जैसा कि आप शायद जानते हैं कि इस समय चार मुख्य प्रकार के वैश्विक बाजार हैं (स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज)। बहुत समय पहले तक, वित्तीय बाजारों में ट्रेडिंग के लिए आपको हरेक एक्सचेंज पर अलग खाता खोलना पड़ता था। कानूनी कारणों से विदेशी कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग बिल्कुल भी नहीं हो सकती थी।
हालांकि, ब्रोकर की ओर से कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस की अवधारणा पेश करने के बाद, कोई भी व्यक्ति किसी भी ब्रोकर के ज़रिए सिर्फ़ CFD ट्रेडिंग अकाउंट खोलकर कहीं भी कुछ भी ट्रेड कर सकता है।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि CFD एसेट नहीं है, बल्कि यह सिर्फ़ मूल्य अंतर के लिए एक समझौता है। इस कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, आपको सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने के समय से लेकर इसे बंद करने के समय तक की कीमत में अंतर का लाभ मिल सकता है और आप एसेट के वास्तविक मालिक नहीं हैं।
इससे CFD कॉन्ट्रैक्ट, मानक फ्यूचर्स या ऑप्शन में पारंपरिक ट्रेडिंग की तुलना में ज़्यादा सुविधाजनक, किफायती और आसान हो जाता है।
इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
- CFD (कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस) क्या है?
- उदाहरण के ज़रिए समझाएं कि CFD का इस्तेमाल कैसे करते हैं
- CFD ट्रेडिंग शुरू करने का तरीका
- नए ट्रेडर के लिए CFD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति
- प्रोफेशनल के लिए CFD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति
- CFD के फ़ायदे और जोखिम
- CFD ट्रेडिंग से जुड़े प्लेटफॉर्म और टूल
- CFD से जुड़े नियम और सुझाव
- CFD ट्रेडिंग बनाम अन्य वित्तीय साधन
- निष्कर्ष
- CFD ट्रेडिंग से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
CFD (कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस) क्या है?
आइए CFD को परिभाषित करें। यहां CFD की परिभाषा दी गई है:
CFD जटिल वित्तीय साधन है, जिससे भविष्य में अंतर्निहित वित्तीय साधन की कीमत के संबंध में दो पक्षों के बीच एक तरह का लेनदेन होता है, जिसमें दोनों पक्ष शुरुआती और अंतिम ट्रेड की कीमतों के बीच के अंतर के बराबर राशि का निपटान करने के लिए सहमति जताते हैं।
CFD क्या है? आइए मैं CFD का मतलब ज़्यादा विस्तार से समझाने की कोशिश करता हूं। CFD एक "कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस" है और यह विक्रेता और खरीदार के बीच एक अनुबंध या लेनदेन है, जिसका मकसद समापन ट्रेड और शुरुआती ट्रेड की कीमतों के बीच भावी अंतर से मुनाफ़ा कमाना है।
अगर समापन कीमत, प्रारंभिक कीमत से ज़्यादा है, तो विक्रेता, क्रेता को अंतर का भुगतान करते हैं और अगर समापन कीमत, प्रारंभिक कीमत से कम है, तो क्रेता, विक्रेता को अंतर का भुगतान करते हैं।
निश्चित रूप से CFD कॉन्ट्रैक्ट एक डेरिवेटिव वित्तीय साधन है, इसलिए अंतर के अलावा, यह उस समय को भी नियंत्रित करता है, जिसके दौरान यह अंतर निर्धारित किया जाता है।
शुरू में, कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस का मुख्य कार्य स्टॉक ट्रेडिंग उपलब्ध कराना था। स्टॉक CFD सबसे लोकप्रिय हैं, इसलिए हम उदाहरण के तौर पर ट्रेडिंग में CFD पोजीशन क्या है, इस पर विचार करेंगे।
मान लीजिए कि आप बोइंग कंपनी के 100 स्टॉक कॉन्ट्रैक्ट खरीदना चाहते हैं। एक स्टॉक की कीमत 160 डॉलर है। शेयर खरीदने के लिए आपको 16,000 डॉलर की ज़रूरत होगी।
लेकिन स्टॉक CFD कॉन्ट्रैक्ट खरीदते समय, आपको अपने CFD ट्रेडिंग अकाउंट में पूरी राशि रखने की ज़रूरत नहीं होती है, आपको सिर्फ़ मार्जिन की ज़रूरत होती है। LiteFinance CFD ब्रोकर के पास स्टॉक पर 2% मार्जिन लागू होता है।
#BA (बोइंग कंपनी) स्टॉक CFD के 100 लॉट खरीदने के लिए, आपको 16,000 का सिर्फ़ 2% चाहिए। यह सिर्फ़ 320 डॉलर + मामूली एक्सचेंज कमीशन है, जिसे हम अभी नहीं लेंगे। कई दिन बाद, शेयर की कीमत बढ़कर 170 डॉलर प्रति शेयर हो गई। कीमत बढ़ गई है, जिसका मतलब है कि विक्रेता को हमें अंतर का भुगतान करना होगा। यह 170 - 160 = 10 डॉलर के बराबर होगा। अब हम 10 को कॉन्ट्रैक्ट की संख्या (100) से गुणा करते हैं और 1,000 डॉलर पाते हैं।
मुझे उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे कि "कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस" का क्या मतलब है।
अब आइए जानें कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस नहीं, बल्कि शेयर खरीदने से हमें क्या लाभ मिलेगा।
मान लें कि हमने 16,000 डॉलर में 100 शेयर खरीदे, कीमत बढ़कर 170 हो गई और हमारे शेयरों की कीमत बढ़कर 17,000 हो गई। 17,000 - 16,000 = 1,000. हमें उतना ही 1,000 का लाभ मिला, लेकिन शेयरों के संदर्भ में, हमें अकाउंट में 16,000 डॉलर रखने की ज़रूरत होगी।
CFD प्रोडक्ट की स्थिति में, हमें सिर्फ़ 320 डॉलर की ज़रूरत थी। और अगर कोई अंतर नहीं है – तो ज़्यादा भुगतान क्यों करें? यही वजह है कि CFD ट्रेडिंग वास्तविक एसेट की ट्रेडिंग की तुलना में ज़्यादा लाभकारी माना जाता है।
संक्षेप में, यह स्पष्ट है कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस के ज़रिए, हम उन लेनदेन को कर सकते हैं, जो पहले किसी भी एक्सचेंज पर हमारे लिए उपलब्ध नहीं थे। हमें ज़्यादा मुनाफा कमाने के लिए अपने CFD ट्रेडिंग अकाउंट में बहुत ज़्यादा पैसा रखने की ज़रूरत नहीं है।
मेरे उदाहरण में, हमने सिर्फ़ 320 डॉलर का निवेश कर 1,000 डॉलर का मुनाफ़ा कमाया और यह निवेश पर 300% से ज़्यादा का रिटर्न है। निवेश पर इतना उच्च रिटर्न पाना अत्यंत कठिन या लगभग असंभव होता है।
CFD ट्रेडिंग क्या है
यह समझने के लिए कि CFD अंतर्निहित बाजार क्या है, यह दुनिया में इतना लोकप्रिय क्यों है और CFD ट्रेडर कैसे बनें, आइए इस पर एक नज़र डालें।
पहले कॉन्ट्रैक्ट पिछली सदी के मध्य 90 के दशक में लंदन में अस्तित्व में आए। उन दिनों, फ़ॉरेक्स ग्लोबल मार्केट अभी भी काफी नया था और इसका एकमात्र उद्देश्य करेंसी एक्सचेंज करना था: इस पर सिर्फ़ करेंसी की ट्रेडिंग की जाती थी।
स्टॉक एक्सचेंज, ट्रेडिंग के लिए मुख्य केंद्र था, जहां स्टॉक एक्सचेंज में, वास्तविक एसेट (स्टॉक और बांड) और वित्तीय अनुबंध (डेरिवेटिव) दोनों ही निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे।
शेयर बाजार मुख्य वित्तीय बाजारों में से एक था और उस समय के अनुभवी ट्रेडर के लिए कोई विकल्प नहीं था, इसलिए सरकार ने अपने विवेक के अनुसार नियम और विनियमन लागू करके वित्तीय बाजारों पर नियंत्रण किया। एक्सचेंज कानून लगभग हर साल बदलता था, और मुख्य प्रतिबंध लीवरेज के उपयोग से जुड़े थे।
बेशक, अब हम सभी लीवरेज ट्रेडिंग का इस्तेमाल करने के आदी हो चुके हैं और इसे अपनी इच्छानुसार 1:1 से 1:1000 तक बदल सकते हैं। उस समय कुछ ही वित्तीय दिग्गज 1:5 लीवरेज का इस्तेमाल कर सकते थे।
दूसरा प्रमुख कर स्टाम्प ड्यूटी था। इस कर के तहत रियल एस्टेट, ज़मीन और शेयर, बॉन्ड और अन्य निवेश साधनों की खरीद पर ज़्यादा कमीशन लिया जाता था।
दो विशिष्ट कारण युवा वित्त पेशेवरों को अपने क्षेत्र में मौजूदा नियमों या प्रतिबंधों से बचने के तरीके खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।
और इस तरह नई डेरिवेटिव्स कंपनी स्मिथ न्यू कोर्ट ने एक समाधान खोज निकाला। “क्यों शेयर खरीदें, उन्हें रजिस्टर करें, ज़्यादा कमीशन और कर अदा करें, जबकि हमें कंपनी में रुचि नहीं है, बल्कि इसके शेयरों के खरीदने और बेचने की कीमतों में बदलाव में रुचि है?”
और वित्तीय सेवा कंपनी ने अपने ग्राहकों को यह सुझाव दिया कि वे खुद शेयरों की ट्रेडिंग न करें, बल्कि इस शेयर के वर्तमान बाजार मूल्य में कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफ़रेंस खरीदें और बेचें। इन कॉन्ट्रैक्ट को जारी करने वाली कंपनी वित्तीय सेवा कंपनी ही थी, इसलिए उन्हें अपने ग्राहक की इच्छानुसार किसी भी लीवरेज के साथ उन्हें बेचने का अधिकार था।
पहले, सिर्फ़ शीघ्र मुनाफ़ा चाहने वाले ट्रेडर ही नये वित्तीय साधनों में रुचि रखते थे, लेकिन बाद में बड़े निवेशकों ने भी शेयरों के साथ CFD की ट्रेडिंग करने पर गंभीरता से विचार किया। इससे उन्हें ज़्यादा कर का भुगतान करने से बचने में मदद मिली, क्योंकि अंतर्निहित एसेट का कोई वास्तविक स्वामित्व नहीं था।
90 के दशक के अंत में, तकनीकी कंपनियों में उछाल आया और कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफ़रेंस में काफी बदलाव हुआ। जेरार्ड और इंटरकमोडिटीज पहली वित्तीय सेवा कंपनी बन गई, जिसने अपने ग्राहकों को विशेष GNI टच प्लेटफ़ॉर्म पर इंटरनेट के माध्यम से स्टॉक CFD ट्रेडिंग की पेशकश की। इस तरह आधुनिक फ़ॉरेक्स बाज़ार का पहला प्रोटोटाइप सामने आया।
समय के साथ, अन्य वित्तीय कंपनियों और CFD प्रदाताओं ने विश्वभर में ऑनलाइन CFD शेयरों की ट्रेडिंग करने की सुविधा उपलब्ध कराई।
वास्तव में, उस समय के कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस ब्रोकर्स ने अपना अंतर्निहित बाजार बनाया था। यह साधारण निजी CFD ट्रेडर के लिए बहुत आसान था और इस पर काम करने के लिए आपको प्रोफेशनल होने की ज़रूरत नहीं थी।
CFD के उतार-चढ़ाव वाले बाजारों से किसी को भी वास्तविक एसेट के बिना मूल्य अंतर पर पैसे कमा सकते हैं। क्योंकि आपको प्रतिभूति खरीदने के लिए अपने अनुरोध के लिए एक्सचेंज और CFD ब्रोकर से लेकर क्लियरिंग हाउस और डिपॉजिटरी तक सभी चरणों से गुजरने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है, इससे आपका समय भी बचता है।
CFD एक डेरिवेटिव वित्तीय साधन है, जिसका मतलब है कि यह हमेशा किसी अंतर्निहित एसेट पर आधारित होता है।
पहले CFD एसेट स्टॉक पर आधारित थी और अब लगभग हर चीज के लिए कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस ट्रेडिंग मौजूद है, जिसे बेचा जा सकता है।
हाल ही में, उतार-चढ़ाव से संबंधित एक वित्तीय समझौता (CFD डील) आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका में दर्ज किया गया था। दो व्यक्तियों ने इस असामान्य तरीके से अपनी शर्त लगाई, और हारने वाले को विजेता को अनुबंध समाप्त होने के समय से इसमें अंतर का भुगतान करना पड़ा।
CFD ट्रेडिंग में पारंपरिक ट्रेडिंग की तुलना में बहुत सारे फायदे हैं। इनमें व्यावहारिक रूप से असीमित लीवरेज, तत्काल लेनदेन और कम CFD मार्जिन शामिल हैं। और अंत में, आप शॉर्ट पोजीशन के साथ CFD की ट्रेडिंग कर सकते हैं, जबकि गैर-मार्जिन स्टॉक शॉर्ट करना संभव नहीं है, आप सिर्फ़ खरीद सकते हैं। हालांकि, यह न भूलें कि लीवरेज्ड ट्रेडिंग में उच्च जोखिम शामिल है और CFD ट्रेडिंग करते समय आपके निवेशक को पैसे गंवाने पड़ सकते हैं।
