क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक बार फिर तेज़ी का दौर देखने को मिल रहा है, जिससे रिटेल ट्रेडर और संस्थागत निवेशकों दोनों का ध्यान आकर्षित हो रहा है। डिजिटल एसेट की बढ़ती मांग के साथ-साथ अत्यधिक उतार-चढ़ाव भी देखा जा रहा है, जिससे यह बाजार अल्पकालिक ट्रेड करने वालो और दीर्घकालिक निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक बन गया है। पहले भी जब क्रिप्टो का तेज़ दौर आया है, तब कीमत बहुत तेजी से बढ़ी है, बिटकॉइन और दूसरी डिजिटल करेंसीज़ की ज़बरदस्त ख़रीद-फरोख्त हुई है और बाज़ार के रुझान में साफ़ तौर पर बदलाव देखने को मिला है।

हालांकि, सफलतापूर्वक निवेश और ट्रेडिंग करने के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि वर्तमान में चल रही तेजी (बुल रन) कब खत्म हो सकती है और इसके शुरू होने के कौन-कौन से संकेत होते हैं। आइए, इस विषय को पिछले चक्रों और वर्तमान बाजार रुझानों के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं। अन्यथा, तेजी के रुझान के चरम पर क्रिप्टोकरेंसी खरीदने या आगामी तेजी के दौर से मुनाफा कमाने का मौका चूकने का जोखिम होता है।

इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:


अहम जानकारी

  • क्रिप्टो बुल रन वह दौर होता है, जब डिजिटल एसेट बाजार में कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ती हैं।
  • बुल रन की अवधि बिटकॉइन हाल्विंग, संस्थागत निवेशकों की रुचि और व्यापक आर्थिक स्थिति जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
  • अब तक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जब भी तेजी आई है, तब मांग में तेज़ बढ़ोतरी हुई है और बाजार में लिक्विडिटी यानी नकदी की उपलब्धता भी बढ़ी है।
  • क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें काफी हद तक व्यापक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करती हैं, जिसमें कम ब्याज दरें और अमेरिकी विनियमन शामिल हैं।
  • ट्रेडिंग वॉल्यूम, मूविंग एवरेज, ऑसिलेटर और बाजार में उतार-चढाव जैसे टेक्निकल इंडीकेटर से यह समझने में मदद मिलती है कि ट्रेंड कब उलटफेर हो सकता है।
  • तेजी की पहचान करने वाले प्रमुख टूल में वायकॉफ अक्यूम्यूलेशन पैटर्न शामिल है, जिससे पता चलता है कि कि बड़े निवेशक बाजार में किस तरह से खरीदारी कर रहे हैं।

क्रिप्टो बुल रन क्या है?

क्रिप्टो बुल रन ऐसी अवधि होती है, जब क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है। ऐसे बुल मार्केट तब बनते हैं जब निवेशक यह अपेक्षा करते हुए बड़ी मात्रा में एसेट खरीदते हैं, कि कीमतें और बढ़ेंगी, और यह सकारात्मक बाजार भावना से प्रेरित होता है। बुल मार्केट की प्रमुख विशेषताओं में बढ़ी हुई तरलता (लिक्विडिटी), नए प्रोजेक्ट में मजबूत रुचि, और क्रिप्टोकरेंसी रणनीतियों का सक्रिय रूप से लागू करना शामिल होता है। इसके अलावा, तकनीकी प्रगति, जैसे कि अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में ब्लॉकचेन का एकीकरण, उद्योग के आगे विकास में योगदान मिलता है और क्रिप्टोकरेंसी परियोजनाओं के पूंजीकरण को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, बड़ी कंपनियां और संस्थागत निवेशक उद्यम पूंजी निवेश में अधिक रुचि दिखाते हैं, जिससे बाजार में अतिरिक्त पूंजी का प्रवाह होता है।

अब तक क्रिप्टो बुल रन अक्सर नई सर्वकालिक उच्चतम स्तर तक पहुंचने का कारण बने हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद, बाजार में अल्पकालिक सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे समग्र सकारात्मक रुझान बाधित नहीं होता है।

बिटकॉइन का तेज़ी वाला दौर

बिटकॉइन नियमित चक्रों का पालन करता है, जिसमें यह बुल (तेज़ी) और बियर (मंदी) मार्केट के बीच बदलती रहती है। यह प्रक्रिया इसके 'हॉल्विंग' इवेंट से जुड़ी होती है। ऐसी घटना है, जिसमें हर चार वर्षों में ब्लॉक रिवॉर्ड आधे कर दिए जाते हैं। नीचे दिए गए चार्ट में अब तक की बड़ी तेजी की लहरों और उनकी अवधि को दिखाया गया है:

