फॉरेक्स ट्रेडिंग में डायवर्जेंस काफ़ी आम टेक्निकल एनालिसिस सिग्नल होते हैं। ये शुरुआती फॉरेक्स सिग्नल माने जाते हैं, जिससे ट्रेंड में उतार-चढ़ाव का संकेत मिलता है और गलत सिग्नल्स को फ़िल्टर करने में मदद मिलती है। इस लेख में आपको कन्वर्जेंस और डायवर्जेंस से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी।

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इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:


ट्रेडिंग में डायवर्जेंस क्या है: परिभाषा और इसका मतलब

फॉरेक्स डायवर्जेंस को उस स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है, जब किसी एसेट की कीमत ऑसिलेटर जैसे किसी तकनीकी इंडीकेटर की विपरीत दिशा में बढ़ रही होती है।

उदाहरण के तौर पर, एसेट की कीमत ऊपर की ओर बढ़ रही है, लेकिन ऑसिलेटर की रेखा विपरीत दिशा में नीचे जा रही है। इसकी विपरीत स्थिति को फॉरेक्स डायवर्जेंस कहा जाता है।

आइए EURUSD चार्ट पर फॉरेक्स डायवर्जेंस का उदाहरण देखते हैं।

​लाइटफाइनेंस: ट्रेडिंग में डायवर्जेंस क्या है: परिभाषा और इसका मतलब

आप चार्ट से देख सकते हैं कि अगली उच्चतम कीमत को नीली रेखा से दिखाया गया है। यह पिछली उच्चतम कीमत से ज़्यादा है। यहां MACD का इस्तेमाल फॉरेक्स डायवर्जेंस इंडीकेटर की तरह किया जाता है। लेकिन MACD इंडीकेटर से नीचे की ओर जाने का संकेत मिलता है। आप देख सकते हैं कि फॉरेक्स डायवर्जेंस इंडीकेटर का हिस्टोग्राम धीरे-धीरे जीरो के पास आ रहा है। यह संकेत सही साबित होता है, क्योंकि इसकी कीमत नीचे की ओर जाती है। यह साधारण बियरिस डायवर्जेंस का उदाहरण है, जिसे निगेटिव डायवर्जेंस भी कहा जाता है। निगेटिव डायवर्जेंस तब बनता है, जब अंतर्निहित प्रतिभूति नए उच्च स्तर पर पहुंच जाती है, लेकिन इंडीकेटर नया उच्च स्तर दर्ज करने में विफल रहता है और निम्न उच्च स्तर बनाता है।

डायवर्जेंस के ट्रेडिंग से जुड़े सिग्नल

आइए हम सभी संभावित प्रकार के डायवर्जेंस सिग्नल के बारे में जानें और चार्ट में उनके उदाहरणों का विश्लेषण करें।

हालांकि डायवर्जेंस आसान सा सिग्नल है, फिर भी कई लोग फॉरेक्स डायवर्जेंस ट्रेडिंग को लेकर उलझन में रहते हैं। इसका वजह यह है कि डायवर्जेंस अलग-अलग प्रकार और श्रेणियों में बंटे होते हैं।

सामान्य तौर पर, डायवर्जेंस निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

  1. नियमित (आसान)/छिपा हुआ/विस्तारित;
  2. तेजी बनाम मंदी;
  3. निगेटिव/पॉजिटिव
  4. डायरेक्ट/रिवर्स;
  5. डायवर्जेंस/कन्वर्जेंस.

इसके पांच उप-प्रकार होते हैं! इतनी विविधता देखकर प्रोफेशनल ट्रेडर भी कभी-कभी कन्फ्यूज़ हो जाते हैं। लेकिन सच कहें तो, डायवर्जेंस ट्रेडिंग करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना लगता है!

डबल टॉप और डबल बॉटम

सभी तरह के फॉरेक्स डायवर्जेंस को समझने के लिए, हमें सबसे पहले मार्केट में डायवर्जेंस की पहचान करने के तरीके के बारे में जानना होगा। डायवर्जेंस का प्रकार चाहे जो भी हो, सभी सिग्नल तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित होते हैं:

1. मुख्य विशेषता तब होती है, जब प्राइस चार्ट में डबल टॉप या डबल बॉटम पैटर्न दिखता है।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

दूसरे शब्दों में कहें तो, चार्ट में दो उच्च या निम्न स्तर होने चाहिए।

अहम जानकारी! ट्रेंडिंग मार्केट में उच्चतम सीमाएं दिखनी चाहिए।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

ऊपर वाले चार्ट में डबल टॉप नहीं है। उच्चतम स्तर साफ़-साफ़ दिखाई नहीं दे रहे। इसलिए कोई डायवर्जेंस सिग्नल नहीं है।

2. किसी भी डायवर्जेंस की पहचान सिर्फ़ प्राइस चार्ट में निम्नतम या उच्चतम स्तर और डायवर्जेंस इंडीकेटर के हिसाब से ही की जाती है।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

उपरोक्त चार्ट में डायवर्जेंस की सही व्याख्या दिखाई गई है। लाइन प्राइस चार्ट पर बने डबल टॉप के स्थानीय उच्च स्तर और डायवर्जेंस इंडिकेटर के संबंधित उच्च स्तर को आपस में जोड़ती है।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

ऊपर वाला चार्ट फॉरेक्स डायवर्जेंस की गलत व्याख्या का उदाहरण है। इसमें प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर की तुलना इंडीकेटर के निम्नतम स्तर के साथ गलत तरीके से की गई है।

3. प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर और इंडीकेटर के उच्चतम स्तर आपस में मेल खाने चाहिए।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

ऊपर वाला चार्ट डायवर्जेंस का सही विश्लेषण दिखाता है। यहां इंडिकेटर के उच्चतम स्तर प्राइस चार्ट पर बने डबल टॉप के उच्चतम स्तर से मेल खाते हैं।

​लाइटफाइनेंस: डबल टॉप और डबल बॉटम

उपरोक्त चार्ट उस स्थिति को दिखाता है, जब प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर और इंडीकेटर के उच्चतम स्तर समय के हिसाब से मेल नहीं खाते। यह बड़ी गलती है।

डायवर्जेंस फॉरेक्स ट्रेडिंग के प्रकार के बारे में पूरी जानकारी

आप प्राइस चार्ट में डायवर्जेंस की आसानी से पहचान कर सकते हैं। आइए अब फॉरेक्स ट्रेडिंग में डायवर्जेंस के अलग-अलग प्रकारों पर नजर डालें। आम तौर पर, डायवर्जेंस के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं: रेगुलर डायवर्जेंस (क्लासिकल या सामान्य डायवर्जेंस भी कहा जाता है), हिडन डायवर्जेंस, और एक्सटेंडेड (रिवर्स) डायवर्जेंस।

​​​लाइटफाइनेंस: डायवर्जेंस फॉरेक्स ट्रेडिंग के प्रकार के बारे में पूरी जानकारी

उपरोक्त तालिका में मूल डायवर्जेंस को दिखाया गया है। आप देख सकते हैं कि हरेक डायवर्जेंस टाइप को तेजी और मंदी (नेगेटिव और पॉजिटिव) में बांटा गया है। सामान्य, रेगुलर डायवर्जेंस से रुझान में उलटफेर होने का संकेत मिलता है। अन्य प्रकार के रेगुलर डायवर्जेंस (हिडन डायवर्जें, और एक्सटेंडेड डायवर्जेंस) से रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है, इन्हें रिवर्स डायवर्जेंस भी कहा जाता है। कई लोग कन्वर्जेंस और डायवर्जेंस को लेकर भ्रमित होते हैं। आइए इन अवधारणाओं को स्पष्ट करें। डायवर्ज का मतलब अलग-अलग होना होता है। व्यापारिक शब्दों में, इसका अर्थ कीमत के रुझान और इंडीकेटर में कोई भी विचलन है।

कन्वर्जेंस, डायवर्जेंस का विपरीत है। कन्वर्जेंस शब्द लैटिन शब्द ‘convergo’ से लिया गया है, जिसका अर्थ करीब आना होता है। इसलिए, कन्वर्जेंस तब होता है, जब प्राइस ट्रेंड और इंडीकेटर लाइन आपस में मिलते हैं।

नियमित डायवर्जेंस

नियमित डायवर्जेंस बेहतर रिवर्सल सिग्नल होता है।

​​​लाइटफाइनेंस: नियमित डायवर्जेंस

बुलिश डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए, आपको प्राइस चार्ट पर बने निम्नतम स्तर और इंडीकेटर के अनुसार दर्ज निम्नतम स्तर का विश्लेषण करना होगा। प्राइस चार्ट को निम्नतम स्तर पर पहुंचना चाहिए, लेकिन इंडीकेटर को उच्चतर निम्न स्तर (तालिका के बाईं ओर देखें) दिखाना चाहिए।

​लाइटफाइनेंस: नियमित डायवर्जेंस

चार्ट में नीली रेखाएं नियमित बुलिस कन्वर्जेंस को दिखाती हैं। कीमत निचले निचले स्तर पर पहुंचकर डबल बॉटम पैटर्न बनाती है, लेकिन MACD उच्चतर निम्न स्तर दिखाता है। ट्रेडिंग में, ऐसा नियमित डायवर्जेंस सिग्नल से मंदी वाले रुझान में तुरंत उलटफेर होने का संकेत मिलता है।