उदाहरण के ज़रिए समझाएं कि CFD का इस्तेमाल कैसे करते हैं
अब आइए जानें कि CFD की ट्रेडिंग कैसे करें। बेहतर होगा कि हम वास्तविक उदाहरण का इस्तेमाल करें।
उदाहरण के तौर पर, हमने टेस्ला स्टॉक (#TSLA) CFD खरीदने का फैसला किया। मेरी राय में, अब इस विशेष कंपनी के शेयर के लिए कॉन्ट्रैक्ट खरीदने का सही समय है। हाल ही में उनमें काफी गिरावट आई थी, और मुख्य रणनीतियों में से किसी एक के अनुसार, अब खरीदना तर्कसंगत है, जिसके बारे में मैं नीचे और ज़्यादा विस्तार से बताऊंगा।
कुछ भी खरीदने या बेचने से पहले, आपको इसके लाभ और हानि का आकलन करना चाहिए। लाभ में संभावित मुनाफा होता है, और हानियों में अधिक जोखिम, कमीशन और स्प्रेड की राशि शामिल हो सकती है।
लाभ की बात तो समझ में आ गई, इसलिए आइए पैसे हानि के उच्च जोखिम पर ज़्यादा विस्तार से चर्चा करें। इन मापदंडों की गणना करने का सबसे तेज़ तरीका ट्रेडर कैलकुलेटर है। आप इसका इस्तेमाल यहां कर सकते हैं:
पहला चरण अपने ट्रेडिंग CFD अकाउंट के पैरामीटर को दर्ज करना है: अकाउंट टाइप, अकाउंट करेंसी और अकाउंट लीवरेज। मैंने अपने ट्रेडिंग CFD अकाउंट के पैरामीटर दर्ज कर लिए हैं;
अब हम अपने फ्यूचर ट्रेड की सेटिंग पर चर्चा करते हैं। ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट का प्रकार चुनें, इस स्थिति में यह “NASDAQ कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस” है;
इसके बाद, अंतर्निहित एसेट चुनें। जैसा कि हमने पहले ही तय कर लिया है कि यह टेस्ला स्टॉक है, टिकर #TSLA है;
इसके बाद, अनुमानित ट्रेड वॉल्यूम दर्ज करें या हम कितने CFD खरीदना चाहते हैं। यहां आपको यह जानना होगा कि एक लॉट में कितने कॉन्ट्रैक्ट होते हैं। स्टॉक पर CFD के लिए, यह लगभग हमेशा 1 CDF = 1 लॉट होता है। मैंने 100 लॉट खरीदने का फैसला किया है;
ट्रेड का प्रकार सेट करें। हमारे मामले में, यह बाय या “लॉन्ग” ट्रेड है;
अब हम वह कीमत सेट करते हैं, जिस पर हम खरीदारी करना चाहते हैं। मैं मौजूदा बाज़ार मूल्य पर खरीदारी करना चाहता हूं, इसलिए ऑर्डर अपने-आप निष्पादित हो जाएगा;
और अब हम वह कीमत सेट करते हैं, जिसकी हमें उम्मीद है। मुझे प्रति शेयर 460 डॉलर के आसपास संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद है
पैरामीटर दर्ज करने के बाद, हम “कैल्क्यूलेट” बटन दबाते हैं और नीचे हमारे भावी ट्रेड के सभी पैरामीटर दिखाई देने लगते हैं;
सबसे पहले, आइए किसी एक बिंदु की कीमत पर ध्यान दें। हमारे वॉल्यूम पर, इसकी कीमत 1 डॉलर होगी;
इसके बाद, आप मार्जिन देख सकते हैं। यह वह राशि है, जिसे हमें 100 कॉन्ट्रैक्ट की खरीदारी करने के लिए अपने CFD अकाउंट में रखना होगा। जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि हमें शेयर के पूरी कीमत की ज़रूरत नहीं होती है, बल्कि कुल राशि का सिर्फ़ 3% हिस्सा चाहिए, जिसकी गणना इस प्रकार की जाती है:
अगला स्प्रेड है, जिसका भुगतान हमें अपने वॉल्यूम के लिए ट्रेड खोलते समय करना होगा। जैसा कि आप शायद जानते हैं कि स्प्रेड खरीद और बिक्री की कीमतों के बीच का अंतर है और यह इस तरह दिखता है:
अगला रात भर किसी पोजीशन को बनाए रखने के लिए लिया जाने वाला स्वैप शुल्क है।
और आखिरी में, कैलकुलेटर हमें ट्रेड के लिए दर्ज़ मानकों के आधार पर संभावित लाभ को दिखाता है।
एक अन्य प्रकार का शुल्क भी है – कमीशन।
जैसा कि आप पहले से ही जानते हैं कि CFD ट्रेडिंग मार्केट में ज़्यादातर ब्रोकर के पास क्लासिक और ECN जैसे 2 तरह के रिटेल इन्वेस्टर अकाउंट होते हैं। बेशक, मुफ़्त डेमो अकाउंट भी है, जहां आप CFD ट्रेडिंग का अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से अलग विषय है। संक्षेप में, इन रिटेल इन्वेस्टर अकाउंट के बीच मुख्य अंतर फीस का प्रकार और मात्रा है, जैसे स्प्रेड, स्वैप और कमीशन।
क्लासिक अकाउंट पर स्प्रेड ECN रिटेल इनवेस्टर की तुलना में ज़्यादा होता है, क्योंकि इसमें दो घटक होते हैं – एक्सचेंज स्प्रेड और ब्रोकरेज स्प्रेड।
यह मार्केट फ्री ट्रेड ज़ोन है और हर कोई पैसा कमाना चाहता है, चाहे एक्सचेंज और CFD प्रोवाइडर हों। ECN अकाउंट में ब्रोकर के मार्कअप के बिना तथाकथित “रॉ” मार्केट स्प्रेड का इस्तेमाल किया जाता है। यह कम समय अंतराल पर काम करने वाले CFD ट्रेडर के लिए बेहद आकर्षक होता है।
लेकिन, यह ब्रोकर के लिए फायदेमंद नहीं है, इसलिए वे इन रिटेल इनवेस्टर अकाउंट पर कमीशन लेते हैं। यह हमेशा निश्चित राशि होती है। यह कमीशन अलग-अलग तरह के वित्तीय साधनों के लिए अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, स्टॉक के साथ CFD ट्रेडिंग करने के लिए यह 25 सेंट प्रति लॉट है।
अब आसान तरीका जानें:
उपरोक्त स्क्रीनशॉट दिखाता है कि मैंने Google स्टॉक और General Electric के लिए दो अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) बेचे हैं।
ध्यान दें कि इन कंपनियों के शेयर की बिक्री की कीमतें कितनी अलग हैं। लेकिन सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि दोनों स्थिति में कमीशन 25 सेंट है। हालांकि, Google स्टॉक के लिए, यह कमीशन, स्टॉक मूल्य का सिर्फ़ 0.017% है, जो बहुत कम है। लेकिन General Electric के लिए, यह कमीशन 4.09% है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि ऐसी परिस्थितियों में ज़्यादा महंगे शेयर की ट्रेडिंग करना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है। साथ ही, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ECN रिटेल इनवेस्टर अकाउंट बनाने का मुख्य उद्देश्य CFD ट्रेडिंग करना है।
ट्रेडिंग शुरू करने से पहले, आइए समझते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) के माध्यम से मुनाफ़ा कैसे कमाया जाता है।
CFD ट्रेडिंग में, हम शुरुआती कीमत और समापन ट्रेड की पोजीशन के बीच के अंतर से मुनाफ़ा कमाते हैं।
आइए सबसे पहले जानें कि CFD की खरीदारी करने पर क्या होता है।
उपरोक्त स्क्रीनशॉट NASDAQ CFD खरीदने के लिए ट्रेड दिखाता है।
अंतर्निहित एसेट की खरीद और बिक्री मूल्य और कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) की खरीद और बिक्री मूल्य समान हैं, इसलिए लाभ और हानि की गणना सामान्य तरीके से की जाएगी। कीमत खरीद मूल्य से ऊपर होने पर, आपको मुनाफा होगा, लेकिन नीचे होने पर आपको हानि होगी।। आप किसी भी समय CFD बंद कर सकते हैं।
जब आप शॉर्ट सेलिंग CFD चुनते हैं, तो यह मूलतः वही है। अब आपको तब मुनाफा होता है, जब अंतर्निहित एसेट की बिक्री या खरीद मूल्य उस बिक्री या खरीद मूल्य से कम होता है, जिस पर ट्रेडिंग शुरू की गई थी।
CFD ट्रेड की अवधि अन्य महत्वपूर्ण पहलू है और यहां मैं इसकी तुलना वित्तीय साधन – फ्यूचर्स और ऑप्शन के साथ करूंगा।
जैसा कि आप शायद जानते हैं, डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग करते समय लाभ को प्रभावित करने वाले मुख्य मापदंडों में से एक ट्रेड की अवधि है।
उपरोक्त चित्र में, मैंने एक वर्ष के अंतराल पर CFD की तुलना फ्यूचर्स ऑप्शन और ऑप्शन से की है।
जैसा कि आप देख सकते हैं, आपको हर तिमाही फ्यूचर्स और ऑप्शंस दोनों को समाप्त करना होगा, ताकि कीमत में कमी न हो। आप एक साल के लिए फ्यूचर्स खरीद सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत आपको बाजार के मुकाबले बहुत ज़्यादा चुकानी पड़ेगी।
ऑप्शन भी फ्यूचर्स की तरह ही है। लेकिन कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) एक अनिश्चित साधन है, क्योंकि अंतर्निहित एसेट की कोई निर्दिष्ट समाप्ति तिथि नहीं होती है। आप अपने ट्रेडिंग को जब तक चाहें, तब तक खुला रख सकते हैं।
आइए अब ट्रेड पर नजर डालें।
स्पष्टता के लिए, मैंने एक ही समय में दो अलग-अलग ECN और क्लासिक रिटेल इनवेस्टर अकाउंट पर ट्रेडिंग की, ताकि आप ट्रेडिंग की स्थितियों के बीच ठोस अंतर को समझ सके।
ट्रेडिंग की स्थितियों को “इंस्ट्रूमेंट के बारे में जानकारी” टैब में देखा जा सकता है।
- पहला और सबसे महत्वपूर्ण अंतर खरीद और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर या स्प्रेड है। ECN अकाउंट में ब्रोकर के मार्कअप के बिना रॉ मार्केट स्प्रेड का इस्तेमाल किया जाता है और यह उपरोक्त स्क्रीनशॉट में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है: ECN अकाउंट पर स्प्रेड 75 अंक है, जबकि क्लासिक पर यह 94 अंक है।
- दूसरा अंतर इंस्ट्रूमेंट में निर्मित लीवरेज की मात्रा है, जिसके बारे में हम बाद में बात करेंगे। ECN अकाउंट पर लीवरेज 1:50 है, और क्लासिक अकाउंट पर यह 1:33 है।
- तीसरा अंतर मार्जिन प्रतिशत है। यह CFD ट्रेडिंग के लिए आवश्यक मार्जिन निर्धारित करता है। ECN अकाउंट पर, यह अंतर्निहित एसेट की कुल कीमत का 2% है और क्लासिक अकाउंट पर, यह मार्जिन 3% है, जिसके लिए ट्रेडिंग अकाउंट पर ज़्यादा राशि की ज़रूरत होती है।
आइए अब ट्रेडिंग करते हैं।
मैं दो अलग-अलग अकाउंट पर CFD ट्रेड शुरू करूंगा।
- सबसे पहले हम ट्रेडिंग का प्रकार चुनते हैं: हमने पहले ही खरीदने का फैसला कर लिया है।
- अगला चरण लॉट में आवश्यक वॉल्यूम सेट करना है। इन शेयर के लिए 1 लॉट एक शेयर के बराबर होता है। हम 100 लॉट खरीद रहे हैं। “खरीदें” पर क्लिक करें।
- ट्रेड खुलने के बाद, अकाउंट के बीच पैरामीटर की तुलना करें। ऐसा करने के लिए, ट्रेड के स्टेटस बार पर क्लिक करें। यहां आप पहला अंतर देख सकते हैं – मार्जिन। जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि अकाउंट पर मार्जिन ट्रेडिंग प्रतिशत अलग-अलग होता है और 1% के इस अंतर की वजह से हमें मार्जिन में 400 डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हुआ। ECN अकाउंट पर यह मार्जिन कम है और 845.18 USD है और क्लासिक अकाउंट पर मार्जिन राशि 1,271.19 USD है।
- पैरामीटर विंडो खोलने के लिए, आपको "बंद करें" बटन के दाईं ओर मौजूद तीन बिंदुओं पर क्लिक करना होगा। ध्यान रखें, वरना आपका पोजीशन गलती से बंद हो जाएगा।
- अकाउंट के बीच एक और महत्वपूर्ण अंतर कमीशन है। जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि यह प्रति शेयर 25 सेंट है। हमने 100 शेयर (कॉन्ट्रैक्ट) खरीदे हैं, जिसका मतलब है कि कमीशन 100 गुना ज़्यादा, यानी 25.00 USD होगा। क्लासिक अकाउंट पर कोई कमीशन नहीं है और हमने 25 बचाए, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। अगर आपको याद हो, तो क्लासिक अकाउंट में ज़्यादा स्प्रेड होता है, जिससे आमतौर पर इस कमीशन की भरपाई होती है।
