प्रिय मित्रों! आज हम सबसे लोकप्रिय इंडीकेटर – MACD पर नज़र डालेंगे। इस टूल का उपयोग करना आसान है और यह अक्सर सफल ट्रेडिंग सिस्टम का हिस्सा होता है। आज मैं आपको बताऊंगा कि MACD का इस्तेमाल कैसे करें, MACD की गणना और इसकी व्याख्या कैसे की जाती है और इससे किस तरह का संकेत मिलता है। साथ ही, आप यह भी जानेंगे कि MACD तकनीकी इंडीकेटर को कैसे सेट अप और इस्तेमाल किया जाए। हम फॉरेक्स, स्टॉक और मेटल मार्केट पर वास्तविक ट्रेडिंग के उदाहरण देखेंगे।
इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
- अहम जानकारी
- MACD इंडीकेटर क्या है: इसकी परिभाषा और जानकारी
- MACD फ़ॉर्मूला और इसकी गणना
- MACD का इस्तेमाल करने का तरीका: थ्योरी
- फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग MACD इंडीकेटर से जुड़ी रणनीतियां
- वास्तविक ट्रेडिंग में MACD इंडीकेटर का इस्तेमाल करना: उदाहरण
- सबसे बेहतर MACD सेटिंग
- MT4 और MT5 के लिए सबसे बेहतर MACD इंडीकेटर
- MACD स्क्रीनर
- MACD बनाम अन्य इंडीकेटर
- MACD की सीमाएं और आलोचनाएं
- मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस (MACD) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ख़ास जानकारी
अहम जानकारी
- MACD (मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस/डाइवर्जेंस) एक इंडीकेटर है, जिसे जेराल्ड एपेल ने 1979 में शेयर बाजार के लिए बनाया था। यह इंडीकेटर फ़ॉरेक्स, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य बाजारों में ट्रेडिंग के लिए उपयुक्त है। MACD दो EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) लाइनों के बीच के अंतर को मापता है, जिससे इसके कन्वर्जेंस/डाइवर्जेंस का पता चलता है।
- MACD लाइन = EMA(तेज़, 12-अवधि) - EMA(धीमी, 26-अवधि); सिग्नल लाइन = SMA(MACD लाइन, 9-अवधि)। हिस्टोग्राम से लाइन के बीच अंतर का पता चलता है।
- लाइन क्रॉसओवर से रुझान में संभावित उलटफेर का संकेत मिलता है। जब MACD लाइन सिग्नल लाइन के ऊपर से जाती है, तो इससे तेजी का संकेत मिलता है और जब यह नीचे से जाती है, तो इससे मंदी का संकेत मिलता है। कीमत और MACD के बीच विचलन से रुझान में संभावित उतार-चढ़ाव का संकेत मिलता है। जीरो लाइन क्रॉसओवर से गति की दिशा की पुष्टि होती है।
- प्राथमिक सेटिंग: H1 और उससे ऊपर के टाइमफ्रेम के लिए 12, 26, 9 और M1–M15 के लिए 21, 31, 1 (या समान) है, ताकि मार्केट में उतार-चढाव को कम किया जा सके।
- MACD का इस्तेमाल आमतौर पर RSI, स्टोकेस्टिक और बोलिंगर बैंड इंडिकेटर्स के साथ किया जाता है, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव को कम किया जा सके। यह ट्रेंड स्ट्रैटेजी के लिए ज़्यादा उपयुक्त है, हालांकि सटीकता बढ़ाने के लिए इसे अन्य इंडिकेटर्स से पुष्टि करने की ज़रूरत होती है।
- यह इंडीकेटर M1–M15 टाइमफ्रेम पर पीछे रह सकता है, जिससे स्थिर बाज़ारों के दौरान ज़्यादा गलत संकेत मिलते हैं। यह स्कैल्पिंग के लिए कम प्रभावी है और इसके लिए अन्य टूल से पुष्टि करने की ज़रूरत होती है।
MACD इंडीकेटर क्या है: इसकी परिभाषा और जानकारी
MACD एक मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस/डाइवर्जेंस इंडिकेटर है, जिसे गेराल्ड एपेल ने 1979 में स्टॉक विश्लेषण के लिए डेवलप किया था। फिर भी, इसका इस्तेमाल फॉरेक्स और अन्य बाज़ारों में व्यापक रूप से किया जाता है।
MACD की गणना फास्ट और स्लो EMA के बीच के अंतर से की जाती है, जिसे सिग्नल लाइन (SMA) के ज़रिए संतुलित किया जाता है। यह क्रॉसओवर, ओवरबॉट/ओवरसोल्ड पोजीशन और डाइवर्जेंस को दिखाता है, जिससे रुझान और रिवर्सल की पहचान करने में मदद मिलती है। हालांकि यह इंडीकेटर सभी एसेट के लिए उपयुक्त है। यह H1 और उससे ऊपर के टाइमफ्रेम में सबसे प्रभावी होता है, क्योंकि निचले टाइमफ्रेम पर मार्केट में उतार-चढ़ाव के कारण सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं।
MACD फ़ॉर्मूला और इसकी गणना
MACD लाइन दरअसल फास्ट और स्लो EMA के बीच के फर्क की गणना का ग्राफिकल नतीजा है। इसकी शुरुआती वर्शन में इसे एक कर्व (घुमावदार रेखा) की तरह दिखाया जाता था। आज की मॉडर्न वर्शन में भी ये एक कर्व के रूप में दिखता है, लेकिन इसके साथ-साथ MACD लाइन के बीच के अंतर को डायग्राम (हिस्टोग्राम) के रूप में भी दिखाया जाता है।
MACD का फ़ॉर्मूला इस प्रकार है:
MACD Line = EMA(CLOSE, FP) - EMA(CLOSE, SP).
जहां:
SP स्लो EMA अवधि और FP फास्ट EMA अवधि है
सिग्नल (धीमी) लाइन MACD लाइन का सरल MA है। इसका फ़ॉर्मूला इस प्रकार है:
- Signal = SMA (MACD Line, SLP).
