आज मैं फॉरेक्स चार्ट की ट्रेडिंग और लाइव फॉरेक्स मार्केट चार्ट के साथ काम करने के तरीकों पर चर्चा करूंगा।

अलग-अलग फ़ॉरेक्स चार्ट को देखकर खासकर कई ट्रेडर्स हतोत्साहित हो सकते हैं। ऐसा लगता है कि सिर्फ़ अनुभवी ट्रेडर ही इन ट्रेडिंग चार्ट को सही ढंग से पढ़ कर समझ सकते हैं।

लेकिन ऐसा लगता है। हरेक तरह का फ़ॉरेक्स चार्ट ट्रेडिंग को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार किया गया है, ताकि रिटेल ट्रेडर भ्रमित न हों। जब आप चार्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करना आसान हो जाता है, इसलिए मूल्य आधारित चार्ट विश्लेषण ज्यादा उत्पादक और सटीक हो जाता है। बड़ी मात्रा में आंकड़ों (आमतौर पर संख्यात्मक) का इस्तेमाल करने वालों के लिए, उस डेटा को किसी सरल और कम जटिल रूप में बदल पाना बेहद जरूरी होता है।

इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:


अहम जानकारी

मुख्य थीसिस

अहम जानकारी और मुख्य बातें

परिभाषा

बाजार के रुझान को समझने और ट्रेडिंग से जुड़े फैसले लेने के लिए फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट आवश्यक साधन हैं।

लाइव फ़ॉरेक्स चार्ट

फ़ॉरेक्स चार्ट से कीमत के बारे में मौजूदा जानकारी मिलती है, जिससे ट्रेडर को सोच समझकर फैसले लेने में मदद मिलती है। हरेक चार्ट से फ़ॉरेक्स बाज़ार की गतिविधियों के बारे में ख़ास जानकारी मिलती है।

चार्ट और मूल्य संकेत

फ़ॉरेक्स चार्ट पर समय के साथ कीमत के रुझान को देखा जा सकता है। इससे ट्रेडर को बाज़ार के रुझान, उच्चतम, निम्नतम कीमत और प्राइस एक्शन को समझने में मदद मिलती है। हर चार्ट कीमत को अलग-अलग तरीके से दिखाता है।

नए ट्रेडर के लिए

नए ट्रेडर के लिए, फॉरेक्स चार्ट को समझने में पैटर्न को पहचानना, कीमत के रुझान की व्याख्या करना और ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीतियों में उनका इस्तेमाल करना शामिल है। बार चार्ट और कैंडलस्टिक चार्ट जैसे अलग-अलग चार्ट की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं।

समझने का तरीका

फॉरेक्स चार्ट का विश्लेषण करते समय शुरुआती और समापन कीमत, उच्चतम और निम्नतम कीमत और हर चार्ट की खासियतों को समझना जरूरी होता है। उदाहरण के तौर पर, कैंडलस्टिक चार्ट के रंगों से यह पता चलता है कि कीमतें बढ़ी या घटी हैं।

प्रकार

इस लेख में अलग-अलग तरह के फॉरेक्स चार्ट पर चर्चा की गई है, जिसमें जापानी कैंडलस्टिक चार्ट, हेइकिन आशी कैंडल्स चार्ट, एरिया फॉरेक्स चार्ट, पॉइंट और फिगर चार्ट, टिक फॉरेक्स चार्ट, रेन्को चार्ट और कागी चार्ट शामिल हैं। हरेक तरह के चार्ट से फॉरेक्स बाजार में उतार-चढ़ाव के बारे में ख़ास जानकारी मिलती है।

लाइव फ़ॉरेक्स चार्ट

सबसे पहले, मैं इस सुविधाजनक प्रणाली में आपको सभी करेंसी पेयर और अन्य एसेट क्लास के लिए मुफ्त फ़ॉरेक्स चार्ट (जो मेरे अनुसार ऑनलाइन सबसे बेहतरीन फ़ॉरेक्स चार्ट हैं) के लिंक देना चाहता हूं, जिसका मैं ज्यादातर समय तक इस्तेमाल करता हूं।

  • फ़ॉरेक्स (फॉरेन एक्सचेंज) करेंसी रेट और चार्ट ऑनलाइन यहां उपलब्ध है।
  • कीमती धातुओं के मूल्य चार्ट (गोल्ड, सिल्वर लाइव फ़ॉरेक्स चार्ट) यहां उपलब्ध हैं।
  • वास्तविक समय में ऑइल फ़ॉरेक्स ग्राफ यहां उपलब्ध हैं।
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  • स्टॉक मार्केट इंडेक्स के ऑनलाइन चार्ट यहां उपलब्ध हैं।

सिस्टम में प्राइस चार्ट खोलने के लिए, सिर्फ़ आवश्यक करेंसी या अन्य एसेट वाले कार्ड पर क्लिक करें।

आप अपने "पसंदीदा" सेक्शन में चार्ट जोड़ सकते हैं, ताकि आपके पास आवश्यक करेंसी और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतों की जानकारी हमेशा पास में रहें। "पसंदीदा" फीचर का इस्तेमाल करने के लिए, सिर्फ़ रजिस्टर करें (यह बहुत तेज़ है)। बस इतना ही करना है - आप अपनी ऑनलाइन चार्ट की अपनी सूची बनाने के लिए सिर्फ़ उस करेंसी के स्टार प्रतीक पर क्लिक कर सकते हैं, जिसकी आपको ज़रूरत है।

फ़ॉरेक्स चार्ट और कीमतों का क्या मतबल होता है?

फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग के चार्ट करेंसी पेयर ट्रेडिंग की शुरुआत समझने का जरिया हैं। ट्रेडर को पहले से ट्रेंड पहचानना आना चाहिए। निवेश से जुड़े अवसरों की पहचान करने के लिए, आपको ये जानना जरूरी है कि चार्ट कैसे बनते हैं, कितने तरह के चार्ट होते हैं, टाइम फ्रेम क्या होता है और प्राइस मूवमेंट को स्क्रीन पर कैसे सही ढंग से सेट किया जाता है।

मॉडर्न ट्रेडिंग में, भावी कीमत के अनुमान लगाने के दो तरीके होते हैं। पहला फाइनेंशियल एसेट या मौलिक विश्लेषण (आर्थिक कैलेंडर, राजनीतिक समाचार, सामान्य बाजार टिप्पणी, विनिमय दर, आदि) से जुड़ी हर चीज का विश्लेषण करना है। दूसरा कीमत का विश्लेषण या तकनीकी विश्लेषण करना है। अगर फंडामेंटल एनालिसिस की बात ज़्यादा या कम स्पष्ट होती है; तकनीकी विश्लेषण में वित्तीय साधन, उसके वित्तीय सूचकांक, अफवाहों, समाचारों, आधिकारिक बयानों के बारे में जानकारी का विश्लेषण करने की ज़रूरत होती है, तो, कीमत का विश्लेषण खुद से करें, सब कुछ अलग है। कीमत का विश्लेषण करने के लिए इसकी निगरानी करने की ज़रूरत नहीं होती है। वित्तीय साधन के कीमतों में उतार-चढ़ाव की निगरानी करने के लिए, विशेष मूल्य चार्ट बनाए गए थे।