नियमित डायवर्जेंस बियरिस की पहचान करने के लिए, आपको प्राइस चार्ट के उच्चतम स्तर और इंडीकेटर के अनुसार दिखाए गए उच्चतम बिंदुओं का विश्लेषण करना चाहिए। कीमत को उच्चतम स्तर पर बना रहना चाहिए, लेकिन इंडीकेटर के उच्चतम धीरे-धीरे कम हो रहे हैं (तालिका के दाईं ओर देखें)। नियमित बियरिस डायवर्जेंस से यह संकेत मिलता है कि तेजी का रुझान जल्द ही नीचे की ओर जाएगा, इसलिए कोई भी शॉर्ट ट्रेड में प्रवेश कर सकता है।

​लाइटफाइनेंस: नियमित डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट नियमित मंदी के विचलन को दिखाता है। सिक्योरिटी की कीमत नए उच्च स्तर पर पहुंचती है, लेकिन MACD हिस्टोग्राम पिछले उच्च स्तर को तोड़ने में विफल रहता है। इसलिए, कीमत का रुझान जल्द ही नीचे की ओर मुड़ना चाहिए।

हिडन डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स: कन्वर्जेंस

हिडन डायवर्जेंस फॉरेक्स, नियमित डायवर्जेंस का उल्टा होता है; इससे रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है।

​​​लाइटफाइनेंस: हिडन डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स: कन्वर्जेंस

हिडन बुलिश डायवर्जेंस तब होता है, जब कीमत उच्च निम्न स्तर पर होती है, जबकि इंडीकेटर निम्नतम स्तर को दिखाता है। ऊपरी रुझान में हिडन डायवर्जेंस बुलिश सिग्नल दिखता है और इससे रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है। ऊपर दी गई तालिका के बाईं ओर हिडन डायवर्जेंस का उदाहरण दिखाया गया है।

​लाइटफाइनेंस: हिडन डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स: कन्वर्जेंस

प्राइस चार्ट पर ऊपर नीली रेखा से जुड़े निम्नतम स्तर लगातार ऊपर की ओर जा रहे हैं। MACD निम्नतम स्तर धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। इसलिए, हिडेन डायवर्जेंस का अर्थ है कि रुझान जारी है।

हिडन बियरिस डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए, हमें प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर का विश्लेषण करना होगा। गिरावट के बाद, कीमत निम्नतम उच्च स्तर पर पहुंच रही है, जबकि MACD उच्चतम स्तर तक पहुंच रहा है। डाउनट्रेंड में हिडन बियरिस डायवर्जेंस दिखता है; इसका मतलब है कि अपेक्षित रिवर्सल गलत है और रुझान संभवतः जारी रहेगा। इसे संदर्भ तालिका के दाईं ओर दिखाया गया है।

​लाइटफाइनेंस: हिडन डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स: कन्वर्जेंस

उपरोक्त चार्ट हिडन बियरिस डायवर्जेंस को दिखाता है। प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर लगातार नीचे जा रहे हैं, जबकि MACD के उच्चतम स्तर ऊपर जा रहे हैं। इसलिए, रुझान ऊपर की ओर नहीं गया है। गिरावट का रुझान जारी है।

एक्सटेंडेड डायवर्जेंस

एक्सटेंडेड डायवर्जेंस फॉरेक्स, हिडन डायवर्जेंस से मिलता-जुलता है। लेकिन, एक्सटेंडेड डायवर्जेंस अक्सर मूल नियमों का पालन नहीं करती, क्योंकि यह आमतौर पर साइडवेज ट्रेंड में दिखता है। इसमें प्राइस चार्ट पर स्पष्ट उच्चतम या निम्नतम स्तर नहीं दिखते। कई ट्रेडर्स इसे ट्रेडिंग सिग्नल के रूप में नहीं मानते और इसलिए इसे ट्रेडिंग के लिए भरोसेमंद नहीं माना जाता है।

​​​लाइटफाइनेंस: एक्सटेंडेड डायवर्जेंस

एक्सटेंडेड बुलिश डायवर्जेंस के साथ निम्नतम स्तर भी बढ़ता है। बियरिश डायवर्जेंस में, उच्च स्तर नीचे की ओर बढ़ते हैं। आइए तालिका में इसका उदाहरण देखें।

​लाइटफाइनेंस: एक्सटेंडेड डायवर्जेंस

उपरोक्त चित्र MACD इंडीकेटर पर एक्सटेंडेड बुलिश डायवर्जेंस को दिखाता है। प्राइस चार्ट पर बने निम्नतम बिंदु लगभग बराबर हैं (थोड़ा विचलन स्वीकार्य है)। हालांकि, MACD का दूसरा निम्नतम स्तर पहले वाले से ज्यादा है। इस डायवर्जेंस से तेजी के रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है।

​लाइटफाइनेंस: एक्सटेंडेड डायवर्जेंस

बियरिस डायवर्जेंस की पहचान भी इंडीकेटर के डेटा के आधार पर की जाती है; MACD निम्नतम उच्च स्तर को दिखाता है। इसका मतलब है कि कीमत में गिरावट होती रहेगी, इसलिए इस समय शॉर्ट पोजिशन लिया जा सकता है।

उपरोक्त EURUSD चार्ट एक्सटेंडेड बियरिस डायवर्जेंस MACD को दिखाता है, जिससे पता चलता है कि गिरावट जारी है। इसमें मामूली विचलन हो सकता है, लेकिन पहले और दूसरे चार्ट में उच्चतम स्तर लगभग बराबर है। संकेत साइडवेज ट्रेंड में दिखता है। यह एक्सटेंडेड डायवर्जेंस की खास विशेषता है।

डायवर्जेंस ट्रेड करते समय अक्सर होने वाली गलतियां

नए ट्रेडर्स अक्सर इंटरनेट पर डाइवर्जेंस के बारे में गलत जानकारी देखते हैं। नीचे मैं डाइवर्जेंस ट्रेड करते समय होने वाली सबसे आम गलतियों पर बात करूंगा:

1. कई फॉरेक्स ट्रेडिंग वेबसाइट पर मैंने देखा कि लेखक डाइवर्जेंस की गलत तरीके से पहचान करते हैं। वे सुझाव देते हैं कि अगर इंडीकेटर ऊपर की ओर बढ़ रहा है, तो इंडीकेटर के उच्चतम स्तर खींची गई रेखा वास्तविक उच्चतम बिंदु को दिखा रही है। इसी आधार पर वे प्राइस चार्ट में उच्चतम स्तर को उस लाइन से जोड़ देते हैं। इसी तरह, डाउनट्रेंड में जब इंडीकेटर के उच्चतम स्तर ज़ीरो लाइन के नीचे होते हैं, तो वे प्राइस चार्ट में निम्नस्तर को जोड़ते हैं। दूसरे शब्दों में, उनका मानना है कि अगर इंडीकेटर गिरावट दिखा रहा है, तो निम्नस्तर को जोड़ना चाहिए; और अगर बढ़ोतरी दिखा रहा है, तो उच्च स्तर को जोड़ना चाहिए।

ध्यान रहे! डाइवर्जेंस ट्रेड करते समय हमेशा प्राइस चार्ट से ही शुरुआत करनी चाहिए। सबसे पहले प्राइस चार्ट पर उच्चतर स्तर, आदर्श रूप से, डबल टॉप या डबल बॉटम की पहचान करते हैं। इसके बाद इंडीकेटर के डेटा को देखें और डाइवर्जेंस की पहचान करें।

2. दूसरी सबसे आम गलती तब होती है, जब ट्रेडर्स सिर्फ इंडीकेटर के आसन्न उच्च स्तर को जोड़कर डायवर्जेंस की पहचान लेते हैं। लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उच्चतम स्तर एक ही ट्रेंड में हैं या नहीं।

अहम जानकारी! असली डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए, आपको सिर्फ उसी ट्रेंड के अंदर प्राइस चार्ट पर बने उच्चतर स्तर की तुलना करनी होती है।

3. कुछ ट्रेडर्स सोचते हैं कि अगर इंडीकेटर चार्ट में लाइन ऊपर की ओर बढ़ रही है (उच्चतम स्तर दिखा रहा है) और प्राइस चार्ट में लाइन नीचे की ओर बढ़ रही है (कीमत घट रही है), तो इसे कन्वर्जेंस कहा जा सकता है। लेकिन यह गलत है। असल में, यह गलत डायवर्जेंस का एक और उदाहरण है।

ध्यान रखें! डायवर्जेंस का निर्धारण प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम और निम्नतम स्तर और इंडीकेटर के डायवर्जेंस /कन्वर्जेंस के अनुसार होता है, न कि उनकी रेखाओं की दिशा के अनुसार होता है।

4. कई ट्रेडर्स यह गलती भी करते हैं कि वे प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर और इंडीकेटर के अनुसार निम्नतम स्तर के डायवर्जेंस का सही तरीके से विश्लेषण नहीं करते।

5. अगर आपको कोई डायवर्जेंस दिखे, तो यह पक्का करें कि इंडीकेटर का उच्चतम स्तर और प्राइस चार्ट पर उच्चतम स्तर एक ही समय पर बन रहा है। आपको अलग-अलग समय पर होने वाले उच्चतम स्तर का विश्लेषण नहीं करना चाहिए!

