वित्तीय बाज़ार में, एक लैगिंग इंडिकेटर होता है, जिससे ट्रेडर्स को किसी स्टॉक को कवर करने और बंद करने के लिए आवश्यक दिनों की औसत संख्या को परिभाषित करने में मदद मिलती है। इस इंडेक्स को डेज़ टू कवर कहा जाता है और यह एक प्रभावी फ़ॉर्मूला है, जिससे किसी एसेट के तेजी और मंदी के रुझानों की जानकारी मिलती है। इस लेख में, हम डेज़ टू कवर की पूरी व्याख्या, ट्रेडर्स के उपयोग करने के तरीके, इसकी गणना प्रक्रिया और शॉर्ट-इंटरेस्ट रेशियो के साथ इसके जुड़ाव के बारे में बताएंगे।

इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:


'डेज़ टू कवर' और 'हाई शॉर्ट इंटरेस्ट रेशियो' क्या हैं?

शॉर्ट इंटरेस्ट रेशियो ट्रेडर्स के लिए यह पता लगाने का प्रभावी तरीका है कि शेयर उनके औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम के मुकाबले बहुत ज़्यादा शॉर्ट हैं या नहीं। तदनुसार, डेज़ टू कवर इंडेक्स है, जिससे शॉर्ट सेलर्स को अपनी पोजीशन कवर करने के लिए आवश्यक दिनों की औसत मात्रा को परिभाषित करने में मदद मिलती है। इस प्रकार, डेज़ टू कवर और शॉर्ट इंटरेस्ट को एक ही माना जाता है, क्योंकि वे किसी शेयर के शॉर्ट इंटरेस्ट डेटा को दिखाते हैं।

चाहे ट्रेडर्स किसी भी परिभाषा का इस्तेमाल करें, इसका मूल सिद्धांत एसेट के इंटरेस्ट रेशियो पर आधारित होता है। अगर किसी शेयर की बिक्री अधिक हो चुकी है या वह सीमित मात्रा में उपलब्ध है, तो इसे हाई इंटरेस्ट रेशियो वाला स्टॉक कहा जाता है। नतीजतन, कई निवेशक तेजी से इसकी खरीदारी करेंगे और शॉर्ट सेलर्स अपनी पोजीशन को कवर करने लगते हैं।

NYSE शॉर्ट इंटरेस्ट रेशियो क्या है

लाइटफाइनेंस: NYSE शॉर्ट इंटरेस्ट रेशियो क्या है

न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज शॉर्ट इंटरेस्ट एक तरह का शॉर्ट इंटरेस्ट डेटा है। यह न सिर्फ़ कंपनी के स्टॉक को बल्कि यू.एस. शेयरों की कुल राशि को दिखाता है। इस तरह, इसकी गणना करने का तरीका शॉर्ट इंटरेस्ट के अन्य संस्करणों से अलग है। यह फ़ॉर्मूला पिछले 30-दिन की अवधि पर आधारित है और इसकी गणना अमेरिकी स्टॉक मार्केट के कुल शेयरों को पिछले महीने के NYSE के दैनिक वॉल्यूम से विभाजित करके की जाती है। NYSE शॉर्ट इंटरेस्ट स्तर के आधार पर, इससे पूरे एक्सचेंज के बारे में ट्रेडर के मंदी या तेजी के रवैये का संकेत मिल सकता है।

उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि जून में यू.एस. स्टॉक मार्केट में 15 बिलियन शेयर बेचे गए, और उसी समय दैनिक वॉल्यूम 3 बिलियन शेयर प्रतिदिन है। इस तरह, NYSE शॉर्ट इंटरेस्ट को इन समीकरण के माध्यम से दर्शाया जाएगा:

15 बिलियन/3 बिलियन = 5

इस परिणाम से यह पता चलता है कि शॉर्ट पोजीशन वाले ट्रेडर्स को इन पोजीशन को कवर करने के लिए लगभग पांच दिन की ज़रूरत होती है।

शॉर्ट इंटरेस्ट डेटा कहां उपलब्ध होता है

शॉर्ट इंटरेस्ट डेटा के बारे में जानकारी पाने के लिए, ट्रेडर्स अलग-अलग विश्वसनीय वेबसाइटों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये ऑनलाइन स्रोत समय-अमे पर सूचना रिपोर्ट, चार्ट और शॉर्ट इंटरेस्ट टेबल अपडेट करते हैं, जिससे विशेष इक्विटी या पूरे स्टॉक मार्केट के बारे में जानकारी मिलती है। उन साइटों के कुछ उदाहरण न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) और नैस्डैक हैं।