लाइटफाइनेंस: बिटकॉइन का तेज़ी वाला दौर

इमेज 1: बिटकॉइन हॉल्विंग और उसके बाद की बढ़ोतरी

हर ग्रोथ सायकल में कुछ ऐसे चरण होते हैं, जो बार-बार दोहराए जाते हैं और तय पैटर्न को फॉलो करते हैं। हाल्विंग की घटना के बाद, जहां बिटकॉइन माइनिंग के रिवार्ड आधे कर दिए जाते हैं, वहां प्रारंभिक चरण शुरू होता है। इस दौर में बाज़ार धीरे-धीरे एसेट जमा करने लगता है। इस समय बिटकॉइन आमतौर पर सीमित सीमा में ट्रेड करता है, जबकि बड़े निवेशक इस उम्मीद में अपनी पोज़िशन बनाते हैं, कि आगे जाकर कीमतें बढ़ेंगी।

इसके बाद, तेजी का असली दौर शुरू होता है, जब बिटकॉइन (BTC) की कीमत तेजी से बढ़ने लगती है। इस वक्त काफी सारे नए लोग निवेश करने आते हैं, ट्रेडिंग ज़्यादा होती है और बाजार में पॉज़िटिव माहौल रहता है। बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो एसेट में बढ़ती रुचि से तरलता में सुधार होता है और डिजिटल एसेट को व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, इस चरण के दौरान अक्सर सकारात्मक समाचार, क्रिप्टोकरेंसी रणनीतियों की बढ़ती लोकप्रियता और नई तकनीकों के विकास जैसी घटनाएं भी देखने को मिलती हैं।

जब बिटकॉइन की कीमत अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंचती है, तो उसे उस चक्र का चरम बिंदु कहा जाता है। इस दौर में बाजार बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव भरा होता है, निवेशक मुनाफे के चक्कर में खूब खरीद-बिक्री करते हैं और बाजार में ज़्यादा तेज़ी या उछाल आने के शुरुआती संकेत मिलते हैं। इसके बाद आमतौर पर मंदी का दौर आता है, जहाँ निवेशक मुनाफा निकालने लगते हैं और कीमतें गिरने लगती हैं। ये मंदी कई महीनों या सालों तक चल सकती है, जब तक कि बाजार फिर से धीरे-धीरे वापसी न करने लगे और नया चक्र शुरू न हो जाए।

लाइटफाइनेंस: बिटकॉइन का तेज़ी वाला दौर

इमेज 2: अप्रैल 2024 में हॉल्विंग के बाद बिटकॉइन में जबरदस्त तेजी

20 अप्रैल 2024 को बिटकॉइन हॉल्विंग के बाद, ब्लॉक रिवॉर्ड को घटाकर 3.125 BTC कर दिया गया, बाजार प्रारंभिक संचय चरण में प्रवेश कर गया। यह चरण छह महीने यानी अक्टूबर 2024 तक चला। इसके बाद एक संक्षिप्त बुल रन (तेजी का दौर) शुरू हुआ। अक्टूबर से दिसंबर के बीच, बिटकॉइन की कीमत तेजी से बढ़ी और इसकी कीमत 65,000 से बढ़कर 101,000 डॉलर तक पहुंच गई, यानी लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई।

जनवरी 2025 में आई स्थिरता को वायथॉफ वितरण चरण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिससे अक्सर आने वाली मंदी के रुझान का संकेत मिलता है। हालांकि, यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि कि क्रिप्टो की तेजी वाली दौड़ खत्म हो गया है। हालांकि मंदी की संभावनाएं ज़्यादा हैं, लेकिन इस स्थिति की पुष्टि इसके सामने आने के बाद ही हो सकती है।निवेशकों को जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए और बाजार के वास्तविक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि उनका अनुमान लगाने की कोशिश करनी चाहिए।

क्रिप्टो में तेजी का दौर कब थमेगा?

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जारी तेजी का दौर कम होते निवेशक की दिलचस्पी, व्यापक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव, और तकनीकी संकेतों की कमजोरी के चलते समाप्त हो सकता है। नीचे दिए गए कारक इस बात के संकेत हो सकते हैं कि तेजी का रुझान अब धीरे-धीरे कम हो रहा है:

  • जब क्रिप्टो की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती हैं और उसके बाद ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है, तब कई बड़े निवेशक धीरे-धीरे अपना एसेट बेचना शुरू कर देते हैं (इसे ही डिस्ट्रीब्यूशन फेज कहा जाता है)।
  • अगर यूएस फेडरल रिज़र्व सिस्टम (Fed) ब्याज दरें बढ़ाता है या उन्हें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखता है, तो इससे क्रिप्टोकरेंसी की मांग कम हो जाती है।
  • वित्तीय दबाव, जैसे दुनिया की किसी बड़ी अर्थव्यवस्था में कर्ज़ का संकट आ जाना।
  • प्रमुख देशों में कड़े क्रिप्टोकरेंसी नियम और संभावित प्रतिबंध।
  • न तो कोई नई टेक्नोलॉजी आ रही है, न कमाई हो रही है और न ही मुनाफा हो रहा है, इसीलिए नए लोग पैसे लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
  • प्रतिकूल समाचार और आर्थिक अस्थिरता के कारण नकारात्मक बाजार का रुझान।
  • मुख्य रूप से अमेरिका में स्टॉक इंडेक्स में तेज गिरावट और परिणामस्वरूप लीवरेज्ड पोजीशन का परिसमापन।