6. डायवर्जेंस से शुरुआती संकेत मिलता है, लेकिन इसमें गलत सिग्नल भी बहुत होते हैं। सिर्फ डायवर्जेंस के भरोसे ट्रेड करना बड़ी गलती है!

7. कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद होने वाले विचलन(डायवर्जेंस) पर ध्यान न दें। वे ज़रूर कारगर रहे होंगे और ज़्यादातर गलत होते हैं। आपको पिछले डायवर्जेंस पर ट्रेड नहीं करना चाहिए।

8. अक्सर लोग ये गलती करते हैं कि डायवर्जेंस को सिर्फ ट्रेंड बदलने का सिग्नल मानते हैं। जबकि यह डायवर्जेंस के टाइप पर निर्भर करता है। इससे रुझान में उलटफेर होने और रुझान के जारी रहने दोनों का संकेत मिल सकता है।

अगर आप इस लेख को शुरू से पढ़ रहे हैं, तो आप अब तक खुद डायवर्जेंस सिग्नल की पहचान करना जान चुके होंगे। अभी अपना ट्रेडिंग टर्मिनल खोलें और खुद डायवर्जेंस की पहचान करने की कोशिश करें। आपको किस तरह का डायवर्जेंस मिला है? इससे क्या पता चलता है? इसके बाद, गलतियों की सूची पर वापस जाएं और यह पक्का करें कि आप उन्हें दोहराएंगे नहीं। सिद्धांत को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका अभ्यास है।

डायवर्जेंस और उसकी पुष्टि

इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि डायवर्जेंस तब होता है, जब प्राइस चार्ट और इंडिकेटर अलग-अलग दिशाओं में चलते हैं। अपने प्रकार के आधार पर, डायवर्जेंस से रुझान में उलटफेर या रुझान के जारी रहने का संकेत मिल सकता है। डायवर्जेंस की मुख्य विशेषता यह है कि यह प्रमुख संकेत है। इसकी असली पुष्टि बाद में होती है, जब मार्केट उसी हिसाब से चलता है। सामान्यतः, कोई भी इंडीकेटर सिग्नल, प्राइस एक्शन, चार्ट या वेव पैटर्न से कीमत में उतार-चढ़ाव या प्रमुख डायवर्जेंस सिग्नल की सत्यता की पुष्टि होती है, उसे पुष्टिकरण माना जा सकता है।

डायवर्जेंस और रिवर्सल

ट्रेडिंग में रिवर्सल तब होता है, जब कीमत अचानक विपरीत दिशा की ओर बढ़ने लगती है। तकनीकी विश्लेषण में, रिवर्सल ज़रूरी होता है, क्योंकि ट्रेडर्स किसी नए ट्रेंड से मुनाफा कमा सकते हैं। डायवर्जेंस के बाद रिवर्सल तब हो सकता है, जब इंडीकेटर से बाज़ार के रुझान में बदलाव का संकेत मिलता है। इसके अलावा, किसी अहम स्तर पर पहुंचने के बाद या कीमत ट्रेंड लाइन पार करने पर भी रिवर्सल हो सकता है।

यह ध्यान देना ज़रूरी है कि डायवर्जेंस प्रमुख संकेत है, जबकि पुष्टिकरण और रिवर्सल से मौजूदा बाजार की स्थिति के बारे में पता चलता है।

डायवर्जेंस सिग्नल पर ट्रेडिंग करना

ठीक है, हमने इस थ्योरी का अध्ययन कर लिया है। आइए अब अलग-अलग वित्तीय बाजारों में व्यावहारिक रूप से डायवर्जेंस सिग्नल पर ट्रेडिंग करने के बारे में नजर डालते हैं।

नियमित बियरिस डायवर्जेंस

सामान्य बियरिस डायवर्जेंस आमतौर पर रुझान के संभावित समाप्ति पर बनता है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसी स्थिति को इस तरह समझाते हैं कि रुझान समाप्त होने के करीब है।

​लाइटफाइनेंस: नियमित बियरिस डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट बियरिस डायवर्जेंस दिखाता है। इसे नीली रेखाओं से दिखाया गया है। आप देख सकते हैं कि रुझान में जल्द ही उलटफेर हो सकता है, लेकिन हमें पुष्टि करने वाला सिग्नल चाहिए। एंट्री पॉइंट तय करने के लिए, हम उस सिग्नल का इस्तेमाल करेंगे, जब ट्रेंडलाइन (डार्क-ग्रीन लाइन) पार जाए। जब रिवर्सल बार ट्रेंड के नीचे बंद होता है, तो हम शॉर्ट ट्रेड शुरू करते हैं। मैंने एंट्री पॉइंट को नीले रंग से दिखाया है।

हम स्टॉप-लॉस को अगले स्थानीय उच्च स्तर (लाल लाइन) से थोड़ा ऊपर सेट करते हैं। प्रॉफिट फिक्स करने के लिए, हम टेक-प्रॉफिट लगाते हैं। यह स्टॉप-लॉस (हरी लाइन) से दोगुना होता है। जैसे ही कीमत में गिरावट आती है, हम मुनाफा कमा लेते हैं।

नियमित बुलिस डायवर्जेंस

नियमित बुलिश डायवर्जेंस बढ़िया रिवर्सल सिग्नल है। बियरिस डायवर्जेंस की तरह ही हमें एंट्री सिग्नल के लिए ट्रेंडलाइन ब्रेकआउट का इस्तेमाल करना चाहिए।

​लाइटफाइनेंस: नियमित बुलिस डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट बढ़िया बुलिश डायवर्जेंस सिग्नल दिखा रहा है। कीमत नीचे की ओर बढ़ती हुई (मंदी वाली) रुझान में है। कुछ समय बाद, दो लगातार नियमितबुलिश डायवर्जेंस बनते हैं। मैंने इन्हें अलग-अलग रंगों से दिखाया है। मैं इस घटना के बारे में बाद में विस्तार से समझाऊंगा। अभी के लिए, हमें सिर्फ़ इस बातको ध्यान में रखना है और इसे बेहतर रिवर्सल सिग्नल की तरह मानना चाहिए।

जब आप एंट्री पॉइंट के बारे में बताने के लिए ट्रेंडलाइन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इसे सही तरीके से खींचना आना चाहिए। हमारे उदाहरण में डाउनवर्ड ट्रेंडलाइन पहले रुझान के उच्चतम स्तर से शुरू हो आखिरी स्थानीय उच्चतम स्तर तक जाती है। पिछली उदाहरण में, बुलिश ट्रेंड में यही तरीका अपनाया गया था, लेकिन वहां ट्रेंडलाइन निम्नतम स्तर पर खींची गई थी।

आइए फिर अपने उदाहरण पर वापस आते हैं। जैसे ही पहला बार ट्रेंडलाइन के ऊपर बंद होता है, हम लॉन्ग ट्रेड में प्रवेश करते हैं। इसे चार्ट पर नीली लाइन से दिखाया गया है।

पिछले उदाहरण की तरह, हम स्टॉप लॉस को पिछले स्थानीय निम्नतम स्तर से थोड़ा नीचे लगाते हैं। टेक प्रॉफिट, स्टॉप लॉस से दोगुना होता है।

​लाइटफाइनेंस: नियमित बुलिस डायवर्जेंस

मुझे इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि स्टॉप लॉस से दोगुना मुनाफ़ा लेना हमेशा सही साबित नहीं होता। हमारी स्थिति में, हमें एक महीने तक मुनाफ़े वाले ट्रेड का इंतज़ार करना होगा। आप डायवर्जेंस सिग्नल और दूसरे इंडीकेटर और ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीतियों के आधार पर ट्रेड से बाहर निकल सकते हैं। मैं इसके बारे में थोड़ी देर बाद विस्तार से बताऊंगा।

विस्तारित बियरिस डायवर्जेंस

पिछले दो प्रकार के डायवर्जेंस के अलावा, इस संकेत से रुझान जारी रहने का पता चलता है। उलटफेर असफल होने के बाद, आप रुझान में प्रवेश करने के लिए विस्तारित बियरिस डायवर्जेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं।

​लाइटफाइनेंस: विस्तारित बियरिस डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट एक्सटेंडेड डायवर्जेंस की सामान्य स्थिति दिखाता है। इसमें विस्तारित बियरिस डायवर्जेंस है, जहां इंडीकेटर उच्चतम स्तर पर पहुंचता है, जबकि प्राइस चार्ट पर बना उच्चतम स्तर नीचे जा रहा होता है (नीली रेखाओं से दिखाया गया है)। इस सिग्नल के बाद आमतौर पर ट्रेंड का गलत रिवर्सल होता है।

