यह लेख मार्जिन जमा करने के तरीके, उसके फायदे और नुकसान का एक संपूर्ण अध्ययन है। इसी के साथ मार्जिन डिपॉज़िट करने में जो बड़े जोखिम छिपे होते हैं, उनका भी एक विस्तृत अध्ययन है। मुझे उम्मीद है कि इससे ट्रेडर्स को इस इंस्ट्रूमेंट के इस्तेमाल के बारे में समझदारी भरा फैसला लेने में मदद मिलेगी।
इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
- मुख्य बातें
- मार्जिन क्या है?
- मार्जिन ट्रेडिंग। मार्जिन लोन की मूल बातें समझाई गईं हैं
- मार्जिन पर खरीदारी और शक्तिशाली उदाहरण
- मार्जिन ट्रेडिंग के लाभ
- क्या मार्जिन ट्रेडिंग के कोई नुकसान हैं?
- मार्जिन ट्रेडिंग से जोखिम कम करना
- मार्जिन अकाउंट क्या है?
- प्रारंभिक मार्जिन और मेंटेनेंस मार्जिन
- मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ
- क्रिप्टो मार्जिन ट्रेडिंग
- ट्रेडिंग में मार्जिन को कैसे ट्रैक करें
- आप फ़ॉरेक्स में मार्जिन की गणना कैसे करते हैं?
- मार्जिन लेवल और फ़्री मार्जिन
- निष्कर्ष
- मार्जिन ट्रेडिंग पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुख्य बातें
मुख्य थीसिस | गहन जानकारी और मुख्य बिंदु |
परिभाषा | फ़ॉरेक्स में मार्जिन ट्रेडिंग, व्यक्तिगत पूंजी से ज़्यादा बड़े पोज़िशन को नियंत्रित करने की क्षमता देती है। |
शर्तें | मार्जिन ट्रेडिंग में शामिल होने के लिए ख़ास शर्तों को पूरा करना होगा, ताकि यह तय हो सके कि ट्रेडर अपनी निवेश-सीमा को पार न करें। |
लाभ | मार्जिन ट्रेडिंग, मार्जिन ट्रेडिंग अधिक लाभ लेने का मौका देती है, क्योंकि यह फ़ॉरेक्स मार्किट में लीवरेज बढ़ाने का भी मौका देती है। |
हानि | हालाँकि मार्जिन ट्रेडिंग से मुनाफे में इज़ाफ़ा हो सकता है, लेकिन अगर मार्केट ट्रेडर की पोज़िशन के हिसाब से नहीं चलता तो इससे नुकसान की आशंका भी बढ़ सकती है। |
जोखिम | मार्जिन ट्रेडिंग में शामिल होने से बहुत बड़े जोखिम सामने आ सकते हैं, खासकर अगर मार्केट अस्थिर और अप्रत्याशित हो |
मार्जिन अकाउंट क्या है? | मार्जिन अकाउंट ट्रेडर्स को ब्रोकर्स से पैसा ऋण लेने की इजाज़त देता है, ताकि वे अपने अकाउंट की राशि से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर ट्रेड कर सकें। |
मार्जिन क्या है?