- SLP सिग्नल लाइन अवधि है।
MACD इंडीकेटर का Excel शीट
मैन्युअली गणना करना काफी लंबा और झंझट वाला काम है, खासकर जब एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज खुद से कैलकुलेट करना हो। इससे कहीं आसान तरीका है कि MACD इंडिकेटर को सीधे डाउनलोड कर लें और तुरंत टेक्निकल एनालिसिस शुरू कर दें।
वैसे यह टेक्निकल एनालिसिस टूल डिफ़ॉल्ट रूप से LiteFinance ऑनलाइन टर्मिनल MT4 दोनों पर ही उपलब्ध होता है।
एक विकल्प यह भी है कि आप MACD का कैलकुलेशन एक्सेल टेबल में ऑटोमेटेड तरीके से करें। यहां आप MACD टेक्निकल इंडिकेटर को टेम्पलेट के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं या फिर टेबल का इस्तेमाल ऑनलाइन भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
मैंने पूरी कोशिश की है कि यह कैलकुलेटर इस्तेमाल करने में बिल्कुल आसान हो।
गणना के लिए आपको कॉलम “B” (जिसे नीले रंग में दिखाया गया है) में क्लोज़िंग प्राइस की वैल्यू भरनी होगी, और साथ ही सिग्नल लाइन और MACD (मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस) की मूविंग एवरेज के लिए पीरियड भी दर्ज करना होगा (जिसे लाल रंग में दिखाया गया है)। गुलाबी रंग वाली सभी सेल्स को आप मैन्युअली भर सकते हैं। नीले रंग वाली सेल्स की गणना स्वचालित रूप से की जाती है, इसलिए उन्हें वैसे ही छोड़ दें। संदर्भ जानकारी वाले टेक्स्ट फ़ील्ड पीले रंग से दिखाए गए हैं।
कॉलम B पहले से ही कुछ रैंडम नंबर से भरा हुआ है। कैलकुलेटर का सही इस्तेमाल करने के लिए इन मानों को अपने मानों से बदलें।
मैंने मूल्य डेटा दर्ज करने के लिए लगभग 70 पंक्तियां छोड़ी हैं, लेकिन आप अंतिम पंक्ति के फ़ॉर्मूले को कॉपी करके तालिका को नीचे की ओर बढ़ा सकते हैं।
अहम जानकारी! कॉलम "B" को पूरा भरना ज़रूरी नहीं है। हालांकि, सही गणना के लिए आपको मूविंग एवरेज की सबसे बड़ी अवधि से कम से कम दोगुनी संख्या में सेल भरने होंगे। उदाहरण के तौर पर, ऊपर दिए गए चित्र में, सबसे धीमे EMA की अवधि 24 है, जो कि सबसे लंबी अवधि मानी जाती है। जिसका मतलब है कि आपको सही गणना के लिए 50 सेल भरने होंगे। यह ध्यान में रखें कि मूल्य मान सबसे पहले से लेकर सबसे हाल के क्रम में ऊपर से नीचे तक भरे जाते हैं।
यह इंडीकेटर आपके दर्ज मानों के आधार पर परिणाम की स्वचालित रूप से गणना करता है। यह तालिका के दाहिने तरफ प्राइस चार्ट के साथ स्थित होता है। यह डायग्राम अंतिम 30 भरे हुए सेल्स पर आधारित होता है और इससे आपको ट्रेडिंग टर्मिनल जैसी ही विश्लेषण प्रक्रिया करने की सुविधा मिलती है।
MACD का इस्तेमाल करने का तरीका: थ्योरी
अब आइए मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस इंडिकेटर के विस्तृत विवरण और इसके प्रयोग को समझते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि कन्वर्जेंस कब होता है। इस टूल से आपको एक साथ कई प्रकार के ट्रेड संकेत पाने की सुविधा मिलती है: लाइनों का डाइवर्जेन्स और इंटरसेक्शन, MACD हिस्टोग्राम की स्थिति, और डाइवर्जेन्स। मैं आपको विस्तार से बताऊँगा कि खरीद और बिक्री के संकेतों को कैसे पहचाना जाए और उन्हें कैसे समझा जाए।
MACD की व्याख्या
आइए समझते हैं कि चार्ट और उसके MACD संकेतों को कैसे पढ़ा जाए। दो मूविंग एवरेज सिस्टम के अधिकांश संस्करणों में पहला दीर्घकालिक मूविंग एवरेज और दूसरा अल्पकालिक मूविंग एवरेज होता है। पहला वक्र बाजार की दीर्घकालिक रुझान को दिखाता है, जबकि दूसरा वर्तमान में बाजार की स्थिति को दिखाता है।
मुख्य संकेतों में वक्रों के बीच मजबूत तेजी या मंदी का विचलन है। इससे ओवरबॉट (अत्यधिक खरीदी) और ओवरसोल्ड (अत्यधिक बिक्री) पोजीशन का पता चलता है। इस स्थिति से रुझान में उलटफेर का संकेत मिलता है। इसके अलावा, जब मूविंग एवरेज एक-दूसरे के पास आते हैं, तो इससे कीमत संतुलित होने का संकेत मिलता है। यह किसी स्थिर रुझान के लिए सामान्य होता है।
चार्ट में हरे रंग का क्षेत्र उस जगह को दिखाता है, जहां मूविंग एवरेज आपस में मिलते हैं, जिससे हमें मौजूदा रुझान की मजबूती के बारे में जानकारी मिलती है।
नीला क्षेत्र वक्र के विचलन भाग को दर्शाता है, जिससे ओवरसोल्ड स्थितियों (ज्यादा बिक्री) का पता चलता है। अल्पकालिक सुधार के बाद बाजार में तेजी से ऊपर की ओर रुझान होता है, जिससे हमारे पूर्वानुमानों की पुष्टि होती है।
MACD मूविंग एवरेज क्रॉसओवर
तेज़ MACD लाइन, कीमत में उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। रुझान समाप्त होने पर, तो यह सिग्नल लाइन को पार कर जाता है। नीचे हम दो मूविंग एवरेज सिस्टम में इस क्रॉसओवर संकेत को पहचानने और समझने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
चार्ट में नीला वृत्त तेजी से उलटफेर होने पर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस सिग्नल को दिखाता है। इस तरह, जब नीली फास्ट लाइन लाल सिग्नल लाइन को ऊपर की ओर पार करती है, तो MACD बढ़ता है। यह ध्यान दें कि उलटफेर का संकेत दिखने में थोडा समय लगा।
लाल वृत्त से बिक्री संकेत और मंदी के रुझान की शुरुआत का पता चलता है। तेज़ MACD रेखा ऊपर से नीचे की ओर सिग्नल कर्व को पार करती है। गिरावट का रुझान शुरू हो चुका है और इंडीकेटर ज़ीरो लाइन की ओर बढ़ रहा है।
सिग्नल लाइन क्रॉसओवर
सिग्नल लाइन क्रॉसओवर को अक्सर MACD सिग्नल माना जाता है। MACD क्रॉसओवर के लिए दो विकल्प हैं:
- तेज़ रेखा धीमी रेखा को नीचे से ऊपर की ओर पार करती है और यह नेगेटिव ज़ोन में होती है। इस स्थिति में, हम बाजार में उतार-काढाव की बात कर रहे हैं और इसके बाद एक तेज़ी वाले रुझान के बनने की संभावना होती है, जहां MACD ऊपर की ओर बढ़ता है।