स्कूल से ही हम जानते हैं कि चार्ट एक ऐसी रेखा होती है, जो दो अक्षों पर बदलती रहती है। ट्रेडिंग में भी प्राइस चार्ट कुछ ऐसा ही होता है। यह ऐसी रेखा है, जो समय और कीमत अक्ष (रेट) के हिसाब से ऊपर-नीचे होती रहती है।

जब पहले चार्ट बनाए गए थे, तब कंप्यूटर तकनीक इतनी विकसित नहीं थी और ट्रेडर्स कंप्यूटर स्क्रीन पर कीमत में उतार-चढ़ाव को ट्रैक नहीं कर पाते थे। इसलिए निवेशक पहले बिंदु के माध्यम से प्राइस चार्ट को ग्राफ पेपर पर बनाते थे, जिन्हें दिनभर की कीमत में उतार-चढ़ाव के हिसाब से एक रेखा से जोड़ा जाता था।

चार्ट समय के साथ-साथ एक-दूसरे के सापेक्ष दिए गए डेटा में होने वाले बदलावों को ग्राफिक रूप से दिखाता है। ट्रेडर ने चार्ट बनाने के लिए इन डेटा का इस्तेमाल किया:

  • शुरुआती – शुरुआती कीमत – ट्रेडिंग अवधि की शुरुआत में एसेट की कीमत।
  • समापन – समापन कीमत – ट्रेडिंग अवधि के अंत में एसेट की कीमत।
  • उच्चतम – कुछ समय अवधि में अधिकतम कीमत।
  • निम्नतम – कुछ समय अवधि में न्यूनतम कीमत।
  • वॉल्यूम – कुछ समय अवधि में निष्पादित कुल कॉन्ट्रैक्ट

आजकल, ट्रेडर कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी भी समय अवधि और वित्तीय साधन के लिए चार्ट देख सकते हैं। लेकिन फ़ॉरेक्स चार्ट पहले की तरह ही उसी सिद्धांत के अनुसार तैयार किए जाते हैं। ये टीम और प्राइस वैल्यू पर आधारित होते हैं।

चार्ट का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि आप कभी भी पुराने डेटा को देखकर यह समझ सकें कि पहले कीमत किस तरह बदल रही थी। फिर, इन डेटा के आधार पर, आप कुछ नियमितताएं या चार्ट पैटर्न (चक्रीय प्रकृति) देख सकते हैं, जिनसे भविष्य का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और यह अंदाज़ा भी लगाया जा सकता है कि आगे चलकर चार्ट कैसा दिखेगा। यही ऐतिहासिक विश्लेषण और पैटर्न की खोज आम क्षैतिज या ऊर्ध्व रेखाओं से हटकर चार्ट को नए रूप में प्रस्तुत करने का कारण बनी।

नए ट्रेडर के लिए फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट को समझने का तरीका

सबसे पहले, आपको LiteFinance वेबसाइट पर रजिस्टर करने के बाद डेमो अकाउंट खोलना होगा। इसमें एक मिनट से ज़्यादा समय नहीं लगेगा, इसके लिए न तो आपको पैसे जमा करने होंगे या न तो सत्यापन की ज़रूरत होती है। यह जरूरी है ताकि आप चार्ट देख सकें और आगे जो बताया जाएगा, उसे समझ सकें। वेबसाइट के किसी भी पेज पर ऊपर दाईं ओर स्थित रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करें और निर्देशों का पालन करें। इसके बाद, आप करेंसी पर क्लिक करें और सबसे लोकप्रिय फ़ॉरेक्स करेंसी पेयर, यूएस डॉलर बनाम यूरो (यानी, EURUSD के लिए एक्सचेंज रेट) का चार्ट चुनें।

लाइटफाइनेंस: नए ट्रेडर के लिए फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट को समझने का तरीका

फॉरेक्स चार्ट वास्तविक समय में कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को ग्राफ़िक रूप से दिखाता है। ट्रेडिंग गतिविधि चार्ट से मौजूदा फॉरेक्स करेंसी पेयर की कीमत के बारे में पता चलता है (हमारे उदाहरण में, 1 यूरो की कीमत अमेरिकी डॉलर में कितनी होती है)।

आइए हम LiteFinance ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (लाइव फॉरेक्स चार्ट) के मुख्य कंट्रोल पैनल के बारे में जानें।

1. फॉरेक्स चार्ट की समयावधि (टाइमफ्रेम)

समयावधि (टाइम फ्रेम) उस विशेष अवधि को दर्शाती है, जिसका इस्तेमाल कीमतों को चार्ट पर दिखाने के लिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर:

  • कैंडलस्टिक फॉरेक्स चार्ट में, टाइमफ़्रेम, कैंडलस्टिक से मिलती-जुलती है। अगर टाइमफ़्रेम M30 है, तो हरेक कैंडलस्टिक हर 30 मिनट में कीमत में उतार-चढ़ाव की सीमा को दिखाता है। आप इस लेख में आगे कैंडलस्टिक चार्ट के बारे में ज्यादा जानेंगे।
  • लाइन फॉरेक्स चार्ट में, एक बिंदु सामान्यतः किसी समयावधि की समापन कीमत को दिखाता है। जब हर 30 मिनट की अवधि पूरी होती है, तो चार्ट उस अवधि की अंतिम कीमत के अनुसार एक बिंदु बनाता है। इसके बाद, सभी बिंदुओं को एक रेखा से जोड़ा जाता है।

लाइटफाइनेंस: 1. फॉरेक्स चार्ट की समयावधि (टाइमफ्रेम)

2. फ़ॉरेक्स चार्ट में तकनीकी इंडीकेटर की सूची

यहां आप उन ट्रेडिंग तकनीकी विश्लेषण संकेतकों का चयन कर सकते हैं, जिन्हें आप फॉरेक्स चार्ट से जोड़ना चाहते हैं।

लाइटफाइनेंस: 2. फ़ॉरेक्स चार्ट में तकनीकी इंडीकेटर की सूची

आइए अब फॉरेक्स करेंसी पेयर की कीमत चार्ट के विकल्पों को समझते हैं। आइए ऑनलाइन फॉरेक्स चार्ट के घटकों पर नज़र डालते हैं।