ट्रेडिंग और निवेश दोनों में फ़ायदा कमाना सबसे बड़ा लक्ष्य है। हालाँकि, वैश्विक एक्सचेंज़्स पर लेनदेन दूसरे मकसद के लिए भी किया जा सकता है, जैसे हेजिंग के ज़रिए बिज़नेस और पूंजी को बचाने के लिए साफ सुथरी रणनीति के रूप में। सभी वित्तीय परिचालनों का अंतिम लक्ष्य लाभ को कहा जाए, यह पूरी तरह से सही नहीं होगा। वित्तीय दुनिया में नकदी को मार्जिन कहा जाता है।
मकसद के आधार पर, मार्जिन परिवर्तनीय, मुक्त, हेज्ड या लॉक्ड हो सकता है (अन्य प्रकार भी होते हैं)। ये सभी व्युत्पन्न मूल रूप से धन की एक राशि को दर्शाते हैं। अगर मुझे आसान शब्दों में इस सवाल का जवाब देना हो कि फ़ॉरेक्स मार्केट में मार्जिन क्या है, तो मैं कहूँगा कि मार्जिन, ट्रेड का ओपनिंग प्राइस और करंट प्राइस के बीच का अंतर है। एक्सचेंज पर मार्जिन, फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग की मार्जिन से अलग नहीं है - एक्सचेंज इंस्ट्रूमेंट्स में भी इसी तरह उतार-चढ़ाव होता है।
स्क्रीनशॉट में दिए गए उदाहरण में, EURUSD को 1.20000 की कीमत पर खरीदा गया है। जब एसेट का प्राइस 1.19000 तक गिर जाता है, तो मार्जिन ऋणात्मक हो जाता है क्योंकि करंट प्राइस खरीद की प्राइस से 0.01 कम है। 1.22000 तक की वृद्धि के साथ, ट्रेड पर मार्जिन सकारात्मक होगी, क्योंकि करंट प्राइस खरीद की प्राइस से 0.02 ज़्यादा होगा।
मार्जिन ट्रेडिंग। मार्जिन लोन की मूल बातें समझाई गईं हैं
1990 के दशक की शुरुआत में कुछ ब्रोकर्स ने छोटे डिपॉज़िट से ट्रेडर्स को आकर्षित करके अपने ग्राहक-आधार को बढ़ाने की संभावना देखी। संभावित "रिटेल" ट्रेडर्स के मार्केट का लाभ स्थायी रूप से उच्च मांग था - कई लोग स्टॉक एक्सचेंज में अपना हाथ आजमाना चाहते थे, लेकिन निवेशकों के लिए प्रवेश की शर्तें बहुत कठिन थीं।
हालाँकि, फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में मार्जिन की शुरूआत और ऑनलाइन ट्रेडिंग के बाद के विकास का शुक्र है कि अब हमारे पास ट्रेडर के तौर पर आगे बढ़ने मौका है और इसी के साथ वर्तमान समय में सबसे रोमांचक व्यवसायों में से एक माने जाने वाले में इस व्यवसाय में कदम दर कदम महारत हासिल करने का अवसर भी है।
FX मार्जिन की मुख्य परिभाषा के अलावा, एक ट्रेडर को यह समझना चाहिए कि फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में मार्जिन क्या होती है। लीवरेज ट्रेडिंग इसका अधिक प्रचलित नाम है।
मार्जिन पर ट्रेड आपके ब्रोकर के फ़ंड की कीमत पर ट्रांजेक्शन में शामिल फ़ंड को बढ़ाने का एक तरीका है, लेकिन आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि मार्जिन में बड़ा जोखिम भी होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह कम समय तक जारी रहने वाली एक ऋण सेवा है जो आपके ब्रोकर द्वारा उस समय प्रदान की जाती है जब आप पोज़िशन पर होते हैं।
मार्जिन पर ट्रेड करते समय, एक ट्रेडर न केवल अपने निजी पैसे का इस्तेमाल कर सकता है, बल्कि अपनी ट्रेडिंग पोज़िशन का वॉल्यूम बढ़ाने के लिए ब्रोकर ने जो ऋण राशि दी हैं, उसका इस्तेमाल भी कर सकता है। जब आप लीवरेज्ड ट्रेडिंग में प्रवेश करने का फैसला लेते हैं और अपने असल ट्रेडिंग अकाउंट की शेष राशि से ज़्यादा धनराशि का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको हमेशा खुलकर सलाह लेने की ज़रूरत होती है।