- तेज़ वक्र धीमी रेखा को ऊपर से नीचे की ओर पार करती है और यह पॉजिटिव ज़ोन में होती है, जिससे MACD नकारात्मक दिशा में मुड़ने लगता है। बाजार में बेचने के संकेत हावी होने लगते हैं, जिससे आने वाले मंदी का संकेत मिलता है।
आइए फ़ॉरेक्स, स्टॉक और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों के उदाहरणों के माध्यम से अलग-अलग विकल्पों पर विचार करें।
उपरोक्त EURUSD चार्ट में, नीला वृत्त उस समय को दिखाता है, जब नीला तेज़ MACD नीचे से ऊपर की ओर सिग्नल लाइन को पार करता है। जैसा कि अपेक्षित था, इस संकेत के बनने के बाद, कीमत में ऊपर की ओर रुझान दिखा।
आप S&P 500 के साप्ताहिक चार्ट में एक और तेजी वाले पलटाव की स्थिति देख सकते हैं। यह नेगेटिव ज़ोन में मूविंग एवरेज लाइन पार करने से पहले होता है (नीले वृत्त से दर्शाया गया है)।
MACD लाइन के सिग्नल लाइन को किसी भी दिशा में पार करने की स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, हम BTCUSD का इस्तेमाल उदाहरण के रूप में करेंगे। आइए हम बुलिश रिवर्सल के शुरुआती संकेत से मिलते-जुलते ट्रेडिंग सिग्नल पर विचार करें।। नीले वृत्त से चिह्नित क्षेत्र में, फास्ट और स्लो लाइन के बीच स्पष्ट इंटरसेक्शन देखा जा सकता है। उस समय चार्ट में, कीमत पहले ही गिरना शुरू हो चुकी थी। MACD सिग्नल लाइन को पार करता है, जिससे इस शुरुआती पलटाव की पुष्टि होती है।
सेंटरलाइन क्रॉसओवर
जब MACD लाइन का सेंटरलाइन क्रॉसओवर होता है, तो दोनों लाइनें पॉजिटिव या नेगेटिव क्षेत्र में प्रवेश करती हैं। अगर यह क्रॉसओवर संकेत ऊपर से नीचे की ओर रुझान को दर्शाते हैं, तो हम एक तीव्र गिरावट की बात कर रहे होते हैं, जिसे बियरिश क्रॉसओवर कहा जाता है। अगर कीमत विपरीत दिशा में नीचे से ऊपर की ओर जाती है, तो यह ऊपर की ओर तेजी का रुझान होता है, जिसे बुलिश क्रॉसओवर कहा जाता है।
EURUSD चार्ट में नीला वृत्त यह दिखाता है कि MACD किस प्रकार सेंटर लाइन को पार करता है। यह घटना तब घटित होती है, जब स्थिर दिशात्मक रुझान होता है और यह ट्रेंड सिग्नल होता है।
MACD हिस्टोग्राम
MACD हिस्टोग्राम EMA की सापेक्ष स्थिति को दिखाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, यह कीमत में औसत उतार-चढ़ाव को ग्राफिकल तौर पर दिखाता है।
जब आप मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस (MACD) इंडिकेटर के साथ ट्रेडिंग करते हैं, तो सबसे पहले आपको शून्य रेखा के सापेक्ष कॉलम की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। अगर कॉलम ज़ीरो से ऊपर हैं, तो रुझान तेजी का होता है; अगर नीचे हैं, तो रुझान मंदी का होता है। बार की ऊंचाई वक्रों के बीच की दूरी के समानुपातिक होती है, इससे हमें ओवरबॉट या ओवरसोल्ड ज़ोन की पहचान करने का एक और मौका मिलता है।
स्लोप पर नज़र रखना भी ज़रूरी है, क्योंकि वही दिखाता है कि बाज़ार का रुझान किस तरफ बदल रहा है:
- अपवार्ड स्लोप – खरीदारों की स्थिति का मजबूत होना।
- डाउनवर्ड स्लोप – बिक्री की स्थिति का मजबूत होना।
ऊपर दिए गए चार्ट में, रंगीन क्षेत्र MACD हिस्टोग्राम के अलग-अलग व्यवहारिक पैटर्न को दिखाते हैं। हरे रंग के क्षेत्र या मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस हिस्टोग्राम और प्राइस चार्ट दोनों में सकारात्मक रुझान देखा जाता है। नीला क्षेत्र स्थिर जैसा दिखता है, यानी एक तरह की स्थिर स्थिति होती है, लेकिन इस दौरान कीमत में उतार-चढ़ाव होता है। हालांकि, इन उतार-चढ़ावों में इतनी मजबूती नहीं होती कि कोई निर्णायक रुझान बन सके। अंततः, लाल क्षेत्र MACD हिस्टोग्राम में मज़बूत मंदी के रुझान को दिखाता है। इसके साथ तेज़ गिरावट के रुझान से जुड़ा होता है।
डायवर्जेंस
डायवर्जेंस को प्रमुख संकेत माना जाता है। यह प्राइस चार्ट के चरम बिंदुओं और इंडीकेटर वैल्यू को जोड़ने वाली रेखाओं की बुलिश या बियरिश डायवर्जेंस को दिखाता है। MACD के लिए, डायवर्जेंस को दोनों मूविंग एवरेज और संकेतक हिस्टोग्राम के रीडिंग दोनों से ट्रैक किया जा सकता है।
डायवर्जेंस तीन तरह के होते हैं:
- क्लासिक (नियमित) – आगामी रुझान में उलटफेर का संकेत मिलता है
- छिपा हुआ – मौजूदा रुझान जारी रहने का संकेत मिलता है
- विस्तारित – यह अधिकतर साइडवेज़ मूवमेंट के दौरान दिखता है और पिछला रुझान जारी रहने का संकेत मिलता है
ऊपर दी गई तस्वीर में तीनों प्रकार दिखाए गए हैं। कृपया हरेक प्रकार के संकेतों को ध्यान में रखें। मैंने इस संकेत के बारे में विस्तृत समीक्षा में विस्तार से लिखा है, जिसमें MACD इंडीकेटर में बदलाव और अन्य इंडीकेटर के हरेक प्रकार के संकेतों के बारे में अच्छे से समझाया गया है।
अगर आप भ्रमित हैं और तीनों प्रकारों का अध्ययन करने में कठिनाई हो रही है, तो मैं आपको सिर्फ़ एक प्रकार के संकेत यानी क्लासिकल डायवर्जेंस के संकेतों को ध्यान में रखने का सुझाव दूंगा। सिर्फ़ क्लासिकल डायवर्जेंस से ही रुझान में उलटफेर का संकेत मिलता है! अगर आपको डायवर्जेंस दिखाई दे, लेकिन ट्रेड सिग्नल अलग-अलग हो, तो संभवतः ऐसे संकेत से रुझान जारी रहने का संकेत मिलता है।
यहां मैं सिर्फ़ संक्षेप में आपको यह बताना चाहूंगा कि नियमित डायवर्जेंस के उदाहरण का उपयोग करके MACD डायवर्जेंस संकेतक का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
ऊपर दिए गए प्राइस चार्ट में, नीली रेखा स्थानीय निम्न स्तरों को दिखाता है, जिनमें से हरेक अपने पिछले स्तर से नीचे है। इसी प्रकार, MACD चार्ट में भी मैंने चार्ट के निचले बिंदुओं को नीली रेखा से जोड़ा है। प्राइस चार्ट में रेखा नीचे की ओर जा रही है, जबकि MACD चार्ट में ऊपर की ओर बढ़ रही है। और यह संकेत मंदी के रुझान के दौरान बनता है, इसलिए हम इसे बुलिश डायवर्जेंस कह सकते हैं। यानी यह एक बेयरिश ट्रेंड से बुलिश ट्रेंड की ओर बदलाव का संकेत है।