डेज़ टू कवर रेशियो का फ़ॉर्मूला

डेज़ टू कवर एक इंडीकेटरर है, जिससे यह पता चलता है कि ट्रेडर्स को अपनी शॉर्ट पोजीशंस कवर करने के लिए औसतन कितने दिन लगते हैं, ताकि उन्हें ज्यादा नुकसान का सामना न करना पड़े। यह फ़ॉर्मूला किसी शेयर के पिछले प्रदर्शन के डेटा बिंदुओं पर आधारित है और इनकी गणना इन सरल समीकरण के मध्यम से की जाती है:

लाइटफाइनेंस: डेज़ टू कवर रेशियो का फ़ॉर्मूला

सरल शब्दों में, डेज़ टू कवर की गणना करने के लिए, डेज़ टू कवर की गणना करने के लिए ट्रेडर्स को शॉर्ट किए गए शेयरों को औसत दैनिक वॉल्यूम से विभाजित करना होता है।

डेज़ टू कवर रेशियो कैलकुलेटर

डेज़ टू कवर फॉर्मूला हाल ही में शॉर्ट किए गए शेयरों की संख्या को उसी स्टॉक में शॉर्ट किए गए शेयरों की औसत दैनिक मात्रा से विभाजित करके की गई गणना पर आधारित है। यह परिणाम पिछले महीने के डेटा बिंदुओं पर आधारित होता है। डेज़ टू कवर रेशियो जानने के लिए ट्रेडर्स का इस्तेमाल करने वाला सबसे आसान कैलकुलेटर यह है:

लाइटफाइनेंस: डेज़ टू कवर रेशियो कैलकुलेटर

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी स्टॉक का वर्तमान शॉर्ट इंटरेस्ट 5 मिलियन शेयर है और इसका औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 15 मिलियन शेयर है, तो परिणाम निम्नलिखित होगा: 5,000,000/15,000,000 = 0.33 दिन। इसके विपरीत, अगर उसी स्टॉक का औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 1,000,000 शेयर प्रतिदिन है, तो परिणाम में बड़ा बदलाव हो सकता है: 5,000,000/1,000,000 = 5 दिन।

उदाहरण

किसी स्टॉक की शॉर्ट इंटरेस्ट और डेज़ टू कवर दोनों ही सेंटीमेंट इंडिकेटर हैं। यह स्टॉक की पूरी शॉर्ट पोजीशन को दिखाता है। नीचे सकारात्मक बाजार दृष्टिकोण और नकारात्मक दृष्टिकोण वाले दो उदाहरण दिए गए हैं।

ज्यादा शॉर्ट इंटरेस्ट दिखाने वाले उदाहरण

ज्यादा शॉर्ट इंटरेस्ट दिखाने वाले लोकप्रिय उदाहरण GME शेयरों से संबधित हैं। पिछले वर्ष कंपनी के स्टॉक की कीमत लगभग 18 डॉलर थी। ज़्यादातर फंड मैनेजर ने बहुत कम कीमत पर स्टॉक उधार लिया, यह उम्मीद करते हुए कि यह और गिरेगा। हालांकि, फरवरी 2021 में निवेशकों के बड़े पैमाने पर कदम उठाने से शेयर की कीमत में तेजी आई और इसकी कीमत 500 डॉलर तक पहुंच गई। नतीजतन, शॉर्ट ट्रेड में निवेश करने वाली फर्मों को उस घटना से अरबों का नुकसान हुआ।

लाइटफाइनेंस: ज्यादा शॉर्ट इंटरेस्ट दिखाने वाले उदाहरण

कम शॉर्ट इंटरेस्ट दिखाने वाले उदाहरण

डेज़ टू कवर की गणना से निवेशकों को एसेट की मंदी या तेजी के बारे में पता चलता है। अगर ट्रेडर को उम्मीद है कि शेयर की कीमत बढ़ती रहेगी या स्थिर रहेगी, तो इससे कम शॉर्ट इंटरेस्ट का संकेत मिलता है। नीचे दिए गए चार्ट में, मार्च के मध्य के बाद की अवधि में स्टॉक की कीमत के प्रति निवेशकों की कोई निराशावादी दृष्टिकोण नहीं है। स्टॉक की कीमत उम्मीद के मुताबिक बढ़ रही है।