क्रिप्टो बुल मार्केट के प्रमुख कारक और संकेत

आने वाली तेजी की शुरुआत करने वाले वाले मुख्य कारक:

  • बिटकॉइन हॉल्विंग चक्र, पहले भी बाजार में तेजी का कारण बनी हैं। लेकिन हर बार हॉल्विंग के बाद आने वाली तेजी, पहले की तुलना में कम तीव्रता वाली रही है।
  • संस्थागत निवेशक अब क्रिप्टोकरेंसी में ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। ये क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल सोना और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव का सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
  • डीसेंट्रलाइज़्ड फाइनेंस (DeFi), नॉन-फंजिबल टोकन (NFT) और नई ब्लॉकचेन तकनीकों का विस्तार हो रहा है, जिससे निवेश के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
  • ETF, निवेश फंड और बैंकिंग सॉल्यूशंस जैसे विकल्पों के आने से बाजार में लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) बढ़ रही है, जिससे नए निवेशक बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
  • जब बैंक कम ब्याज देते हैं, तो लोग ज़्यादा मुनाफा पाने के लिए अपने पैसे क्रिप्टोकरेंसी जैसे फायदे वाले निवेशों में लगाते हैं।
  • डिजिटल एसेट के भविष्य को लेकर बाजार के रुझान में सुधार और निवेशकों का भरोसा मज़बूत हुआ है।
  • क्रिप्टोकरेंसी को स्टेट रिज़र्व में शामिल किया जाना और अंतरराष्ट्रीय कानूनों में बदलाव।
  • वैश्विक वित्तीय बाजारों का अलग-अलग हिस्सों में बंट जाना और पारंपरिक एसेट जैसे शेयरों और बॉन्ड का टोकनाइज़ेशन।

क्रिप्टोकरेंसी में आई अब तक की ज्यादा तेजी की जानकारी

अब तक जब भी बिटकॉइन में जबरदस्त तेजी आई है, तो उसके साथ कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। इसलिए, यह जानकारी भविष्य के क्रिप्टो बुल मार्केट की भविष्यवाणी करने में काफ़ी मूल्यवान साबित हो सकती है। पिछले चक्रों का विश्लेषण करने से हमें ये पता चलता है कि आगे क्या हो सकता है, खासकर जब हम हॉल्विंग, बाजार के रुझान और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों जैसे प्रमुख कारकों को ध्यान में रखते हैं।

बिटकॉइन की पहली बड़ी तेजी का दौर

2013 में क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में पहली बड़ी तेजी देखी गई थी, जब बिटकॉइन की कीमत 13 से बढ़कर 1,100 डॉलर तक पहुंच गई। यह महत्वपूर्ण अवधि न सिर्फ़ बाजार के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, बल्कि इसने डिजिटल एसेट की ओर आम जनता का ध्यान भी आकर्षित किया। इस तेजी के दौरान कुछ खास घटनाएं भी हुईं:

  • रिटेल और संस्थागत निवेशकों की भारी भागीदारी के चलते बिटकॉइन (BTC) की कीमत में तेज़ी से बढ़ोतरी।
  • पहली क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज की शुरुआत हुई, जिससे क्रिप्टो में रुचि रखने वाले लोगों के लिए ट्रेडिंग करना आसान हो गया।
  • बिटकॉइन को लेकर व्यापक मीडिया कवरेज हुई, जिससे इसकी लोकप्रियता और लोगों में जागरूकता काफी बढ़ गई।
  • आम जनता के बीच बिटकॉइन (BTC) की मांग तेजी से बढ़ी, क्योंकि उस समय लोगों ने इसे डिजिटल सोना समझकर खरीदने का फैसला किया।
  • बिटकॉइन की कीमत उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, पहली बार बड़ी गिरावट आई। इससे साफ पता चलता है कि तेजी का दौर अब खत्म हो गया है। बिटकॉइन की कीमत 1,100 डॉलर से गिरकर मात्र 180 डॉलर रह गई। इसकी बड़ी वजह Mt. Gox एक्सचेंज पर हैकिंग थी, जिसमें 8.5 लाख बिटकॉइन गायब हो गए और एक्सचेंज को दिवालिया घोषित करना पड़ा।

लाइटफाइनेंस: बिटकॉइन की पहली बड़ी तेजी का दौर

इमेज 3: क्रिप्टो बाजार में पहली बड़ी तेजी

पहली तेजी से पता चला कि क्रिप्टोकरेंसी का बाजार चक्रों में चलता है और जब लोगों की बिटकॉइन में दिलचस्पी बढ़ती है, तो इसकी कीमत अचानक बहुत तेज़ी से ऊपर जा सकती है।

मीडिया की नजर में आया बिटकॉइन

वर्ष 2017 में बिटकॉइन के इतिहास का बेहद यादगार पल आया, जब इसकी कीमत अचानक बढ़कर 20,000 डॉलर तक पहुंच गई। इस जबरदस्त उछाल के बाद मीडिया में क्रिप्टो की खूब चर्चा होने लगी और लाखों नए लोग इसमें पैसा लगाने लगे। उस तेजी वाले दौर की कुछ खास बातें ये थीं:

  • बिटकॉइन की कीमत में तेजी को देखकर भारी तादाद में निजी निवेशकों ने निवेश करना शुरू किया।
  • मीडिया और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा ने बिटकॉइन और बाकी क्रिप्टोकरेंसीज़ को जबरदस्त बढ़ावा मिला।
  • दिसंबर 2017 में कई बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज शुरू हुए और शिकागो के CME और Cboe एक्सचेंज पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग की शुरुआत हुई।
  • परंपरागत वित्तीय कंपनियों और फंडों में भी रूचि बढ़ने लगी, क्योंकि डिजिटल गोल्ड की कीमत इतनी तेज़ी से बढ़ी कि अब उसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो गया।
  • बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा। दिसंबर 2017 में जब कीमत 19,343 डॉलर तक पहुंची, तो उसके बाद सुधार हुआ और दिसंबर 2018 तक, इसकी कीमत गिरकर सिर्फ 3,323 डॉलर रह गई।

लाइटफाइनेंस: मीडिया की नजर में आया बिटकॉइन

इमेज 4: क्रिप्टो बाजार में दूसरी बड़ी तेजी

कोविड का असर और DeFi की शुरुआत

साल 2020 की शुरुआत में जब COVID-19 महामारी फैली, तो पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई। इसके जवाब में, दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन लगाए, जिससे सार्वजनिक लाभ और व्यापार प्रोत्साहन के माध्यम से अर्थव्यवस्था में सस्ते पैसे का प्रवाह बढ़ गया। इस दौर में कई नई क्रिप्टोकरेंसीज़ सामने आईं, जिनमें से कई आज भी मज़बूती से टिके हुए हैं। उसी समय, एथेरियम क्रिप्टोकरेंसी जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर बहुत सारी सेकेंडरी एप्लिकेशन बनने लगीं, जिससे अलग-अलग सेक्टरों में नए-नए क्रिप्टो प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इस तेज़ी से बढ़ते बदलाव के पीछे कई अहम कारण थे, जैसे:

  • COVID-19 महामारी के जवाब में अमेरिका की फेडरल रिज़र्व और दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने भारी मात्रा में आर्थिक पैकेज और राहत योजनाएं शुरू कीं। इसका नतीजा यह हुआ कि इन बड़े केंद्रीय बैंकों की कुल बैलेंस शीट 2.5 गुना बढ़कर 25 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
  • सप्लाई चेन में रुकावटें और महंगाई बढ़ने की वजह से निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा क्रिप्टोकरेंसी में बढ़ने लगी। लोग इन्हें एक ऐसे विकल्प के तौर पर देखने लगे, जिससे पारंपरिक बचत और निवेश की तुलना में ज़्यादा मुनाफा मिल सकता है।
  • DeFi का तेज़ी से विस्तार हुआ और लोगों को पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के के बिना भी पैसे लगाने और कमाने के नए तरीके मिलने लगे।
  • साल 2021 में NFT में अचानक ज़बरदस्त तेजी आई, जिससे ब्लॉकचेन की दुनिया में अरबों डॉलर का निवेश हुआ और NFT नए तरह की डिजिटल एसेट के रूप में लोकप्रिय हो गया।
  • डिजिटल एसेट के माध्यम से लिक्विडिटी में बढ़ोतरी हुई, जिससे क्रिप्टो मार्केट में अगली बड़ी तेजी देखने को मिली।

लाइटफाइनेंस: कोविड का असर और DeFi की शुरुआत

इमेज 5: DeFi प्रोटोकॉल में पैसे (लिक्विडिटी) का तेज़ी से बढ़ना

NFT को लेकर लोगों की बढ़ती रुचि

NFT (नॉन-फंज़िबल टोकन) एक खास तरह का डिजिटल एसेट होता है। यह आर्टवर्क, म्यूज़िक, वीडियो या गेम की वर्चुअल आइटम जैसे किसी खास चीज़ या कंटेंट की मालिकाना हक़ को दिखाता है। बाकी क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन को आपस में बदला जा सकता है (एक बिटकॉइन हमेशा दूसरे बिटकॉइन के बराबर होता है)। लेकिन हर NFT अलग होता है, उसकी अपनी खास पहचान होती है, इसलिए उसे किसी और NFT से बदला नहीं जा सकता।

NFT का इस्तेमाल डिजिटल और फिज़िकल एसेट की प्रामाणिकता और मालिकाना हक को सत्यापित करने के लिए किया जाता है और ये सब ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ज़रिए होता है। इससे आर्टिस्ट और कंटेंट बनाने वाले लोग अपना काम डिजिटल रूप में बेच सकते हैं, और खरीदार उन यूनिक डिजिटल एसेट को खरीदकर उनका मालिक बन सकते हैं और ट्रेड सकते हैं। साल 2020–2021 में NFT का इस्तेमाल बढ़ा, जिससे कई बड़े बदलाव हुए:

  • NFT प्रोजेक्ट की लोकप्रियता बढ़ी, जिससे निवेशकों और आर्टिस्ट दोनों का ध्यान इस ओर आकर्षित होने लगा।
  • डिजिटल एसेट की संभावनाओं को जानने-समझने में लगे क्रिप्टो यूज़र्स की तादाद लगातार बढ़ने लगी।
  • NFT की ट्रेडिंग तेजी से बढ़ी और इसी वजह से इन्हें खरीदने-बेचने के लिए अलग-अलग खास प्लेटफॉर्म बनने लगे।
  • NFT को गेमिंग, फैशन और आर्ट जैसी इंडस्ट्रीज़ में शामिल किया जाने लगा, जिससे इनका इस्तेमाल कई नए तरीकों से होने लगा।
  • नई टेक्नोलॉजी और मानक बनने से डिजिटल एसेट बनाना और उन्हें मैनेज करना पहले से आसान हो गया।

लाइटफाइनेंस: NFT को लेकर लोगों की बढ़ती रुचि

इमेज 6: वर्ष 2021–2022 में अपने उच्चतम स्तर पर NFT ट्रेडिंग वॉल्यूम

वर्ष 2021–2022 में NFT ट्रेडिंग ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी थी। CryptoPunks और Bored Ape Yacht Club जैसी कलेक्शन इतनी महंगी बिकी कि कई बार कीमत सैकड़ों मिलियन डॉलर, यानी करोड़ों डॉलर तक पहुंच गई। लेकिन जैसे ही ये जोश ठंडा पड़ा, लोगों की दिलचस्पी भी धीरे-धीरे कम होने लगी और वर्ष 2022 की सर्दियों तक तो हाल ऐसा हो गया था कि NFT का नाम लेने वाले भी गिनती के रह गए थे।

फरवरी 2025 तक, NFT बाजार पूंजीकरण सिर्फ़ 4.8 बिलियन डॉलर है, जिसमें दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा नहीं है। ये आंकड़े 2021 के मुकाबले करीब छह गुना कम हैं, जब रोज़ाना का ट्रेडिंग वॉल्यूम 125 मिलियन डॉलर से भी ऊपर चला जाता था।

बिटकॉइन और एथेरियम ETF

अगली बार बिटकॉइन की कीमत में जबरदस्त उछाल 2023 के आखिर और 2024 की शुरुआत में देखने को मिला, जब अमेरिका की SEC (प्रतिभूति और विनिमय आयोग) ने क्रिप्टोकरेंसी पर आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट (ETF जैसे निवेश साधनों) को मंज़ूरी दे दी।

BlackRock, Grayscale, Fidelity और VanEck जैसी दुनिया की बड़ी निवेश कंपनियों ने अपने-अपने एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट लॉन्च करने शुरू कर दिए हैं। ये कदम कई मायनों में बेहद अहम है

  • बिटकॉइन और एथेरियम ETF की मदद से बड़े संस्थागत निवेशक और निजी निवेशक सीधे क्रिप्टोकरेंसी खरीदे बिना ही इस मार्केट में निवेश कर सकते हैं।
  • बड़े फंड और बैंकों जैसे नए निवेशकों के आने से मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ी है। ETF खरीदकर कोई भी निवेशक अप्रत्यक्ष रूप से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर सकता है।
  • ETF संरचनाओं में विनियमन और पारदर्शिता होने की वजह से क्रिप्टोकरेंसी को ज़्यादा भरोसेमंद माना जाने लगा है। बिटकॉइन और एथेरियम अब बैंकिंग सिस्टम में भी क़ानूनी मान्यता पाने लगे हैं और इन्हें आम करेंसी (फिएट मनी) में बदलना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है।
  • पेंशन फंड और बड़े-बड़े निवेशक लंबे समय तक इसमें पैसा लगाते हैं, इसलिए ऐसे भरोसेमंद संस्थानों से मार्केट में लगातार पैसा आता रहेगा और लिक्विडिटी बनी रहेगी।
  • उतार-चढ़ाव कम हो जाता है। जैसे-जैसे ETF में ज्यादा स्थिर पूंजी आती है, वैसे-वैसे बाजार में लंबी अवधि वाले निवेश भी बढ़ने लगते हैं।

लाइटफाइनेंस: बिटकॉइन और एथेरियम ETF

इमेज 7: वर्ष 2023 में बिटकॉइन की कीमत में ढाई गुना (2.5x) उछाल

राजनीतिक सकारात्मक माहौल

2024 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में फिर तेजी आई। बिटकॉइन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली और जनवरी 2025 में इसकी कीमत 110,000 डॉलर के अपने अब तक के सबसे उचतम स्तर पर पहुंच गई।