ठीक यही सिद्धांत क्लासिक बियरिश डायवर्जेंस पर भी लागू होता है। सिर्फ़ फर्क इतना है कि इसमें हमें उच्च स्तर पर डायवर्जेंस की पहचान करनी होती है और यह संकेत तेजी के रुझान भीतर होना चाहिए।
फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग MACD इंडीकेटर से जुड़ी रणनीतियां
ट्रेडर MACD की कई तरह की रणनीतियां अपनाते हैं। यहां कुछ प्रमुख रणनीतियां दी गई हैं:
- MACD इंटरसेक्शन पर खरीद और बिक्री करना। यह ट्रेंड-फॉलोइंग से जुड़ी रणनीति है। जब तेज़ इंडिकेटर कर्व, सिग्नल लाइन को पार करता है, तो इससे नए ट्रेंड की शुरुआत का संकेत मिलता है। ठीक इसी समय हमारे पास बाज़ार में सफलतापूर्वक प्रवेश करने का अवसर होता है।
- MACD डायवर्जेंस इंडिकेटर बाजार में रिवर्सल पॉइंट का सटीक अनुमान लगा सकता है। प्राइस चार्ट के चरम बिंदुओं और MACD हिस्टोग्राम की डायवर्जेंस पर ट्रेडिंग करने पर गलत संकेतों की संभावना बेहद कम होती है।
- बाज़ार में उलटफेर की आशंका के लिए MACD के चरम मान पर नजर रखें। इस विधि के पीछे की तर्कशक्ति यह है कि रुझान में उलटफेर आमतौर पर MACD हिस्टोग्राम के उच्चतम या निम्नतम बिंदुओं पर होता है। उलटफेर के क्षण को पोजीशन खोलने का सबसे अच्छा अवसर माना जाता है।
- बाजार में प्रविष्टि बिंदुओं की पहचान करते समय MACD का इस्तेमाल ट्रेंड फ़िल्टर के रूप में करें। अगर आप अन्य इंडीकेटर के संकेतों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो मूविंग एवरेज लाइन का इस्तेमाल पूर्वानुमान की अतिरिक्त पुष्टि के रूप में किया जा सकता है।
नए ट्रेडर के लिए MACD से जुड़ी रणनीति
MACD लाइन पार करने पर खरीद और बिक्री करना
फॉरेक्स में MACD का इस्तेमाल करने का सबसे आसान तरीका रुझान को फ़ॉलो करना है। इस विधि का इस्तेमाल ट्रेडिंग की शुरुआत करने वाले लोग भी कर सकते हैं:
- जब तेज़ MACD रेखा सिग्नल रेखा को नीचे से ऊपर की ओर पार करे और MACD हिस्टोग्राम शून्य से ऊपर जाकर सकारात्मक हो जाए, तब खरीदारी करें।
- जब तेज़ MACD लाइन ऊपर से नीचे आए और हिस्टोग्राम ज़ीरो के नीचे गिरकर नेगेटिव हो जाए, तो बिक्री करें।
हम अपना स्टॉप लॉस सबसे निकटतम स्थानीय चरम सीमा से थोड़ा नीचे लगाएंगे। आप पोजिशन को इंडिकेटर के संकेतों पर भी बंद कर सकते हैं या फिर एक या दो स्टॉप लॉस की दूरी पर टेक प्रॉफिट सेट करके भी बंद कर सकते हैं।
आइए इस रणनीति को XAUUSD के उदाहरण के माध्यम से समझते हैं।
नीले वृत्त में, हम देखते हैं कि तेज़ लाल वक्र धीरे चलने वाली बैंगनी रेखा को ऊपर की ओर क्रॉस कर रही है। इसके तुरंत बाद MACD हिस्टोग्राम पॉज़िटिव ज़ोन में चला जाता है। रणनीति के दोनों संकेत मिलने से हमें कैंडल बंद (नीली रेखा) होने पर लॉन्ग पोजिशन खोलने का संकेत मिलता है। स्टॉप लॉस को पिछले स्थानीय निम्न स्तर से थोड़ा नीचे सेट करें।
जब तक MACD हिस्टोग्राम बढ़ रहा है, तब तक हम बुलिश ट्रेंड की मजबूती को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं। थोड़ी देर बाद एक बार बनता है, जिसे रेड सर्कल में दिखाया गया है। यह पिछली बार से नीचे है, जिससे खरीदारों की सक्रियता में कमी का पता चलता है।
आपने शायद MACD इंडीकेटर का एक और अलर्ट देखा होगा, जिसका मैंने ज़िक्र किया था – दोनों मूविंग एवरेज के बीच साफ़ अंतर (डायवर्जेंस) है। इससे ओवरबॉट ज़ोन और संभावित रुझान में संकेत मिलता है। इसलिए, जब कैंडलस्टिक हरे रंग की रेखा के स्तर पर बंद होती है, जहां MACD कर्व के बीच बड़ा अंतर होता है और हिस्टोग्राम घट रहा होता है, तो हम मुनाफा कमाते हैं, क्योंकि रुझान नकरात्मक हो सकता है।
वैकल्पिक रूप से, आप ट्रेड को मुनाफ़ा कमाकर भी बंद कर सकते हैं। इसे जोखिम प्रबंधन के अनुसार, पोजिशन खोलने के स्तर से स्टॉप लॉस तक की दूरी के बराबर या उसके दो गुना तक हो सकता है।
बाज़ार में होने वाले उतार-चढ़ाव का पता लगाना
यह MACD इंडिकेटर के लिए ज्यादा जटिल रणनीति है। यह क्लासिक डायवर्जेंस सिग्नल पर तब आधारित होता है, जब:
- प्राइस चार्ट में सकरात्मक रुझान दिख रहा है और स्थानीय उच्च स्तर लगातार बनते जा रहे हैं। लेकिन इस स्थिति में MACD लाइन ऊपर नहीं जा रही। आप चाहें तो हिस्टोग्राम भी देख सकते हैं। इसका मतलब है कि प्राइस तो ऊपर बढ़ रहा है, लेकिन लेकिन खरीदारों का दबाब अब खत्म हो रहा है और असल में तेजी का रुझान अब कमजोर पड़ चुका है।
- भले ही कीमत में लगातार गिरावट हो रही हो, लेकिन MACD कर्व या उसका हिस्टोग्राम और नीचे नहीं जा रहा। इसका मतलब है कि मंदी का रुझान अब समाप्त होने वाला है।
पहली स्थिति में, बाजार में उलटफेर होने से पहले मंदी का संकेत मिलता है। जब MACD लाइन ज़ीरो लाइन को पार करती है, तो सेल पोजिशन के साथ बाजार में प्रवेश करने का मौका मिलता है। दूसरी स्थिति में, बुलिस डायवर्जेंस होता है। इस तरह के रुझान से खरीदारी का संकेत मिलता है। साथ ही, लॉन्ग पोजिशन लेने का भी अवसर मिलता है।
उपरोक्त BTCUSD चार्ट में बियरिस डायवर्जेंस को तिरछी नीली रेखाओं से दिखाया गया है।
अहम जानकारी! निचले रुझान में हम निचले स्तरों और ऊपरी रुझान में, ऊपरी स्तरों की तुलना करते हैं।
जैसे ही चार्ट पर पहली हरी बार दिखे, वही प्रवेश करने का सही वक्त होता है। कैंडल के बंद होते ही लॉन्ग पोजिशन (नीली क्षैतिज रेखा) खोलें। स्टॉप लॉस को पिछले न्यूनतम स्तर के ठीक नीचे सेट करें। ऑर्डर को दो स्टॉप लॉस (हरी रेखा) के बराबर टेक प्रॉफिट लगाकर बंद कर दें।
अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज S&P 500 इंडेक्स के उदाहरण के माध्यम से मैं आपको ट्रेडिंग करने का एक और तरीका बताने जा रहा हूं। हम उच्चतम स्तर और तेज MACD लाइन के आधार पर मंदी विचलन निर्धारित करते हैं। जैसा कि आप देख सकते हैं, कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि MACD चार्ट नीचे की ओर बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि ऊपरी रुझान समाप्त होने वाला है।