3. कीमत और समय का पैमाना

पीला बॉक्स कीमत का पैमाना है। यह EURUSD करेंसी पेयर के सहसंबंध को दिखाता है। मौजूदा बाज़ार की कीमत, 1.12678 को हरे रंग से हाइलाइट किया गया है। इसका मतलब है कि आप अभी 112 678 अमेरिकी डॉलर में 100 000 यूरो खरीद सकते हैं। हरे रंग का मतलब है कि कीमत इस समय बढ़ रही है। लाल रंग का मतलब होगा कि कीमत गिर रही है। पतली क्षैतिज रेखा पिछली कीमतों के सापेक्ष मौजूदा मूल्य स्तर को दिखाता है, यह विजुअल विश्लेषण करने के लिए उपयुक्त है। वर्तमान कीमत लाइव फ़ॉरेक्स चार्ट में लगातार बदल रही है, इसलिए मौजूदा कीमत का रंग, हरा/लाल, हर समय बदलता रहेगा।

लाइटफाइनेंस: 3. कीमत और समय का पैमाना

नीला बॉक्स समय पैमाने को दिखाता है, जिससे EUR की कीमत के पिछले परफॉरमेंस का पता चलता है। अगर आप माउस कर्सर को कैंडलस्टिक पर ले जाते हैं, तो आपको समय पैमाने पर नीचे इस कीमत की तारीख दिखाई देगी, कीमत दाहिने पैमाने दिखेगी। इसे स्क्रीनशॉट पर काले रंग से चिह्नित किया गया है।

पीला तीर एक और पैमाना दिखाता है। इससे प्रदर्शित पिछले डेटा के समय को बदलने की अनुमति मिलती है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप 7D चुनते हैं, तो चार्ट पिछले 7 दिनों में कीमत में उतार-चढ़ाव को दिखाएगा। हरा तीर उस मेनू की ओर संकेत करता है, जहाँ से आप पैमानों के प्रकार (प्रतिशत और लघुगणकीय) को बदल सकते हैं, साथ ही वर्तमान समय और मौजूदा टाइम ज़ोन भी देख सकते हैं।

कुछ उपयोगी सुझाव:

आप स्क्रॉल करके मैन्युअल रूप से पैमाने को बदल सकते हैं (नीचे दिए गए स्केल के बिना)।

आप चार्ट को किसी भी दिशा में चयनित पैमाने पर ले जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका पैमाना सात दिन (7D) का है, तो आप मूल्य डेटा को 1-7 जून की अवधि से 1-7 मई की अवधि में ले जा सकते हैं। आपको बायाँ माउस बटन दबाकर रखना चाहिए और ग्राफ़ को साइड में खींचना चाहिए। अगर यह समझना थोडा भ्रामक लग रहा था, तो चार्ट पर दिए गए इस निर्देश का एक-एक करके पालन करें, आपको सब कुछ तुरंत समझ में आ जाएगा।

फ़ॉरेक्स चार्ट समझने का तरीका

ट्रेडिंग की समझ ट्रेडिंग चार्ट पढ़ने से शुरू होती है। अगर आप फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग चार्ट बनाने के सिद्धांतों को समझते हैं, तो आप चार्ट की व्याख्या को प्रभावित करने वाले कारकों (तकनीकी और मौलिक विश्लेषण) के बारे में जान सकते हैं।

फ़ॉरेक्स चार्ट में कीमत में उतार-चढ़ाव को अलग-अलग तरीकों से दिखाया जा सकता है। हरेक तरह के फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट के अपने फायदे और नुकसान हैं।

आइए हम हरेक तरह के फ़ॉरेक्स चार्ट को विस्तार से समझें और यह जानने की कोशिश करें कि फ़ॉरेक्स चार्ट को सही तरीके से कैसे समझा जाए।

लाइटफाइनेंस: फ़ॉरेक्स चार्ट समझने का तरीका

फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में अलग-अलग तरह के चार्ट का इस्तेमाल करके फ़ॉरेक्स चार्ट का विश्लेषण

आजकल, ग्राफिक विश्लेषण से फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में कीमत दिखाने वाले तीन मुख्य तरह के चार्ट का सुझाव मिलता है: लाइन चार्ट, बार चार्ट, जापानी कैंडलस्टिक चार्ट।

अब, आइए आगे बढ़ते हैं और सबसे महत्वपूर्ण विषय का अध्ययन करते हैं। मैं ऑनलाइन लाइव फ़ॉरेक्स चार्ट पर सभी प्रकार की मूल्य प्रस्तुतियों के बारे में बताऊंगा, ताकि आप फ़ॉरेक्स चार्ट समझ सकें और एसेट की कीमत में उतार-चढ़ाव का सही ढंग से विश्लेषण कर सकें। यह ध्यान में रखें कि मैं आगे की जानकारी को स्पष्ट करने के लिए अमेरिकी डॉलर प्राइस चार्ट का इस्तेमाल करता हूं। अब इस पर चर्चा करते हैं।

फ़ॉरेक्स लाइन चार्ट

इस तरह के चार्ट को सबसे पहले बिल्कुल शुरुआत में ही बनाया गया था; यही वजह है कि यह सबसे सरल और कम जानकारीपूर्ण है। चार्ट को काफी सरलता से बनाया गया है। समय की हरेक नई अवधि के दो मुख्य पैरामीटर होते हैं; शुरुआती कीमत (नई अवधि शुरू होने पर कीमत) और समापन कीमत (समय अवधि समाप्त होने पर कीमत)। इनमें से हरेक पैरामीटर चार्ट में एक बिंदु बनाता है; फिर, शुरुआती कीमत की बिंदु को समाप्ति कीमत की बिंदु से जोड़ा जाता है। बिंदुओं को लगातार जोड़ने से एक रेखा बनती है।

लाइटफाइनेंस: फ़ॉरेक्स लाइन चार्ट

आजकल, इस तरह के प्राइस चार्ट का इस्तेमाल कम ही किया जाता है, क्योंकि इससे किसी विशेष समयावधि के दौरान कीमत के उच्चतम और न्यूनतम स्तरों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है। हालांकि, कुछ तकनीकी विश्लेषक इस चार्ट के आधार पर अपना विश्लेषण करते हैं, क्योंकि यह रुझान के अनुसार काम करने के लिए सबसे सटीक माना जाता है, क्योंकि इससे ट्रेंडलाइन के गलत ब्रेकआउट या मूल्य स्तर की पहचान करने में मदद मिलती है।

क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए इस तरह की चार्ट विज़ुअलाइज़ेशन की मुख्य विशेषताओं के बारे में जानें।