- परिणामस्वरूप, हमारा वर्तमान लाभ कीमत और कमीशन के अंतर के अनुसार जोड़ा जाएगा। लाभ का सूत्र इस प्रकार होगा:
दूसरे शब्दों में, मैंने टेस्ला स्टॉक के 100 कॉन्ट्रैक्ट खरीदे। एक पॉइंट का खरीद मूल्य 1 डॉलर है। अगर मैंने 400 में खरीदा और 410 पर बंद किया, तो मुझे इतने का मुनाफ़ा होगा: 100 * 1 * (410-400) = 1,000 डॉलर।
कुछ समय बाद, मैंने अपने CFD ट्रेड बंद कर दिए और दोनों अकाउंट पर लाभ लगभग समान था।
जैसा कि मैंने बताया है, क्लासिक पर उच्च स्प्रेड की भरपाई ECN पर कमीशन से की गई थी और एकमात्र अंतर यह था कि ECN पर मार्जिन कम था।
CFD मार्केट
जैसा कि मैंने कई बार बताया है कि कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफ़रेंस का दायरा बहुत बड़ा है।
फिलहाल, 4 मुख्य प्रकार के एक्सचेंज होते हैं (स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी)। इन एक्सचेंजों पर लगभग सभी प्रकार के इंस्ट्रूमेंट के लिए CFD ट्रेडिंग मौजूद है।
CFD की ट्रेडिंग करने का सबसे लोकप्रिय तरीका अभी भी सबसे लोकप्रिय कंपनियों के शेयरों पर आधारित है, जिन्हें "ब्लू चिप्स" कहा जाता है।
क्यों? आइए जानें कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) कैसे बनाए गए थे।
सबसे पहले, यह उन निवेशकों के लिए है, जो कानून के आधार पर विदेशी कंपनियों के शेयर नहीं खरीद सकते।
दूसरे स्थान पर तेल, सोना, कॉफी, चाय, गैस और कई अन्य कमोडिटीज के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं।
तीसरा सबसे लोकप्रिय विकल्प स्टॉक इंडेक्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट है।
इस सूची में नीचे करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी के लिए CFD शामिल है।
मैंने एक्सचेंज के प्रकार के अनुसार सबसे लोकप्रिय कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) की तालिका तैयार की है।
वैसे, मेरे CFD प्रोवाइडर LiteFinance सभी सूचीबद्ध ट्रेडिंग टूल उपलब्ध कराते हैं। ये CFD फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग से जुड़ी सेवाएं मुहैया कराने वाले पहले फ़ॉरेक्स ब्रोकर हैं।
CFD ट्रेडिंग शुरू करने का तरीका
अब आइए जानें कि CFD की ट्रेडिंग कैसे करें। हालांकि, इस अंतर्निहित बाज़ार में प्रवेश करने से पहले, यह जानना ज़रूरी है कि CFD ट्रेडिंग में जोखिम शामिल है और अगर आपको इस वित्तीय साधन की स्पष्ट समझ नहीं है, तो आपको तेज़ी से वित्तीय हानि हो सकती है।
पहला कदम एक रणनीति तैयार करना है। यह काल्पनिक हो सकता है या चरण-दर-चरण निर्देशों के रूप में काफी वास्तविक हो सकता है। मैं नए निवेशकों को कागज पर योजना तैयार करने का सुझाव देता हूं।
क्या आप तैयार हैं? तो आइए शुरू करते हैं:
1. सबसे पहले, आपको किसी फॉरेक्स ब्रोकर के ज़रिए खाता खोलवाना होगा
फॉरेक्स ही क्यों? क्योंकि फॉरेक्स ब्रोकर्स के पास कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफ़रेंस की सबसे व्यापक रेंज होती है। यह स्टॉक ब्रोकर्स और निवेश बैंकों की ओर से दी जाने वाली रेंज से कहीं ज़्यादा व्यापक होती है।
मैंने आपके लिए अपने निर्देशों के अनुसार LiteFinance पर्सनल अकाउंट पर काम किया है, जिसका इस्तेमाल में कई सालों से कर रहा हूं।
मैंने इस प्रोवाइडर के ज़रिए CFD की ट्रेडिंग करना क्यों चुना? क्योंकि मैं कई वर्षों से इनकी सेवाओं से संतुष्ट हूं।
हालांकि, मैं तुरंत असली पैसे से ट्रेडिंग शुरू करने का सुझाव नहीं देता। इस बाजार में शुरुआत करने के लिए और CFD ट्रेडिंग करते समय अपने निवेशक खातों को वित्तीय हानि से बचाने के लिए, वर्चुअल मनी से शुरुआत करना सबसे अच्छा होगा, यानी एक मुफ़्त डेमो अकाउंट बनाएं।
2. मुफ़्त डेमो अकाउंट बनाने के बाद, आपको पर्सनल अकाउंट का एक्सेस मिलता है। बाईं ओर मुख्य वर्टिकल पैनल होता है, जहां आप मेनू का पहला आइटम “ट्रेड” चुनकर उस पर क्लिक करते हैं।
3. ट्रेडिंग पेज खुल जाएगा, और स्क्रीन के नीचे आप एक ग्रे हाइलाइटेड हॉरिजॉन्टल बार देख सकते हैं, जिसमें चार कॉलम में शून्य राशि (0.00 USD) दिखती है। यह ट्रेडिंग टर्मिनल पैनल है, जहां आप अपने ट्रेडिंग अकाउंट में मौजूद फंड का रिकॉर्ड देख सकते हैं। अकाउंट में शून्य शेष राशि दिखाई देती है, क्योंकि डेमो अकाउंट में कोई धनराशि नहीं है।
4. सबसे पहले आपको अपने अकाउंट में पैसे जमा करना होगा। ऐसा करने के लिए, नीले "जमा करें" बटन पर क्लिक करें।
5. फिर पेज के बीच में एक विंडो दिखेगा, जिसमें दो भाग होंगे। सबसे पहले, हमें वास्तविक खाता खोलने के लिए कहा जाएगा। दूसरे में दो फ़ील्ड होते हैं; ऊपरी फ़ील्ड में आवश्यक जमा राशि दर्ज करें। शुरुआत करने के लिए, 10,000 वर्चुअल डॉलर काफी है।
6. अब "जारी रखें" बटन दबाएं।
7. कुछ सेकंड के बाद, आपका बैलेंस 0.00 नहीं, बल्कि 10,000 USD हो जाएगा।
8. अब टेस्टिंग शुरू करने का समय आ गया है। ऐसा करने के लिए, मुख्य पैनल पर "ट्रेड" टैब पर क्लिक करें।
9. ऊपर एक मेनू दिखाई देगा, जहां सभी पारंपरिक ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट को समूहों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। हम CFD ट्रेड खोलने जा रहे हैं, इसलिए हम मुख्य रूप से शेयर में रुचि रखते हैं, जिसका मतलब है कि हम पैनल में "शेयर" टैब चुनेंगे।
10. सभी शेयर की सूची खुलेगी, जिसके लिए ब्रोकर कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) उपलब्ध कराते हैं। इस लेख में पहले, हमने टेस्ला स्टॉक CFD के बारे में बताया था। हम उन्हें दूसरों की तुलना में थोड़ा बेहतर समझते हैं, इसलिए आइए उन पर CFD ट्रेडिंग का अभ्यास करें। शेयर के नाम या लोगो पर क्लिक करें।
11. क्लिक करने के बाद, इन शेयर की ट्रेडिंग के लिए एक विंडो खुलेगी। स्क्रीन के बीच में स्टॉक प्राइस चार्ट होगा। अगर आप पहले से ही तकनीकी विश्लेषण से जुड़ी मूल बातें जानते हैं, तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
12. पैस बिहेवियर का विश्लेषण करने के बाद, मैंने तय किया कि मैं लंबे समय के लिए खरीदारी करूंगा। इसलिए हम ट्रेड प्रकार फ़ील्ड में दाईं ओर मौजूद "खरीदें" टैब पर स्विच करते हैं।
13. नीचे दी गई लाइन में आपको वांछित खरीद वॉल्यूम दर्ज करना होगा। न्यूनतम वॉल्यूम 1 लॉट या एक शेयर है। लेकिन हमारे पास 10,000 USD है, इसलिए एक शेयर खरीदने का कोई मतलब नहीं है। मैंने 100 शेयर या 100 टेस्ला CFD खरीदने का फैसला किया।
14. सभी डेटा की जांच करने के बाद, हमें सिर्फ़ “खरीदें” पर क्लिक करना होगा और हमारा अनुरोध ब्रोकर के पास चला जाएगा और CFD ट्रेड खुल जाएगा।
15. कुछ ही मिनटों के बाद, मुझे अपने काम का नतीजा दिख गया। टर्मिनल के निचले फ़ील्ड में कीमत बदलने लगी और कीमत वास्तव में बढ़ गई, जिससे मुझे 173 डॉलर का मुनाफ़ा हुआ। स्पष्टता के लिए, मुनाफ़े को हरे रंग और नुकसान को लाल रंग में दिखाया गया है।
16. टर्मिनल फ़ील्ड में हमारे बैलेंस की स्थिति बदल गई है। अब यह 10,000 नहीं, बल्कि 10,148 है।
अब सवाल यह है कि मुझे 173 डॉलर का मुनाफ़ा क्यों हुआ, जबकि हमारे अकाउंट पर शुद्ध आय 148 डॉलर है? इसका जवाब आसान है – कमीशन। ब्रोकर ने ट्रेड खुलने पर कमीशन लिया था, और यह मुनाफ़े से अपने आप कट जाता है। जैसा कि आपको पता होगा, यह प्रति अनुबंध 25 सेंट है या हमारे संदर्भ में, 25 डॉलर है, क्योंकि हमारे पास 100 कॉन्ट्रैक्ट हैं। 173 - 25 = 148।
17. शुरुआत करने के लिए, 173 डॉलर का लाभ काफी है, इसलिए हम अपना ट्रेड बंद कर सकते हैं।
ऐसा करने के लिए, उस फ़ील्ड पर क्लिक करें, जहां बैलेंस बदल रहा है और थोड़ी उंचाई पर एक टैब खुलेगा जिसमें हमारे ट्रेड या ट्रेड्स होंगे। हमें सही टैब मिल जाएगा और दाईं ओर एक “बंद करें” बटन होगा। इस पर क्लिक करने पर हमारा ट्रेड बंद हो जाएगा।
18. डेमो अकाउंट पर पैसा कमाना निस्संदेह फायदेमंद है, लेकिन सफलता की संतुष्टि के अलावा, कोई वास्तविक परिणाम नहीं मिलता।
अगर आप गंभीरता से लाभ कमाने के साथ CFD की ट्रेडिंग करना सीखने का फैसला लेते हैं, तो आपको वास्तविक पैसा कमाना शुरू करना होगा और इसके लिए आपको लाइव अकाउंट की ज़रूरत होगी।
सबसे पहले, आइए अपने पर्सनल अकाउंट को लाइव CFD ट्रेडिंग पर स्विच करें। ऐसा करने के लिए, अपने पर्सनल अकाउंट के ऊपरी दाएं कोने में मौजूद अपने प्रोफ़ाइल आइकन पर क्लिक करें।
19. छोटा सा सेटिंग टैब खुलेगा, जहां आपको "लाइव ट्रेडिंग चालू करें" बटन पर क्लिक करना होगा।
20. इस बटन पर क्लिक करने के बाद, आपके पर्सनल अकाउंट की स्थिति "लाइव अकाउंट" में बदल जाती है। हम ट्रेडिंग से जुड़ी गतिविधियों को गंभीरता से ले रहे हैं।
21. सबसे पहले, हमें लाइव अकाउंट में पैसा जमा करना होगा। ऐसा करने के लिए, मुख्य पैनल में मौजूद "वित्त" टैब चुनें।
22. खुलने वाली विंडो में, शीर्ष मेनू में, "जमाराशि" विकल्प को चुनें।
23.बैंक कार्ड से लेकर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम तक जमाराशि विकल्पों वाली विंडो खुलेगी। आप अपने लिए सबसे आसान तरीका चुन सकते हैं।
24. जमा करने की विधि चुनने के बाद, आपको राशि जमा करने का अनुरोध करना होगा।
पहला फ़ील्ड जमा राशि का होगा।
हर किसी की स्थिति अलग होती है, लेकिन मैं आपको एक सुझाव दूंगा। मैं 10 से ज़्यादा वर्षों से अलग-अलग वित्तीय बाजारों में काम कर रहा हूं और इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि जमा राशि सिर्फ़ आपकी ओर से निर्धारित लक्ष्यों पर निर्भर करती है।
"सभी लक्ष्यों को 3 श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: इस्तेमाल करना, ट्रेडिंग करना, और कमाना। 'ट्रेडिंग' करना बिल्कुल मजाक नहीं है। जब हमने लाइव ट्रेडिंग मोड में स्विच किया, तो मजाक खत्म हो गया। क्योंकि हमारे अपने पैसे शेयर में लगे हैं और हम उन्हें गंवाना नहीं चाहते।"
इस्तेमाल करना। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो अभी वित्तीय बाजारों में नए हैं।
अगर ऐसा है, तो आपको CFD की ट्रेडिंग करना सीखना चाहिए, अपनी पहली पूंजी कमाने का प्रयास करना चाहिए, और समझना चाहिए कि सब कुछ कैसे काम करता है। चुने गए स्टॉक की कीमत का दोगुना होना काफी होगा।
कीमत दुगुनी क्यों होती है? ताकि एक या कई असफल CFD ट्रेड से आपकी जमा राशि को बहुत ज़्यादा नुकसान न हो। हमारे टेस्ला स्टॉक के संदर्भ में, जहां एक शेयर की कीमत लगभग 400 डॉलर है, 1,000 डॉलर काफी है।