ट्रेडेड वॉल्यूम जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक महत्वपूर्ण वित्तीय परिणाम आपके सामने आएँगे। ट्रेडर का निजी फ़ंड और ब्रोकर के ज़रिये ऋण लिए गए फ़ंड के अनुपात को लीवरेज कहा जाता है।
ट्रेडर के लिए फायदे तो समझ में आते हैं, लेकिन क्या ब्रोकर इतने भरोसे के साथ अपना फ़ंड देकर भारी जोखिम नहीं उठा रहा है? चिंता न करें - ब्रोकर ने अपना ख्याल खुद कर लिया है।
फ़ॉरेक्स ट्रेड्स और विदेशी एक्सचेंज के साथ ही cfd ट्रेडिंग में, मार्जिन एक प्रकार का संपार्श्विक है। यह ग्राहक के ट्रेडिंग अकाउंट की वैल्यू पर वह राशि है जो किसी ख़ास ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट पर लेनदेन के तहत दायित्वों को पूरा करने के लिए ज़रूरी है।
ब्रोकर, ट्रेडर को किसी ख़ास लेनदेन के लिए खासतौर से फ़ंड उपलब्ध कराता है। इसलिए, ट्रेडर के ज़रिए ब्रोकर को यह गारंटी देनी होगी कि उनके पास संभावित नुकसान को कवर करने के लिए पर्याप्त फ़ंड मौजूद हैं।
अगर मार्जिन की राशि पर्याप्त नहीं है, तो ब्रोकर आपको वांछित मापदंडों के साथ ट्रेड खोलने की इजाज़त नहीं देगा। इस मामले में, आपको या तो लीवरेज को कम करना होगा या ट्रेड वॉल्यूम को कम करना होगा, जब तक कि मार्जिन की आवश्यकता राशि आपके अकाउंट में उपलब्ध राशि से कम या उसके बराबर न हो जाए।
ऊपर हमने ऋण मार्जिन से जुड़े मामले पर विचार किया है, जिसमें जितना ज़्यादा लीवरेज का इस्तेमाल होता है, फ़ॉरेक्स मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ उतनी ही ज़्यादा होती हैं।
ट्रेड के लीवरेज के अलावा ट्रेडिंग अकाउंट का लीवरेज भी है, जो इसके विपरीत, फ़ॉरेक्स मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं को कम करने एक तरीके के रूप में काम कर सकता है।
एक्सचेंज ट्रेडिंग के नियमों के अनुसार, ट्रेड सुरक्षित होना चाहिए। 1 लॉट के मानक एक्सचेंज वॉल्यूम को चलाने के लिए आपके ट्रेडिंग अकाउंट में पर्याप्त फ़ंड होना ज़रूरी है। आपके ट्रेडिंग अकाउंट का लाभ उठाने से आपको डिपॉज़िट के साथ ट्रेड करने की क्षमता मिलती है, जो आमतौर पर स्वीकृत किये गए एक्सचेंज स्टैंडर्ड की तुलना में बहुत छोटी होती है।
मैं आपको एक रहस्य बताता हूँ: 1 लॉट से कम वॉल्यूम कोई नहीं होता। यह असंभव लगता है, है न? आखिरकार, हर कोई ब्रोकर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए 0.1 लॉट या 0.01 लॉट जैसे आंशिक लॉट का आदी है।
फ्रॅक्शनल लॉट्स वही हैं जो मार्जिन कॉल्स होती हैं। यदि ब्रोकर लीवरेज उपलब्ध नहीं कराते तो सिर्फ बड़े डिपॉज़िट वाले ट्रेडर ही एक्सचेंज पर ट्रेड कर पाते।
उपरोक्त आंकड़ा यह बताता है कि आपके वित्तीय लीवरेज का साइज़ मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं को किस तरह से प्रभावित करता है। यह आंकड़ा करेंसी पेयर की ट्रेडिंग के लिए सबसे कम मार्जिन दिखाता है जिसमें 1 लॉट की मानक निश्चित ट्रेडिंग वॉल्यूम भी शामिल होता है।