बिटकॉइन का ज़िक्र पहली बार अमेरिका के फेडरल लेवल पर एक रणनीतिक रिज़र्व एसेट के तौर पर हुआ है। अमेरिका के कई राज्यों में सांसदों ने इसे लोकल रिज़र्व में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भी दिए। ट्रंप की टीम में भी कई बड़ी हस्तियां क्रिप्टोकरेंसी की समर्थक हैं, जिनमें एलन मस्क, डेविड सैक्स (जिन्होंने खुद को "क्रिप्टो सीज़ार" कहा है), और यूएस ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट शामिल हैं। इस तरह का बढ़ता समर्थन दिखाता है कि क्रिप्टोकरेंसी का फ्यूचर काफी दमदार हो सकता है।

  • नियामक नीति: डोनाल्ड ट्रंप की सरकार क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों को आसान बना सकती है, जिससे इस इंडस्ट्री के लिए बेहतर माहौल बन सकता है।
  • आर्थिक नीति: टैक्स में कटौती और संभावित प्रोत्साहन योजनाएं बड़ी संस्थाओं को क्रिप्टोकरेंसी बाजार की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे इसमें तेज़ी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
  • निवेशकों की धारणा: अगर राजनीति में स्थिरता रही और टेक इंडस्ट्री को समर्थन मिला, तो लोग खासकर बिटकॉइन और एथेरियम जैसी डिजिटल करेंसी पर ज्यादा भरोसा करने लगेंगे।
  • ETF का विस्तार: अगर अमेरिकी SEC जैसे नियामक नियमों में बदलाव करते हैं, तो XRP, LTC, SOL, TRX जैसे और टोकन पर आधारित ETF लॉन्च होने का रास्ता खुल सकता है।

लाइटफाइनेंस: राजनीतिक सकारात्मक माहौल

इमेज 8: ट्रंप के जीतते ही वर्ष 2024 में बिटकॉइन की कीमत 100,000 डॉलर पर पहुंची

जोखिम और सावधानियां

हालांकि, इस समय क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य काफी आशाजनक दिख रहा है, लेकिन यह न भूलें कि अत्यधिक आशावाद आमतौर पर तेज़ी के दौर के आखिर में देखने को मिलता है। जब बाज़ार में उत्साह और उन्माद का माहौल होता है, तब बड़े निवेशक (होल्डर) अपने एसेट रिटेल इनवेस्टर के बीच बांट देते हैं और अपने मुनाफे को सुरक्षित कर लेते हैं। वायकोफ डिस्ट्रीब्यूशन और एक्युमुलेशन जैसे तकनीकी संकेतक और चार्ट पैटर्न संभावित सुधार की अप्रत्यक्ष पुष्टि कर सकते हैं। इस संदर्भ में, क्रिप्टो बुल मार्केट से जुड़ी रणनीतियां अपनाते समय इन मनी मैनेजमेंट नियमों का पालन करना बेहद ज़रूरी है:

  • कभी भी अपनी सारी पूंजी एक ही एसेट में निवेश न करें। इसे अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करें।
  • बाज़ार की उतार-चढ़ाव पर नज़र रखें और अपना पैसा एक ही क्रिप्टो में न लगाकर अलग-अलग में लगाएं।

पिछली गलतियां दोहराने से बचना

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग करते समय, यह ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है कि भविष्य की सटीक भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता। अपने हर फैसले के लिए आप खुद ज़िम्मेदार हैं और और सिर्फ़ अपने जोखिम को ही आप नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए नीचे दिए गए रिस्क मैनेजमेंट से जुड़े नियमों का पालन करें:

  • कभी भी इतना पैसा निवेश न करें, जिसका नुकसान आप उठा नहीं सकते।
  • अपने ट्रेड को सुरक्षित रखने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शन का इस्तेमाल करें।
  • घाटे में चल रही पोज़िशन में औसत लागत घटाने की कोशिश न करें।
  • सस्ते में खरीदें, महंगे में बेचें।
  • जो आज महंगा लग रहा है, वह कल और भी महंगा हो सकता है।
  • जो आज सस्ता लग रहा है, वह कल और भी सस्ता हो सकता है।
  • हमेशा पहले से ही अपना टेक-प्रॉफिट और स्टॉप-लॉस लेवल सेट करें।
  • शुरुआती योजना के मुताबिक चलें।

आने वाली तेज़ी का पूर्वानुमान

आगामी क्रिप्टोकरेंसी में तेजी का पूर्वानुमान लगाने के लिए आर्थिक हालात, भू-राजनीतिक घटनाएं, तकनीकी नवाचार और बाजार के व्यवहार जैसे अनेक कारकों का विश्लेषण करना ज़रूरी होता है। नीचे दिए गए उदाहरण में अनुमान प्रस्तुत किया गया है, साथ ही उसे उचित ठहराने की विधि भी बताई गई है:

अगली क्रिप्टो तेज़ी 2025 के आखिर या 2026 की शुरुआत में शुरू हो सकती है, जब बाज़ार थोड़ा सुधर चुका होगा और दुनिया की अर्थव्यवस्था नए टैरिफ और ट्रेडर से जुड़े नियमों के हिसाब से बदलती है। इस बार लोग क्रिप्टो को वैकल्पिक निवेश मानकर उसमें ज़्यादा दिलचस्पी दिखा सकते हैं।