एंट्री पॉइंट तय करने के लिए, हम MACD मूविंग एवरेज का इस्तेमाल करते हैं, खासकर जब ये ज़ीरो लेवल को नीचे की ओर पार करते हैं। आमतौर पर, जब MACD मूविंग एवरेज पॉजिटिव ज़ोन में जाती हैं, तो इसे ट्रेंड रिवर्सल सिग्नल माना जाता है। लेकिन, हिडन बियरिस डायवर्जेंस को ध्यान में रखते हुए, हमें उम्मीद है कि यह लेवल पार कर गया है, लेकिन यह केवल झूठा संकेत होगा और कीमत जल्द ही वापस अपनी पुरानी सीमा में लौट आएगा। इसलिए, जब इंडीकेटटर फिर से नेगेटिव ज़ोन में जाता है, तो हम शॉर्ट ट्रेड में प्रवेश करते हैं। स्टॉप-लॉस को पहले बने कन्वर्जेंस (लाल लाइन) के उच्चतम स्तर से थोड़ा ऊपर सेट किया जाता है । ऊपर के चार्ट से स्पष्ट है कि टेक-प्रॉफिट, स्टॉप-लॉस से दो गुना बड़ा है। कीमत इतनी बढ़ गई है कि हम मुनाफे के साथ ट्रेड से बाहर निकलते हैं।

विस्तारित बुलिस डायवर्जेंस

यह संकेत पिछले संकेत जैसा ही है। इससे यह भी पता चलता है कि रुझान इस बार ऊपर की ओर जारी रहेगा।

​लाइटफाइनेंस: विस्तारित बुलिस डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट से यह स्पष्ट है कि MACD हिस्टोग्राम निचले निम्न स्तर स्तर को बनाता है, जबकि प्राइस चार्ट ऊपरी रुझान को दिखाता है। मैंने विस्तारित बुलिस डायवर्जेंस को नीली रेखाओं से दिखाया है।

पिछली स्थिति की तरह, हम रुझान में गलत उलटफेर होने की उम्मीद करते हैं। MACD मूविंग एवरेज (सिग्नल लाइन से भ्रमित न हों!) कुछ समय के लिए शून्य स्तर से नीचे चला जाता है और फिर वापस आ जाता है। यह खरीदारी का संकेत है! मैंने इसे करेंसी पेयर प्राइस चार्ट पर नीले रंग से दिखाया है। हम स्टॉप लॉस को पिछले ट्रेड की तरह ही सेट करते हैं; सिर्फ़ यह प्राइस चार्ट पर बने निचले स्तर से नीचे है। स्टॉप लॉस की दूरी का दोगुना लक्ष्य काफी जल्दी हासिल हो जाता है।

गलत डायवर्जेंस सिग्नल

ट्रेडिंग में डायवर्जेंस सिग्नल के दौरान यह काफी आम स्थिति होती है। गलत सिग्नल तब होता है, जब लाइनों का मिलना या अलग होना (कन्वर्जेंस या डायवर्जेंस) उम्मीद के मुताबिक ट्रेंड बदलने या आगे बढ़ने में असर नहीं डालता।

आप तीन तरीकों से गलती होने के जोखिम को कम कर सकते हैं:

  • मनी मैनेजमेंट से जुड़े नियमों का पालन करके।
  • हरेक ट्रेड में हमेशा स्टॉप लॉस लगा करके।
  • सिग्नल फ़िल्टर करके (पूरक इंडीकेटर का इस्तेमाल करें)।

आइए तीसरे बिंदु पर विस्तार से चर्चा करें। गलत सिग्नल को फिल्टर करने के लिए आप सहायक तकनीकी टूल, प्राइस एक्शन पैटर्न और ग्राफ़िकल चार्ट पैटर्न का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए जानें कि बोलिंजर बैंड का इस्तेमाल करके गलत सिग्नल को कैसे फिल्टर किया जा सकता है।

​लाइटफाइनेंस: गलत डायवर्जेंस सिग्नल

उपरोक्त चित्र में प्राइस चार्ट और MACD हिस्टोग्राम के बीच फॉल्स डायवर्जेंस का उदाहरण दिखाया गया है। डायवर्जेंस सिग्नल के बाद, कीमत नीचे जाने लगती है और MACD मूविंग एवरेज भी नेगेटिव ज़ोन में चला जाता है। हालांकि, कीमत बोलिंजर बैंड के नीचे स्थिर नहीं रहती है, जिसका मतलब है कि कीमत ट्रेंड में होने के बजाय स्थिर होने की संभावना है। बोलिंजर बैंड रेड ज़ोन के पास आ जाते हैं, जहां कीमत विपरीत क्षेत्र में चली जाती है। इससे बियरिस रिवर्सल सिग्नल समाप्त हो जाता है।

गलत सिग्नल को फिल्टर करने के लिए आप अन्य ट्रेंड इंडीकेटर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रेंड इंडीकेटर से मिलने वाले अतिरिक्त सिग्नल अक्सर डायवर्जेंस सिग्नल्स की तुलना में ज्यादा बेहतर होते हैं।

फॉरेक्स में डायवर्जेंस ट्रेड करने के तरीके

इसलिए, डायवर्जेंस के सिद्धांत और व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल करने के बारे में जानने के बाद, हम फ़ॉरेक्स में डायवर्जेंस ट्रेडिंग के लिए चरण-दर-चरण गाइड बना सकते हैं।

डायवर्जेंस पर ट्रेडिंग करते समय जल्दी एंट्री करने से बचने के तरीके

यह पक्का करें कि आप इन तरीकों का पालन करते हैं:

  1. प्राइस चार्ट में मौजूदा रुझान की दिशा को की पहचान करें। ट्रेंडलाइन बनाएं।
  2. डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए दो लगातार उच्चतम/न्यूनतम स्तर की पहचान करें।
  3. MACD हिस्टोग्राम को प्राइस चार्ट से जोड़ें और चार्ट पर बने उच्चतम स्तर के अनुसार इंडीकेटर पर उच्चतम/न्यूनतम स्तर तय करें।
  4. अगर आपको इंडीकेटर और एसेट की कीमत के बीच डायवर्जेंस का पता चलता है, तो सिग्नल की दिशा तय करें।
  5. इसके बाद, एंट्री प्वाइंट तय करें। मैं ट्रेड में प्रवेश करने के लिए ट्रेंडलाइन के पार बंद होने वाले बार को आधार बनाने का सुझाव देता हूं।
  6. डायवर्जेंस से जुड़ी मूल रणनीति से उच्चतम उच्च/निम्नतम स्तर से कुछ दूरी पर स्टॉप लॉस निर्धारित करने का सुझाव मिलता है।
  7. मूल परिदृश्य में स्टॉप लॉस की तुलना में दोगुनी दूरी पर टेक प्रॉफिट लगाना शामिल है।

यह मूल रणनीति है, जिस पर फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग आधारित हो सकती है। यह नए ट्रेडर्स के लिए काफी अच्छा हो सकता है। खुद डायवर्जेंस ट्रेडिंग का इस्तेमाल करें। सिर्फ़ कुछ क्लिक में बिना किसी रजिस्ट्रेशन के टर्मिनल में प्रवेश करें। डायवर्जेंस की पहचान करें और अपनी ट्रेडिंग रणनीति बनाएं।

डायवर्जेंस ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट

आप जिस भी ट्रेडिंग विधि का इस्तेमाल करें, हमेशा स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट लगाएं। आप अपने ट्रेडिंग चार्ट को दिन के 24 घंटे निगरानी में नहीं रख सकते। सही समय पर सिर्फ़ इन दो टूल की मदद से ही अपना डिपॉजिट सुरक्षित रख पाएंगे और अपना मुनाफ़ा तय करने में मदद मिलेगी। अगर डायवर्जेंस सिग्नल पर ट्रेड कर रहे हैं, तो बियरिश ट्रेंड के लिए स्टॉप लॉस सबसे उच्च स्तर के ऊपर और बुलिश ट्रेंड के लिए सबसे निचले न्यूनतम स्तर के नीचे लगाएं।

​लाइटफाइनेंस: डायवर्जेंस ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट

उपरोक्त चित्र में उचित स्टॉप लॉस का उदाहरण दिखाया गया है, जिसे लाल रेखा से दिखाया गया है। यह बियरिश डायवर्जेंस है, इसलिए स्टॉप लॉस स्थानीय उच्च स्तर से थोडा ऊपर लगाया जाता है।

इनवर्स डायवर्जेंस की स्थिति में, आप स्थानीय उच्चतम स्तर के ऊपर स्टॉप लॉस लगाते हैं। यह डायवर्जेंस के अंदर होता है।

डायवर्जेंस ट्रेडिंग से यह सुझाव मिलता है कि ट्रेंड का पालन करें। इसलिए, आप किसी भी रिवर्सल सिग्नल के अनुसार ट्रेड से बाहर निकल सकते हैं। मैं नए ट्रेडर्स को यह सुझाव देता/देती हूं कि टेक प्रॉफिट को स्टॉप लॉस की दूरी से दोगुनी दूरी पर सेट करें; यह आसान और सफल ट्रेडिंग रणनीति है।

डायवर्जेंस इंडीकेटर

ट्रेडर्स अक्सर ट्रेडिंग में ऑसिलेटर डाइवर्जेंस का इस्तेमाल करते हैं। mt4 के सर्वश्रेष्ठ डाइवर्जेंस इंडीकेटर MACD, RSI, स्टोकेस्टिक, AO (ऑसम ऑसिलेटर) हैं। यह यूज़र फ्रेंडली और उपयोग में आसान है, लेकिन काफी सटीक ट्रेडिंग सिग्नल प्रदान करते हैं। आप स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर ट्रेडिंग फॉरेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी "स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर: फॉरेक्स ट्रेडिंग में इंडीकेटर का इस्तेमाल करने से जुड़ी गाइड" लेख में पा सकते हैं।