लाइटफाइनेंस: कम शॉर्ट इंटरेस्ट दिखाने वाले उदाहरण

डेज़ टू कवर का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग करने के तरीके

लाइटफाइनेंस: डेज़ टू कवर का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग करने के तरीके

डेज़ टू कवर इंडिकेटर ट्रेडर के लिए कई तरीके से उपयोगी टूल साबित होता है। यह किसी शेयर के संबंध में ट्रेडर की मंदी और तेजी के दृष्टिकोण का परिवर्तनीय कारक हो सकता है। इससे भावी निवेश योजनाओं और रणनीतियों को बनाने में मदद मिल सकती है। इस इंडेक्स लेवल के माध्यम से, व्यापारियों को सतर्क किया जा सकता है कि खुले बाजार में उतार-चढ़ाव और कम प्रदर्शन के कारण कंपनी बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं कमा पाएगी।

इसके अलावा, निवेशक शॉर्ट इंटरेस्ट इंडिकेटर की दिशा पर नज़र रख सकते हैं और शेयर के खरीद दबाव में संभावित आगामी बढ़ोतरी को पहचान सकते हैं। सरल शब्दों में यह कह सकते हैं कि अगर किसी शेयर के ज्यादा स्टॉक बेचे जा रहे हैं, तो शॉर्ट पोजीशन वाले निवेशक अपने ट्रेड को कवर करने और बंद करने के लिए सबसे कम संभव कीमत पर खरीदने के लिए प्रेरित होंगे। इससे स्टॉक की कीमत में तेज़ उछाल आएगा। यह तब तक बरकरार रह सकती है, जब तक डेज़ टू कवर की अवधि पूरी नहीं हो जाती।

इसके अलावा, ज्यादा डेज़ टू कवर से भावी लाभदायक निवेश का संकेत हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, ऐसा हो सकता है, अगर किसी कंपनी के पास नया प्रोडक्ट है, जिसे प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित नहीं माना जाता है। नतीजतन, शेयर की कीमत कम है और कई शॉर्ट सेलर्स इसमें खरीदारी करने के लिए आकर्षित हो सकते हैं। इससे शॉर्ट इंटरेस्ट प्रतिशत में उछाल आ सकता है और स्टॉक की कीमत में बढ़ोतरी हो सकती है। निवेशक इसे शॉर्ट स्क्वीज़ के संकेत के रूप में देखते हैं और शेयर के आगामी बढ़ोतरी से मुनाफ़ा कमाने की कोशिश करते हैं।

निष्कर्ष

डेज़ टू कवर लैगिंग इंडीकेटर है, जिससे निवेशकों को यह समझने में मदद मिलती है कि क्या किसी शेयर में शॉर्ट स्क्वीज़ का अनुभव होने की संभावना है। यह शॉर्ट सेलर्स की ओर से अपनी पोज़ीशन कवर करने के लिए आवश्यक औसत दिनों की संख्या दिखाता है। यह इंडेक्स निवेशकों के लिए मंदी या तेजी का संकेतक हो सकता है। कुछ निवेशक इस पर आधारित शॉर्ट या लॉन्ग पोज़ीशन ले सकते हैं। किसी भी मामले में, जैसे-जैसे डेज़ टू कवर बढ़ते हैं, शॉर्ट सेलर्स नुकसान से बचने की कोशिश करेंगे और सबसे कम संभव कीमत पर खरीदना शुरू करेंगे। इससे स्टॉक की कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

डेज़ टू कवर इंडीकेटर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डेज़ टू कवर की गणना का परिणाम 0.2 जैसे बहुत कम मान से लेकर 8 जैसे उच्च मान तक हो सकता है। उच्च ब्याज अनुपात होने पर इसे आशाजनक और लाभदायक संकेत माना जा सकता है। इस तरह, इस प्रकार, निवेशक 8 से 10 दिन या उससे अधिक के उच्च शॉर्ट अनुपात पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

शॉर्ट पोजीशन कवर करने के लिए कोई निर्धारित समय सीमा नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि लेंडर निवेशकों से कब शेयर वापस लेने का अनुरोध कर सकते हैं। जब तक शॉर्ट सेलर्स अपनी पोजीशन रखते हैं, उन्हें ब्याज चुकाना पड़ता है। सिर्फ़ अगर वे चुकता करने में सक्षम नहीं होते, तो लेंडर शेयर वापस करने का अनुरोध कर सकते हैं।