कारण:

  1. आर्थिक स्थितियां: टैरिफ प्रतिबंधों और ट्रेड से जुड़े विवादों से उबरने के बाद, क्रिप्टोकरेंसी की मांग फिर से बढ़ सकती है। निवेशक वैकल्पिक लाभ के अवसरों की तलाश कर सकते हैं, क्योंकि डिजिटल एसेट अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए आकर्षक विकल्प बन रहा है।
  2. भू-राजनीतिक घटनाएं: अगर दुनिया भर में देशों के बीच रिश्ते सुधरते हैं और हालात थोड़ा स्थिर होते हैं, तो इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिख सकता है। बाज़ार में लोग अक्सर भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलावों पर तेजी से रिएक्ट करते हैं और जब माहौल स्थिर होता है, तो डिजिटल एसेट (जैसे क्रिप्टो) पर भरोसा बढ़ जाता है।
  3. तकनीकी नवाचार: अगर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में कोई बड़ी तरक़्क़ी होती है या मौजूदा प्लेटफॉर्म और बेहतर बनते हैं, तो इससे कई तरह के निवेशकों का ध्यान आकर्षित हो सकता है। सिक्योरिटी, स्केलेबिलिटी और वॉलेट को यूज़र-फ्रेंडली बनाने जैसे अपग्रेड से उन लोगों के लिए भी रास्ता आसान हो सकता है, जो पहले तकनीकी जटिलताओं की वजह से इससे दूरी बनाए हुए थे।
  4. बाज़ार का रुझान: रुझानों, चार्ट पैटर्न और तकनीकी संकेतकों का अध्ययन करने से कीमत में संभावित उतार-चढ़ाव की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकता है। बाज़ार में सुधार के बाद, अगर संचय के संकेत दिखाई देते हैं, तो यह संभावित तेजी की शुरुआती चरणों का संकेत हो सकता है।

पूर्वानुमान पद्धति:

  1. आर्थिक डेटा विश्लेषण: GDP (सकल घरेलू उत्पाद), मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी जैसे प्रमुख संकेतकों का मूल्यांकन करने से अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति और उसके विकास की संभावनाओं को समझने में मदद मिलती है। अगर लोगों को अपनी मूल ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाई हो रही हो, तो वे जोखिम भरे निवेश करने से बचेंगे।
  2. भू-राजनीतिक और वित्तीय घटनाओं पर नज़र रखना: दुनिया भर की ख़बरों से अपडेट रहना और उनके बाज़ार पर असर को समझना ज़रूरी है। खास तौर पर केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर ध्यान दें, क्योंकि आसान मौद्रिक नीतियां लोगों को ज़्यादा निवेश करने का मौका देती हैं, जिससे क्रिप्टो की डिमांड बढ़ती है, जबकि सख्त नीतियों से आमतौर पर जोखिम भरे एसेट पर दबाव पड़ता है।
  3. तकनीकी नवाचारों पर नज़र रखना: नई उभरती तकनीकों का विश्लेषण करें और देखें कि उनका क्रिप्टो मार्केट से क्या संबंध है। यह सोचें कि क्या इन तकनीकी बदलाव से भविष्य में मुनाफा कमा सकते हैं, नए बाज़ार बना सकते हैं, और इन्हें कहां-कहां लागू किया जा सकता है।
  4. तकनीकी विश्लेषण: रुझानों की पहचान करने और संभावित एंट्री और एग्जिट पॉइंट तय करने के लिए तकनीकी टूल्स का इस्तेमाल करें। चार्ट पैटर्न और इंडिकेटर्स से अहम जानकारी मिलती है, जिससे निवेशकों को सोच-समझकर फैसले लेने और क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में अपने निवेश की योजना बनाने में मदद मिलती है।

तेज़ी के दौर की तैयारी करना और ज्यादा से ज्यादा फ़ायदा उठाना

हालांकि क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में तेज़ी का दौर मुनाफ़ा कमाने का बेहतरीन अवसर होता है, लेकिन इसके लिए सावधानीपूर्वक तैयारी और रणनीतिक दृष्टिकोण की ज़रूरत होती है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिससे निवेशकों और ट्रेडर्स को ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने में मदद मिल सकती है:

  • रिसर्च और विश्लेषण: पैसे लगाने से पहले अच्छे से रिसर्च और विश्लेषण ज़रूर करें। मौजूदा रुझानों, पूर्वानुमानों और बाजार को प्रभावित करने वाले संभावित कारकों के बारे में जानें। स्थिति को समझने के लिए शेयर, बॉन्ड, सोना और करेंसी के रुझान को भी ध्यान में रखें।
  • पोर्टफोलियो में विविधता लाना: अपना पैसा अलग-अलग क्रिप्टो में लगाओ, ताकि रिस्क कम हो और मुनाफा कमाने के मौके ज़्यादा मिलें।
  • तकनीकी विश्लेषण: रुझानों की पहचान करने और सही एंट्री और एग्ज़िट प्वाइंट तय करने के लिए तकनीकी विश्लेषण विधियों का इस्तेमाल करें। प्रचलित रुझान को पहचानें और उसका अनुसरण करें। प्राथमिक रुझान के विरुद्ध पोजीशन खोलने से बचें।
  • जोखिम प्रबंधन: ठोस जोखिम प्रबंधन रणनीति बनाएं और उसे लगातार अपनाएं। हर ट्रेड के लिए स्टॉप-लॉस और टेक-प्रॉफिट ऑर्डर लगाएं और ट्रेड का साइज सीमित रखें। स्टॉप ऑर्डर को बाद में न बदलें।
  • समाचार पर नज़र रखना: हर खबर को बड़ा मान लेना सही नहीं है। खबर आने से पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव का सटीक अंदाज़ा लगाना मुमकिन नहीं होता। किसी बड़ी खबर के आने से पहले अपने पोज़िशन कम कर दें या उन्हें पूरी तरह बंद कर दें। उतार-चढ़ाव (वॉलेटिलिटी) में बढ़ोतरी को ध्यान में रखें।
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण: अपने क्रिप्टो निवेश के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं। छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं।

इन दिशानिर्देशों का पालन करने से आप अगली तेज़ी के दौर के लिए खुद को अच्छी तरह तैयार कर पाएंगे और अपने मुनाफे को बढ़ा सकेंगे।

निष्कर्ष

क्रिप्टो में तेज़ी का दौर सिर्फ़ कीमतों के बढ़ने का समय नहीं होता, बल्कि यह जटिल प्रक्रिया होती है। यह कई कारकों पर निर्भर करती है। अब तक देखा गया है कि तेजी का दौर आमतौर पर उस समय आता है, जब आर्थिक हालात स्थिर होते हैं, नई टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव होता है और संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती है। लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि तेज़ी के दौरान भी मार्केट में सुधार हो सकते हैं, और हर तेजी के दौर के बाद मंदी का दौर आना तय होता है।

फिर भी, क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री लगातार बदल रही है और बेहतर हो रही है। हर नए चक्र के साथ ऐसे नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिससे क्रिप्टो को लंबे समय तक बने रहने और स्थिर रूप से बढ़ने में मदद मिलती है। अगली तेजी की लहर शायद नई तकनीकी तरक़्क़ी, इंस्टीट्यूशनल प्रोडक्ट जैसे बिटकॉइन ETF और बड़े देशों में रेगुलेशन में ढील की वजह से आएगी। इसके अलावा, मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स, निवेशक की धारणा और टेक्निकल इंडिकेटर्स पर नज़र रखना ज़रूरी है, ताकि मार्केट में बदलाव होने पर तुरंत सही कदम उठाया जा सके।

क्रिप्टोकरेंसी में तेजी के दौर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पहले क्रिप्टो में तेज़ी का दौर आमतौर पर 1 से 2 साल तक चलता था, लेकिन ये पूरी तरह इस बात पर निर्भर होता है कि दुनिया की आर्थिक हालत कैसी है और लोगों की तरफ से कितनी मांग है। जैसे-जैसे क्रिप्टो इंडस्ट्री परिपक्व हो रही है, बिटकॉइन की कीमतों में तेज़ी और गिरावट का चक्र भी अब धीमा और कम उतार-चढ़ाव वाला होता जा रहा है।

अगर निवेशकों भरोसा डगमगाया या निवेशकों का मूड बदला, तो मौजूदा तेज़ी का दौर खत्म हो सकता है। लेकिन अगर क्रिप्टो इंडस्ट्री में क़ानूनी और तकनीकी बदलाव तेजी से होते हैं, तो ये तेजी का दौर वर्ष 2026 के मध्य तक भी चल सकता है।

क्रिप्टो में अगली तेजी का दौर वर्ष 2026 से 2028 के बीच शुरू हो सकता है, जब बिटकॉइन की अगली हॉल्विंग होगी, बाज़ार में पैसा बढ़ेगा, और नए क़ानूनी नियम सामने आएंगे। साथ ही, अगर अंतरराष्ट्रीय बैंकों के रिपोर्टिंग नियमों में बदलाव होते हैं, तो उसका भी मार्केट पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सबसे ज्यादा उम्मीद बिटकॉइन और एथेरियम से है। साथ ही, XRP, SOL और TON जैसे कुछ आशाजनक ऑल्टकॉइन्स भी इसमें शामिल हैं। किसी भी क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य इस बात पर निर्भर होता है कि क्या क्रिप्टो एसेट असली कमाई का ज़रिया बन सकती है और लोगों को व्यावहारिक उपयोग के ज़रिए मुनाफा मिल सके।

क्रिप्टो बाजार में बुल रन

इस लेख की सामग्री, लेखक की राय को दिखाती है और यह लाइटफाइनेंस के ब्रोकर की आधिकारिक स्थिति को जरूरी नहीं दिखाती। इस पेज पर पब्लिश सामग्री सिर्फ़ सूचना के उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है और इसे निर्देश 2014/65/EU के उद्देश्यों के लिए निवेश की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
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