जैसे चार्ट नेगेटिव ज़ोन में दिखे, तो ऑर्डर खोलें (नीली क्षैतिज रेखा)। स्टॉप ऑर्डर को उच्चतम स्तर के ठीक ऊपर सेट करें। थोड़ी देर बाद बाज़ार से तब बाहर निकलें, जब चार्ट का अगला लाल बार, पिछले बार (हरी रेखा) से थोड़ा नीचे बने।
बाज़ार में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना
अत्यधिक मूल्यों पर ट्रेडिंग के लिए ऑसिलेटर के रूप में MACD का इस्तेमाल, ट्रेडरों के बीच आम बात है। यह रणनीति इन नियमों पर आधारित होती है:
- जब हिस्टोग्राम पर दोनों मूविंग एवरेज सकारात्मक हो जाएं, उच्च मान तक पहुंचें और छोटा बार बने, तो बिक्री करें।
- जब MACD हिस्टोग्राम अत्यधिक नकारात्मक मान तक पहुंच जाए और पिछली बार की तुलना में छोटा बार बने, तब खरीदारी करें।
स्टॉप लॉस लगाने के नियम पहले के उदाहरणों जैसे ही हैं। जब MACD हिस्टोग्राम विपरीत दिशा में जाना शुरू करे, तब बाजार से बाहर निकलें।
EURJPY चार्ट में नीला सर्कल उस क्षण को दर्शाता है, जब हिस्टोग्राम अपने उच्चतम मान तक पहुंचता है। इसके बाद गिरावट शुरू होती है। पहले ऐसे बार पर शॉर्ट पोजिशन (नीली रेखा) खोलें, जो पिछले बार से छोटा हो। स्टॉप लॉस को पिछले उच्च स्तर (लाल रेखा) से थोड़ा ऊपर सेट करें।
इसके बाद, हम MACD हिस्टोग्राम के व्यवहार पर बारीकी से नज़र रखते हैं। जब कीमत में गिरावट हो रही होती है, तो यह नेगेटिव ज़ोन में चला जाता है और नया निचला (रेड सर्कल) स्तर बनाता है। हम निचला लाल बार (हरी रेखा) बनते ही बाजार से बाहर निकलते हैं।
ट्रेड ढूंढते समय MACD का इस्तेमाल ट्रेंड फिल्टर के तौर पर करना
मूल नियमों में से एक नियम यह है कि बाजार के रुझान के अनुसार ट्रेडिंग करें। स्थिर मजबूत रुझानों की पहचान करने के लिए MACD बहुत बढ़िया संकेतक माना जाता है। बाजार का सही पक्ष चुनना आसान है:
- वह टाइमफ्रेम चुनें, जिस पर आप ट्रेडिंग करेंगे।
- एक या दो टाइमफ्रेम ऊपर वाला चार्ट खोलें। उदाहरण के तौर पर, अगर आप चार घंटे के चार्ट पर ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो दैनिक चार्ट खोलें।
- अगर MACD हिस्टोग्राम पॉजिटिव साइड में बन रहा हो, तो रुझान ऊपर की ओर हो सकता है। ऐसे में सिर्फ लॉन्ग ट्रेड खोलें। और अगर रुझान नीचे की ओर बन रहा है, तो शॉर्ट पोजीशन ट्रेड खोलें।
आइए दैनिक EURUSD चार्ट में लंबी अवधि वाले मजबूत रुझानों की पहचान करने की कोशिश करें। नीले क्षेत्र के अंदर, MACD ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इसलिए, इन सभी दिनों में आपको लॉन्ग पोजीशन को प्राथमिकता देनी चाहिए। फिर लाल क्षेत्र में गिरावट देखी जाती है। जब MACD हिस्टोग्राम छोटी समय-सीमाओं पर नकारात्मक पक्ष की ओर मुड़ता है, तो सिर्फ़ शॉर्ट पोजीशन खोलने का सुझाव दिया जाता है।
MACD से जुड़ी बेहतर रणनीति
वास्तविक ट्रेडिंग में MACD इंडीकेटर का इस्तेमाल करना: उदाहरण
MACD की खास बात यह है कि इसे कई जगह इस्तेमाल कर सकते हैं। मूल रूप से स्टॉक मार्केट विश्लेषण के लिए डिज़ाइन किया गया। यह अन्य बाजारों में भी प्रभावी साबित हुआ है। आधुनिक ट्रेडर करेंसी पेयर, कीमती धातुओं, एनर्जी, स्टॉक, फ्यूचर्स और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग करने के लिए MACD का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करते हैं। नीचे मैं S&P 500, गोल्ड और EURUSD की ट्रेडिंग के बारे में बताऊंगा।
S&P 500
S&P 500 इंडेक्स के लिए, सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद रणनीति हिस्टोग्राम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्रॉसिंग पर ट्रेड करना है। तेज़ MACD लाइन के नीचे से ऊपर की ओर पार हो जाने और MACD हिस्टोग्राम के पॉजिटिव ज़ोन में चले जाने के बाद खरीदारी करें और पोज़िशन को होल्ड करें। सिग्नल लाइन के कर्व के ऊपर से नीचे की ओर पार हो जाने और MACD हिस्टोग्राम के निगेटिव ज़ोन में चले जाने के बाद बिक्री करें।
चार घंटे के S&P 500 चार्ट में नीला सर्कल उस क्षण को दिखाता है, जब सिग्नल कर्व नीचे से ऊपर की ओर MACD लाइन को पार करता है और MACD हिस्टोग्राम पॉजिटिव ज़ोन में चला जाता है। इससे लॉन्ग पोज़िशन खोलने का संकेत मिलत है। हम MACD हिस्टोग्राम की पहली सकारात्मक बार (नीली रेखा) पर बाज़ार में प्रवेश करते हैं। स्टॉप लॉस को पिछले न्यूनतम स्तर के नीचे लगाना चाहिए।
पिछले उदाहरणों की तरह, बाज़ार से निकासी उस क्षण पर की जानी चाहिए, जब अगला बार (कॉलम) पिछली बार से नीचे बनता है (हरे वृत्त से दर्शाया गया)। हालांकि, इस स्थिति में मुनाफा थोड़ा ही होगा (हरी रेखा)।
दूसरे विकल्प के तौर पर हम अतिरिक्त शर्त का इस्तेमाल कर सकते हैं: जब तेज़ MACD लाइन दिशा बदलती है, तो बाहर निकलते हैं। चार्ट पर यह संकेत बैंगनी रंग के सर्कल वाले हिस्से में थोड़ा देर से दिखता है। इसी बिंदु पर हम अपनी पोज़िशन बंद करते हैं और इससे काफी ज़्यादा मुनाफा होता है।
गोल्ड
आप S&P 500 जैसी ही सिस्टम का इस्तेमाल करके गोल्ड की ट्रेडिंग कर सकते हैं, लेकिन एक बात का ध्यान रखना होगा। इसमें लॉन्ग पोजीशन खोलना होता है। पुराना डेटा दिखाता है कि सिर्फ क्रॉसिंग पर बेचने से ज़्यादा फायदा नहीं होता।
चार्ट में नीला अंडाकार उस हिस्से को दिखाता है, जहां लाल तेज़ MACD लाइन धीमी लाइन को नीचे से ऊपर की ओर पार करती है। जैसे ही MACD हिस्टोग्राम पॉज़िटिव ज़ोन में जाता है (नीली रेखा), उसी वक्त पोज़िशन खोलें। लाल रेखा उस स्टॉप लॉस को दिखाती है, जिसे सबसे निकटतम निम्न स्तर के ठीक नीचे लगाया गया है।
ट्रेंड के बनते समय MACD हिस्टोग्राम के इंडिकेटर धीरे-धीरे नीचे जा रहे हैं, लेकिन MACD कर्व अब भी ऊपर की ओर बढ़ रहा है। पिछले उदाहरण की तरह ही, हम डबल सिग्नल का इंतज़ार करते हैं। यह थोड़ी देर बाद तब होता है (हरा अंडाकार), जब कर्व नीचे की ओर मुड़ता है और एक और नीचे की ओर बार बनता है। इसी वक्त हम मार्केट से बाहर निकलते हैं (हरी रेखा)।
अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी डॉलर पर MACD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति ठीक-ठाक काम करती है। इससे मुनाफा हो सकता है और होगा भी, लेकिन लगातार ज्यादा मुनाफे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
जैसे पहले वाले उदाहरणों में दिखाया गया था, वैसे ही यहां भी जब दोनों रेखाएं क्रॉस करती हैं और MACD हिस्टोग्राम पॉजिटिव ज़ोन में जाता है (नीला अंडाकार), तब हम लॉन्ग पोज़िशन लेते हैं (नीली रेखां)। स्टॉप लॉस निम्न स्तर के नीचे लगाते हैं (लाल रेखा)। फिर हम उस सिग्नल का इंतज़ार करते हैं, जब हिस्टोग्राम गिरने लगे और MACD लाइन के पलटने के संकेत दिखने लगे। ये संकेत हरे अंडाकार वाले भाग में दिखते हैं। इसके बाद हम हरी रेखा के स्तर पर मुनाफा कमाते हैं।
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सबसे बेहतर MACD सेटिंग
आमतौर पर माना जाता है कि MACD की सबसे उपयुक्त सेटिंग 12, 26, 9 होती हैं: इन सेटिंग को खासतौर पर एक घंटे (H1) के चार्ट के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। लेकिन ये आस-पास के टाइमफ्रेम्स पर भी प्रभावी होते हैं। इसी वजह से लगभग सभी ट्रेडिंग टर्मिनलों में इसे डिफॉल्ट तौर पर सेट किया जाता है।
इन पैरामीटर का अर्थ इस प्रकार है:
- 12 – तेज EMA अवधि;
- 26 – धीमी EMA अवधि;
- 9 – संकेत MA अवधि।
MACD की इंट्राडे सेटिंग
इंट्राडे ट्रेडिंग में M1 से लेकर H1 तक के अलग-अलग चार्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। हमने ऊपर H1 और उससे मिलते-जुलते टाइमफ्रेम के बारे में बताया है, इसलिए अब हम स्कैल्पिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सेटिंग्स नजर डालते हैं।
1 मिनट के चार्ट के लिए MACD इंडिकेटर की सेटिंग:
- 13, 21, 1;
- 21, 34, 1;
- 31, 144, 1
अगर आपकी ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति में एक साथ कई चार्ट का इस्तेमाल होता है, तो M1 टाइमफ्रेम के लिए MACD इंडिकेटर की इन सेटिंग को अलग-अलग और एक साथ भी लागू किया जा सकता है। पैरामीटर का पहला विकल्प कीमत में उतार-चढ़ाव के प्रति सबसे ज़्यादा संवेदनशील है और आखिरी विकल्प सबसे कम संवेदनशील है। कृपया यह ध्यान दें कि तीनों तरह की सेटिंग में सिग्नल लाइन संतुलित होना शामिल नहीं है।
5 और 15 मिनट के लिए पैरामीटर 21, 31, 1 का इस्तेमाल करें। लेकिन आधे घंटे के चार्ट में ट्रेडिंग के लिए, मानक सेटिंग 12, 26, 9 चुनना बेहतर है।
MT4 और MT5 के लिए सबसे बेहतर MACD इंडीकेटर
MACD कलर को सबसे बेहतरीन वर्जन माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसका हिस्टोग्राम पढ़ना बहुत आसान होता है। डिफ़ॉल्ट तौर पर, जब कॉलम पॉज़िटिव ज़ोन में होते हैं, तो यह हरे रंग का दिखता और जब नेगेटिव ज़ोन में होता है, तो लाल रंग का दिखता है।
MT4 के लिए MACD कलर इंडिकेटर यहां यहां से डाउनलोड किया जा सकता है। अगर आप MT5 वर्जन डाउनलोड करना चाहते हैं, तो इस पेज पर जाएं।
अगर आप ऑटोमेटिक मोड में ट्रेडिंग आज़माना चाहते हैं, तो मैं आपको सलाह दूंगा कि MT4 में दिया गया MACD सैंपल एक्सपर्ट एडवाइज़र ज़रूर देखें।। इसमें डिफ़ॉल्ट रूप से 1 घंटे और 4 घंटे के टाइमफ्रेम के लिए बेहतरीन सेटिंग दी गई हैं। अगर आप इसे किसी और चार्ट जैसे वीकली चार्ट पर इस्तेमाल करना चाहें, तो नए लोग भी इसकी सेटिंग आसानी से समझ सकते हैं।
MACD स्क्रीनर
MACD मोमेंटम इंडिकेटर का इस्तेमाल सिर्फ तकनीकी विश्लेषण के लिए ही नहीं, बल्कि निवेश के लिए एसेट चुनने के टूल के तौर पर भी किया जा सकता है। लेकिन सवाल ये है कि अपने ट्रेडिंग स्टाइल को बेहतर बनाने आप स्टॉक स्क्रीनर का फ़ायदा उठा सकते हैं – जिन एनालिटिकल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग शेयर की जानकारी मिलती है। इनकी मदद से आप दर्जनों पैरामीटर के आधार पर एसेट को फिल्टर कर सकते हैं।
वहां आपको लोकप्रिय मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म देखने को मिलेगा::
हालांकि, इन सभी सर्विसेज़ में एक कमी है – ये टेक्निकल इंडिकेटर्स के आधार पर फिल्टर नहीं कर पाते। इस काम के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला स्क्रीनर tradingview.com है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप इसका इस्तेमाल सिर्फ स्टॉक्स में ही नहीं, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भी कर सकते हैं।
MACD इंडिकेटर के हिसाब से फिल्टर करने के लिए, पहले अपना पसंदीदा स्क्रीनर चुनें और फिर सबसे दाईं तरफ मौजूद तीन डॉट वाले बटन पर क्लिक करें।
सर्च बॉक्स में 'MACD' टाइप करें और दिखने वाले बॉक्स पर टिक कर दें। इससे टेबल में दो नए कॉलम जुड़ जाएंगे। एक में MACD पैरामीटर्स की वैल्यू दिखेगी और दूसरे में ये बताया जाएगा कि इंडिकेटर के हिसाब से खरीदना या बेचना है। tradingview स्क्रीनर की एक और बढ़िया बात यह है कि इसमें आप अलर्ट सेट कर सकते हैं, पहले से कॉन्फ़िगर किए हुए फिल्टर टेम्प्लेट इस्तेमाल कर सकते हैं और चाहें तो अपना खुद का भी बना सकते हैं।
www.investing.com पोर्टल पर एक और अच्छा स्क्रीनर उपलब्ध है। लेकिन इसका इस्तेमाल स्टॉक मार्केट में किया जाता है।
आपको यह वेबसाइट के मेन मेन्यू में देखने को मिल सकता है। इसके लिए पहले 'टूल्स' टैब पर जाएं और फिर 'स्टॉक स्क्रीनर' वाले लिंक पर क्लिक करें।