अन्य लोकप्रिय फ़ॉरेक्स डायवर्जेंस इंडीकेटर निम्नलिखित हैं:

  • चैकिन ऑसिलेटर
  • डीमार्कर;
  • मोमेंटम;
  • वॉल्यूम ऑसिलेटर

इन इंडीकेटर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

ऊपर बताए गए हरेक फ़ॉरेक्स डायवर्जेंस इंडीकेटर अलग-अलग होते हैं और उसकी अपनी विशेषताएं और सटीकता का स्तर होता है। यह खास वित्तीय बाज़ारों के लिए उपयुक्त होता है।

झे नहीं लगता कि आपको खुद को ऊपर दी गई सूची तक सीमित रखना चाहिए। डायवर्जेंस से जुड़े सिद्धांत किसी भी तकनीकी इंडीकेटर के साथ काम करता है। इसलिए, आप अपनी पसंद का कोई भी ऑसिलेटर इस्तेमाल कर सकते हैं।

MACD डायवर्जेंस

पिछले उदाहरणों में, मैंने MACD डाइवर्जेंस इंडीकेटर का इस्तेमाल किया है। MACD का मतलब मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस होता है। MACD इंडिकेटर तीन एलीमेंट से मिलकर बना होता है:

  • MACD लाइन (मुख्य लाइन) असल में स्लो EMA और फास्ट EMA के बीच का फर्क दिखाती है। इससे पता चलता है कि ट्रेंड किस दिशा में जा रहा है।
  • MACD सिग्नल लाइन - MACD लाइन का EMA।
  • MACD हिस्टोग्राम, प्राथमिक लाइन और सिग्नल लाइन के बीच का फर्क दिखाता है। इससे पता चलता है कि ट्रेंड कितना मज़बूत है।

जैसा कि मैंने ऊपर बताया है, आप डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए, हिस्टोग्राम का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप प्राथमिक MACD लाइन का इस्तेमाल कर सकते हैं। मैं नीचे दूसरे तरीके के बारे में बताऊंगा।

​लाइटफाइनेंस: MACD डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट में विकर्ण रेखाओं से MACD बुलिश डायवर्जेंस को दिखाया गया है। यह ध्यान रखें कि बुलिश और बियरिश डायवर्जेंस हमें MACD लाइन (चार्ट में नीली लाइन) के उच्चतम बिंदु से तय करना करना चाहिए, न कि सिग्नल लाइन से तय करना चाहिए। एंट्री पॉइंट मैंने नीले रंग से दिखाया है।

RSI डायवर्जेंस

RSI इंडीकेटर यानी रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स से पता चलता है कि कि मार्केट ओवरबॉट ज़ोन (जहां बहुत ज़्यादा खरीदारी हो चुकी है) या ओवरसोल्ड ज़ोन (जहां बहुत ज़्यादा बिक्री हो चुकी है) में है।। इन्हीं लेवल से हमें एंट्री और एग्ज़िट सिग्नल मिलते हैं। यह एक और मज़बूत ट्रेडिंग सिग्नल RSI डायवर्जेंस इंडीकेटर है। पिछले उदहारण की तरह, RSI में भी बुलिश और बियरिश डायवर्जेंस हो सकता है।

​लाइटफाइनेंस: RSI डायवर्जेंस

नीली रेखाओं से प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम स्तर और RSI के उच्चतम स्तर के बीच का डायवर्जेंस दिखाया गया है। इसलिए, यह बियरिस डायवर्जेंस RSI है। जब RSI रेखा ओवरबॉट ज़ोन (चार्ट में नीली क्षैतिज रेखा) से बाहर जाती है, तो मैं ट्रेड में प्रवेश करता हूं। जब RSI ओवरसोल्ड सिग्नल भेजा जाता है, तो मैं ट्रेड से बाहर निकल जाता हूं। मैंने उपरोक्त चार्ट में इस बिंदु को हरे वृत्त से दिखाया गया है। अगर आप RSI इंडीकेटर के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, तो आपको रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स - RSI इंडीकेटर पर लेख पढ़ना चाहिए।

स्टोकेस्टिक हिडन डायवर्जेंस इंडीकेटर

स्टोकेस्टिक एक और लोकप्रिय ऑस्सीलेटर है, जिसका इस्तेमाल डायवर्जेंस ट्रेडिंग में किया जाता है। इसमें दो रेखाएं होती हैं। यह अक्सर आपस में मिलती-जुलती हैं। RSI की तरह, स्टोकेस्टिक डायवर्जेंस इंडीकेटर से भी बाज़ार की ओवरबॉट ज़ोन या ओवरसोल्ड स्थिति का पता लगता है। स्टोकेस्टिक फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति डायवर्जेंस से प्राइस बार और मुख्य इंडीकेटर लाइन के बीच डायवर्जेंस और कन्वर्जेंस की पहचान करने का सुझाव मिलता है।

​लाइटफाइनेंस: स्टोकेस्टिक हिडन डायवर्जेंस इंडीकेटर

नीली विकर्ण रेखाएं सामान्य बियरिस डायवर्जेंस को दिखाती हैं। जब इंडीकेटर लाइन ओवरबॉट ज़ोन के बाहर जाती है, तो अतिरिक्त एंट्री सिग्नल मिलता है। एंट्री लेवल को नीली क्षैतिज रेखा से दिखाया गया है।

जब %K और %D स्टोकास्टिक्स मिलते हैं और इंडीकेटर, ओवरसोल्ड ज़ोन में चला जाता है, तो हम मुनाफा (हरी रेखा) कमाते हैं। इस सिग्नल को उपरोक्त चार्ट में हरे वृत्त से दिखाया गया है।

हिडन स्टोकास्टिक ऑसिलेटर डायवर्जेंस उसी नियम के अनुसार तय की जाती है, जैसा MACD और RSI की स्थिति में होता है।

​लाइटफाइनेंस: स्टोकेस्टिक हिडन डायवर्जेंस इंडीकेटर

उपरोक्त चार्ट में बुलिश डायवर्जेंस स्टोकास्टिक का उदाहरण दिखाया गया है। आप देख सकते हैं कि वही नियम MACD की तरह काम करते हैं। ऊपरी रुझान में इंडीकेटर का दूसरा निम्न स्तर पहले वाले से नीचे होता है। मैं ट्रेड में तब प्रवेश करता हूं, जब स्टोकास्टिक्स के दूसरे उच्चतम स्तर पर मिलान होने के तुरंत बाद पुष्टि करने वाली हरी बार बंद होती है। मैं स्टॉप लॉस डायवर्जेंस में सबसे निचले निम्न स्तर के नीचे सेट करता हूं। मैं ओवरबॉट ज़ोन के दूसरे रीटेस्ट पर स्टोकेस्टिक नियमों के अनुसार मुनाफ़ा कमाता हूं।। आप बाय ट्रेड तब भी बंद कर सकते हैं, जब कीमत ट्रेंडलाइन को पार करती है या फिर स्टॉप लॉस की दोगुनी दूरी पर सीधे टेक प्रॉफिट सेट कर सकते हैं।

अहम जानकारी! स्टोकास्टिक ऑसिलेटर तकनीकी विश्लेषण के लिए काफी उपयोगी टूल है। स्टोकास्टिक ट्रेडिंग गाइड की पूरी जानकारी आपको स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर लेख में मिलेगी।

ऑसम ऑसिलेटर डायवर्जेंस

ऊपर बताए गए ऑसिलेटर के अलावा, ऑसम ऑसिलेटर डायवर्जेंस इंडीकेटर हिस्टोग्राम जैसा दिखता है, न कि किसी घुमावदार रेखा जैसा दिखाई देता है। ऑसम ऑसिलेटर वाली ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति काफी हद तक MACD हिस्टोग्राम से मिलती-जुलती है।

​लाइटफाइनेंस: ऑसम ऑसिलेटर डायवर्जेंस

उपरोक्त चार्ट बियरिस डायवर्जेंस के अनुसार दर्ज EURUSD सेल ट्रेड को दिखाता है। इसके बाद, सेल ट्रेड से मुनाफा कमाकर बाहर निकला जाता है और नियमित बुलिश डाइवर्जेंस दिखाई देने पर खरीदारी की जाती है। शॉर्ट और लॉन्ग दोनों के प्रवेश स्तर को नीली क्षैतिज रेखा से दिखाया गया हैं। प्रवेश बिंदुओं पर, ऑसम ऑसिलेटर शून्य रेखा को पार करती है। मैंने प्रविष्टियों को हरे वृत्तों से दिखाया है।

AO (ऑसम ऑस्सीलेटर) की खासियत यह है कि जब इंडीकेटर ज़ीरो लाइन को पार करता है, तब संकेत मिलता है। जब AO शून्य रेखा को पार करता है, तो स्थानीय या वैश्विक ट्रेंड में बदलाव होना चाहिए। इसलिए, अगर प्राइस चार्ट पर बने उच्चतम या निम्नस्तर स्तर के बीच में AO ज़ीरो लाइन को पार कर लेता है, तो उन्हें एक ही डायवर्जेंस पैटर्न का हिस्सा नहीं माना जा सकता। ऐसी गलती से बचने के लिए, आपको लंबे टाइमफ़्रेम पर उसी डाइवर्जेंस की जांच करनी चाहिए। अगर वहां सिग्नल अभी भी बना हुआ है, तो आप उसे ट्रेडिंग में इस्तेमाल कर सकते हैं।

