प्रेफरेंस शेयर और इक्विटी शेयर में क्या अंतर है? प्रेफरेंस शेयर में निवेश करने पर आमतौर पर तय डिविडेंड मिलता है। अगर किसी साल डिविडेंड नहीं दिया गया हो, तो भी शेयरधारकों को बाद में उसका भुगतान मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, इक्विटी या कॉमन शेयर में आमतौर पर ज़्यादा लिक्विडिटी होती है और कीमत बढ़ने की संभावना भी ज़्यादा रहती है। प्रेफरेंस शेयरधारकों को कुछ स्थितियों में भुगतान पाने में प्राथमिकता मिलती है, जबकि इक्विटी शेयरधारकों को कंपनी की जनरल मीटिंग में वोट करने का अधिकार होता है।
हर तरह के शेयर के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, जिनके बारे में यहां आसान भाषा में समझाया गया है। यह लेख पढ़कर जानें कि प्रेफरेंस शेयर, इक्विटी शेयर से कैसे अलग होते हैं।
इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
अहम जानकारी
- इक्विटी शेयर ऐसी प्रतिभूति होती है, जिन्हें कोई जॉइंट-स्टॉक कंपनी जारी करती है और जो निवेशक की कंपनी की कुल शेयर पूंजी में हिस्सेदारी दिखाते हैं। आसान शब्दों में, इक्विटी का मतलब कंपनी में मालिकाना हक होता है और इससे शेयरधारकों को कंपनी के फैसलों में वोट करने का अधिकार मिलता है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन, इक्विटी शेयरों की कुल संख्या को उनके मौजूदा बाजार की कीमत से गुणा करके निकाला जाता है।
- प्रेफरेंस शेयर भी कंपनी में हिस्सेदारी दिखाते हैं, लेकिन इन्हें मार्केट कैपिटलाइजेशन की गणना में शामिल नहीं किया जाता। इसके बजाय, इनमें इक्विटी शेयर की तुलना में कुछ खास प्राथमिकता और अतिरिक्त फायदे मिलते हैं।
- डिविडेंड का पेमेंट होने पर प्रेफरेंस शेयरधारकों को पहले प्राथमिकता मिलती है। इसका मतलब है कि अगर पहले किसी समय डिविडेंड नहीं मिला था, तो उसका भुगतान पहले इन्हें किया जाता है, उसके बाद ही इक्विटी शेयरधारकों को पैसा मिलता है।
- प्रेफरेंस शेयर पर डिविडेंड की दर आमतौर पर तय होती है। यह उनके अंकित कीमत का निश्चित प्रतिशत होता है। ये फिक्स्ड या जमा होने वाले डिविडेंड पहले दिए जाते हैं, जबकि इक्विटी शेयरधारकों को अतिरिक्त डिविडेंड कंपनी की ग्रोथ और बचे हुए मुनाफे के आधार पर मिल सकता है।
- अगर कंपनी बंद होती है या लिक्विडेशन होता है, तो प्रेफरेंस शेयरधारकों को भुगतान पहले मिलता है, जिससे ऐसे शेयरों के सममूल्य और आंतरिक मूल्य की सुरक्षा होती है, वहीं, इक्विटी शेयरधारकों का ज्यादा जोखिम होता है।
- प्रेफरेंस शेयर उन निवेशक के लिए सही है, जिन्हें आय की अनुमानित राशि और कम उतार-चढ़ाव और तय इनकम के साथ लगातार डिविडेंड पेमेंट चाहिए।
इक्विटी शेयर और प्रेफरेंस शेयर: पूरी तुलना
शेयर ऐसी प्रतिभूति है, जिससे किसी जॉइंट-स्टॉक कंपनी में हिस्सेदारी की मालिकाना हक की पुष्टि होती है। इससे धारक को मुनाफे का एक हिस्सा, यानी डिविडेंड पाने का अधिकार मिलता है। शेयरों को मुख्य रूप से इक्विटी शेयर और प्रेफरेंस शेयर में बांटा जाता है। इन दोनों में मुख्य अंतर डिविडेंड की गणना और वितरण के तरीके, शेयरधारकों की मीटिंग में वोटिंग अधिकार, और लिक्विडेशन की स्थिति में पूंजी के अधिकार से जुड़े होते हैं। इन अंतर से हर तरह के शेयर की कीमत, उतार-चढ़ाव और लिक्विडिटी पर असर पड़ता है।
वोटिंग अधिकार और कंपनी पर नियंत्रण
इक्विटी शेयरधारकों के विपरीत, प्रेफरेंस शेयरधारक कंपनी के फैसलों में सीधे शामिल नहीं होते और उन्हें वोट करने का अधिकार नहीं होता, इसलिए उनका शेयरधारक के रूप में अधिकार और कंपनी पर प्रभाव कम होता है। वे मुनाफा बांटने, बिजनेस से जुड़ी रणनीति बनाने या प्रबंधन में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल नहीं होते।