इसके बाद, खुलने वाली विंडो में, ऊपरी बाएं कोने में दिए गए मेनू पर ध्यान दें। आइटम "तकनीकी इंडीकेटर" चुनें। इसके बाद, "MACD" और दाईं ओर की विंडो में अपने पैरामीटर के हिसाब से डिफ़ॉल्ट सेटिंग बदलें। उदाहरण के तौर पर, जैसे मैंने स्लाइडर्स की मदद से वैल्यू की एक रेंज सेट की, ताकि उसी के हिसाब से शेयर की कीमत फिल्टर हो सकें। नीचे की विंडो में पैरामीटर से मेल खाने वाले स्टॉक का चयन दिखाया गया।
MACD बनाम अन्य इंडीकेटर
अन्य तकनीकी विश्लेषण टूल्स की तरह MACD में भी खूबियां और कमियां हैं। नीचे मैं इसकी तुलना कुछ लोकप्रिय तकनीकी इंडिकेटर से करूंगा, इसके फायदे-नुकसान के बारे में बताऊंगा और मिले-जुले इंडीकेटर के विषय पर भी बात करूंगा।
MACD बनाम RSI
जहां MACD मूविंग एवरेजेज़ के बीच का फर्क दिखाता है, वहीं RSI थोड़ा अलग तरीके से काम करता यह पिछले और मौजूदा कीमत में उतार-चढ़ाव या ओवरबॉट और ओवरसोल्ड स्तरों के बीच संतुलित अंतर दिखाता है। MACD लंबे टाइमफ्रेम के लिए बढ़िया होता है, जबकि RSI छोटे टाइमफ्रेम के लिए बढ़िया होता है।
ये दोनों टूल अक्सर पूरक जानकारी प्रदान करते हैं, इसलिए MACD ट्रेडिंग से जुड़ी रणनीति में इनका एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि एक MACD-RSI मोमेंटम इंडिकेटर भी है। यह अब तक का सबसे सटीक स्कैल्पिंग टूल है। आप इसे यहां से डाउनलोड कर सकते हैं।
अगर आप RSI के बारे में और जानना चाहते हैं और इसे MACD के साथ इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो मैं आपको "RSI रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स इंडिकेटर" नामक लेख पढ़ने का सुझाव दूंगा।
MACD बनाम स्टोकेस्टिक
स्टोकेस्टिक के मुकाबले MACD को ट्रेंडिंग मार्केट में ज़्यादा असरदार माना जाता है। वहीं, जब मार्केट साइडवे मूव कर रहा होता है, तब ऑसिलेटर बेहतर नतीजे दिखाता है। अगर आप एक ऐसी ट्रेडिंग सिस्टम बनाना चाहते हैं जो प्राइस मूवमेंट पर ज़्यादा निर्भर न हो, तो आप एक ही समय सीमा में अलग-अलग अवधि में स्टोकेस्टिक जैसे अन्य तकनीकी इंडीकेटर के साथ MACD को तब जोड़ सकते हैं, जब टूल दूसरे की रीडिंग को फ़िल्टर करता है।
आपको स्टोकेस्टिक के बारे में ज्यादा जानकारी "स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर: फॉरेक्स ट्रेडिंग में स्टोकेस्टिक इंडिकेटर का इस्तेमाल कैसे करें" लेख में मिल सकती है।
MACD की सीमाएं और आलोचनाएं
MACD चाहे जितना भी पॉपुलर हो, ये मान लेना कि ये हर बार सही काम करेगा, सही नहीं होगा। अन्य तकनीकी विश्लेषण टूल्स की तरह, इसकी भी कुछ सीमाएं हैं:
- MACD की परफॉर्मेंस अलग-अलग एसेट और मार्केट में अलग-अलग होती है। हमने S&P 500, गोल्ड और अमेरिकी डॉलर जैसे उदाहरण में ये फर्क देखा है।
- गलत सिग्नल हमारी अपेक्षा से कहीं ज़्यादा आम हैं। इसे दूसरे तकनीकी विश्लेषण टूल्स के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए।
- छोटे टाइमफ्रेम पर MACD उतना असरदार नहीं होता, क्योंकि इसके सिग्नल देर से मिलते हैं। इसलिए स्कैल्पिंग से जुड़ी रणनीति में इसके साथ दूसरे ऑसिलेटर इंडिकेटर का भी इस्तेमाल किया जाता है।
- MACD ट्रेंड-फॉलो करने वाला मोमेंटम इंडिकेटर है। इसका मतलब ये है कि अगर इसमें कोई अत्यधिक वैल्यू दिखे, तो जरूरी नहीं कि तुरंत रिवर्सल हो। ऐसे संकेत पाने के लिए ऑसिलेटर का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होता है।
और अब जानिए, ट्रेडर्स MACD की सीमाओं के बारे में क्या सोचते हैं।
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मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस (MACD) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MACD इंडीकेटर दो मूविंग एवरेज के कनवर्जेंस/डायवर्जेंस के सुचारू अंतर का विश्लेषण करके कीमत का अंदाजा लगाता है। सरल शब्दों में, MACD दो अलग-अलग मूविंग एवरेज के ज़रिए एक साथ बाजार विश्लेषण का परिणाम है। इंडीकेटर को शुरू में मध्यम रूप से अस्थिर शेयर बाजार के लिए विकसित किया गया था। अब इसका इस्तेमाल कीमत में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने और पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है। स्टॉक ट्रेडर अभी भी निवेश से जुड़े निर्णय लेने के लिए MACD का इस्तेमाल करते हैं। MACD वैल्यू एक अलग विंडो में दिखता है। यह आमतौर पर प्राइस चार्ट के ऊपर या नीचे होता है।
H1 और इससे मिलते-जुलते टाइमफ्रेम के लिए सबसे उपयुक्त मान 12, 26, 9 हैं। कई ट्रेडर्स इन्हीं को डेली चार्ट पर ट्रेडिंग के लिए भी डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स की तरह इस्तेमाल करते हैं। अगर आप बहुत छोटे टाइमफ्रेम पर ट्रेड करना चाहते हैं, तो 5 या 15 मिनट के टाइमफ्रेम के लिए 21, 31, 1 पैरामीटर का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।1 मिनट के टाइमफ्रेम पर तीन तरह की सेटिंग (13, 21, 1; 21, 34, 1 और 31, 144, 1) को असरदार माना गया है। कई ट्रेडर्स चार्ट में उपरोक्त पैरामीटर के साथ तीन इंडीकेटर जोड़ते हैं, ताकि उनका एनालिसिस और सिग्नल ज़्यादा सटीक हो सके।
मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस इंडिकेटर को ट्रेडिंग में कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, जब इसकी दो रेखाएं एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं, तो इससे रुझान में उलटफेर का संकेत मिल सकता है। इसके अलावा, प्राइस चार्ट और इंडिकेटर के चरम बिंदुओं के बीच डायवर्जेंस भी मिलता-जुलता है, लेकिन ये संकेत ज़्यादा सटीक माने जाते हैं। इस स्थिति में, मूविंग एवरेज और चार्ट दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। चार्ट की ज़ीरो लाइन के मुकाबले पोज़िशन पर भी नज़र रखें। जैसे कि, जब ज़ीरो से ऊपर चला जाता है तो इससे मजबूत रुझान का संकेत मिलता है, और अगर वह नीचे आता है, तो रुझान के कमजोर होने का संकेत मिलता है। MACD की दोनों मूविंग एवरेज जब पॉजिटिव या नेगेटिव ज़ोन में जाती हैं और ज़ीरो लाइन को पार करती हैं, तो कई ट्रेडर्स इसे मौजूदा ट्रेंड की मजबूती का सबूत मानते हैं।