जैसा कि आप जानते हैं, जब आप फ़ॉरेक्स ट्रेड करते हैं तो एक स्टैंडर्ड ट्रेडिंग लॉट आधार अकाउंट करेंसी की 100,000 इकाइयों के बराबर होता है। इस तरह, जब आप लीवरेज्ड ट्रेडिंग का इस्तेमाल किए बिना 1 लॉट का लेनदेन करेंगे तो आपका मार्जिन 100,000 होगा। बिना लीवरेज वाली पोज़िशन को 1:1 के रूप में लिखा जाता है।
इसके बाद, आप देखेंगे कि जैसे ही ट्रेडिंग अकाउंट पर इस्तेमाल होने वाले लीवरेज बढ़ते है, मार्जिन की आवश्यकता उसी अनुपात से कम हो जाती है। यदि आप लीवरेज को 10 गुना बढ़ाते हैं, और यह 1:10 है, तो मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ 10 गुना कम हो जाएँगी और 10,000 करेंसी यूनिट्स होंगी। अधिकतम संभव लीवरेज के साथ, एक ट्रेड को 100 मुद्रा इकाइयों के रूप में कम मार्जिन की ज़रूरत होगी, अगर 1 लॉट का लेनदेन सुनिश्चित करना हो तो।
वित्तीय लीवरेज और मार्जिन संबंधी जोखिम
अब आइए अकाउंट लीवरेज के मुद्दे पर अधिक विस्तार से विचार करें।
अगर इस पैरामीटर का कहीं भी इस्तेमाल नहीं होता है तो इसका साइज़ क्यों जानना चाहिए? अगर आप बहुत गंभीरता से ट्रेडिंग करते हैं, और इसे किसी नए ट्रेडर की तरह नहीं करते, तो आपको उन इंस्ट्रूमेंट्स की अच्छी खासी जानकारी होनी चाहिए जिन्हें आप इस्तेमाल करते चले आ रहे हैं।
फ़ॉरेक्स पर ट्रेड करने के दौरान ट्रेडर का व्यवहार दो प्रकार का होता है: आक्रामक और पुराना। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्रेडर अपने ट्रेड में कितना जोखिम उठाने को तैयार है। यह सीधे तौर पर ट्रेडर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लीवरेज की मात्रा से जुड़ा हुआ है।
आक्रामक ट्रेडिंग में हमेशा बड़ा जोखिम होता है, जिससे भारी मुनाफे की संभावना होती है। मसलन, अगर आप अपने अकाउंट में 100 USD जमा करके हर हफ्ते 10,000 USD कमाना चाहते हैं, तो आपको आक्रामक तरीके से ट्रेड करना होगा। साफतौर पर कहें तो पूरी ताकत झोंक देनी होगी।
आक्रामक ट्रेडिंग रणनीति के लिए, लीवरेज 1:11 से 1:1,000 तक होता है।
हालाँकि, अगर मकसद "जल्दी अमीर बनना" नहीं है, तो विकल्प ट्रेडिंग की पुरानी रणनीतियों का बचता है। मोटे तौर पर सामान्य लीवरेज 1:1 से 1:10 तक होगा।
एक उदाहरण पर विचार करें जहाँ हम एक आक्रामक या पुरानी रणनीति की पहचान कर सकते हैं।
मान लीजिए कि EURUSD करेंसी पेयर में 1.13120 की दर से एक ट्रेड को ओपन किया गया था जिसमें 0.75 लॉट का वॉल्यूम और 2,000 USD की डिपॉज़िट भी शामिल है। आपको यह पता लगाना होगा कि ये पैरामीटर किस लीवरेज से जुड़े हैं। आप यह निम्न फार्मूला से कर सकते हैं:
यदि हम फार्मूला में सभी मान रखते हैं, तो हमें प्राप्त होता है:
यह लीवरेज एक आक्रामक ट्रेड रणनीति की सीमा के तहत आता है - ट्रेडर बढ़े हुए जोखिम के साथ काम करता है।
ट्रेड को तीन तरीकों से और ज़्यादा पुराने रूप में बदला जा सकता है:
- एक अलग वर्तमान दर के साथ एक और करेंसी पेयर की खोज करके क्वोट को कम करें;
- वॉल्यूम कम करें;
- डिपॉज़िट में वृद्धि करें।