ट्रेडिंग करना। यह विकल्प वित्तीय बाजारों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयुक्त है, लेकिन लेकिन वे ट्रेडिंग की जटिलताएं समझने या सीखने में रुचि नहीं रखते। वे सिर्फ़ निश्चित राशि के लिए एक निश्चित शेयर खरीदना चाहते हैं और 100, 200, 300 या उससे भी ज़्यादा प्रतिशत का मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं।
क्या आपको लगता है कि यह अवास्तविक है? ऐसा नहीं है, लेकिन ऐसे ट्रेड 99% भाग्य पर निर्भर होते हैं, और इसीलिए इस श्रेणी को "प्लेइंग" कहा जाता है। हालांकि, इसके कई सफल उदाहरण हैं।
उदाहरण के लिए, आइए 2 सप्ताह पीछे चलते हैं और टेस्ला कंपनी की CFD बेचते हैं, जिसकी कीमत तब 2,200 डॉलर प्रति स्टॉक थी। 100 से ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट 1,000 डॉलर में बेचे जा सकते थे और सिर्फ़ एक दिन में उन्होंने 180,000 डॉलर का मुनाफ़ा कमाया।
यह बहुत ही वास्तविक कहानी है, सिर्फ़ कुछ ही भाग्यशाली लोग थे, क्योंकि इस तरह की गिरावट की संभावना लगभग नहीं थी। इसलिए अगर आप इस तरह की ट्रेडिंग शैली अपनाते हैं, तो 1,000, 2,000, 3,000 या जितना चाहें उतना जमा करें, किसी अप्रत्याशित घटना पर सारी रकम दांव पर लगाएं और प्रतीक्षा करें।
ऐसा होने पर, आप एक ही दिन में अमीर बन जाएंगे, लेकिन अगर सफल नहीं हुआ, तो कम से कम आपने कोशिश की है।
मुनाफ़ा कमाना। इस श्रेणी के नाम से ही स्पष्ट है: वित्तीय सफलता पाने के लिए, प्रयास करना होता है। यह सबसे सबसे बढ़िया तरीका है, जिसका अनुसरण सिर्फ़ सबसे दृढ़ और उद्देश्यपूर्ण व्यक्ति ही कर सकते हैं। आपको अंत में निश्चित रूप से इनाम मिलेगा।
कोई भी व्यक्ति अपनी लाभदायक रणनीति योजना बना सकेगा और इस दौरान प्राप्त जानकारी की मदद से लगातार कमाई कर सकेंगे।
इस जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल वित्तीय बाजारों से जुड़े कार्यक्षेत्र में करेंगे।
अमूल्य अनुभव हासिल करेंगे और ब्रोकरेज कंपनी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला लेंगे।
और कोई भी वही दिशा चुनेगा, जिसे मैंने चुना है। बाजार में सफल ट्रेडिंग यात्रा के साथ-साथ, मैंने शिक्षा और वित्तीय विश्लेषण में अपनी पहचान बनाई है।
अगर आप वास्तविक ट्रेडर बनने की दिशा पर चलना चाहते हैं और पैसा कमाना सीखना चाहते हैं, तो आपको प्रारंभिक धनराशि की महत्वपूर्ण राशि और डेटा का विश्लेषण करने की क्षमता (कुछ गणना कौशल) की ज़रूरत होती है।
मेरी पहली वास्तविक पूंजी लगभग 4,000 डॉलर थी। मैंने पहले ही कई लेख लिखे हैं, जहां मैं ट्रेडिंग से जुड़ी लागतों के बारे में विस्तार से चर्चा करता हूं। इसलिए अगर आपको ज़्यादा जानकारी चाहिए, तो मेरे अन्य लेख देखें।
आइए आगे बढ़ते हैं। आज मैंने हमारी स्टार्ट-अप पूंजी के रूप में 4,000 चुना है, क्योंकि स्टॉक ट्रेडिंग की लागत 400 डॉलर है।
25. जमा करने के बाद, "ट्रेड" बटन पर क्लिक करके देखें कि आपके अकाउंट में आवश्यक राशि दिखाई देती है। यह "कुल फंड" फ़ील्ड में दिखेगा।
26. मेरे पास 4,000 डॉलर नहीं, बल्कि 4,852 डॉलर है! दरअसल, मैंने पहले से 852 डॉलर की राशि जमा कर रखी थी।
27. आइए वास्तविक ट्रेडिंग शुरू करें।
आइए “शेयर” टैब पर क्लिक करें और और थोड़ा सोच-समझकर आगे बढ़ें। हमारे पास असली पैसा है, इसलिए जल्दबाजी में कोई कदम उठाना हमारे लिए ठीक नहीं है। सबसे पहले, हमें सटीक ट्रेडिंग योजना तैयार करनी होगी।
आप इंटरनेट और इस ब्लॉग पर ट्रेडिंग से जुड़ी योजनाओं के बारे में बहुत सारे लेख देख सकते हैं। लेकिन मैंने इसके बारे में बताया है, इसलिए मैं आपके लिए छोटी ट्रेडिंग योजना भी तैयार करूंगा।
ट्रेडिंग प्लान में विशिष्ट दिशा-निर्देश होते हैं, जिसका आपको निश्चित रूप से पालन करना चाहिए, ताकि सकारात्मक परिणाम हासिल कर सकें। यह मूल रूप से इस तरह दिखता है:
मैं जिस ट्रेडिंग योजना का अभी इस्तेमाल करता हूं, उसमें 37 पॉइंट हैं। मैं इसके बारे में अच्छी तरह से जानता हूं। संभावित एसेट का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया में मुझे कुछ सेकंड से लेकर सप्ताह तक का समय लग सकता है।
पहली बार ट्रेडिंग प्लान को देखने वाले व्यक्ति को हर बिंदु को समझने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। लेकिन ट्रेडिंग प्लान के बिना आपके CFD ट्रेड का परिणाम अनिश्चित होगा और हम स्थिर लाभ के बारे में बात नहीं कर सकते। मैं ट्रेडिंग प्लान के हरेक बिंदु के बारे में विस्तार से चर्चा करूंगा, क्योंकि मैं इसके लिए अलग लेख लिखने वाला हूं। आइए मूल सेक्शन से शुरूआत करते हैं।
लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन खोलने के लिए सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए, हमें कम से कम उस कार्य समय पर निर्णय लेने की ज़रूरत होती है, जब शेयर की ट्रेडिंग की जा रही हो। आमतौर पर तकनीकी या मौलिक विश्लेषण के बाद ट्रेडिंग से जुड़े इंस्ट्रूमेंट चुनें और ट्रेडिंग के लिए पूंजी का एक हिस्सा वितरित करें।
28. जब आप अपने ट्रेडिंग लक्ष्यों को अपनी ट्रेडिंग योजना के साथ जोड़ लेते हैं, तो अब आप ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं। चयनित वित्तीय साधन पर क्लिक करें। इस संदर्भ में, चुना गया वित्तीय साधन टेस्ला है।
29. अगर हम तकनीकी विश्लेषण को अपनाते हैं, तो मूल्य चार्ट पर ध्यान देना चाहिए।
ट्रेडिंग की बहुत सी रणनीतियां हैं, लेकिन अलग-अलग व्यापारिक रणनीतियों में से, "बाजार अंतराल" की अवधारणा विशेष रूप से प्रभावी है। मैं इसके बारे में विस्तार से नहीं बताऊंगा, क्योंकि मैंने अपने एक लेख में इस रणनीति के बारे में विस्तार से बताया है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि ट्रेडिंग अभी शुरू ही हुई है और कीमत में अंतर हुआ है, जिससे अगले एक या दो घंटे में शेयर की कीमत में अल्पकालिक बढोतरी होने की संभावना है। समय सीमित है, इसलिए आपको तेजी से कदम उठाना होगा।
30. बाजार में शेयर की कीमतें बढ़ रही हैं, इसलिए अब खरीदारी का समय है। हम ट्रेड का प्रकार 'खरीदें' के रूप में सेट करते हैं।
31. फिर हम ट्रेड का वॉल्यूम सेट करते हैं। मैंने पहले ही गणना कर ली है कि 100 कॉन्ट्रैक्ट के लिए मुझे CFD मार्जिन में लगभग 900 डॉलर का खर्च आएगा। यह मेरे लगभग 5000 के बैलेंस के लिए काफी स्वीकार्य है, इसलिए मैं 100 कॉन्ट्रैक्ट खरीदूंगा।
32. पैरामीटर सेट करने के बाद, मैं “खरीदें” पर क्लिक करता हूं।
33. विशेष रूप से उन लोगों को सहायक जानकारी मुहैया करा रहे हैं, जिनके पास वित्तीय विश्लेषण और ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीतियों में बेहतर समझ या विशेषज्ञता हासिल नहीं है। आपके लिए सेक्शन "एनालिटिक्स" है; यह बटन आपके पर्सनल अकाउंट के मुख्य पैनल पर स्थित है।
34. खुलने वाली विंडो में, "एनालिटिक्स फीड" पर क्लिक करें और इस फीड में आवश्यक वित्तीय साधन ढूंढें।
35. आज की टेस्ला समीक्षा उपलब्ध है। जब आप उस पर क्लिक करेंगे, तो आपको कंपनी के विश्लेषकों में से एक की संक्षिप्त विश्लेषणात्मक समीक्षा दिखाई देगी, जिसमें इस वित्तीय साधान के बारे में उनकी राय होगी। आप उनके तर्कों को समझ कर उनके अनुसार काम कर सकते हैं। लेकिन भविष्य के लिए मैं यही कहना चाहूंगा कि अपनी राय पर भरोसा करना हमेशा बेहतर होता है।
36. जिस समय 'एनालिटिक्स' टैब देख रहे थे, उसी समय कीमत चार्ट में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कीमत हमारी उम्मीदों के मुताबिक बढ़ने लगी।
37. और अब समय आ गया है कि हम ट्रेडिंग पैनल पर नज़र डालें और अपनी जमा राशि की स्थिति का आकलन करें। उन 10-15 मिनटों के दौरान जब हमने एनालिटिक्स का अध्ययन किया, कीमतें बढ़ीं और इस समय हमें ट्रेड से 560 डॉलर का मुनाफ़ा हो रहा है।
38. मुझे लगता है कि 10 मिनट की ट्रेड के लिए यह काफी है। हमारी रणनीति सफल रही है और अब हमें जल्द से जल्द ट्रेड बंद कर मुनाफा कमाना चाहिए। आप जानते हैं, इसे कैसे करना है, सिर्फ़ 'क्लोज़' बटन पर क्लिक करें।
39. ट्रेड बंद होने के बाद, मैं आपको प्रारंभिक मुनाफे का भरपूर लाभ उठाने का सुझाव देता हूं। कहने का मतलब है, मुनाफ़े वाली राशि को निकालें और उसकी खुशी को महसूस करें।
40. यह नए और अनुभवी ट्रेडर के लिए बहुत ही उपयोगी अभ्यास है, जिससे ट्रेडर का आत्मविश्वास बढ़ता है। CFD ट्रेडिंग खाते से मुनाफ़े वाली राशि निकालने के लिए "वित्त" सेक्शन पर जाएं।
41. अब, “जमा” टैब के बजाय, “निकासी” टैब पर क्लिक करें।
42. फिर से, निकासी विधि चुनें।
आपका CFD ट्रेडिंग अकाउंट, शेष राशि और निकासी के लिए उपलब्ध राशि वाले फ़ील्ड में दिखेगा। मेरे पास 5,479 हैं। अगर आपको याद हो, तो मैंने 4,000 जमा किए थे। साथ ही, अकाउंट में लगभग 900 डॉलर थे। कुल मिलाकर, मैंने 5,000 से ज़्यादा निकालने का फैसला किया। 479 डॉलर परिश्रम और सुविचारित रणनीति के लिए खुद को उपहार खरीदने के लिए काफी है।
CFD ट्रेडिंग के उदाहरण
CFD ट्रेडिंग के इस्तेमाल करने के तरीके का विश्लेषण करने और CFD पोज़िशन के उदाहरणों पर चर्चा करने के बाद, आइए हम संक्षेप में इसका सारांश प्रस्तुत करें और कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) की ट्रेडिंग के लिए आवश्यक नियमों और अवधारणाओं को समझें।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CFD कैसे काम करता है और लाभ एवं हानि का निर्धारण कैसे किया जाता है।
ट्रेडिंग शुरू करने का निर्णय लेने के बाद, हमें अपनी ट्रेडिंग से जुड़ी योजना पर ध्यान देना चाहिए।
वित्तीय एसेट और पैरामीटर तय करने के बाद, हम खरीदने या बेचने का फैसला करते हैं। ट्रेडिंग का नतीजा सीधे इस बात पर निर्भर करेगा कि हमने दिशा सही तरीके से चुनी है या नहीं।
अपेक्षित नतीज़ा निर्धारित करना आसान है। ऊपर मैंने पहले ही पूरे कैलकुलेशन फॉर्मूला के बारे में बताया है, लेकिन सरल फॉर्मूला भी है। आपको सिर्फ़ क्लोजिंग और ओपनिंग कीमतों के बीच के अंतर को अपनी पसंद के वॉल्यूम पर एक पॉइंट की कीमत से गुणा करना होगा।
ऊपर दी गई तस्वीर में, मैंने शेयरों पर चर्चा करना बंद कर दिया है और इसे ब्रेंट ऑयल कॉन्ट्रैक्ट के उदाहरण के ज़रिए दिखाने का फ़ैसला किया। यह एक्सचेंजों पर सबसे लोकप्रिय कमोडिटी CFD है।
उदाहरण के तौर पर, हमने ऑइल कॉन्ट्रैक्ट खरीदने का फैसला किया। ऑइल, लॉट में बेचा जाता है और न्यूनतम लॉट 0.1 है। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट अपेक्षाकृत सस्ता है, इसलिए आप सुरक्षित रूप से पूरा लॉट या उससे ज़्यादा खरीद सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, मैंने 1 लॉट खरीदा। खरीद मूल्य 40.00 डॉलर था और जिस कीमत पर मैंने इसे बाद में बेचा वह 45.00 डॉलर था। बिक्री मूल्य खरीद मूल्य से ज़्यादा होने की वजह से मुझे मुनाफा हुआ।
वैसे, कीमत कितनी बार 500 अंक के ऊपर गई?