बोलिंजर बैंड डायवर्जेंस इंडीकेटर

मैं पहले ही बता चुका हूं कि बोलिंजर बैंड, डायवर्जेंस सिग्नल के साथ अच्छे से मेल खाते हैं। बोलिंजर बैंड एक ट्रेंड इंडीकेटर है, इसलिए डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए हमें किसी ऑसिलेटर की ज़रूरत होती है। इसके लिए मैं MACD को उदाहरण के तौर पर ले रहा हूं।

​लाइटफाइनेंस: बोलिंजर बैंड डायवर्जेंस इंडीकेटर

उसमें मैंने डबल बोलिंजर बैंड ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति के बारे में बताया है। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि प्राइस चार्ट पर दो बोलिंजर बैंड जोड़ने का सुझाव दिया जाता है। एक इंडीकेटर का गुणांक 1 और दूसरे का 2 रखा जाता है। इसके बाद चार्ट तीन ज़ोन में बंट जाता है: बीच का हरा बैंड न्यूट्रल एरिया होता है, जबकि ऊपर और नीचे की लाल बैंड बॉयर और सेलर ज़ोन को दिखाती हैं।

डबल बोलिंगर बैंड डाइवर्जेंस की सामान्य रणनीति से यह सुझाव मिलता है कि अगर ऊपर की ओर रुझान के बाद कोई उलटफेर होता है और कीमत निचले लाल बैंड में प्रवेश करती है, तो मंदी का रुझान शुरू होना चाहिए। इसके विपरीत, जब कीमत ऊपरी लाल बैंड में प्रवेश करती है, तो तेजी का रुझान शुरू होना चाहिए।

उपरोक्त चार्ट से यह साफ है कि इस रणनीति से गलत संकेत भी मिलता है। इसलिए, इसलिए डायवर्जेंस यहां अच्छा फ़िल्टर का काम करता है। मई की शुरुआत में, EURUSD पेयर ऊपरी रेड ज़ोन में प्रवेश करती है और उसे पार करती है। हालांकि, MACD निचले उच्च स्तर को दिखाता है। यह नियमित डायवर्जेंस का उदाहरण है। इसके अलावा, कीमत MACD और MACD हिस्टोग्राम दोनों से अलग हो रहा है, जिससे अतिरिक्त पुष्टि होती है। अगर आपको मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस macd जैसे संकेत मिलते हैं, तो रुझान में जल्द ही उलटफेर होगा।

शॉर्ट एंट्री की पुष्टि के लिए, हमें तब तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है, जब तक कीमत निचले रेड ज़ोन में पहुंच न जाए। हम पहले ही ट्रेंड में एंट्री कर सकते हैं, जब कैंडलस्टिक ग्रीन ज़ोन में बंद हो और MACD मूविंग एवरेज के हिसाब से हिस्टोग्राम नेगेटिव एरिया में चला जाए। स्टॉप लॉस हम नवीनतम स्थानीय उच्च स्तर से थोड़ा ऊपर लगाते हैं। ट्रेड से बाहर तब निकलना चाहिए, जब ट्रेंड रिवर्सल का विपरीत डायवर्जेंस सिग्नल मिले।

चार्ट से साफ-साफ पता चलता है कि सिग्नल जनवरी में मिला। हम शॉर्ट ट्रेड से निकलकर लॉन्ग ट्रेड में प्रवेश करते हैं। आप देख सकते हैं कि MACD और बोलिंगर बैंड का एक साथ इस्तेमाल करते हैं, तो यह ट्रेडिंग के फैसले लेने में बहुत भरोसेमंद और सटीक होता है। इसके अलावा, MACD के विशेष डिज़ाइन के कारण, इस इंडीकेटर से हिस्टोग्राम और मूविंग एवरेज, दोनों पर डायवर्जेंस सिग्नल मिलता है।

​लाइटफाइनेंस: बोलिंजर बैंड डायवर्जेंस इंडीकेटर

चार्ट से आप देख सकते हैं कि हम डबल डायवर्जेंस जांच की वजह से गलत सिग्नल से बचते हैं। हमारी स्थिति में, MACD हिस्टोग्राम बुलिश डायवर्जेंस दिखा रहा है, लेकिन मूविंग एवरेज से इस सिग्नल की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए यह सिग्नल गलत माना गया।

ऑन-बैलेंस वॉल्यूम (OBV)

ऑन-बैलेंस वॉल्यूम (OBV) इंडीकेटर, ट्रेडिंग वॉल्यूम को दिखाने वाला इंडीकेटर है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि कीमत में उतार-चढ़ाव में सबसे अहम कारक ट्रेडिंग वॉल्यूम होता है।

OBV ट्रेडिंग वॉल्यूम में बदलाव को मापता है और उसे पिछले मान में जोड़ता या घटाता है। अगर कीमत पिछली दिन की तुलना में ज्यादा पर बंद होती है, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम पिछले मान में जोड़ दिया जाता है। अगर कीमत पिछली दिन से कम पर बंद होती है, तो इसे घटा दिया जाता है। इस तरह, OBV इंडीकेटर से यह पता चलता है कि बाजार में खरीददार और विक्रेता में से कौन ज्यादा मजबूत है।

चार्ट पर डायवर्जेंस तब हो सकता है, जब कीमत में उतार-चढ़ाव और OBV की दिशा अलग-अलग होती है। जब कीमत बढ़ रही हो और OBV घट रहा हो, तो इससेनिकट भविष्य में कीमत में गिरावट होने का संकेत मिल सकता है। अगर कीमत में गिरावट हो रही हो और OBV बढ़ रहा हो, तो यह संभावना है कि कीमत में जल्द ही ऊपर की ओर बढ़ोतरी होगी।

डायवर्जेंस ट्रेडिंग से जुड़ी बेहतर रणनीति

MACD और बोलिंजर बैंड के उदाहरण के माध्यम से, हम देख सकते हैं कि ट्रेंडलाइन और अन्य ऑसिलेटर का उपयोग डाइवर्जेंस सिग्नल को फिल्टर करने के लिए किया जा सकता है। MACD के अलावा, हमने पहले ही स्टोकेस्टिक, AO और RSI का अध्ययन किया है। यह इंडीकेटर डायवर्जेंस सिग्नल की पहचान करने के लिए प्रभावी है। लेकिन शायद ये एक साथ और भी बेहतर काम करेंगे! मेरा सुझाव है कि हम व्यापक डाइवर्जेंस डे ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति तैयार करें और इसे व्यावहारिक रूप से आजमाएं।

मैं डायवर्जेंस से जुड़ी रणनीति को बहुत जटिल नहीं बनाना चाहता, इसलिए मैं इन टूल का इस्तेमाल करूंगा:

  • स्टोकेस्टिक – 21, 7, 7; यह EMA के ज़रिए संतुलित किया गया
  • RSI – अवधि 14
  • डबल बोलिंजर बैंड

डायवर्जेंस की पुष्टि के अलावा, स्टोकेस्टिक और RSI से ओवरबॉट और ओवरसोल्ड स्थितियों का भी संकेत मिलेगा। स्टोकेस्टिक के लिए, मैंने यहां दिए गए लेख से दैनिक समय-सीमा के लिए सुझाई गई सेटिंग्स का इस्तेमाल किया। मैंने रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स के लिए डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स का इस्तेमाल किया।

बोलिंगर बैंड, ट्रेंड इंडिकेटर के रूप में काम करेंगे। स्टॉप लॉस को उच्च स्तर से थोड़ा ऊपर या निम्न स्तर से थोड़ा नीचे सेट किया जाता है। जब इंडीकेटर, ओवरबॉट/ओवरसोल्ड ज़ोन में जाएगा, तो हम मुनाफा कमाएंगे।

हम उसी स्थिति में डायवर्जेंस ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी आज़माने वाले हैं, जिस स्थिति में हमने पहले MACD इंडीकेटर का इस्तेमाल करके ट्रेड किया था।

​लाइटफाइनेंस: डायवर्जेंस ट्रेडिंग से जुड़ी बेहतर रणनीति

1. मूल्य और स्टोकास्टिक के बीच स्पष्ट डायवर्जेंस है। मूल्य अब ऊपरी बोलिंजर बैंड में है और मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए रुझान तेजी वाला है। इस सिग्नल के आधार पर, यह नियमित बियरिश डायवर्जेंस है।

2. कीमत ऊपरी बोलिंगर बैंड को पार करके ग्रीन ज़ोन में वापस आ जाती है। RSI ओवरबॉट ज़ोन में प्रवेश करने के बाद फिर से नीचे चला जाता है। इन संकेत से रुझान में उलटफेर की पुष्टि होती है, इसलिए हम प्रवेश बिंदु का विवरण देते हैं।

3. हम अगले बार में शॉर्ट ट्रेड में तब प्रवेश करते हैं, जब स्टोकेस्टिक %K और %D लाइन (चार्ट में नीले वृत्त से दिखाया गया है) को ऊपर से नीचे की ओर पार करती है।