ध्यान दें: ये अंतर ज्यादातर इक्विटी और प्रेफरेंस शेयरों पर लागू होते हैं, लेकिन हर कंपनी की परिस्थितियां अलग होती हैं। शेयरधारकों के अधिकार कंपनी के चार्टर में तय होते हैं। कुछ स्थितियों में, अगर चार्टर में बताया गया हो, तो प्रेफरेंस शेयरधारकों को भी वोटिंग अधिकार दिए जा सकते हैं।
यह जानकारी अमेरिकी कंपनी के चार्टर से ली गई है, जिसे US SEC की ओर से नियंत्रित किया जाता है। चार्टर के मुताबिक, अगर छह तिमाहियों तक डिविडेंड नहीं दिया जाता, तो प्रेफरेंस शेयरधारकों को शेयरधारकों की बैठक में दो डायरेक्टर चुनने का अधिकार मिल जाता है।
डिविडेंड पेमेंट की प्राथमिकताएं
प्रेफरेंस शेयरहोल्डर्स को इक्विटी शेयरहोल्डर्स से पहले डिविडेंड मिलता है, लेकिन सिर्फ तभी जब इसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की ओर से घोषित किया गया हो। यह उनकी प्राथमिक दावेदारी को दिखाता है, क्योंकि इक्विटी शेयरधारक को डिविडेंड सिर्फ़ प्रेफरेंस शेयरधारकों को भुगतान किए जाने के बाद ही मिलता है। साथ ही, कंपनी के ऋणदाताओं, बॉन्डहोल्डर्स और प्रेफरेंस शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान पहले किया जाता है। अगर डिविडेंड मंजूर नहीं किया जाता, तो निवेशक के पास किस तरह के शेयर हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
तय अवधि (तिमाही/साल) के लिए डिविडेंड वितरण की जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर पहले से प्रकाशित कर दी जाती है।
क्यूम्यूलेटिव प्रेफरेंस शेयरधारकों को पहले नहीं दिए गए डिविडेंड या बकाया डिविडेंड पाने का अधिकार होता है। वहीं, इक्विटी शेयरधारक पिछली अवधि के बकाया डिविडेंड का दावा नहीं कर सकते।
जोखिम और रिटर्न प्रोफाइल में अंतर
प्रेफरेंस शेयर में आम तौर पर निवेश पर तय रिटर्न मिलता है। यह पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए आकर्षक होते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी जोखिम सहन करने की क्षमता कम है और जो निश्चित लाभ और पूंजी बढ़ोतरी चाहते हैं। इस रिटर्न दर को शेयरधारकों की बैठक में संशोधित किया जा सकता है, लेकिन किसी भी बढ़ोतरी की सीमा निर्धारित होती है। वहीं, कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करते हुए इससे ज्यादा डिविडेंड लाभांश और अच्छा खासा पूंजी लाभ मिल सकता है। हालांकि, वे बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
जोखिम की स्थिति में, प्राथमिक शेयर कम जोखिम वाले निवेश माने जाते हैं, क्योंकि इनका भुगतान पहले होता है और इनकी कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता।
इक्विटी शेयर के प्रकार
- क्लास A/क्लास B/क्लास C शेयर – अलग-अलग तरह के इक्विटी शेयर हैं, जिनमें हर शेयर के साथ अलग-अलग वोटिंग अधिकार जुड़े होते हैं।
- फ्रैक्शनल शेयर – ऐसे इक्विटी शेयर हैं, जिनमें निवेशको कम पैसे से निवेश करने की सुविधा मिलती है। डिविडेंड की गणना अनुपातिक रूप से की जाती है।
- अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (ADR) – ऐसे प्रतिभूति होते हैं, जिससे यह पुष्टि होती है कि आप किसी विदेशी कंपनी के शेयर के मालिक हैं और यह शेयर अमेरिकी स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध है।
स्टॉक्स को कई तरह से बांटा जा सकता है, जैसे मल्टीबैगर और वैल्यू स्टॉक्स, ब्लू चिप और पेनी स्टॉक्स या रिडीमेबल शेयर।