क्योंकि स्टॉक एक्सचेंज पर कीमत में उतार-चढ़ाव में न्यूनतम बढ़ोतरी हुई। 45.00 होने से पहले, कीमत 40.00 से 40.01, 40.02 और इसी तरह 1 अंक या उससे ज़्यादा तक बढ़ गई।
लाभ इसके बराबर है: एक अंक (1 डॉलर) की कीमत को (बेचने की कीमत (अंक) और खरीदने की कीमत (अंक)) के अंतर से गुणा किया जाता है। यह 1 * (4500-4000) = 500 है।
अगर आप भाग्यशाली नहीं हैं और कीमत नहीं बढ़ती, लेकिन बाजार में गिरावट आती है, तो खरीदारी की स्थिति में नुकसान होगा। इसकी गणना उसी फॉर्मूले 1 * (3500-4000) = -500 का उपयोग करके की जाएगी। इस स्थिति में नुकसान 500 डॉलर होगा।
लाभ और हानि को समझने के बाद, आइए अब जानें कि मार्जिन का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
CFD ट्रेडिंग का मूल तत्व CFD मार्जिन ट्रेडिंग है, जब कोई ट्रेडर ब्रोकर की ओर से दिए गए लीवरेज के आधार पर मुनाफ़ा कमाते हैं। हम इसके बारे में नीचे विस्तार से चर्चा करेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि मार्जिन और लीवरेज्ड ट्रेडिंग में फ़ायदा और नुकसान, दोनों हो सकता है, जिसका मतलब है कि यह आपके मुनाफ़े को काफ़ी हद तक बढ़ा सकता है, लेकिन दूसरी ओर, आपके रिटेल इनवेस्टर अकाउंट से तेज़ी से वित्तीय हानि भी हो सकती है।
मार्जिन लेंडिंग की वजह से, आप अकाउंट में सिर्फ़ न्यूनतम राशि रखकर भी बड़ी रकम के साथ ट्रेडिंग कर सकते हैं।
इसलिए ट्रेडर, शेयर या कमोडिटीज की ट्रेडिंग कर सकते हैं और अंतर्निहित एसेट को खरीदने के लिए पूरी राशि के बिना भी उनसे पैसा कमा सकते हैं।
आइए, दुनिया की सबसे लोकप्रिय कंपनी Google या Alphabet Inc के शेयर के उदाहरण का इस्तेमाल करके देखें कि इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।
इस समय एक शेयर की कीमत लगभग 1,445 डॉलर है। इसे खरीदने के लिए हमें पूरी रकम की जरूरत होती है। वास्तव में, कमीशन और स्प्रेड के साथ यह रकम और भी ज्यादा होगी।
लेकिन अगर आप शेयर नहीं, बल्कि शेयर के बराबर आकार का Google CFD खरीदने का निर्णय लेते हैं, तो मार्जिन प्रतिशत के कारण आपको अपने अकाउंट में 1,445 डॉलर की पूरी राशि रखने की ज़रूरत नहीं होगी।
इस शेयर के लिए मार्जिन कुल कीमत का सिर्फ़ 2% या 28.98 डॉलर है। दूसरे शब्दों में यह कह सकते हैं कि आपको वही शेयर कई गुना सस्ती कीमत पर मिलता है। इस पर लाभ की गणना हमेशा की तरह की जाएगी: कीमत आपकी दिशा में जितने अंक आगे बढ़ेगी, आपको उतना ही मुनाफ़ा होगा।
नए ट्रेडर के लिए CFD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति
यह सेक्शन बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें हम ट्रेडिंग और बाजार के व्यवहार से जुड़ी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
स्पष्ट रणनीति से आपको बाजार में उतार-चढ़ाव से पैसे कमाने में मदद मिलेगी।
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) की ट्रेडिंग का अभ्यास करने के लिए विशेष रूप से ट्रेडिंग से जुड़ी कई रणनीतियां हैं, लेकिन मेरा सुझाव है कि आप सबसे मूल और आसान रणनीतियों पर विचार करें।
शॉर्ट और लॉन्ग CFD ट्रेडिंग
आइए अपनी समीक्षा फॉरेक्स CFD से जुड़ी सबसे आम रणनीति से शुरू करें, जिसे "कम कीमत पर खरीदें, ज़्यादा कीमत पर बेचें" कहा जाता है। यह चार्ट में कुछ इस तरह से दिखेगा:
उपरोक्त चित्र में दो अलग-अलग अंतर्निहित एसेट के लिए बाजार की गतिविधियों के दो चार्ट दिखाए गए हैं।
शीर्ष चार्ट Facebook के शेयर को दिखाता है और निचला चार्ट सबसे लोकप्रिय ऑनलाइन ऑक्शन eBay के शेयर को दिखाता है।
जैसा कि आप देख सकते हैं, बाजार मूल्य में गिरावट की लंबी अवधि के बाद, Facebook के शेयर की कीमत में अंततः संतुलन आ गया और इसमें सक्रिय रूप से गिरावट आना बंद हो गया।। इसे आपूर्ति और मांग का संतुलन कहा जाता है। अक्सर संतुलन के बाद शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव आता है।
दूसरे शब्दों में, अगर बाज़ार में कीमत में लंबे समय से गिरावट देखने को मिल रहा है, तो जल्द ही कीमतें बढ़ने लगेंगी। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
बाज़ार में गिरावट आने के बाद, इसकी कीमत कम हो जाती है और खरीदारों के लिए बढ़िया विकल्प बन जाता है, क्योंकि अब इसे खरीदने के लिए कम पैसे की ज़रूरत होती है। साथ ही, जितनी लंबी अवधि तक गिरावट रहेगी, भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी। इसलिए पहला नियम है – "कम कीमत पर खरीदें"।
एक और उदाहरण यह है: जब eBay के शेयर लंबे समय तक ऊपर की ओर बढ़ते रहते हैं, तो अंततः ऐसा समय आएगा, जब प्रमुख खरीदार अपने लक्ष्यों तक पहुंचेंगे और मुनाफा कमाएंगे।
ऐसा होने पर, जब एसेट की कीमत को बढाने के लिए उपयोग की जाने वाली धन आपूर्ति उपलब्ध नहीं होगी और सिर्फ़ उन लोगों की पैसे की आपूर्ति बचेगी, जिन्होंने CFD में शॉर्ट सेलिंग करने का निर्णय लिया है। जब विक्रेताओं की पैसे की आपूर्ति खरीदारों की मात्रा से ज़्यादा हो जाती है, तो कीमत में उतार-चढ़ाव होता है और शेयर गिरने लगते हैं। इसलिए दूसरा नियम है – 'ज़्यादा कीमत पर बेचें'।"
मुझे लगता है कि इस रणनीति में कुछ भी जटिल नहीं है। हर कोई इसे जानता है, लेकिन यह इसे और ज़्यादा प्रभावी बनाता है। यह 100 साल पहले भी कारगर रही थी और आज भी कारगर है।
CFD ट्रेडिंग में लीवरेज
यह ट्रेडिंग में एक और बहुत महत्वपूर्ण सेक्शन है। अब लीवरेज के बारे में बात करने का समय है। फॉरेक्स पर लीवरेज ब्रोकर की ओर से दिया जाने वाला ब्याज-मुक्त ऋण है, जिससे आप अपनी पूंजी से ज़्यादा वॉल्यूम के साथ ट्रेड कर सकते हैं।
आपके ब्रोकर की ओर से आपको दिए जाने वाले लीवरेज के बिना, व्यक्तिगत रूप से एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना ट्रेडर और ब्रोकर, दोनों के लिए फायदेमंद नहीं होगा। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि लीवरेज का इस्तेमाल करके CFD की ट्रेडिंग करते समय वित्तीय हानि हो सकता है। यह एक जटिल साधन है, जिससे एक तरफ, आपको अपने रिटर्न में बढ़ोतरी होती है, लेकिन दूसरी तरफ, आपके रिटेल इनवेस्टर को वित्तीय हानि हो सकती है।
इस तथ्य के बावजूद कि दुनिया के स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग काफी सक्रिय है, कीमत में दैनिक उतार-चढ़ाव अंतर्निहित एसेट की कीमत का लगभग एक प्रतिशत है। लीवरेज के बिना, सबसे सफल ट्रेड में भी ट्रेडर की आय कुछ सेंट ही होगी।
उदाहरण के लिए, आप Hewlett-Packard का 1 शेयर खरीदना चाहते हैं, जिसकी कीमत 18 डॉलर है। सबसे अच्छे दिन पर भी, शेयरों की कीमत में 3 से 4 डॉलर तक का उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए, आपकी आय 3 डॉलर होगी। आप एक्सचेंज पर लाखों कैसे कमा सकते हैं? आप ऐसा सिर्फ़ लीवरेज का इस्तेमाल करके ही कर सकते हैं।
आइए कुछ उदाहरण देखें:
उदाहरण 1
सबसे पहले, आइए करेंसी के लीवरेज पर नजर डालें।
मान लीजिए कि हमने फॉरेक्स करेंसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कमाने का फैसला किया है। उदाहरण के तौर पर, हम USDCHF करेंसी पेयर का इस्तेमाल करेंगे, जो कुछ समय पहले 1.0000 पर थी।
हमने तय किया है कि इस करेंसी पेयर की कीमत बढ़ने पर हम इसकी खरीदारी करेंगे।
करेंसी के लिए बेस कॉन्ट्रैक्ट साइज़ 100,000 यूनिट है। दूसरे शब्दों में, 1-लॉट CFD ट्रेड को 100,000 डॉलर की ट्रेडिंग के रूप में माना जाता है, जिसमें लाभ या हानि की गणना तदनुसार की जाती है। विफलता की स्थिति में, ज़्यादा नुकसान से बचने के लिए, इसे 0.01 लॉट के न्यूनतम आकार तक घटाया जा सकता है, जिससे करेंसी की मात्रा 1,000 हो जाएगी।
हम बढ़ोतरी की उम्मीद में 1.00000 पर USDCHF करेंसी पेयर का 0.01 लॉट खरीद रहे हैं। इस स्थिति में, हमारे लॉट के आधार पर, लंबी या कम अवधि में कीमत में उतार-चढ़ाव से लाभ या हानि होगी। 0.01 लॉट में, हरेक अंक 0.01 डॉलर के बराबर होगा।
कुछ देर बाद कीमत बढ़कर 1.01000 हो गई। इसमें 1,000 अंकों की बढ़ोतरी हुई। इसलिए हमारे CFD ट्रेड का लाभ 1,000 * 0.01 = 10 डॉलर होगा।
अगर हम ज़्यादा वॉल्यूम (जैसे कि 0.1) का इस्तेमाल करते हैं, तो लाभ 10 गुना बढ़कर 100 डॉलर हो जाएगा। लीवरेज जितना ज्यादा होगा, मुनाफा उतना ही ज्यादा हो सकता है, लेकिन जोखिम और मार्जिन कॉल का ध्यान रखें। असफल होने पर नुकसान भी लीवरेज के अनुसार बढ़ जाएगा और जमा राशि जल्दी खत्म हो सकती है।
उदाहरण 2
आइए जानें कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) में लीवरेज का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
आइए विश्लेषण करें कि Google शेयर के लिए लीवरेज का इस्तेमाल कैसे करते हैं। CFD की ट्रेडिंग करते समय, न्यूनतम वॉल्यूम अक्सर एक स्टॉक होता है। दूसरे शब्दों में, 1 लॉट 1 स्टॉक के बराबर होता है।
एक शेयर की कीमत 1,444 डॉलर होती है और फॉरेक्स मार्केट में, हमें पूरी राशि अपने खाते में रखने की जरूरत नहीं होती है। इस विषय पर हम बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे।
एक लॉट स्टॉक खरीदते समय, लीवरेज 1:1 होगा और इसे खरीदे गए स्टॉक्स की संख्या में बढ़ोतरी से नियंत्रित किया जाएगा।
अगर हम 10 कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तो लीवरेज 1:10 होगा। अगर हम 100 कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तो लीवरेज 1:100 होगा, जिससे यह निवेशक के लिए फायदेमंद हो सकता है।
1 लॉट के लिए एक अंक की कीमत हमेशा शेयर की कीमत में न्यूनतम उतार-चढ़ाव के बराबर होगी, यानी 1 सेंट या 0.01 डॉलर होगी।
आइए गणना करें कि यदि शेयर की कीमत 1,444 डॉलर से बढ़कर 1,450 डॉलर हो जाए, तो हमें कितना मुनाफ़ा होगा।
अगर हम 1 कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तो लाभ अंकों की संख्या को एक अंक की कीमत से गुणा करने के बराबर या 600 * 0.01 = 6 डॉलर होगा।
अगर आप लीवरेज बढ़ाते हैं, तो आपको ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट (उदाहरण के लिए, 100) खरीदने की ज़रूरत होती है। इसके बाद, मुनाफ़ा भी 100 गुना बढ़ जाएगा और 600 डॉलर तक पहुंच जाएगा।
CFD ट्रेडिंग में मार्जिन
ब्रोकर की ओर से आपको दिए जाने वाले मार्जिन लीवरेज के बिना, व्यक्तिगत निवेशकों के लिए एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना लगभग असंभव होगा और ब्रोकर की आय लगभग शून्य होगी।
इसलिए, ट्रेडिंग से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों के लिए मार्जिन ट्रेडिंग अच्छा विकल्प होगा। मार्जिन की मदद से, अनुभवी ट्रेडर ऐसे लेन-देन कर सकते हैं, जिनके लिए उनके पास काफी धनराशि नहीं होती है। हालांकि, मार्जिन कॉल की संभावना को रोकने के लिए मार्जिन की शर्तों को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
उदाहरण के तौर पर, आप 10 Google शेयर खरीदना चाहते हैं। हर किसी के लिए इसे खरीदना संभव नहीं होगा, क्योंकि एक शेयर की कीमत 1,445 डॉलर है और दस की कीमत 14,450 डॉलर है। मार्जिन लेंडिंग की मदद से, मैं अपने CFD ट्रेडर के अकाउंट में सिर्फ़ 400 डॉलर रखकर 100 Google शेयर खरीद सकता हूं।
आइए एक उदाहरण देखें:
पहले मैंने आपको मार्जिन की गणना का फॉर्मूला बताया था। यह निम्नलिखित है:
यहां मुख्य पैरामीटर प्रतिशत मार्जिन है। इससे परिभाषित होता है कि आपको अपने अकाउंट में एसेट की कुल कीमत का कितना हिस्सा रखना होगा, ताकि ट्रेड पूरा कर सकें।
उदाहरण के तौर पर, Google शेयर के संदर्भ में, मार्जिन कुल कीमत का सिर्फ़ 2% है। दूसरे शब्दों में, 1 शेयर खरीदने के लिए हमें 1,444 डॉलर के बजाय सिर्फ़ 28.89 डॉलर की ज़रूरत होती है। इस तरह, हम अपने अकाउंट में सिर्फ़ 1000 डॉलर रखकर 30 से ज़्यादा शेयर खरीद सकते हैं।
CFD ट्रेडिंग में हेजिंग
अब मैं आपको CFD ट्रेडिंग के लिए भरोसेमंद रणनीति के बारे में बताना चाहता हूं। यह हेजिंग रणनीति है। वित्तीय दुनिया में, हेजिंग एक ऐसा तरीका है, जिससे पूंजी को उच्च जोखिम से बचाया जा सकता है। हमारे मामले में, हम गिरावट वाले बाजारों के संभावित उच्च जोखिम से बचने के लिए हेजिंग का इस्तेमाल करेंगे।
उपरोक्त चित्र में इसके इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में दिखाया गया है।
उदाहरण के तौर पर, हमने Apple का शेयर खरीदने का फैसला किया। चार्ट में बाजार का ग्राफ ऊपर बढ़ रहा है और सब कुछ ठीक दिख रहा है। लेकिन अचानक हमें पता चलता है कि कंपनी में अस्थायी समस्याएं हो सकती है। यह नए iPhone के दोषपूर्ण बैच से जुड़ी हो सकती है। इससे अभी तक शेयर पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इसकी बहुत संभावना है कि भविष्य में ऐसा हो सकता है।
ट्रेड बंद करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि समस्याएं अस्थायी हैं और कीमत लंबी अवधि में बढ़नी चाहिए। इस स्थिति में, हम एक तरीका अपना सकते हैं। हम दूसरे अकाउंट पर जाकर कीमत में उतार-चढ़ाव वाले साथ चार्ट पर नज़र रखते हैं।