  1. लाइन चार्ट फॉरेक्स सिर्फ़ ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित प्राइस पैटर्न के अनुसार ट्रेडिंग करने के लिए उपयुक्त नहीं है।
  2. यह फॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट लंबी समयावधि, जैसे कि D1 और उससे भी लंबी अवधि के लिए ज्यादा प्रभावी है, क्योंकि इन टाइमफ्रेम में ट्रेंडलाइन मूल्य सीमाओं की तरह दिखती हैं; उन्हें ड्रा करने के लिए, कीमत के प्रमुख पैरामीटर अहम होते हैं।
  3. इस तरह के प्रदर्शन का उपयोग अक्सर चार्ट और EMA तकनीकी विश्लेषण संकेतक के आधार पर संयुक्त रणनीतियों में किया जाता है, क्योंकि इससे किसी पोजीशन में प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए ज्यादा सटीक संकेत मिलता है।

फ़ॉरेक्स बार चार्ट

लाइन चार्ट के बाद कीमत के फॉरेक्स बार चार्ट बनाए गए थे। इस तरह का फॉरेक्स चार्ट ज्यादा जानकारी देने वाला और जटिल होता है। इसे यूएसए में बनाया गया था, इसलिए यह पश्चिमी देशों में काफी लोकप्रिय है। पश्चिम में अधिकांश रूढ़िवादी फॉरेक्स ट्रेडर अभी भी किसी अन्य तरह के प्राइस चार्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। आइए इस चार्ट के पैटर्न पर नजर डालें।

लाइटफाइनेंस: फ़ॉरेक्स बार चार्ट

बार चार्ट में लंबवत रेखाओं की एक श्रृंखला होती है, जिसे बार कहा जाता है। बार चार्ट में किसी भी ट्रेडिंग अंतराल को बार से दिखाया जाता है। यह दिन के न्यूनतम से अधिकतम कीमत तक खींची गई लंबवत रेखा होती है। बार चार्ट, लाइन चार्ट की तुलना में ज्यादा विस्तार से जानकारी प्रदान करता है। बार चार्ट से किसी विशेष अवधि में शुरुआती और समापन कीमतों के अलावा उच्चतम, निम्नतम कीमत के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती है। आप जानते हैं कि कीमत में उतार-चढ़ाव के दौरान, यह कई बार अंतिम समापन कीमत से ज्यादा हो सकता है। उच्च कीमत से पता चलता है कि बार चार्ट बनने के दौरान कीमत कितने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। यही बात निम्न पर भी लागू होती है, सिर्फ़ निम्नतम मूल्य स्तरों का विश्लेषण किया जाता है। लंबवत रेखाओं से तकनीकी विश्लेषक करने में मदद मिलती है, ताकि किसी विशेष अवधि के भीतर कीमत के रुझान की पहचान कर सकें। यह फ़ॉरेक्स चार्ट में कीमत का विस्तार से विश्लेषण करने के लिए बहुत ज़रूरी है।

लाइटफाइनेंस: फ़ॉरेक्स बार चार्ट

क्या शामिल किया जाना चाहिए? बार चार्ट की मुख्य विशेषताएं:

  1. प्रारंभिक कीमत ऊर्ध्वाधर रेखा के बाईं ओर क्षैतिज रेखा है और समापन कीमत इस रेखा के दाईं ओर स्थित है।
  2. बार चार्ट दो तरह के होते हैं: राइजिंग बार और फालिंग बार। राइजिंग बार में, शुरुआती कीमत, समापन कीमत से कम होती है; फालिंग बार के लिए, यह इसके ठीक विपरीत होता है।
  3. बार चार्ट पर ट्रेडिंग करने की कई खास रणनीतियां हैं, जिनमें पिन बार ट्रेडिंग, इनसाइड बार ट्रेडिंग, और एन्गल्फिंग बार प्रमुख हैं।

जापानी कैंडलस्टिक चार्ट

कैंडलस्टिक चार्ट की शुरुआत जापान में हुई थी और अब यह फ़ॉरेक्स ट्रेडर और अन्य एसेटमें निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। परंपरागत रूप से माना जाता है कि इसे 18वीं शताब्दी में जापानी राइस ट्रेडर मुनेहिसा होम्मा ने कीमतों के उच्चतम और निम्नतम स्तर को ट्रैक करने के लिए बनाया था। यह प्राइस चार्ट सबसे ज्यादा जानकारी वाली है, क्योंकि यह सभी तरह के मुख्य चार्ट को जोड़ता है और बार चार्ट से बेहतर है, क्योंकि इसमें रंग के माध्यम से बढ़ोतरी या गिरावट के बारे में जानकारी भी मिलती है। आइए जानें कि इस तरह के चार्ट में क्या-क्या शामिल है:

लाइटफाइनेंस: जापानी कैंडलस्टिक चार्ट

कैंडलस्टिक में काले/लाल या सफेद/हरे रंग की बॉडी और ऊपरी या निचली छाया (शैडो) होती है। कुछ विवरणों में कैंडलस्टिक की "विक" जैसी अवधारणा भी शामिल होती है। ऊपरी और निचली छायाएं किसी निश्चित समय अवधि के दौरान उच्चतम और न्यूनतम कीमत को दिखाती है। मोमबत्ती की बॉडी का ऊपरी और निचला हिस्सा क्रमशः शुरुआती और समापन कीमत को दिखाता है।

लाइटफाइनेंस: जापानी कैंडलस्टिक चार्ट

अगर समापन कीमत, प्रारंभिक कीमत से ज्यादा होता है, तो कैंडलस्टिक की बॉडी सफेद/हरे रंग की होती है। अगर यह कम होता है, तो बॉडी काले/लाल रंग की होती है।

जब समापन कीमत उच्चतम या निम्नतम के बराबर होता है, तो शायद छाया (या दोनों) में से कोई एक न हो। जब समापन और शुरुआती कीमत समान होता है, तो कैंडलस्टिक की बॉडी नहीं बनती है; ऐसी कैंडलस्टिक को डोजी कहा जाता है।

हालांकि, इस तरह का प्राइस चार्ट कितना भी जानकारी वाला क्यों न हो, कैंडलस्टिक्स में समय अंतराल के भीतर के कीमत में उतार-चढ़ाव की जानकारी नहीं मिलती है; इससे न तो यह संकेत मिलता है कि पहले यह उच्चतम या निम्नतम स्तर तक पहुंचा गया था, न ही कीमत कितनी बार बढ़ी या गिरी। यह जानकारी हासिल करने के लिए, आपको चार्ट के छोटे टाइमफ्रेम पर स्विच करना चाहिए। आजकल, प्रदर्शन का सबसे लोकप्रिय तरीका चीनी शैली है, जहां राइजिंग कैंडलस्टिक हरे रंग की होती है और फालिंग कैंडलस्टिक लाल रंग की होती है।