एक भरोसेमंद ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग करना शुरू करें
प्रेफरेंस शेयर के प्रकार
प्रेफरेंस शेयर के प्रकार:
क्यूमुलेटिव प्रेफर्ड शेयर – जिनके बकाया डिविडेंड जमा होते रहते हैं और इन्हें सामान्य शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड मिलने से पहले चुकाना पड़ता है। इससे आय ज्यादा भरोसेमंद रहती है, लेकिन आमतौर पर इनसे बाजार की तुलना में कम रिटर्न मिलता है।
उदाहरण: 2022 से 2024 तक, आम बैठक में शेयरधारकों ने डिविडेंड देने की बजाय शुद्ध लाभ को फिर से निवेश करने का फैसला किया। 2025 में डिविडेंड की घोषणा हुई। इसके बाद प्रेफरेंस शेयरधारकों को 2022–2025 के लिए उनका तय डिविडेंड मिला, और बाकी का लाभ इक्विटी शेयरधारकों में बांट दिया गया।
- नॉन-क्यूमुलेटिव प्रेफर्ड शेयर – इन शेयरों के शेयरहोल्डर्स पिछली अवधि के डिविडेंड का दावा नहीं कर सकते। अगर कंपनी को नुकसान होता है, तो डिविडेंड नहीं मिलता। फायदे यह हैं कि नॉन-क्यूमुलेटिव शेयर कम कीमत पर मिलते हैं और रिडीम करने की स्थिति में ज्यादा लिक्विडिटी मिलती है।
- कन्वर्टिबल प्रेफर्ड शेयर – निवेशक को प्रेफरेंस शेयरों को साधारण शेयरों से बदलने का अधिकार है। इससे निवेश के और भी विकल्प मिल जाते हैं और यह अलग-अलग वित्तीय साधनों के साथ मेल खाता है। ध्यान दें, इक्विटी शेयर को प्रेफर्ड शेयर में नहीं बदला जा सकता।
- रिडीमेबल/परपिचुअल प्रेफर्ड शेयर – पहले जारीकर्ता को बताए गए शर्तों के अनुसार तय समय के अंदर इन शेयरों को वापस रीडीम करना होता है। इससे कंपनी को वित्तीय जरूरतों के लिए पैसे जुटाने या अपनी निवेश से जुड़ी रणनीति बदलने में मदद मिलती है। प्रॉस्पेक्टस में कोई तय समय नहीं होता और निवेशकों को पैसा लौटाने की कोई फिक्स टाइमलाइन नहीं होती।
- फिक्स्ड-रेट/फ्लोटिंग-रेट प्रेफर्ड शेयर – आमतौर पर प्रेफरेंस शेयर में तय डिविडेंड रेट होता है, जिसकी गणना अंकित कीमत के प्रतिशत के अनुसार की जाती है। लेकिन कुछ प्रेफरेंस शेयर में फ्लोटिंग रेट होता है, हालांकि ये कम ही होते हैं।
प्रेफरेंस शेयर की तुलना अक्सर बॉन्ड से की जाती है। दोनों में डिविडेंड अपने मार्केट प्राइस के बजाय अपनी अंकित कीमत के आधार पर मिलता है और उनके होल्डर्स को पहले पेमेंट मिलता है।
फायदे और सीमाएं: प्रेफरेंस शेयर बनाम इक्विटी शेयर
यूरोप या एशिया के किसी निवेशक के लिए, जिसने 1,000 डॉलर के Apple शेयर खरीदे हैं, शेयरहोल्डर्स मीटिंग में मतदान अधिकार शायद मायने नहीं रखेंगे। असली बात यह है कि दोनों तरह के शेयरों में लाभांश का अंतर कितना है।
- प्रेफरेंस शेयर से आम तौर पर उनके अंकित कीमत पर तय लाभ मिलता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी शेयर का अंकित मूल्य 100 डॉलर है, मौजूदा बाजार मूल्य 120 डॉलर है और डिविडेंड रेट 5% है, तो निवेशक को 100 × 0.05 = $5 मिलेगा। अगर मार्केट प्राइस अंकित कीमत से कम भी हो जाता है, तो भी डिविडेंड इनकम में कोई बदलाव नहीं होता है।
- इक्विटी शेयर की आमदनी इस बात पर निर्भर करती है कि शेयरधारक क्या फैसला करते हैं। शुद्ध मुनाफा पहले प्रेफरेंस शेयरधारकों को मिलता है और बची हुई राशि फिर इक्विटी शेयरधारकों में बांटी जाती है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक को 6 डॉलर डिविडेंड मिलता है और शेयर की कीमत 120 डॉलर है, तो डिविडेंड लाभांश = 6 ÷ 120 = 5% होगा।
ध्यान दें: प्रतिशत लाभांश वही रहता है, लेकिन वास्तविक लाभांश की राशि अलग-अलग होती है।
प्रेफरेंस शेयर और इक्विटी शेयर में क्या अंतर है? नीचे दी गई तालिका दोनों के बीच अंतर को दिखाती है।