कुछ देर के बाद, शेयर में वास्तव में गिरावट शुरू हो जाता है और उस समय जब कीमत हमारे खरीद स्तर पर पहुंच जाती है, तो हम दूसरे खाते पर बिल्कुल वही पोजीशन खोलते हैं (उसी वॉल्यूम के साथ), लेकिन इस बार यह सेल पोजीशन होगा।
अगर कीमत और भी कम हो जाती है, तो दूसरे अकाउंट पर मुनाफ़ा होगा। यह पहले अकाउंट पर हुए नुकसान के बराबर होगा।
कुछ समय तक प्रतीक्षा करने के बाद, हमारे पास एक विकल्प होता है। हम दूसरे अकाउंट पर लाभदायक पोजीशन को बंद कर सकते हैं और मुख्य खाते में फिर से लाभ पाने के लिए कीमत की बढ़ोतरी का इंतज़ार कर सकते हैं। हम तब तक प्रतीक्षा कर सकते हैं, जब तक कि कीमत उस स्तर पर वापस न आ जाए, जहां से हमने शुरुआत की थी।
यह आप पर निर्भरता करता है, लेकिन आपको सिर्फ़ यह समझने की ज़रूरत है कि आप यह ओवरलैप क्यों कर रहे हैं। अगर आप अतिरिक्त मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं, तो आपके पास विकल्प 1 है, लेकिन यह जोखिम भरा है। अगर आप केवल अस्थायी नुकसान से बचना चाहते हैं, तो आपके पास विकल्प 2 है, जिसे ब्रेकईवन कहा जाता है।
प्रोफेशनल के लिए CFD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति
आइए अब चर्चा करते हैं कि अनुभवी ट्रेडर CFD ट्रेडिंग कैसे करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि यह नए लोगो के लिए उपयुक्त नहीं हैं, इसे समझने के लिए कुछ मूल जानकारी की जरूरत होती है। इसमें अक्सर तकनीकी विश्लेषण से जुड़ी मूल रणनीतियों और कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस संरचना को एकीकृत करना शामिल है।
आइए सबसे लोकप्रिय से शुरूआत करें।
रेंजबाउंड (रेंज) ट्रेडिंग
रेंज ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति शायद फ़ॉरेक्स ट्रेडर के बीच सबसे लोकप्रिय है।
इस रणनीति का मूल सिद्धांत प्राइस चैनल में काम करने पर आधारित है। आप इस चार्ट पर किसी एसेट की कीमत में पार्श्व उतार-चढ़ाव और दो समानांतर रेखाओं के भीतर उतार-चढ़ाव का अवलोकन और विश्लेषण कर रहे हैं। इसके बाद, आप चैनल इंडीकेटर (CCI या RSI) में से किसी एक को जोड़ते हैं और प्राइस चैनल में उच्च और निम्न की तुलना उन बिंदुओं से करते हैं, जहां इंडीकेटर लाइन, ओवरबॉट और ओवरसोल्ड ज़ोन से बाहर निकलती है।
अगर यह पॉइंट पूरी तरह से मेल खाता है, तो यह बाजार में प्रवेश करने का सुनहरा अवसर होता है। अगर कीमत चार्ट में इस लाइन तक पहुंची है, लेकिन इंडीकेटर पर EMA लाइन, ज़ोन तक नहीं पहुंची है, तो संकेत को अविश्वसनीय माना जाता है और इस रणनीति में इसे ध्यान में नहीं रखा जाता है।
ब्रेकआउट
फ्रैक्टल ब्रेकआउट से जुड़ी रणनीति भी ट्रेडर के बीच काफी लोकप्रिय है।
इस रणनीति का इस्तेमाल आमतौर पर इंट्राडे अंतराल पर किया जाता है।
पिछली रणनीति की तरह, यह अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों की अवधि के बाद महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव की पहचान करने और उनका लाभ उठाने पर आधारित है। बोलिंगर बैंड और बिल विलियम्स फ्रैक्टल का इस्तेमाल इंडीकेटर के रूप में किया जाता है।
आप चार्ट में उस समय की तलाश करते हैं, जब कीमत निकटतम फ्रैक्टल के स्तर को पार करती है। इसके बाद, आप चार्ट के निकटतम बोलिंगर बैंड की सीमा से बाहर निकलने का इंतज़ार करते हैं। संकेत को तब सही माना जाता है। स्टॉप लॉस आमतौर पर विपरीत फ्रैक्टल लेवल पर लगाया जाता है।
विपरीत निवेश (कॉन्ट्रेरियन इनवेस्टिंग)
विपरीत निवेश से जुड़ी रणनीति एक मौलिक रणनीति है। यह मूल्य चार्ट पर आधारित नहीं होती है, बल्कि लोगो की राय पर आधारित होती है।
इस रणनीति का सर्वप्रथम वर्णन बेंजामिन ग्राहम ने अपनी पुस्तक “द इंटेलिजेंट इनवेस्टर” में किया था, जहां बड़े समूह का व्यवहार और राय अव्यवस्थित और अप्रत्याशित लग सकती है।
इस रणनीति का सिद्धांत काउंटरट्रेंड पॉइंट को खोजना है। आप एक ऐसी एसेट ढूंढते हैं, जिसमें स्पष्ट दिशात्मक दबाव होता है और इसके विपरीत पोजीशन खोलते हैं।
दूसरे शब्दों में, आप बाजार की रुझान की विपरीत ट्रेडिंग कर रहे हैं। टेस्ला स्टॉक को उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है। जब पिछले हफ्ते यह घोषणा की गई थी कि कंपनी को S&P500 स्टॉक इंडेक्स में शामिल नहीं किया जाएगा, तो ज़्यादातर लोग ही इसे नहीं बेच रहे थे। यह इस रणनीति के लिए बिल्कुल सही स्थिति है। निकट भविष्य में उलटफेर और बढ़ोतरी की ज़्यादा संभावना है।
ट्रेंड फॉलोइंग
ट्रेंड फॉलोइंग से जुड़ी रणनीति, इंडीकेटर आधारित रणनीतियों में काफी लोकप्रिय है। इसमें चैनल रणनीति की तुलना में कई खामियां हैं।
इस रणनीति का सिद्धांत यह है कि किसी नए बने ट्रेंड की दिशा में पोजीशन खोली जाए। आप तेज (21 अवधि) और धीमी (55 अवधि) मूविंग एवरेज के इंटरसेक्शन (प्रतिच्छेदन) से प्राप्त मुख्य संकेत के आधार पर ट्रेंड फॉर्मेशन पॉइंट निर्धारित करते हैं। इसके बाद, संकेत को आमतौर पर दो ऑसिलेटर MACD और RSI का इस्तेमाल करके फ़िल्टर किया जाता है। यह पक्का करें कि कीमत RSI पर सही सीमा के भीतर रहे, और कीमत MACD पर आवश्यक ट्रेंड में हो।
उदाहरण के तौर पर, बाय पोजीशन में, चार्ट में तेज़ EMA धीमे EMA को पार करता है और उसी समय, RSI चैनल के अंदर होता है और MACD हिस्टोग्राम ऊपर की ओर रुझान में होता है, तो यह संकेत सही है, आप खरीदारी कर सकते हैं। RSI अपनी निर्धारित सीमा से बाहर चले जाने पर, ट्रेडिंग बंद कर देना चाहिए।
स्कैल्पिंग (स्प्रेड ट्रेडिंग)
स्कैल्पिंग से जुड़ी कई सारी रणनीतियां हैं, लेकिन मैं आपको इंडीकेटर सेशन स्कैल्पिंग का सुझाव दूंगा। यह CFD ट्रेडिंग के लिए सबसे उपयुक्त है।
यह रणनीति 4 मुख्य इंडीकेटर की संकेतों की तुलना पर आधारित है। मुख्य संकेत MACD ऑसिलेटर से मिलता है। इसलिए, इसके बाद, हम RSI और दो MA का इस्तेमाल करके इस संकेत की जांच करते हैं।
रणनीति का उद्देश्य यह है कि संकेत सभी चार इंडीकेटर पर मेल खाए।
इनके मिलान का उदाहरण ऊपर दिए गए चार्ट में उपलब्ध है।
हमें खरीद संकेत तब मिलता है, जब 0 लेवल से ऊपर MACD पहला बार बनाता है, RSI ऊपर की ओर मध्य 50 लेवल को पार करता है और 10 अवधि वाली तेज़ लीनियर वेटेड मूविंग एवरेज, 26 अवधि वाली एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से ऊपर होती है।
स्विंग ट्रेडिंग
स्विंग ट्रेडिंग कोई रणनीति नहीं है, जैसा कि कई लोग सोचते हैं। स्विंग ट्रेडिंग नियमों, विधियों और बाजार की समझ का जटिल मेल है। यह आपको स्पष्ट और संरचित ट्रेडिंग योजना प्रदान करता है, जिसमें हर छोटे से छोटे विवरण का ध्यान रखा जाता है।
सामान्य तौर पर, स्विंग ट्रेडिंग को ऐसी ट्रेडिंग पद्धति माना जाता है, जिसमें ट्रेडर रुझान के अनुसार लंबे समय तक पोजीशन बनाए रखते हैं, स्थायी उतार-चढ़ाव को अनदेखा करते हैं। उचित दृष्टिकोण के साथ, ये किसी छोटे लाभ का नहीं, बल्कि पूरे रुझान का लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।
स्विंग पोजीशन अक्सर एक महीने से ज़्यादा समय तक बनी रहती है। लेकिन वैश्विक स्विंग पोजीशन भी होती है।
ऊपर दिए गए चार्ट में आप सोने (गोल्ड) में मेरी वास्तविक ट्रेडिंग देख सकते हैं, जिसे मैंने लगभग एक वर्ष तक खुला रखा। मैंने मुख्य ट्रेडिंग को प्रभावित किए बिना, संबंधित शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग को जोड़ता और हटाता रहा।
सामान्यतः मैं स्विंग ट्रेडिंग को ट्रेडिंग कौशल और निपुणता का सर्वोच्च रूप मानता हूं। मैं इस पद्धति के बारे में शीघ्र ही एक अलग लेख लिखने की योजना बना रहा हूं।
न्यूज़ प्लेइंग
न्यूज़ ट्रेडिंग बहुत लोकप्रिय ट्रेडिंग है।
सामान्यतः, न्यूज़ ट्रेडिंग को 2 प्रकारों में विभाजित किया जाता है: आवधिक समाचारों पर ट्रेडिंग और घटनाओं पर ट्रेडिंग। आवधिक ट्रेडिंग मुख्य रूप से आर्थिक कैलेंडर का उपयोग करके की जाती है। वहीं, इवेंट ट्रेडिंग के लिए आपको उस विशेष वित्तीय साधन से संबंधित हर घटना की जानकारी होनी चाहिए, जिसमें आपकी रुचि है।
उदाहरण के तौर पर, मैंने Walmart Inc. से जुड़ी घटनाओं को चुना। अगस्त के अंत में, यह घोषणा की गई कि कंपनी लोकप्रिय TikTok सर्विस खरीद रही है और शेयर की कीमत सक्रिय रूप से बढ़ने लगी। यह एक खरीद सौदे का उदाहरण है। हालांकि, एक महीने बाद, मीडिया में खबर आई कि चीनी सरकार इस डील को रोक सकती है और Wal-Mart के शेयर की कीमत सक्रिय रूप से गिरने लगी – यह बिक्री का संकेत है।
CFD के फ़ायदे और जोखिम
CFD ट्रेडिंग क्या है और इसमें क्या खास है? पैसे कमाने का तरीका या कोई और अनावश्यक वित्तीय साधन?
फ़ायदे और नुकसान का विश्लेषण करने से इस सवाल का जवाब देने में मदद मिलेगी।
जब दस साल पहले दुनिया भर के ब्रोकर ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस का सक्रिय रूप से ट्रेडिंग करना शुरू किया, तो निश्चित रूप से, मैंने खुद से पूछा: "CFD क्या है?"
जैसे-जैसे मैंने नए तरह के कॉन्ट्रैक्ट का अध्ययन किया, मुझे अन्य उपलब्ध अनुबंधों की तुलना में इसमें कई फायदे दिखे। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया, कुछ कमियां भी सामने आई। आइए दोनों पर नज़र डालें।
CFD के फ़ायदे
मैं पहले CFD की ट्रेडिंग का अभ्यास करता था। इससे मुझे अन्य तरह के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले चार प्रमुख फायदे समझने में मदद मिली:
आपको ट्रेडिंग करने के लिए बहुत कम पूंजी की ज़रूरत होती है। मैंने इस लेख में कई बार इस फ़ायदे के बारे में बात की है।
मार्जिन सबसे बड़ा लाभ है, जिससे CFD ट्रेडिंग लगभग हर किसी के लिए कारगर होता है। 1,500 डॉलर के शेयर की कीमत की तुलना में 2% मार्जिन क्या है? लगभग 30 डॉलर के लिए, मुझे प्रतिदिन 100, 200, 300 और उससे भी ज़्यादा डॉलर की आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
बहुत कम कमीशन है। जब किसी कंपनी के शेयर को लंबी अवधि तक, कई महीनों से लेकर एक साल तक खरीदने की बात आती है, तो मैं सबसे पहले फीस के बारे में सोचता हूं।
इन शुल्कों में अधिग्रहण कर, शेयरधारकों के रजिस्टर में शामिल करने के लिए कमीशन, संभावित डिलीवरी कमीशन (कमोडिटीज के मामले में), लीवरेज, ओवरनाइट और अन्य शुल्क शामिल हैं।
इससे आपको अपने मौजूदा पोर्टफोलियो के लिए कोई भी वित्तीय साधन खरीदने से पहले गंभीरता से सोचना होता है। हालांकि जब मैं CFD खरीदने का फैसला करता हूं, तो मैं इसके बारे में बिल्कुल नहीं सोचता, क्योंकि मैं सिर्फ़ एक बार का स्प्रेड, प्रति लॉट 25 सेंट का कमीशन और स्वैप शुल्क देता हूं। यह एक सेंट से भी कम होता है।
उदाहरण के तौर पर, 1,500 डॉलर में 1 Google स्टॉक कॉन्ट्रैक्ट खरीदते समय, आप स्प्रेड में 80 सेंट, कमीशन में 25 सेंट और दस दिनों के स्वामित्व के लिए 1 सेंट का भुगतान करेंगे। और बस इतना ही! 1,500 डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए, आप कमीशन में सिर्फ़ 1 डॉलर का भुगतान करते हैं। निष्कर्ष स्पष्ट है।
पोर्टफोलियो हेजिंग से जुड़े विकल्प। मैंने पहले ही ऊपर हेजिंग के बारे में चर्चा की है। हेजिंग के लिए ऑप्शन और फ्यूचर्स जैसे कई डेरिवेटिव हैं, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस ट्रेडिंग उनकी तुलना में बहुत ज़्यादा किफायती है।
वास्तव में, कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस, लॉक और सिंथेटिक हेजिंग पोजीशन बनाने का सबसे बढ़िया तरीका है। लेकिन उनका मुख्य लाभ फिजिकल स्टॉक में लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन को तुरंत हेज कर सकते हैं। मैंने ऊपर प्रक्रिया के बारे में बताया है।
सुविधा। उपरोक्त सभी बातें इस लेख में संक्षेप में दी गई है। सुविधा कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस से संबंधित सभी चीज़ों पर लागू होती है। इसमें न्यूनतम मार्जिन, और असीमित लीवरेज, और व्यावहारिक रूप से कोई कमीशन शामिल नहीं है, जिसका अलग से उल्लेख करना जरूरी है।
फ़ॉरेक्स ब्रोकर आसान और प्रचलित टर्मिनल में सभी तरह के वित्तीय साधन पर CFD ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करते हैं। आपको अलग-अलग एक्सचेंज पर अकाउंट खोलने की ज़रूरत नहीं होती है। कई CFD प्रोवाइडर के पास सभी तरह के सबसे लोकप्रिय कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस का एक्सेस होता है।
CFD जोखिम
जहां तक नुकसान की बात है, तो मैंने दो पहलुओं की पहचान की है। शायद वे नुकसान भी न हों, लेकिन फिर भी, मैं सुझाव देता हूं कि आप हमेशा छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें, क्योंकि इनका परिणाम पर असर पड़ता है।
कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
मुझे लगता है कि कई लोग कह सकते हैं कि "हम किस तरह के कानून की बात कर रहे हैं, अगर हम विदेशों में लोकप्रिय ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग करते हैं और करों का भुगतान नहीं करते हैं?"