निवेशक उच्च शॉर्ट रेशियो को मंदी का संकेत मानते हैं। इस वजह से वे उस उच्च दर का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं और ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए निवेश करते हैं। ट्रेडर्स के लिए, 8 से 10 दिन या उससे भी ज्यादा का शॉर्ट रेशियो एक अवसर माना जाता है। ऐसे मौकों पर, यह अंतर कवर करना कठिन हो जाता है और शॉर्ट सेलर्स को मजबूरन खरीदारी करनी पड़ती है, जिससे स्टॉक की कीमत और भी ज़्यादा बढ़ जाती है।

अगर किसी स्टॉक को तेजी से बेचा जा रहा हो या बड़ी मात्रा में शॉर्ट सेलिंग हो रही हो, तो इससे पता चलता है कि स्टॉक की शॉर्ट सेलिंग की जा रही है। शॉर्ट सेलर्स ज्यादा शेयर खरीदकर अपनी पोजीशन को कवर करने की कोशिश करते हैं, जिससे कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।

डेज़ टू कवर एक लैगिंग इंडीकेटर है, जिसका इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि शॉर्ट सेलर्स को पोजीशन को कवर करने में कितने दिन लगेंगे। इसके अलावा, इससे किसी शेयर के शॉर्ट स्क्वीज़ होने की संभावना निर्धारित होती है। इससे शॉर्ट सेलर्स को अपने शेयरों को एक्सचेंज करने में परेशानी होती है। निवेशक इसका इस्तेमाल स्टॉक की मांग और कीमत बढ़ाने में करते हैं।

शॉर्ट पोजीशन को कवर करने की परिभाषा वित्तीय बाजार में तब उपयोगी होती है, जब कोई शॉर्ट सेलर पोजीशन को कवर करने की कोशिश कर रहे होते हैं। इस तरह, जब कोई ट्रेडर शॉर्ट कवर करने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो वह उन प्रतिभूतियों को वापस खरीद रहे होते हैं, जिन्हें मूल रूप से शॉर्ट पोजीशन बेचा गया था और वे उधार लिए गए उस स्टॉक को वापस कर रहे होते हैं, जिसकी उसे शॉर्ट सेलिंग शुरू करने के लिए ज़रूरत थी।

शॉर्ट इंटरेस्ट अनुपात का मतलब है कि स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे कीमतें गिरती हैं। शेयर बहुत तेज़ी से बेचे जाते हैं, जिससे संभावित शॉर्ट स्क्वीज़ होता है और स्टॉक की कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, निवेशक 8 से 10 या उससे ज्यादा के अनुपात को सकरात्मक अवसर के रूप में मानते हैं।

डेज़ टू कवर इंडिकेटर यह दिखाता है कि सभी शॉर्ट सेलर्स को अपने शेयर वापस खरीदने में कितने दिन लग सकते हैं। इसकी गणना करने के लिए, आपको औसत दैनिक वॉल्यूम को शॉर्ट की गई शेयरों की संख्या से विभाजित करना पड़ता है। यह मेट्रिक ट्रेडर्स के लिए उपयोगी है, क्योंकि इससे आपको संकेत मिल सकता है कि किसी स्टॉक को खरीदना या बेचना कितना मुश्किल हो सकता है।

शॉर्ट स्क्वीज़ तब होता है, जब शॉर्ट सेलर्स को बढ़ती मांग के कारण ऊंचे दामों पर अपने शेयर वापस खरीदने पड़ते हैं, जिससे स्टॉक की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। उच्च डेज़ टू कवर से यह संकेत मिलता है कि औसत से अधिक शॉर्ट सेलर्स हैं, जिससे मांग बढ़ने पर शॉर्ट स्क्वीज़ की संभावना होती है। इसके अलावा, कम डेज़ टू कवर से यह संकेत मिलता है कि कम संभावित विक्रेता हैं, इसलिए कम खरीदारी दबाव के साथ ही शॉर्ट स्क्वीज़ शुरू हो सकता है।

डेज़ टू कवर (days to cover in hindi): शॉर्ट इंटरेस्ट रेशियो का क्या मतलब होता है?

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