​लाइटफाइनेंस: डायवर्जेंस ट्रेडिंग से जुड़ी बेहतर रणनीति

4. स्टोकेस्टिक, ओवरसोल्ड ज़ोन में ऊपर की ओर जाता है। RSI बैलेंस ज़ोन में है; इससे ओवरसोल्ड स्थिति की पुष्टि नहीं होती है। इसलिए, गलत रिवर्सल या स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन रुझान में उलटफेर (नीले वृत्तों से दिखाया गया है) की उम्मीद नहीं की जा सकती। हम शॉर्ट ट्रेड को खुला रखते हैं।

5. आखिरकार, इसमें अस्थायी सुधार होता है। कोई डायवर्जेंस नहीं है। ऑसिलेटर संतुलन क्षेत्र में हैं। हम शॉर्ट ट्रेड होल्ड करके रखते हैं।

​लाइटफाइनेंस: डायवर्जेंस ट्रेडिंग से जुड़ी बेहतर रणनीति

6. अक्टूबर के अंत में, दोनों ऑसिलेटर ओवरसोल्ड ज़ोन में प्रवेश कर गए। जब कीमत ऊपर की ओर वापस आती है और पहली पहली केंडल (बार) ग्रीन ज़ोन में बंद होती है, तो हम शॉर्ट पोज़िशन से बाहर निकलते हैं और मुनाफा कमाते हैं।

नतीजन, रिवर्सल सिग्नल गलत साबित हुआ और कीमत में लगातार गिरावट होती रही। हालांकि, इस दौरान कोई एंट्री सिग्नल नहीं है। उसके बाद, नियमित पॉज़िटिव डायवर्जेंस दिखता है, इसलिए हम लॉन्ग पोज़िशन लेते हैं। ओवरसोल्ड ज़ोन के आधार पर ट्रेड से बाहर निकलने का सिग्नल सिर्फ़ जून महीने में (ग्रीन सर्कल में दिखाया गया है) दिखता है।

इस आसान टेस्ट के परिणामस्वरूप, हम कह सकते हैं कि यह डाइवर्जेंस रणनीति पूरी तरह से सही है। हालांकि, जल्दी बाहर निकलने के कारण हम बाकी मजबूत मूवमेंट को मिस कर सकते हैं। वास्तव में, हर छोटी बढ़त या गिरावट में ट्रेड करने की ज़रूरत नहीं है। अगर ज्यादा गिरावट के बिना ट्रेडिंग से जुड़ी रणीनीति से स्थिर लाभ मिलता है, तो उसका इस्तेमाल पहले ही किया जा सकता है।

डायवर्जेंस डे ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति बनाने के लिए इस एल्गोरिथम का इस्तेमाल करें। किसी जोखिम और LiteFinance टर्मिनल में पंजीकरण की आवश्यकता के बिना, डायवर्जेंस से जुड़ी रणनीति आजमाएं। उदाहरण के तौर पर, आप AO जैसे अलग-अलग ऑसिलेटर को सेट करके और उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

विचलन (डायवर्जेंस) संचय सिद्धांत

AO या MACD जैसे इंडीकेटर का इस्तेमाल करते समय, आप अक्सर यह नोटिस कर सकते हैं कि डायवर्जेंस सिग्नल मिलने के बाद इंडीकेटर उस सिग्नल को लागू नहीं करता। इसके बजाय, यह एक और उच्चतम या न्यूनतम स्तर बनाता है, लेकिन 0 लाइन को पार नहीं करता। इस स्थिति में हमें दो उच्चतम स्तर नहीं, बल्कि तीन या उससे ज्यादा उच्चतम स्तर दिखाई देते हैं। सबसे सामान्य धारणा यह है कि इसे इंडीकेटर की गलती माना जाता है और स्टॉप लॉस के ज़रिए पोजीशन बंद करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है।

अगर हम मार्केट में आगे की स्थिति देखें, तो पता चलता है कि सिग्नल रद्द नहीं हुआ है, बल्कि किसी अन्य समय में और बाज़ार की स्थिति के अनुसार स्थानांतरित हो जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि संकेत संचित होता जाता है और दोहरा या तिहरा संकेत दिखता है। ऐसा क्यों होता है? यह आसान है - हम डाइवर्जेंस का अनुमान पूरे मौजूदा रुझान से नहीं, बल्कि उसके सिर्फ़ एक हिस्से से लगाते हैं। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि हमारे शुरुआती संकेत का अर्थ वैश्विक दायरे में स्थानीय रुझान में बदलाव होता है। इस स्थानीय रुझान में बदलाव को सुधार कहा जाता है। इंडीकेटर सुधार शुरू होने के समय डायवर्जेंस को दिखाता है और सुधार के बाद, जब मुख्य रुझान जारी रहता है, तो इंडीकेटर अपनी गलती सुधार लेता है और वैश्विक रुझान को बदले बिना (शून्य रेखा से आगे नहीं जाते हुए) कीमत का अनुसरण करना शुरू कर देता है। जब यह रुझान समाप्त हो जाता है, तो इंडीकेटर से फिर से विचलन का संकेत मिलता है। अब यह सिग्नल पहले सिग्नल के भीतर दिखाई देता है। अब, यह एकल संकेत है। यह वैश्विक रुझान बदलने तक जारी रह सकता है।

​लाइटफाइनेंस: विचलन (डायवर्जेंस) संचय सिद्धांत

उपरोक्त चार्ट हमारे ट्रेड को दिखाता है। आप देख सकते हैं कि रिवर्सल सिग्नल से पहले MACD हिस्टोग्राम में डायवर्जेंस था (सर्कल में दिखाया गया है)। मुझे यह बताना होगा कि MACD मूविंग एवरेज से इस सिग्नल की पुष्टि नहीं होती। हालांकि, इस तरह के कई कन्वर्जेंस डायवर्जेंस सिर्फ़ इस संभावना को बढ़ाते हैं कि यह डायवर्जेंस सही साबित होगा।

डायवर्जेंस ट्रेडिंग के बारे में खास जानकारी और सुझाव

फॉरेक्स डायवर्जेंस शुरुआती संकेतों में से एक है। किसी भी मार्केट और किसी भी ट्रेडिंग से जुड़े वित्तीय साधन पर डायवर्जेंस की आसानी से पहचान की जा सकती है। डायवर्जेंस के संकेत सार्वभौमिक होते हैं और इसका इस्तेमाल मार्केट में मूल रणनीति और अतिरिक्त फ़िल्टर के रूप में किया जा सकता है। किसी भी तकनीकी विश्लेषण का इसेमाल करने वाले ट्रेडर को डायवर्जेंस संकेतों को जानना और उनका इस्तेमाल करना चाहिए।

मैं डायवर्जेंस ट्रेडिंग के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार संक्षेप में बता सकती/सकता हूं।

  1. सिर्फ डायवर्जेंस सिग्नल पर ही ट्रेड में प्रवेश करना काफी नहीं है। डायवर्जेंस की पुष्टि तकनीकी इंडीकेटर से करें।
  2. अगर आप अलग-अलग तरह के डायवर्जेंस से भ्रमित हैं, तो मुख्य प्रकार – सामान्य डाइवर्जेंस को अच्छी तरह समझें। नियमित डायवर्जेंस से रुझान में उलटफेर की पहचान करने और ट्रेंड के सबसे उच्चतम या निम्नतम स्तर पर रहने पर ट्रेड करने में मदद मिलती है।
  3. यह पक्का करें कि आप डायवर्जेंस की सही तरीके से पहचान कर रहे हैं। अपने आप की जांच चेकलिस्ट के जरिए करें। डायवर्जेंस ट्रेडिंग करते समय होने वाली आम गलतियों पर आधारित सेक्शन देखें।
  4. डायवर्जेंस का विश्लेषण करते समय कई या संचित संकेतों पर ध्यान दें।
  5. अगर लंबे समय वाले चार्ट में डायवर्जेंस दिखे, तो छोटे टाइम फ्रेम वाले चार्ट का डायवर्जेंस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
  6. फॉरेक्स डायवर्जेंस और कन्वर्जेंस के संकेत सभी प्लेटफॉर्म पर समान होते हैं। आप किसी भी मार्केट में डाइवर्जेंस ट्रेड कर सकते हैं!
  7. डायवर्जेंस के लिए कोई सार्वभौमिक संकेतक नहीं है! फॉरेक्स ट्रेडिंग में डायवर्जेंस संकेतों को अलग-अलग तरीके से आज़माएं। अलग-अलग तकनीकी इंडीकेटर के साथ इस्तेमाल कर देखें। लेकिन, बिना वजह जोखिम न लें। किसी भी रणनीति को हमेशा डेमो अकाउंट पर आजमाएं।

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आपको शुभकामनाएं और अच्छे मुनाफे की कामना!

डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डायवर्जेंस प्राइस चार्ट और तकनीकी इंडीकेटर के बीच का विचलन है। उदाहरण के तौर पर, अगर प्राइस चार्ट में तेजी (अपट्रेंड) दिख रही है, लेकिन इंडीकेटर निचले स्तर पर जा रहा है। इंडीकेटर ऊपर की ओर जा रहा है, जबकि कीमत का रुझान नीचे की ओर है।

नियमित डायवर्जेंस से कीमत में तुरंत उतार-चढ़ाव का संकेत मिलता है। यह ट्रेंड के शीर्ष या निम्नतम स्तर पर ट्रेड शुरू करने का अच्छा संकेत है। छिपे हुए और विस्तारित डायवर्जेंस भी होते हैं। नियमित डायवर्जेंस के अलावा, इससे रुझान जारी रहने का संकेत मिलता है। इन संकेतों को ट्रेंड ट्रेडिंग और गलत संकेतों को फ़िल्टर करने के लिए अच्छा माना जाता है।

डायवर्जेंस की पहचान करने के लिए, आपको कैंडलस्टिक चार्ट के निम्नतम या उच्चतम बिंदुओं पर रेखा खींचनी होगी। इंडीकेटर लाइन या हिस्टोग्राम के ज़रिए खींचे गए उच्चतम बिंदुओं पर एक और रेखा खींचें। अगर रेखाएँ अलग हो जाती हैं, तो यह डायवर्जेंस है। सबसे मज़बूत संकेत नियमित डायवर्जेंस से मिलता है। उदाहरण के तौर पर, ऊपरी रुझान में, नियमित डायवर्जेंस (उदाहरण के लिए, मंदी में) तब होता है, जब कीमत का हर नया उच्च स्तर पिछले उच्च स्तर से ऊपर होता है, लेकिन ऑसिलेटर उच्चतम स्तर को पार करने में विफल रहता है। नियमित बुलिस डायवर्जेंस तब होता है, जब इंडीकेटर निम्न स्तर को अपडेट करने में विफल रहता है, जबकि प्राइस चार्ट निचले स्तर तक पहुंचता है।

रुझान में उलटफेर होने से पहले सामान्य डायवर्जेंस होता है। इसलिए, जब आप पुष्टि कर लें कि डायवर्जेंस सही है, तो जब कोई ट्रेंड समाप्त होने वाला हो, तो आपको उस ट्रेंड के विपरीत दिशा में ट्रेड लेना चाहिए। अगर मौजूदा अपट्रेंड में उलटफेर होने वाला है, तो आप सेल पोजीशन में प्रवेश करते हैं। अगर डाउनट्रेंड समाप्त हो रहा है, तो आप बॉय ट्रेड में प्रवेश करते हैं।

हिडन या एक्सटेंडेड डायवर्जेंस से रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है। इसलिए, जब आपको कोई हिडन या एक्सटेंडेड डायवर्जेंस दिखाई दे, तो आपको मौजूदा रुझान की दिशा में ट्रेड में प्रवेश करना चाहिए।

नियमित (डायरेक्ट) डायवर्जेंस का मतलब ट्रेंड रिवर्सल है; जबकि हिडन या एक्सटेंडेड डायवर्जेंस जैसे अन्य प्रकार के डायवर्जेंस से रुझान के जारी रहने का संकेत मिलता है। यही वजह है कि एक्सटेंडेड डायवर्जेंस की तरह, हिडन डायवर्जेंस को इनवर्स भी कहा जाता है।

सिर्फ़ डाइवर्जेंस पर आधारित ट्रेडिंग सटीक नहीं होती। मैं पूर्ण रूप से यह सुझाव देता हूं कि डायवर्जेंस की पुष्टि करने के लिए अतिरिक्त इंडीकेटर का इस्तेमाल करें। आप डायवर्जेंस संकेतों को ट्रेंड इंडीकेटर, ट्रेंड लाइन ब्रेकआउट, सपोर्ट/रेज़िस्टेंस लेवल ब्रेकआउट, चार्ट पैटर्न और प्राइस एक्शन ट्रेड संकेतों के साथ जोड़ सकते हैं। अनुभवी ट्रेडर्स तो डाइवर्जेंस पर आधारित एक्सपर्ट एडवाइज़र्स और स्वचालित डाइवर्जेंस ट्रेडिंग सिस्टम भी डेवलप करते हैं। ये ऑटोमेटेड सिस्टम डायवर्जेंस की जांच करते हैं और इससे अपने आप ट्रेडिंग सिग्नल मिलता है।

डायवर्जेंस का विश्लेषण करने के लिए, आप किसी भी ऑसिलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। डाइवर्जेंस ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छे ऑसिलेटर हैं: MACD, स्टोकेस्टिक, RSI, ऑसम ऑसिलेटर, चाइकिन ऑसिलेटर, डीमार्कर, मोमेंटम और वॉल्यूम ऑसिलेटर। हालांकि ये सभी ऑसिलेटर अलग-अलग हैं, लेकिन डाइवर्जेंस सिग्नल समान हैं। हरेक ऑसिलेटर से डाइवर्जेंस सिग्नल मिलता है। आपको अपनी पसंद के अनुसार टूल चुनना चाहिए। अगर आप नए हैं, तो MACD या AO का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।

डायवर्जेंस सिग्नल ही आधार होते हैं और ट्रेडिंग रणनीति का हिस्सा भी होते हैं। या फिर ये ऐसे फ़िल्टर का हिस्सा होते हैं, जिससे सिग्नल की विश्वसनीयता की जांच होती है। डायवर्जेंस सिग्नल को समझने और उनके साथ काम करने की जानकारी और क्षमता को शायद ही कम करके आंका जा सकता है। इन कौशल से ट्रेडर को कम से कम बड़ी ग़लतियों से बचने और अपनी जमा पूंजी सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

डायवर्जेंस तब होता है, जब कीमत और इंडीकेटर विपरीत दिशाओं में चलते हैं। ऐसा तब हो सकता है, जब इंडीकेटर सीधे कीमत से जुड़े कारकों को मापता है या फिर ट्रेडिंग वॉल्यूम या अस्थिरता (वॉलेटिलिटी) में बदलाव होता है।

डायवर्जेंस दो तरह के होते हैं; पॉज़िटिव और नेगेटिव। पॉज़िटिव डायवर्जेंस को सामान्य डायवर्जेंस कहा जाता है। नेगेटिव डायवर्जेंस छुपा हुआ (हिडन) या विस्तारित (एक्सटेंडेड) डायवर्जेंस हो सकता है।

बियरिस डायवर्जेंस तेजी की रुझान में होने वाला सामान्य डायवर्जेंस है और इससे रुझान में उलटफेर होने का संकेत मिल सकता है। नेगेटिव बियरिस डायवर्जेंस से मंदी का रुझान जारी रहने का संकेत मिलता है।

आप डायवर्जेंस से पहले की रुझान दिशा से यह तय कर सकते हैं कि डायवर्जेंस तेजी वाला या मंदी वाला है । मंदी वाले बाजार में होने वाला सामान्य डायवर्जेंस तेजी वाला होता है, जबकि बढ़ते हुए मार्केट में यह मंदी वाला होता है। नेगेटिव डायवर्जेंस की स्थिति में स्थिति उलटी होती है।

बियरिस डायवर्जेंस शॉर्ट ट्रेड करने वाले लोगों के लिए सही माना जाता है। लेकिन अगर आपकी कोई लॉन्ग पोज़िशन खुली है, तो यह सही संकेत नहीं है।

बुलिश डायवर्जेंस को समझने के लिए, आपको कीमत में उतार-चढ़ाव और इंडीकेटर की रीडिंग पर नज़र रखनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, अगर मंदी के रुझान में कीमत निचले स्तर पर पहुंच जाती है और इंडीकेटर ऊपर की ओर बढ़ रहा है, तो इसे बुलिश डायवर्जेंस कहा जाता है, जिससे ऊपर की ओर संभावित उलटफेर का संकेत मिलता है।

स्टॉक में डायवर्जेंस का मतलब है कि शेयर की कीमत और इंडीकेटर अलग-अलग दिशाओं में चलते हैं। उदाहरण के तौर पर, शेयर की कीमत लगातार बढ़ रही है और नए उच्चतम स्तर पर पहुंच रही है, जबकि इंडीकेटर नीचे जा रहा है। ट्रेडर्स इसका इस्तेमाल सही एंट्री पॉइंट तय करने के लिए करते हैं।

सामान्य बुलिस डायवर्जेंस से डाउनट्रेंड में मंदी से तेजी की ओर उलटफेर का संकेत मिलता है। ऐसा तब होता है, जब कीमत नए निचले स्तर पर पहुंचती है, जबकि तकनीकी इंडीकेटर से उच्च निम्नतम स्तर का संकेत मिलता है।

जब RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) इंडीकेटर में डायवर्जेंस होता है, तो इससे रुझान में संभावित उलटफेर का संकेत मिल सकता है। RSI में सामान्य डायवर्जेंस तब होता है, जब किसी एसेट की कीमत नए उच्चतम स्तर या नए निम्नतम स्तर तक पहुंचती है, लेकिन RSI इंडीकेटर उसी दिशा में आगे बढ़कर इसकी पुष्टि नहीं करता। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी एसेट की कीमत नए निम्न स्तर पर पहुंचती है, लेकिन RSI ऊपर की ओर बढ़ना शुरू कर देता है, तो इससे ऊपर की ओर संभावित उलटफेर का संकेत मिल सकता है।


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डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स: डायवर्जेंस फ़ॉरेक्स क्या है और यह कैसे काम करता है

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