यह बात सही है और मुझे बेहद खुशी है कि मुझे आयकर नहीं देना पड़ता। लेकिन फिर भी मैं आपको कुछ आंकड़े साझा करना चाहता हूं।
हाल के वर्षों में, ब्रोकर और उनके रिटेल क्लाइंट के बीच CFD ट्रेड को लेकर विवादों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ब्रोकर आमतौर पर कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस के मार्केट मेकर होते हैं। इसलिए, वे अपने नियम खुद निर्धारित करते हैं। CFD का कोई स्पष्ट रूप से लिखित विनिर्देश नहीं है और यह इसे गैर-मानकीकृत बनाता है। किसी भी विवाद के मामले में, ब्रोकर को सही माना जाता है।
इसी वजह से, मैं सत्यापित ब्रोकर के माध्यम से CFD ट्रेडिंग करने का सुझाव देता हूं। थोड़ा ज़्यादा कमीशन लेने वाले CFD प्रोवाइडर को चुनना बेहतर होता है, ताकि आप ताकि आप धोखाधड़ी से बच सकें।
CFD निवेशक शेयरधारक नहीं होते।
हम फिर से कह सकते हैं कि इसे पूरी तरह से नुकसान नहीं माना जा सकता।
यह किसी नए ट्रेडर के लिए उतनी ज़रूरी नहीं होगी, लेकिन अनुभवी ट्रेडर के लिए इसकी अहमियत अलग है।
विनियमन के संदर्भ में CFD पोजीशन और फिजिकल स्टॉक खरीदने के बीच अंतर होता है।
अगर आपने कोई शेयर खरीदा है और उसे शेयरधारकों के रजिस्टर में दर्ज किया है, तो आप तब तक उसके मालिक रहेंगे, जब तक आप इसे बेच या अन्य किसी को हस्तांतरित नहीं करते। बाढ़, आग, वैश्विक संकट, COVID-19 महामारी या आपके ब्रोकर का दिवालिया होना जैसी कोई भी स्थिति इस प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकती। शेयर आपका ही रहेगा, भले ही जिस ब्रोकर से आपने इसे खरीदा है, वह 10 साल से ब्रोकर न रहा हो।
भले ही, जिस कंपनी का शेयर आपके पास है, वह बंद हो जाए या कोई और कंपनी उसे खरीद लेती है, तो भी आपका शेयर आपके पास रहेगा और उसकी कीमत बनी रहेगी।
CFD से जुड़े काम प्रबंधित करते समय, सिर्फ़ आपके ब्रोकर ही इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर ब्रोकर को कोई समस्या होती है, तो आपके कॉन्ट्रैक्ट उसी तरह समाप्त हो जाएंगे, जैसे वे अस्तित्व में आए थे।
इसलिए, फिर से भरोसेमंद ब्रोकर चुनना जरूरी है!
CFD ट्रेडिंग से जुड़े प्लेटफॉर्म और टूल
अब हम उन वित्तीय साधनों के बारे में चर्चा करेंगे, जिनका इस्तेमाल आप CFD ट्रेडिंग करते समय करते हैं।
1. ट्रेडिंग से जुड़े प्लेटफॉर्म
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस सबसे आम एक्सचेंज-ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट है। इसलिए, किसी विशेष सॉफ़्टवेयर की ज़रूरत नहीं होती है। आपके ब्रोकर की ओर से उपलब्ध कराए गए साधारण ट्रेडिंग टर्मिनल से CFD का कार्य आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।
बेशक, सबसे लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म MetaTrader 4 ट्रेडिंग टर्मिनल है। मेरी राय में, इससे बेहतर कोई ट्रेडिंग टर्मिनल नहीं है। इसमें ट्रेडिंग के लिए आपकी ज़रूरत की हर चीज़, तकनीकी विश्लेषण करने के लिए अलग–अलग वित्तीय साधन और पुराने चार्ट डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है।
इस टर्मिनल का नया वर्जन MT5 भी है, लेकिन यह MT4 जितना लोकप्रिय नहीं है।
हाल ही में कई आसान ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म सामने आए हैं, इनका मुख्य लाभ यह है कि ये आपके पर्सनल अकाउंट से सीधे जुड़े होते हैं, जिससे आपके पास ब्रोकर के साथ बातचीत करने का त्वरित एक्सेस होता है।
2. ट्रेडिंग टूल
टूल में वे सभी अतिरिक्त फ़ीचर हैं, जिसे आपके ब्रोकर की ओर से उपलब्ध कराया जाता है।
इसमें इकोनॉमिक कैलेंडर और ज़रूरी विश्लेषण का फ्री एक्सेस शामिल है। सिर्फ़ बहुत विश्वसनीय अधिकृत वित्तीय सेवा प्रदाता ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं क्योंकि हर कोई के पास वित्तीय शोध और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाले विश्लेषकों की समर्पित टीम को बनाए रखने की वित्तीय संसाधन या क्षमता नहीं है, जिनमें ट्रेडर का कैलकुलेटर शामिल है, जिसका मैंने पहले ही जिक्र किया है। आप न्यूज़ फ़ीड भी जोड़ सकते हैं। यह न्यूज़ ट्रेडर के लिए ज़रूरी है।
3. ग्राफ़िकल विश्लेषण के कारक
ऐसे टूल आमतौर पर ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म में बनाए जाते हैं। लेकिन समय स्थिर नहीं रहता और नए ट्रेडिंग इंडीकेटर या ग्राफ़िक एलीमेंट लगातार दिखाई देते रहते हैं। आपको उन्हें डाउनलोड, इंस्टॉल करने और अपने ट्रेडिंग टर्मिनल में उनके साथ ट्रेडिंग करने का अभ्यास करना चाहिए।
4. ट्रेडिंग एडवाइज़र
यह टूल आपके ट्रेडिंग को स्वचालित रूप से करने के लिए ज़रूरी है। ट्रेडिंग रोबोट के ज़रिए ट्रेडिंग करना एल्गोरिथम ट्रेडिंग कहलाता है। उनका लाभ यह है कि वे ट्रेडर के लिए ज़्यादातर काम करते हैं, जिसमें बाज़ार में प्रवेश करने के लिए संकेत खोजने से लेकर ट्रेडर की भागीदारी के बिना पूरी तरह से स्वचालित ट्रेडिंग करना शामिल है।
सफल ट्रेडर के पास बाजार का विश्लेषण करने के लिए सभी ज़रूरी टूल होते हैं। अग्रणी ब्रोकर यह जानते हैं और अपने ग्राहकों को एक ही स्थान और एक ही प्लेटफर्म पर यह सब कुछ उपलब्ध करने का प्रयास करते हैं।
जैसा कि मैंने कई बार बताया है कि मैं LiteFinance को चुनता हूं – ऐसे ब्रोकर हैं, जिन्हें वित्तीय बाजारों में 15 वर्षों का अनुभव है।
मैं इस ब्रोकर के साथ 5 वर्षों से ज़्यादा समय से काम कर रहा हूं, जबकि इससे पहले मैंने कई अन्य ब्रोकरों के साथ भी काम किया है।
LiteFinance की सबसे बड़ी खूबी इसकी आसान सुविधाएं हैं।
सभी ज़रूरी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध है।
इस वेबसाइट का डिजाइन यूज़र-फ्रेंडली है – आप कई लिंक पर जाए बिना आसानी से वांछित जानकारी पा सकते हैं। आपको सिर्फ़ 2 या 3 क्लिक में ज़रूरी जानकारी मिल जाती है।
मैं विशेषज्ञ के तौर पर ट्रेडिंग की शर्तों, कमीशन और कीमत में तुरंत उतार-चढ़ाव या गिरावट पर सर्वर की प्रतिक्रिया से पूरी तरह खुश हूं। इसके अलावा, कंपनी स्कैल्पिंग और स्विंग ट्रेडिंग की अनुमति देती है।
CFD से जुड़े नियम और सुझाव
अब मैं आपको अपनी सफल ट्रेडिंग रणनीति बनाने के लिए कुछ सुझाव देता हूं। हरेक ट्रेडिंग रणनीति मूलतः विशिष्ट नियमों पर आधारित होती है, भले ही वह कितना भी स्पष्ट क्यों न लगे। आइए नियम बनाते हैं:
1. हमेशा नियमों का पालन करें!
सबसे पहला और सबसे ज़रूरी नियम यह है कि हमेशा अपनी ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति के नियमों का पालन करें। किसी भी तरह की चूक या लापरवाही से नुकसान या समस्याएं हो सकती है।
2. प्रतिबंधात्मक ऑर्डर का इस्तेमाल करें
CFD की ट्रेडिंग करते समय, आप कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग करेंगे। शेयरों की ट्रेडिंग का समय बहुत निर्धारित होता है। ट्रेडिंग में कुछ समय के लिए अंतराल होगा, जिसके बाद कीमत में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव हो सकता है। इन उतार-चढाव की वजह से वित्तीय हानि से बचने के लिए, आपको हमेशा जोखिमों को सीमित करना ध्यान में रखना चाहिए।
3. फैसले लेने में संकोच न करें
मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि यदि आप गलती करने से डरते हैं, तो आप कभी सफल निवेश रणनीति नहीं बना पाएंगे। गलतियों के बिना, आप कभी नहीं सीखेंगे। गंभीर गलतियों से बचने के लिए, बिंदु 2 को देखें।
4. अपना लीवरेज देखें
ट्रेड खोलने से पहले हमेशा अपने लीवरेज को निर्धारित सीमा में रखें और ऐसा कुछ भी न करें, जिसकी आपने पहले से योजना नहीं बनाई हो।
दूसरे तरीके से कहें तो, अगर आपने पहले से ही ट्रेडिंग पोज़िशन शुरू कर दी है। कोई ऐसी घटना घटित होती है, जिससे आपकी भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो आपको योजना के बिना पोजीशन का आकार नहीं बढ़ाना चाहिए।
5. ट्रेड खोलने से पहले उसकी गणना करें
किसी भी ट्रेड को खोलने से पहले, आपको साफ तौर पर पता होना चाहिए कि आप किस उद्देश्य से ऐसा कर रहे हैं और अगर कुछ गलत हुआ, तो आपको कितना नुकसान होगा।
6. कभी भी किसी की बात न सुनें
अगर कोई आपको बताता है कि उन्होंने बिटकॉइन पर लाखों कमाए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सब कुछ छोड़कर बिटकॉइन खरीद लेना चाहिए। यह ध्यान में रखें कि ज़्यादातर अफ़वाहें जानबूझकर फैलाई जाती हैं और इससे आपको कोई लाभ नहीं होगा। अगर कोई आपको बताता है कि LiteFinance भरोसेमंद ब्रोकर है, तो उन पर भरोसा न करें – खुद रिसर्च करके सही निर्णय लें।
7. ट्रेडिंग के दौरान ब्रेक लेना न भूलें।
आपको हर समय बाजार में नहीं रहना चाहिए। ब्रेक लेना जरूरी है, आपके शरीर को आराम चाहिए। थकान से गलतियां होती हैं। खराब ट्रेड के बाद ब्रेक लेना विशेष रूप से मददगार साबित होता है।
8. अपनी गलतियों का विश्लेषण करें
वित्तीय हानि तेज़ी से होने के जोखिम से बचने के लिए, ख़राब ट्रेड के बाद यह तय करें कि यह आपकी अपनी गलती थी या यह कोई मामूली बाज़ार जोखिम था। अगर बाज़ार में कोई गड़बड़ी थी। भले ही, आपको किसी ट्रेडिंग में वित्तीय नुकसान हुआ हो, लेकिन आपने इस मुश्किल परिस्थिति में भी आप अपनी रणनीति का पालन किया।
बाजार में गलतियां अक्सर नहीं होतीं और अगर आप हमेशा उनके लिए तैयार रहते हैं, तो आपका मुनाफ़ा बढ़ेगा।
CFD ट्रेडिंग बनाम अन्य वित्तीय साधन
अब हमें CFD की तुलना एक्सचेंज और ब्रोकर की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले अन्य वित्तीय साधान से करना चाहिए।
CFD बनाम शेयर (स्टॉक) ट्रेडिंग
स्टॉक CFD और फिजिकल स्टॉक की तुलना करते समय, कई बातों का उल्लेख किया जाना चाहिए:
CFD के फ़ायदे:
- न्यूनतम मार्जिन की शर्तें;
- असीमित लीवरेज;
- कोई कमीशन और टैक्स नहीं;
- शॉर्ट सेलिंग CFD खोलने की सुविधा;
- हेजिंग की संभावना।
फिजिकल स्टॉक के फ़ायदे
- लेन-देन कानून के अनुसार सख्ती से विनियमित होते हैं;
- वित्तीय विवादों में संपार्श्विक एसेट हो सकता है;
- ब्रोकर के परिसमापन की स्थिति में, स्टॉक बने रहेंगे;
- मालिक कंपनी के वोटिंग शेयरधारक हैं।
CFD बनाम स्प्रेड बेटिंग
CFD और स्प्रेड बेटिंग की तुलना करते समय, कई बातों का उल्लेख किया जाना चाहिए:
CFD के फ़ायदे:
- न्यूनतम मार्जिन की शर्तें;
- असीमित लीवरेज;
- कोई कमीशन और टैक्स नहीं;
- "डीलर गतिविधि पर" कानून के अनुसार विनियमित;
- हेजिंग की संभावना
स्प्रेड बेटिंग के फ़ायदे:
- ग्राहक ट्रेड का आकार निर्धारित करते हैं;
- स्प्रेड में अंतर पर ट्रेड करने की सुविधा।
स्प्रेड बेटिंग के नुकसान:
- कोई नियामक दिशा-निर्देश नहीं है;
- बुकमेकींग से संबंधित गतिविधियां;
- लाभ के लिए ऊपरी सीमा।
CFD बनाम फ्यूचर्स
CFD ट्रेडिंग की तुलना फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की खरीदारी से करते समय, कई बातों का उल्लेख किया जाना चाहिए:
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस के फ़ायदे:
- न्यूनतम मार्जिन की शर्तें;
- असीमित लीवरेज;
- कोई कमीशन और टैक्स नहीं;
- शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खोलने की सुविधा;
- हेजिंग की संभावना;
- उच्च तरलता;
- कॉन्ट्रैक्ट की कोई समय सीमा नहीं है।
फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के फ़ायदे:
- अंतर्निहित एसेट को हेज करने की संभावना;