जापानी कैंडल्स चार्ट में पतली लंबवत रेखाओं की एक श्रृंखला होती है। हरेक कैंडलस्टिक पिछली कैंडलस्टिक के बंद होने के बाद दिखती है। एक के बाद एक ऊपर की ओर बनी कैंडल्स से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है और वैसे ही नीचे की कैंडल्स गिरावट दिखाती हैं। कैंडलस्टिक्स अलग-अलग रंगों के होते हैं, इसलिए चार्ट में रुझानों की पहचान करना बहुत आसान होता है, क्योंकि वे एक ही रंग की रेखाओं की एक श्रृंखला की तरह दिखते हैं। क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए कैंडलस्टिक चार्ट की मुख्य विशेषताओं को समझें।

  1. कैंडलस्टिक की खास विशेषता यह है कि शुरुआती और समापन कीमतें कैंडल्स की बॉडी की निचली या ऊपरी सीमाओं के रूप में दिखती है। राइजिंग कैंडल (सफेद) में, शुरुआती कीमत हमेशा नीचे होती है, जबकि राइजिंग कैंडल (काली) में शुरुआती कीमत हमेशा ऊपर होती है।
  2. कैंडलस्टिक्स कई प्रकार की हो सकती हैं: शैडो वाली सफेद ग्रोथ कैंडलस्टिक, बिना शैडो वाली सफेद ग्रोथ कैंडलस्टिक, बिना शैडो और बॉडी वाली कैंडलस्टिक, बिना बॉडी वाली लेकिन शैडो वाली कैंडलस्टिक, शैडो वाली काली कैंडलस्टिक, बिना शैडो वाली काली कैंडलस्टिक।
  3. जापानी कैंडलस्टिक चार्ट इस्तेमाल करने की कई ट्रेडिंग रणनीतियां हैं। यहां तक कि ख़ास तरह का तकनीकी विश्लेषण भी विकसित किया गया है, जिसे कैंडलस्टिक विश्लेषण कहा जाता है। इस विश्लेषण में समान कैंडलस्टिक के दोहराए जाने वाले संयोजन ढूंढने का सुझाव दिया जाता है। उन्हें कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न कहा जाता है। फ़िलहाल, 100 से ज्यादापैटर्न हैं; लेकिन उनमें से कुछ वास्तव में लोकप्रिय हैं।

आइए अब फॉरेक्स चार्ट डिस्प्ले के ज्यादा जटिल और दुर्लभ प्रकारों पर नज़र डालें। एडवांस चार्टिंग तकनीकें नए अवसर प्रदान करती हैं और इससे आपको ज्यादा सोच-समझकर ट्रेडिंग निर्णय लेने में मदद मिलती है।

हेइकिन आशी कैंडल्स चार्ट

जापानी कैंडलस्टिक के अस्तित्व में आने के बाद हेइकिन-आशी चार्ट विकसित हुआ। यह चार्ट महत्वपूर्ण अंतर को छोड़कर सामान्य कैंडलस्टिक चार्ट जैसा ही दिखता है। हरेक नई कैंडलस्टिक, पिछली कैंडलस्टिक की बॉडी के बीच में खुलती है। अन्य सभी पैरामीटर समान रहते हैं। हेइकिन-आशी चार्ट की कैंडलस्टिक में अक्सर कोई शैडो नहीं होती है, इसलिए वे मजबूत रुझान को ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। नई कैंडलस्टिक बनाने के लिए कीमत को पिछली कैंडलस्टिक की बॉडी के आधे हिस्से से कवर करना चाहिए। यही वजह है कि कैंडलस्टिक में अक्सर शैडो नहीं होती है, जिससे रुझान की मजबूती का पता चलता है। हेइकिन-आशी चार्ट एक नियमित कैंडलस्टिक चार्ट पर दिखने वाली लंबी शैडो के प्रभाव को कम करता है और स्पष्ट रुझान दिखाने के लिए कीमत में उतार-चढ़ाव का औसत निकालता है। क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए हेइकिन-आशी कैंडल चार्टिंग तकनीक की मुख्य विशेषताओं को समझें:

  1. हेइकिन-आशी चार्ट मामूली मूल्य उतार-चढ़ाव को हटा देता है और सिर्फ़ मुख्य रुझान को दिखाता है। - वास्तव में, यह चार्ट ट्रेंडलाइन तकनीकी संकेतक है।
  2. हेइकिन-आशी चार्ट में रुझान प्रदर्शित होने पर, लगभग कोई विपरीत शैडो नहीं बनती है; शैडो की लंबाई और कैंडलस्टिक्स की संख्या रुझान की मजबूती को दिखाता है।
  3. उदाहरण के तौर पर, इस तरह के हेइकिन-आशी चार्ट में, डोजी जैसे कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न बहुत ज्यादा ज़रूरी होते हैं। सामान्य कैंडल में डोजी एक तरह का रुकने का संकेत होता है; लेकिन हेइकिन-आशी कैंडलस्टिक में, यह चार्ट पैटर्न पहले से ही ट्रेंड रिवर्सल का मजबूत संकेत है और इसी से प्रवेश करने का संकेत मिलता है।

लाइटफाइनेंस: हेइकिन आशी कैंडल्स चार्ट

मामूली मूल्य उतार-चढ़ाव हट जाने के कारण, यह चार्ट मजबूत रुझान को दिखाता है और मामूली सुधार को छिपाता है।एरिया फ़ॉरेक्स चार्ट

इस तरह का एरिया फॉरेक्स चार्ट, सामान्य लाइन चार्ट से अलग है, लेकिन चार्ट भरे हुए क्षेत्रों का इस्तेमाल करके मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाता है। इसका मुख्य फ़ायदा यह है कि एरिया चार्ट बहुत साफ और उपयोग में आसान हैं। मूल्य के नीचे की जगह को भरने से कीमत में रुझान को विशेष रूप से हाइलाइट किया जाता है। एरिया चार्ट किसी भी ट्रेडिंग अवधि में स्थानीय मूल्य उतार-चढ़ाव, कीमत में अचानक बढ़ोतरी और गिरावट को स्पष्ट रूप से दिखाता है। इस चार्टिंग तकनीक का उपयोग आमतौर पर निवेश उद्देश्यों की लाभप्रदता को दिखाने के लिए किया जाता है।