इक्विटी शेयर | प्रेफरेंस शेयर | |
डिविडेंड | समय के साथ डिविडेंड बढ़ सकता है, लेकिन भुगतान की गारंटी नहीं है। | आमतौर पर निश्चित दर पर भुगतान करते हैं, जिसमें बढ़ोतरी सीमित होती है, लेकिन ज्यादा अनुमानित आय मिलता है। |
वोटिंग के अधिकार | हां | नहीं (जब तक कंपनी के चार्टर में न बताया गया हो) |
बकाया लाभांश | नहीं | अगर शेयर क्यूमुलेटिव हैं, तो पिछली डिविडेंड भी आपको मिलती है। |
लिक्विडेशन के समय निवेश की वापसी का अधिकार | ऋणदाताओं, बॉन्डधारकों और प्रेफ़रेंस शेयरधारकों को भुगतान करने के बाद ही आपको संपत्ति मिलती है। | एसेट पर दावा करने का अधिकार मिलता है। |
उतार-चढ़ाव | ज़्यादा उतार-चढ़ाव, लेकिन कम स्प्रेड। | कम उतार-चढ़ाव, लेकिन ज़्यादा स्प्रेड। |
प्रेफरेंस शेयर को अक्सर ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इनका डिविडेंड स्थिर रहता है। कंपनी कुछ क्वार्टर या साल के पेमेंट छोड़ भी दे, तो भी यह सुरक्षित रहता है। वास्तविकता में, यह स्थिरता डिविडेंड लाभांश में साफ़ तौर पर दिखती है, जिसे कुल डिविडेंड को वर्तमान शेयर कीमत से विभाजित करके निकाला जाता है।
अगर किसी शेयर का अंकित मूल्य 100 डॉलर है और डिविडेंड रेट 5% है, तो वार्षिक डिविडेंड 5 डॉलर होगा। अगर बाजार मूल्य में 10 डॉलर तक की गिरावट होती है, तो डिविडेंड लाभांश 5 ÷ 10 = 50% हो जाता है। नियामकों के लिए, इतनी असामान्य रूप से उच्च लाभांश से यह संकेत मिलता है कि कंपनी वित्तीय कठिनाई में है और इसी कारण वे हस्तक्षेप करके डिविडेंड भुगतान को रोक भी सकते हैं।
रोचक तथ्य: कुछ स्टॉक एक्सचेंजों पर आप एक यूनिट खरीद सकते हैं, जो ट्रेड करने योग्य पैकेज होता है और जिसमें कंपनी के अलग-अलग क्लास के शेयर एक ही टिकर के तहत जुड़े होते हैं।
ब्राज़ील के स्टॉक एक्सचेंज पर क्लाबिन के तीन तरह के शेयर ट्रेड होते हैं। यह कैपिटलाइज़ेशन के मामले में टॉप 10 में है:
KLBN3 — कॉमन शेयर।
KLBN4 — प्रेफरेंस शेयर।
KLBN11 ऐसा यूनिट है, जिसे 1 KLBN3 कॉमन शेयर और 4 KLBN4 प्रेफ़रेंस शेयरों को मिलाकर बनाया जाता है। KLBN11 में निवेशक को मूल प्रतिभूति का अधिकार और डिविडेंड मिलता है: KLBN3 शेयर से वोटिंग अधिकार और KLBN4 शेयरों से प्राथमिक डिविडेंड। पूरे शेयर पैकेज का ट्रेडिंग एक ही टिकर से जुड़ा होता है।
इक्विटी या कॉमन शेयर की कीमत आम तौर पर प्रेफ़रेंस शेयरों की तुलना में थोड़ी ज्यादा होती है। हालांकि, अगर आप 3 प्रेफ़रेंस शेयर और 1 कॉमन शेयर अलग-अलग खरीदते हैं, तो कुल लागत 18.56 BRL होती है, जबकि एक यूनिट इससे कम में ट्रेड होती है। यूनिट से दोनों शेयर एक साथ खरीदकर औसत कीमत पर निवेश करना आसान होता है और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता आती है।
निष्कर्ष
आइए, इस लेख के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में समझें:
- प्रेफरेंस शेयर उन निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जाता है, जो सुरक्षित निवेश करना पसंद करते हैं और स्थिर, पूर्वानुमानित लाभांश आय की उम्मीद रखते हैं।
- इक्विटी शेयरों पर लाभांश दर प्रेफ़रेंस शेयरों की तुलना में ज्यादा या कम हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शेयरधारकों ने लाभांश के लिए कितनी राशि अलग रखी है।
- अगर यह शेयरधारकों या नियामक की ओर से तय किया जाए, तो दोनों प्रकार के शेयरधारक को कोई भुगतान नहीं भी मिल सकता है। साथ ही, कंपनी भविष्य में बढ़ोतरी के लिए पूंजी जुटाने के लिए नए शेयर छूट वाली कीमत पर जारी कर सकती है।
अभी शेयर में निवेश करने का तरीका जानें!