तेज़ MACD लाइन असल में तेज़ और धीमी मूविंग एवरेज के अंतर को दिखाने वाली ग्राफिकल व्याख्या होती है। तेज़ और धीमी EMA के बीच का अंतर भी चार्ट में दिखता है। चार्ट में सिग्नल लाइन (जिसे कभी-कभी धीमी लाइन भी कहा जाता है) भी होती है। यह MACD लाइन का सिंपल मूविंग एवरेज होता है।
MACD एक घंटे (H1) और उससे बड़े टाइमफ्रेम पर अच्छी कार्यक्षमता दिखाता है। लेकिन इस स्थिति में भी आपको सिर्फ़ इस इंडीकेटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। लगभग सभी सफल ट्रेडिंग सिस्टम में कई तकनीकी विश्लेषण टूल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे एक-दूसरे के संकेतों की पुष्टि होती है।
कई ट्रेडिंग सिस्टम में एक साथ कई वित्तीय साधन से सिग्नल पाना शामिल होता है। MACD का इस्तेमाल अन्य इंडीकेटर के लिए फ़िल्टर (अतिरिक्त पुष्टि) के रूप में किया जा सकता है। आप अलग-अलग टाइमफ्रेम पर चार्ट का विश्लेषण करके भी सिग्नल फ़िल्टर कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप दैनिक चार्ट चुनते हैं, जिसमें MACD हिस्टोग्राम सकारात्मक क्षेत्र में बढ़ता है, तो छोटे टाइमफ्रेम पर, आपको सिर्फ़ लॉन्ग पोजीशन खोलना चाहिए। इस रणनीति से सकारात्मक गलत संकेतों के प्रतिशत को कम करने में मदद मिलेगी।
सिग्नल MACD लाइन, तेज़ मूविंग एवरेज (MA) का सिंपल मूविंग एवरेज सिस्टम होता है। तदनुसार, संकेत अवधि उस मूविंग एवरेज की गणना की गई लंबाई होती है।
दो मूविंग एवरेज लाइनों का "गोल्डन क्रॉस" ऐसी वित्तीय स्थिति होती है, जब शॉर्ट MACD ऊपर की ओर बढ़ता है और लॉन्ग लाइन को ऊपर की ओर पार करता है, जिससे बुलिश क्रॉसओवर होता है। ज़्यादातर स्थिति में, इस संकेत के बाद बाजार में ऊपर की ओर उलटफेर होता है। इसके विपरीत स्थिति को "डेड क्रॉस" कहा जाता है। यह तब होता है, जब शॉर्ट मूविंग एवरेज ऊपर से नीचे की ओर लॉन्ग एवरेज को पार करता है, जिससे बियरिस क्रॉसओवर होता है। इस संकेत से निकट भविष्य में गिरावट की संभावना का पता चलता है।
MACD मज़बूत खरीद और बिक्री संकेत बनाता है और ज्यादातर तकनीकी ट्रेडर्स इसे सबसे उपयोगी संकेतक मानते हैं। इसी कारण, मूविंग एवरेज सिस्टम का इस्तेमाल आधुनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के मानक टूल में से एक माना जाता है। ऐसा कोई चमत्कारी उपाय नहीं है, जिससे हर ट्रेडिंग परिस्थिति में मुनाफ़ा सुनिश्चित हो सके। इस इंडीकेटर की कुछ सीमाएं भी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं – शॉर्ट-टर्म चार्ट पर संकेतों में देरी और 'स्थिर' बाजार में ज्यादा सकारात्मक लेकिन गलत संकेत मिलना।
शून्य रेखा के ऊपर का क्षेत्र सकारात्मक कहलाता है और इसके नीचे का क्षेत्र नकारात्मक कहलाता है। इसलिए, जब हिस्टोग्राम शून्य रेखा के नीचे होता है, तब नेगेटिव MACD बनता है।
मूविंग एवरेज लाइन मूल रूप से प्रति घंटे वाले चार्ट पर काम करने के लिए बनाई गई थीं। हालांकि, बाद में यह अन्य टाइमफ्रेम पर भी प्रभावी साबित हुईं। माना जाता है कि H1 (1 घंटे) या उससे बड़े चार्ट पर सबसे अच्छे नतीजे मिलते हैं।
12, 26, 9 MACD की मानक सेटिंग मानी जाती है। संख्या 12 का मतलब तेज़ मूविंग एवरेज की अवधि, 26 – धीमी गति वाली अवधि और 9 – संकेत अवधि है। ये सेटिंग मूल रूप से प्रति घंटा चार्ट के लिए बनाई की गई थी। हालांकि, समय के साथ, उन्होंने सबसे छोटे वाले को छोड़कर, अन्य एक्सचेंज इंस्ट्रूमेंट और टाइमफ़्रेम पर प्रभावशीलता दिखाई है।
MACD इंडिकेटर से थोड़ा लेट सिग्नल मिलता है। वैसे तो ये कमी ज़्यादातर तकनीकी विश्लेषण टूल्स, जैसे मूविंग एवरेज में भी होती है। उच्च टाइमफ्रेम पर ट्रेडिंग करते समय, देरी का इतना असर नहीं पड़ता। लेकिन छोटे चार्ट पर इसका असर साफ़ दिखता है और दक्षता में उल्लेखनीय गिरावट आती है। इसलिए, जब स्कैल्पिंग जैसी रणनीति अपनाई जाती है, तो MACD को दूसरे टूल्स के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि तेज संकेतों को ठीक से फ़िल्टर किया जा सके।
MACD से कभी पहले और कभी देरी से संकेत मिलता है। उदाहरण के तौर पर, दो मूविंग एवरेज लाइनों का क्रॉस होना या ज़ीरो लाइन को पार करना, ये सब देरी वाले संकेत माने जाते हैं। वहीं अगर MACD बुलिश डायवर्जेंस दिखाए और साथ में ये भी बताए कि एसेट ओवरसोल्ड है, तो वो प्रमुख संकेत बन जाता है। MACD इंडीकेटर एक तकनीकी इंडीकेटर के रूप में बहुत अच्छी तरह से काम करता है, जिससे घटना से कुछ कैंडल पहले रुझान में उलटफेर होने का संकेत मिलता है।
ख़ास जानकारी
MACD कई दशक पहले बनाया गया था, लेकिन आज भी जब इसे ट्रेंड से जुड़ी रणनीति में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे काफ़ी भरोसेमंद ट्रेडिंग सिग्नल मिलता है। खासतौर पर जब लॉन्ग-टर्म ट्रेडिंग की जाती है या बड़े टाइमफ्रेम्स पर काम हो रहा हो, तब MACD काफी असरदार साबित होता है। लेकिन जो ट्रेडर्स जल्दी-जल्दी ट्रेडिंग करके कमाई करते हैं, उन्हें इसके संकेत की गुणवत्ता से थोड़ी परेशानी हो सकती है।
MACD की इतनी लोकप्रियता इस बात का सबूत है कि तकनीकी विश्लेषण में इसका रोल कितना ज़रूरी है। यही वजह है कि जो भी ट्रेडिंग सीखना शुरू कर रहे हैं, उनके लिए MACD को समझना बेहद जरूरी है। अगर आप सही तरीके से सीखना चाहते हैं, तो मेरा सुझाव है कि आप अभी टर्मिनल पर जाएं और खुद MACD का इस्तेमाल करें। अगर आप ट्रेडिंग की शुरुआत कर रहे हैं, तो बिना रजिस्ट्रेशन वाले डेमो अकाउंट पर ट्रेडिंग करके आप नुकसान से बच सकते हैं!
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रीयल टाइम मोड में GOOG का मूल्य चार्ट

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