लाइटफाइनेंस: हेइकिन आशी कैंडल्स चार्ट

क्या शामिल किया जाना चाहिए: आइए एरिया चार्ट की मुख्य विशेषताओं को देखें।

  1. इस तरह के प्राइस चार्ट की विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव स्पष्ट रूप से दिखते हैं, जैसे समय अंतराल के भीतर सुधार और मामूली गिरावट।
  2. एरिया चार्ट एक बेहतरीन चार्ट प्रकार है, जिससे चार्ट पैटर्न को ढूंढने और इसकी पहचान करने में मदद मिलती है।
  3. एरिया फॉरेक्स चार्ट स्पष्ट रूप से पिछली अवधि के संबंध में कीमत में उतार-चढ़ाव को दिखाता है। यह बिना किसी जटिलता के कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाता है। भरे हुए क्षेत्र से कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को याद रखने और इसकी पहचान करने में आसानी होती है। अगर आपको प्राइस चार्ट याद रखना हो, तो एरिया चार्ट बढ़िया विकल्प है।

पॉइंट और फिगर चार्ट (टिक-टैक-टो चार्ट)

पॉइंट और फ़िगर चार्ट की शुरुआत 19वीं सदी के मध्य में पहले तकनीकी ट्रेडर ने की थी। यह मूल रूप से एक चार्ट नहीं था, बल्कि यह पॉइंट और फ़िगर का इस्तेमाल करके अनुमान लगाने का तरीका था। आधुनिक विश्लेषण में उपयोग किए जाने वाले ज़्यादातर प्राइस चार्ट, किसी विशेष समय अवधि के दौरान शुरुआती कीमत, समापन कीमत, उच्चतम और निम्नतम कीमत के आधार पर बनाए जाते हैं। लेकिन पॉइंट और फ़िगर चार्ट सिर्फ़ उस अवधि के समापन कीमत के आधार पर बनाया जाता है। पॉइंट और फ़िगर चार्ट की विशेषता Xs और Os की एक श्रृंखला है। Xs ऊपर की ओर कीमत में रुझान को दिखाता है, जबकि Os नीचे की ओर कीमत में रुझान को दिखाता है। चार्ट पर मौजूद हरेक बॉक्स मूल्य पैमाने को दिखाता है, जिसे वित्तीय साधन की कीमत के आधार पर समायोजित किया जाता है।

लाइटफाइनेंस: पॉइंट और फिगर चार्ट (टिक-टैक-टो चार्ट)

ट्रेडिंग के लिए, आपको दो मुख्य पैरामीटर के अनुसार चार्ट को समायोजित करना होगा:

  1. बॉक्स की साइज़। यह उन बिंदुओं की संख्या है, जिसे हरेक बॉक्स दिखाता है।
  2. रिवर्सल मानदंड: वह बिंदुओं की संख्या, जिसे कीमत को बदलने के लिए Xs के कॉलम को Os के कॉलम में या इसके विपरीत बदलने की ज़रूरत होती है। इसका उद्देश्य नया ट्रेंड बनाना होता है।

क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए पॉइंट और फ़िगर चार्ट की प्रमुख विशेषताओं को देखें:

  1. इस चार्ट में समय या वॉल्यूम पर ध्यान नहीं रखा जाता, केवल कीमत में उतार-चढ़ाव को दिखाता है, इसलिए कीमत में उतार-चढ़ाव के आधार पर, हर कॉलम बनने में कुछ मिनट से लेकर कुछ दिन का समय लग सकता है।
  2. टिक-टैक-टो चार्ट में बॉक्स किसी ख़ास कीमत को नहीं दिखाता है, बल्कि बॉक्स साइज़ के भीतर आने वाली मूल्य सीमा को दिखाता है।
  3. पॉइंट और फिगर चार्ट में संकेत बहुत सरल होते हैं: जब Xs के कॉलम के बाद एक नया O बॉक्स बनता है, तो इससे बिक्री का संकेत मिलता है। जब Os के कॉलम के बाद एक नया X बॉक्स बनता है, तो इससे खरीद का संकेत मिलता है, क्योंकि ऊपर की ओर नया ट्रेंड शुरू होता है।
  4. पॉइंट और फिगर चार्ट में सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल खास महत्व रखते हैं। यह चार्ट उच्चतम और निम्नतम स्तर को नहीं दिखाता, इसलिए ये स्तर साफ़ तौर पर क्षैतिज रेखाओं के रूप में नजर आते हैं। जब कीमत इन रेखाओं को पार करती है, तो इससे ट्रेड में प्रवेश करने का संकेत मिलता है।

टिक फॉरेक्स चार्ट

टिक फॉरेक्स चार्टिंग तकनीक, दरों के उतार-चढ़ाव को टिक के रूप में रेखा के ज़रिए दिखाता है। टिक एक्सचेंज पर होने वाला न्यूनतम मूल्य उतार-चढ़ाव होता है; दूसरे शब्दों में, टिक हरेक मूल्य उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। इस चार्टिंग तकनीक के आधार पर, फॉरेक्स में वॉल्यूम के मूल इकाई, टिक वॉल्यूम मानी जाती है।

लाइटफाइनेंस: पॉइंट और फिगर चार्ट (टिक-टैक-टो चार्ट)

टिक फॉरेक्स चार्ट का इस्तेमाल करते समय, दो कीमतों (बोली और मांग) की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यही दोनों कीमतें कमीशन (स्प्रेड) को दिखाती हैं और जब तक इस कमीशन की कीमत उतार-चढ़ाव के आधार पर बदलती रहती है, तो कई बार ऐसा भी हो सकता है कि कमीशन बिल्कुल न हो और कभी बहुत ज्यादा हो सकता है। इस तरह के चार्ट का उपयोग एक विशेष ट्रेडिंग रणनीति में होता है, जिसे आर्बिट्रेज कहा जाता है।

चार्ट में प्रदर्शित टिक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

  1. ऊपर की ओर टिक तब दिखता है, जब विक्रेता और क्रेता के बीच ट्रेडिंग पहले की तुलना में ज्यादा कीमत पर हुआ हो।
  2. नीचे की ओर टिक तब दिखता है, जब अंतिम लेनदेन, पिछले लेनदेन की तुलना में कम कीमत पर किया जाता है।
  3. जीरो टिक तब दिखता है, जब लेनदेन पिछले लेनदेन के समान कीमत पर किया जाता है।

क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए फॉरेक्स टिक चार्ट ट्रेडिंग की मुख्य विशेषताओं का विश्लेषण करें।

  1. टिक चार्ट को कभी-कभी मार्केट-मेकर चार्ट कहा जाता है, क्योंकि यह कीमतों में होने होने वाले सभी उतार-चढ़ाव को स्पष्ट रूप से दिखाता है, जैसे कि स्लिपेज।
  2. टिक फॉरेक्स चार्ट सिर्फ़ तब आपके लिए उपयुक्त होगा, जब आपके ब्रोकर के पास न्यूनतम या शून्य स्प्रेड हो, क्योंकि टिक चार्ट में दिखाए गए ट्रेंड बहुत छोटे होते हैं।