- कानून के अनुसार सख्ती से अनुपालन;
- शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खोलने की सुविधा;
- कॉन्ट्रैक्ट के तहत दायित्वों की गारंटीकृत पूर्ति।
CFD बनाम ऑप्शन
CFD ट्रेडिंग की तुलना ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की खरीदारी से करते समय, कई बातों का उल्लेख किया जाना चाहिए:
पहली बात, अगर CFD का अस्तित्व नहीं होता, तो ऑप्शन इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय साधन होता।
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस के फ़ायदे:
- न्यूनतम मार्जिन की शर्तें;
- असीमित लीवरेज;
- कोई कमीशन और टैक्स नहीं;
- शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खोलने की सुविधा;
- हेजिंग की संभावना;
- उच्च तरलता;
- कॉन्ट्रैक्ट की कोई समय सीमा नहीं है।
ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के फ़ायदे:
- अंतर्निहित एसेट की बहुत सस्ती हेजिंग की संभावना;
- कानून के अनुसार सख्ती से अनुपालन;
- कॉन्ट्रैक्ट को बेचने और खरीदने की सुविधा;
- कॉन्ट्रैक्ट के तहत दायित्वों के प्रदर्शन की गारंटी;
- सभी एक्सचेंज इंस्ट्रूमेंट में सबसे बेहतरीन अंतर्निहित हानि सीमित करने की प्रणाली।
ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के नुकसान:
- कम लिक्विडिटी;
- कृपया ध्यान दें! बाइनरी ऑप्शन ट्रेडिंग एक अनियमित शैडो OTC-मार्केट है। धोखाधड़ी करने वाले वित्तीय सेवा प्रदाताओं से सामना होने की संभावना ज़्यादा है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, मैं यह बताना चाहूंगा कि CFD ट्रेडिंग नए और उन ट्रेडर के लिए बढ़िया विकल्प है, जिनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है। मौजूदा पोर्टफोलियो में बड़ी मात्रा में फंड रखने वाले ट्रेडर अपर्याप्त कानूनी विनियमन और लीवरेज के उपयोग से जुड़े वित्तीय हानि के उच्च जोखिम के कारण अंतर्निहित एसेट को खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं।
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) चुनते समय, CFD कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। बेहतर जोखिम प्रबंधन योजना के बिना, रिटेल CFD ट्रेडर को तेजी से वित्तीय हानि हो सकती है। अगर आप कम शुल्क और कम लागत का विकल्प चुनने का फैसला करते हैं, तो CFD ज़्यादातर अन्य ट्रेडिंग विधियों के लिए बेहतरीन विकल्प है।
फिर भी, ध्यान रखें कि किसी भी ट्रेडर के लिए सफलता का एकमात्र मापदंड सिर्फ़ लाभ की राशि है और चुनी गई वित्तीय साधन की कोई प्रासंगिकता नहीं है।
काफी बातें हो चुकी हैं, अब काम या जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने का वक्त है। मैं आपको शुभकामनाएं देता हूं। अगर आपके कोई सवाल पूछना चाहते हैं, तो बेहिचक पूछें, मुझे उसका जवाब देने में खुशी होगी!
CFD ट्रेडिंग से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
CFD या कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस दो पार्टी (विक्रेता और खरीदार) के बीच एक विशेष समझौता है, जिसमें वे ट्रेडिंग खोलने के समय अंतर्निहित एसेट की निपटान कीमत और उसे बंद करने के समय के कीमत के बीच का अंतर स्थानांतरित करते हैं। CFD जटिल वित्तीय साधन है, जिसका सुझाव नए लोगों को नहीं दिया जाता है। निवेशकों को हमेशा यह जानकारी होनी चाहिए कि CFD ट्रेडिंग में जोखिम शामिल है और सफलता की कोई गारंटी नहीं है। CFD खाते से तेजी से वित्तीय हानि होने से बचाने के लिए, खुद को लगातार शिक्षित करना और इस जटिल वित्तीय साधन से ट्रेडिंग का अभ्यास करना ज़रूरी है।
CFD ट्रेडिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करके एक्सचेंज पर लेनदेन किया जाता है। CFD ट्रेडर अंतर्निहित एसेट के निपटान कीमत में अंतर के लिए अनुबंध समाप्त करते हैं। एसेट स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी या स्टॉक इंडेक्स CFD हो सकती है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत अंतर्निहित एसेट का कोई वास्तविक स्वामित्व नहीं होता। यह याद रखना ज़रूरी है कि ज़्यादातर CFD ट्रेड में वित्तीय हानि का ज़्यादा जोखिम होता है। इसलिए इस क्षेत्र में जानकारी हासिल करना और इन जटिल वित्तीय साधन के साथ ट्रेडिंग का अभ्यास करना ज़रूरी है।
फॉरेक्स पर CFD अलग-अलग एक्सचेंज पर ट्रेडिंग अकाउंट रजिस्टर किए बिना ही विभिन्न ट्रेडों के लिए कॉन्ट्रैक्ट का एक्सेस देते हैं। फॉरेक्स ब्रोकर सिर्फ ट्रेडिंग अकाउंट का इस्तेमाल करके अलग-अलग वित्तीय साधन में ट्रेड करने का अवसर उपलब्ध कराते हैं।
CFD जटिल वित्तीय साधन है, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कानूनी प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है, जिससे अलग-अलग देशों के नागरिक अन्य वित्तीय क्षेत्रों की प्रतिभूतियों में लेन-देन नहीं कर पाते। इसके अलावा, कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस उन कंपनियों के शेयरों को खरीदने का बहुत ही सस्ता तरीका है, जिन्हें खरीदने के लिए निवेशक के पास पर्याप्त धन नहीं होता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि CFD जोखिम भरा निवेश हैं और आवश्यक कौशल और अनुभव के बिना आपके रिटेल इनवेस्टर अकाउंट से तेज़ी से वित्तीय हानि हो सकती है।
हां। CFD में मानकीकृत कॉन्ट्रैक्ट वॉल्यूम फॉरमेशन सिस्टम का इस्तेमाल लिए किया जाता है, जिसे लॉट कहा जाता है। स्टॉक CFD के लिए न्यूनतम लॉट आमतौर पर 1 होता है। यह एक स्टॉक के बराबर होता है। ऐसे लेन-देन में, आपका लीवरेज 1:1 होगा। लीवरेज का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग करने में ज़्यादा जोखिम होता है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। CFD ट्रेडर्स के पास जल्दी से ज़्यादा पैसे कमाने की क्षमता होती है, लेकिन उन्हें लीवरेज और अनुभव की कमी के कारण तेज़ी से वित्तीय हानि होने की संभावना का भी सामना करना पड़ता है। इन ट्रेड में निहित जोखिमों के बारे में हमेशा जागरूक रहना ज़रूरी है और लीवरेज का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग करते समय, रिटेल इनवेस्टर अकाउंट को वित्तीय हानि से बचाना चाहिए।
कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस का इस्तेमाल करके किसी वास्तविक एसेट में ट्रेड की हेजिंग करने के लिए, आपको उस एसेट में अंतर्निहित एसेट में ट्रेड के विपरीत दिशा में CFD ट्रेड खोलने की खोलने की ज़रूरत होती है। अगर आपने अंतर्निहित एसेट खरीदा है, तो आपको उसी वॉल्यूम में CFD के साथ शॉर्ट पोजीशन खोलने की ज़रूरत होती है। अगर आपने अंतर्निहित एसेट बेचा है, तो CFD ट्रेड एक खरीद स्थिति होनी चाहिए।
फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और CFD के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर कॉन्ट्रैक्ट की अवधि है। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति तिथि होती है, जिसके बाद, फिर से कॉन्ट्रैक्ट करना पड़ेगा। CFD की कोई समाप्ति तिथि नहीं होती है और इसे किसी भी समय अवधि के लिए समाप्त किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखें कि इन दोनों साधनों में अपेक्षाकृत उच्च ट्रेडिंग जोखिम होता है और आपके निवेशकों को तब तक वित्तीय हानि हो सकती है, जब तक कि आपके पास ट्रेडिंग से जुड़ी कुशल रणनीति और जोखिम प्रबंधन योजना न हो।
फ़ॉरेक्स बाज़ार में CFD पर फ़ॉरेक्स पेयर के समान ही कर लगाया जाता है। दूसरे शब्दों में, अगर ब्रोकर विदेश में हैं, तो ग्राहक कर एजेंट होते हैं और अपने विवेक से करों का भुगतान करने का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफ़रेंस (CFD) में कोई अन्य कर देने की ज़रूरत नहीं होती है।
किसी भी अन्य ट्रेडर की तरह, CFD ट्रेडर भी ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति का सख्ती से पालन करके सफलता हासिल करते हैं। अगर कोई ट्रेडर अपने नियमों का पालन करते हैं, तो सफलता जल्दी ही मिल जाएगी। अन्य सभी विकल्प से निवेशकों को वित्तीय हानि हो सकती है। ऐसा लीवरेज, अनुभव की कमी और जोखिम प्रबंधन ठीक से नहीं होने के कारण हो सकता है।
CFD आधिकारिक मानकीकृत कॉन्ट्रैक्ट है और इसलिए यह फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजेक्शन या किसी अन्य डेरिवेटिव पर लागू होने वाले सभी कानूनी प्रावधानों के अधीन है।
ग्राहकों को CFD प्रदान करने वाले ब्रोकर के अधिकार क्षेत्र के अनुसार CFD ट्रेडिंग की सुरक्षा की गारंटी मिलती है। ब्रोकर की विश्वसनीयता जितनी ज़्यादा होगी, CFD ट्रेडिंग उतनी ही सुरक्षित होगी। CFD ट्रेडिंग सुरक्षित हो सकती है, लेकिन ट्रेडिंग से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने से पहले सभी प्रासंगिक जानकारी की विस्तार से जांच और मूल्यांकन करना बहुत ज़रूरी है। अगर वे इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो लीवरेज के कारण तेजी से वित्तीय हानि होने से रिटेल इनवेस्टर की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। CFD ट्रेडिंग के लिए उतार-चढ़ाव वाले बाजारों, ठोस जोखिम प्रबंधन सिद्धांतों और संबंधित जोखिमों की व्यापक समझ की ज़रूरत होती है, अन्यथा, आप खुद को ऐसी स्थिति में पा सकते हैं, जहां आपके निवेशक को वित्तीय हानि हो सकती है।
हां। ये वित्तीय बाजारों के लिए CFD हैं। उदाहरण के तौर पर, विदेशी कंपनियों के शेयर तब तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते, जब तक कि आप शेयर जारी करने वाले देश के नागरिक न हों।
मार्जिन लेंडिंग के कारण, CFD को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में निवेश के लिए सबसे बढ़िया विकल्प माना जाता है। उदाहरण के तौर पर, LiteFinance ब्रोकर के ज़रिए विदेशी कंपनियों के स्टॉक पर CFD की ट्रेडिंग करने पर अंतर्निहित एसेट की कुल कीमत का सिर्फ़ 2% मार्जिन उपलब्ध होता है। 112 डॉलर की कीमत का Apple कंपनी का शेयर खरीदने के लिए आपको सिर्फ़ 2.25 डॉलर की ज़रूरत होती है। हालांकि, अगर आपके पास पर्याप्त कौशल और अनुभव नहीं है, तो मार्जिन का इस्तेमाल करके CFD की ट्रेडिंग करते समय, आपको वित्तीय हानि हो सकती है।
स्प्रेड बेट और CFD जटिल वित्तीय साधन है, जिनका इस्तेमाल वैश्विक बाजारों में पोजीशन का लाभ उठाने के लिए किया जा सकता है। CFD के काम करने का तरीका स्प्रेड बेट के काम करने के तरीके से अलग है। स्प्रेड बेट अनिवार्य रूप से डेरिवेटिव ट्रेडिंग का एक रूप है, जिससे आप किसी प्रतिभूति या एसेट की भावी कीमत का अनुमान लगा सकते हैं। इसमें अंतर्निहित एसेट का स्वामित्व लेना शामिल नहीं है, यह केवल कीमत के उतार-चढ़ाव पर दांव लगाने पर केंद्रित होता है। दूसरी ओर, CFD ट्रेडर को अन्य तरीकों की तुलना में उनकी व्यापारिक गतिविधियों में अधिक विकल्प और अनुकूलनशीलता प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें अपने दृष्टिकोण के आधार पर अंतर्निहित बाजार में ‘लॉन्ग’ या ‘शॉर्ट’ पोजीशन लेने की अनुमति मिलती है। स्प्रेड बेट और CFD के बीच एक और महत्वपूर्ण अंतर यह है कि स्प्रेड बेट से होने वाले लाभ कर मुक्त होते हैं, जबकि कुछ न्यायिक क्षेत्रों में CFD ट्रेडिंग से होने वाले लाभों पर पूंजीगत कर लगाया जाता है।
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