इक्विटी और प्रेफ़रेंस शेयर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह आपके निवेश से जुड़े लक्ष्य पर निर्भर करता है। इक्विटी शेयर ज्यादा लिक्विड होते हैं और इसमें उच्च बढ़ोतरी की संभावना होती है, साथ ही शेयरधारक बैठकों में मतदान का अधिकार भी मिलता है। हालांकि, इनमें अधिक जोखिम और उतार-चढ़ाव भी होता है और डिविडेंड की कोई गारंटी नहीं होती। दूसरी ओर, प्रेफरेंस शेयर से निश्चित डिविडेंड भुगतान मिलता है, जो सामान्य शेयरधारकों से पहले दिया जाता है और अगर कोई डिविडेंड छूट जाए, तो उसका भुगतान भी किया जाता है। लेकिन वोट देने का अधिकार नहीं मिलता।
हालांकि प्रेफरेंस शेयर में आम तौर पर शेयरधारक बैठकों में वोटिंग का अधिकार नहीं मिलता (जब तक कि चार्टर में विशेष रूप से न बताया गया हो), लेकिन इनमें डिविडेंड पेमेंट में प्राथमिकता, डिविडेंड न मिलने पर बकाया पाने का अधिकार और कंपनी दिवालिया होने पर एसेट क्लेम करने की प्राथमिकता शामिल है।
BAC.PRB, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) पर सूचीबद्ध बैंक ऑफ़ अमेरिका के प्रेफर्ड शेयर्स को दिखाता है (इसके कॉमन शेयर्स टिकर BAC के तहत ट्रेड किए जाते हैं)। STRD, NASDAQ पर ट्रेड होने वाला माइक्रोस्ट्रेटजी का प्रेफर्ड शेयर है। इस मार्केट के लिए मुख्य बेंचमार्क S&P U.S. प्रेफर्ड स्टॉक इंडेक्स (SPPREF) है, जिसकी गणना S&P डॉव जोन्स इंडेक्स के अनुसार की जाती है।
प्रेफरेंस शेयर आमतौर पर जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए ज्यादा सही माना जाता है। ये निर्धारित और पूर्वानुमानित आय प्रदान करते हैं, जिसे लाभ वितरण में प्राथमिकता दी जाती है। अगर पिछली अवधि में डिविडेंड नहीं दिया गया था, तो क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर बाद में भी उसका भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा, ये आमतौर पर इक्विटी शेयरों की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।
यह बात सही नहीं है। प्रेफरेंस शेयर को आमतौर पर इक्विटी शेयर माना जाता है। जैसे कि इक्विटी शेयर्स, कंपनी के पूंजी में हिस्सेदारी को दिखाते हैं और दिवालियापन की स्थिति में, लेनदारों के बाद धारकों को कंपनी की संपत्ति में हिस्सा मिलता है। ये डिविडेंड भुगतान में प्राथमिक अधिकार भी देते हैं और कुछ मामलों में पूंजी की वापसी (कैपिटल रिडेम्प्शन) का भी अधिकार मिलता है।

इस लेख की सामग्री, लेखक की राय को दिखाती है और यह लाइटफाइनेंस के ब्रोकर की आधिकारिक स्थिति को जरूरी नहीं दिखाती। इस पेज पर पब्लिश सामग्री सिर्फ़ सूचना के उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है और इसे निर्देश 2014/65/EU के उद्देश्यों के लिए निवेश की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
कॉपीराइट कानून के हिसाब से, यह लेख बौद्धिक संपत्ति माना जाता है, जिसमें इसकी बिना अनुमति के कॉपी करना और वितरण पर पाबंदी है।