रेंको चार्ट (रेंको कैंडलस्टिक)

रेंको चार्टिंग तकनीक, सामान्य जापानी कैंडलस्टिक चार्ट और पॉइंट एंड फिगर चार्ट के सिद्धांत का मिला-जुला रूप है। रेंको चार्ट को बाज़ार में उन उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए बनाया गया था, जो आमतौर पर साइडवेज़ ट्रेंड (फ्लैट ट्रेडिंग) के दौरान सामान्य चार्ट में दिखते हैं। रेंको निर्माण सिद्धांत के कारण यह शायद ही कभी स्थिर दिखता है, इसलिए चार्ट में हमेशा ट्रेंड दिखाई देते हैं। रेंकों चार्ट पर ट्रेड करने के लिए, टिक-टैक-टो चार्ट की तरह, आपको दो मुख्य पैरामीटर को समायोजित करना होता है:

  1. ब्रिक साइज यह दिखाता है कि चार्ट में रेंकों कैंडलस्टिक बनाने के लिए कीमत में कितना बदलाव होना चाहिए।
  2. रिवर्सल मापदंड। नई कैंडलस्टिक बनाने के लिए कीमत में कितने अंकों की बढ़ोतरी होनी चाहिए। यह मूल पैरामीटर है, जिसका आकार रेंकों बार के आकार से दोगुना है।

लाइटफाइनेंस: रेंको चार्ट (रेंको कैंडलस्टिक)

क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए इस तरह के रेंकों चार्ट की मुख्य विशेषता देखें।

  1. रेंकों तकनीकी विश्लेषण चार्ट, ट्रेंड को साफ-साफ दिखाते हैं, क्योंकि ये छोटे-मोटे उतार-चढ़ावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो ब्रिक साइज से कम होते हैं।
  2. रेंकों फॉरेक्स चार्ट, मार्केट के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव को पूरी तरह से हटा देता है, लेकिन आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आपको मध्य-अवधि की समय-सीमा में ट्रेडिंग करना होगा।
  3. इस चार्ट पर ऑसिलेटर जैसे तकनीकी इंडिकेटर कहीं ज्यादा सटीक काम करते हैं।
  4. कभी-कभी नया ब्रिक बनने में बहुत समय लग सकता है, जिससे आपकी ट्रेडिंग रणनीति बाधित हो सकती है, खासकर अगर आप एक्सपर्ट एडवाइज़र का इस्तेमाल करते हैं।

जापानी कैंडलस्टिक चार्ट और रेंकों चार्ट की बहुत विस्तृत तुलना यहां उपलब्ध है।

कागी चार्ट

कागी चार्ट लंबवत रेखाओं की श्रृंखला की तरह दिखता है। यह कीमत में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है और ज़्यादातर सामान्य चार्ट की तरह समय पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं करता है। चार्ट की रेखा मोटी या पतली इस आधार पर होती है कि किसी वित्तीय साधन की कीमत कैसे बदल रही है। इस तरह के चार्ट में रेखाओं की परिवर्तनशील मोटाई ही ट्रेडर के लिए ट्रेडिंग में प्रवेश करने का संकेत होता है। इस तरह का चार्ट मूल रूप से तकनीकी टूल है, क्योंकि इसमें EMA तकनीकी विश्लेषण के मुख्य सिद्धांत का मेल होता है। कागी चार्ट में ट्रेंड रिवर्सल स्तर का मूल पैरामीटर है। यह डिफ़ॉल्ट रूप से पिछले कीमत में उतार-चढ़ाव का 4% है।

लाइटफाइनेंस: कागी चार्ट

क्या शामिल किया जाना चाहिए? आइए इस तरह के कागी चार्ट के प्रमुख मापदंडों को देखें।

  1. कागी चार्ट बनाते समय, संकेत संचय के सिद्धांत का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब उलटफेर का संकेत दिखाई देता है और फिर नए ट्रेंड की पुष्टि होती है।
  2. ज्यादा सटीक संकेत पाने के लिए, कई फ़ॉरेक्स ट्रेडर पिछले कागी व्यवधान और नए कागी चार्ट की रेखा की मोटाई में बढ़ोतरी के मिले-जुले संकेत का इस्तेमाल करते हैं।
  3. इस तरह का चार्ट लंबी समयावधि में ट्रेडिंग करने के लिए बेहतर होता है।

कागी चार्ट पर ट्रेडिंग करने के लिए विस्तृत गाइड और कागी चार्ट का विवरण यहां उपलध है।

निष्कर्ष

अंत में, मैं यह बताना चाहता हूं: जिस चार्टिंग तकनीक को आप चुनते हैं, वह सीधे आपकी ट्रेडिंग रणनीति से जुड़ी होती है। अगर आप प्राइस पैटर्न पर ट्रेड करते हैं, तो कैंडलस्टिक चार्ट या एरिया चार्ट आपके लिए उपयुक्त है; अगर आप ट्रेंड में ट्रेड करते हैं, तो हेइकिन आशी या बार चार्ट बेहतर विकल्प है। अगर गणितीय तकनीकी संकेतकों के आधार पर ट्रेडर करते हैं, तो साधारण लाइन चार्ट भी काफी हो सकता है। अगर आप एक्सपर्ट एडवाइज़र और तकनीकी एनालिसिस इंडीकेटर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको यह ध्यान में रखना चाहिए कि रोबोट एक निश्चित तरह के चार्ट के लिए बनाए गए हैं। एक्सपर्ट एडवाइज़र आमतौर पर सार्वभौमिक होते हैं, लेकिन विशेष चार्टिंग तकनीक के साथ ज्यादा कुशलता से काम करते हैं। इसी तरह कई तकनीकी इंडीकेटर बार, कैंडलस्टिक आदि के लिए भी खास तौर पर बनाए गए होते हैं।

इसके अलावा, कई ट्रेडर कई प्रकार के फ़ॉरेक्स प्राइस चार्ट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि ज्यादा सटीक बाजार विश्लेषण करके बाजार के रुझान की पहचान कर सकें। अपनी फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति को ठीक से परिभाषित करें और उसी अनुसार लेख में बताए गए चार्ट में से उपयुक्त फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग चार्ट चुनें। अगर आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं, तो कमेंट सेक्शन में लिखें। मुझे सवाल का जवाब देने में खुशी होगी।


फ़ॉरेक्स चार्ट से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर चार्ट में कीमत बढ़ती है, तो करेंसी पेयर की कीमत बढ़ रही है। इसका मतलब है कि पहली करेंसी की कीमत दूसरी करेंसी (कोट करेंसी) के मुकाबले बढ़ रही है। इस स्थिति में, लॉन्ग पोजीशन(खरीद) खोलना और आगे के रुझान की निगरानी करना फायदेमंद होगा। इसके अलावा, अगर चार्ट में कीमत कम हो जाती है, तो बेस करेंसी, कोट करेंसी के मुकाबले सस्ती हो रही है, इसलिए, आपको शॉर्ट ट्रेडर (सेल) खोलने की ज़रूरत होती है। इस तरह, EUR/USD पेयर में बढ़ोतरी का मतलब होगा कि यूरो की कीमत डॉलर के मुकाबले बढ़ रही है और गिरावट का मतलब होगा कि डॉलर की कीमत यूरो के मुकाबले बढ़ रही है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग में जोखिम होता है। मार्जिन का इस्तेमाल करके फॉरेन एक्सचेंज पर ट्रेड करना संभव है। परिणामस्वरूप आपको पता होना चाहिए कि लीवरेज से अतिरिक्त जोखिम होता है, क्योंकि नुकसान प्रारंभिक निवेश की राशि से ज्यादा हो सकता है। इस तरह, फॉरेन एक्सचेंज में पैसा लगाने और ट्रेडिंग से जुड़े किसी भी अवसर की पहचान करने से पहले, स्वतंत्र वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेना और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और ट्रेडिंग से जुड़े उद्देश्यों के अनुसार अपनी ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति बनाना ज़रूरी है।

सबसे पहले, आपको वह चार्ट चुनना होगा, जिसका आप इस्तेमाल करेंगे। सभी ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर आम तौर पर तीन तरह के मूल चार्ट उपलब्ध होते हैं: लाइन चार्ट, बार चार्ट और कैंडलस्टिक चार्ट। इन तीनों का इस्तेमाल करके ट्रेडर्स को ट्रेड करने के लिए अलग-अलग तरह का डेटा मिलता है। लाइन चार्ट, समापन कीमतों के आधार पर एक बार में एक रेखा खींचता है। बार चार्ट वित्तीय साधनों के शुरुआती और समापन कीमत और उनके उच्चतम और निम्नतम कीमत को दिखाता है। कैंडलस्टिक चार्ट, बार चार्ट के काफी करीब होता है, हालांकि यह देखना आसान होता है कि अभी बाजार में तेजी या मंदी का माहौल है या नहीं। आपको सबसे अच्छा लगने वाला चार्ट तय करने के बाद, अब तकनीकी विश्लेषण का समय है। LiteFinance प्लेटफ़ॉर्म में, आप चार्ट में कई तकनीकी विश्लेषण टूल जोड़ सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि किसी एसेट को खरीदना है या बेचना है।

अपने लिए इस तरह का सबसे उपयुक्त चार्ट ढूढने के बाद, सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल बनाना सबसे अच्छा है, जिससे आपको बाज़ार की स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी। सबसे पहले आपको उस अवधि के सभी उच्चतम और निम्नतम कीमत की पहचान करनी होगी, जिस सीमा पर आप ट्रेडिंग कर रहे हैं। फिर आपको उन सभी उच्चतम और निम्नतम कीमत को जोड़ने वाली रेखाएँ जोड़नी होंगी, जिनकी आपने पहचान की है। आपके पास अब काम करने वाले सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल हैं और अब आप आगे बढ़ सकते हैं। यह ध्यान दें कि रेखाएँ लगभग कभी भी पूरी तरह से मेल नहीं खाती, इसलिए चिंता न करें - फिर भी सपोर्ट और रजिस्टेंस ज़ोन को अच्छी तरह से दिखाती है।

फ़ॉरेक्स मार्केट में करेंसी पेयर या अन्य वित्तीय साधनों के मूल्य चार्ट उस ब्रोकर की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं, जिस पर आप ट्रेडिंग करते हैं। आप MetaTrader 4 (या 5) प्लेटफ़ॉर्म के बारे में जाने में भी रुचि हो सकती है, जिसका इस्तेमाल अक्सर प्रोफेशनल ट्रेडर करते हैं। LiteFinance में प्राइस चार्ट का इस्तेमाल करना आसान होता है, क्योंकि आप एक क्लिक में चार्ट के प्रकार को बदल सकते हैं और उपयोग में आसान मेनू से सभी आवश्यक तकनीकी विश्लेषण टूल जोड़ सकते हैं। इसके अलावा, आपको अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए कई वित्तीय साधन मिलेंगे। ऐसे प्रोफेशनल ट्रेडर जिनके ट्रेडों की कॉपी की जा सकती है और कई अन्य दिलचस्प और लाभदायक विकल्प उपलब्ध हैं। यह ध्यान रखें कि फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग के जोखिमों को प्रबंधित करने के लिए, इस वित्तीय बाज़ार के बारे में खुद को शिक्षित करना, कर सलाहकार की मदद लेना, अपने ट्रेडिंग से जुड़े निर्णयों से संबंधित दायित्व स्वीकार करना और इस बाज़ार में उपलब्ध ट्रेडिंग से जुड़े अवसरों के साथ अपनी जोखिम सहनशीलता का अनुपालन करना ज़रूरी है।

फ़ॉरेक्स ग्राफ़ को समझने के 3 तरीके होते हैं:

  1. ट्रेंड लाइन बनाएं। आप इसे कैंडल्स की समापन कीमतों, कीमतों के संचय (संचय क्षेत्रों) या कैंडल शैडो के आधार पर अलग-अलग तरीकों से कर सकते हैं।
  2. ब्रेकआउट का विश्लेषण करें। ब्रेकआउट पॉइंट वह क्षेत्र होता है, जहां कैंडल तकनीकी रेखा को पार कर गई है और जहां समापन कीमत तय होती है।
  3. प्राइस क्लस्टर का विश्लेषण करें - इससे सबसे सुरक्षित स्टॉप-लॉस पोजीशन का पता चलेगा। प्राइस क्लस्टर की संकीर्ण मूल्य सीमा होती है, जिसमें निचला, ऊपरी और मध्य तीन स्तर होते हैं, इनमें हर एक में अलग-अलग जोखिम की संभावना निहित होती है।
अपने ग्राफ़ बनाकर एक साथ कई टाइम फ़्रेम का विश्लेषण करें - इससे आप भावी परिप्रेक्ष्य के साथ विस्तार से विश्लेषण कर पाएंगे और संभावित ट्रेडिंग अवसरों की पहचान कर पाएंगे।


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फ़ॉरेक्स चार्ट: नए ट्रेडर के लिए संपूर्ण गाइड

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