सबसे आसान और कारगर तरीका वॉल्यूम कम करना है। आइए अब उसी ट्रेड के लिए लीवरेज की गणना करें, लेकिन ऐसा 0.15 लॉट के वॉल्यूम के साथ किया जाएगा।
यह लीवरेज पुरानी रणनीति के अनुरूप है।
लेख में लीवरेज की अवधारणा पर बहुत विस्तार से चर्चा की गई है जिसका नाम है: "ट्रेडिंग में लीवरेज क्या है: उदाहरण और परिभाषा." यदि आप मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं की बुनियदी बातें सीखना चाह रहे हैं तो मैं इसे आपको अपने बुकमार्क में जोड़ने की सलाह देता हूँ।
मार्जिन पर खरीदारी और शक्तिशाली उदाहरण
मार्जिन पर खरीद कोई वित्तीय साधन खरीदने के लिए एक ट्रांसेक्शन है, यह लीवरेज के इस्तेमाल से अमल में आती है। "मार्जिन पर खरीद" शब्द स्टॉक ट्रेडिंग से आया है, जहाँ निवेशक अक्सर अपने निजी फ़ंड से ट्रेड करते हैं। फ़ॉरेक्स पर ज़्यादातर खुदरा ट्रेडर लीवरेज के साथ काम करते हैं, इसलिए कोई भी खरीद या बिक्री ट्रेड, मार्जिन को प्राथमिकता देता है।
स्टॉक ट्रेडिंग और फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में मार्जिन पर खरीदारी को लेकर विचार करें:
इसलिए, अपने निजी फ़ंड से महज़ $5,000 का इस्तेमाल करके एक ट्रेडर 50 शेयर खरीद सकेगा, अगर खरीद प्राइस $100 प्रति शेयर है तो।
मार्जिन पर खरीदने के दौरान, यानी कि 5,000 डॉलर की अतिरिक्त ऋणी राशि का इस्तेमाल करते हुए, ट्रेडर का अंतिम पोर्टफोलियो समान शेयर प्राइस वाले 100 शेयरों का होगा।
इसलिए, अगर कोई ट्रेडर मार्जिन का उपयोग करता है, तो उसका वित्तीय परिणाम दोगुना होगा, अअपने निजी फ़ंड के साथ ट्रेड करने की तुलना में। यह सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणामों पर लागू होता है।
मुद्रा प्राइस में उतार-चढ़ाव स्टॉक उपकरणों की तुलना में कम महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए, मार्जिन के बिना फ़ॉरेक्स मार्केट रिटेल ट्रेडर्स की पहुँच से बाहर है, और फ़ॉरेक्स मार्किट पर 1: 100 जैसे लीवरेज प्राइस औसत और उचित हैं। चूंकि इस तरह का लीवरेज हासिल करना आसान होता है, इसलिए आपको प्रति ट्रेड कुल डिपॉज़िट के 5% से ज़्यादा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
फ़ॉरेक्स मार्केट पर मार्जिन और गैर-मार्जिन ट्रेड्स के नतीजों के बीच जो अंतर होता है, वह अधिक महत्वपूर्ण है। स्टॉक एक्सचेंज न तो बड़े नुकसान और न ही बड़े मुनाफे का मौका देता है।
मार्जिन पोज़िशन क्या है?
मार्जिन पोज़िशन एक लीवरेज्ड अर्थात उत्तोलित पोज़िशन है। मार्जिन पोज़िशन ओपनिंग का मतलब है, ब्रोकर ने जो अतिरिक्त फ़ंड मुहैया कराये हैं, उनका उपयोग करके ट्रेडिंग करना।
यदि आप एक फ़ॉरेक्स ट्रेडर हैं, तो आपको फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में मार्जिन को भली भाँती जानना चाहिए। यदि आप विदेशी एक्सचेंज मार्केट में खासतौर से अपने निजी फ़ंड से ट्रेडिंग करते हैं, तो आपको अच्छा-ख़ासा मुनाफा कमाने के लिए पर्याप्त डिपॉज़िट की ज़रूरत होगी।
मार्जिन ट्रेडिंग के लाभ
इसका एक फ़ायदा यह है कि इससे लाभ की संभावना बढ़ जाती है और प्रारंभिक निवेश तेज़ी से बढ़ता है। यह बात खासतौर से मुद्राओं की ट्रेडिंग के दौरान बिलकुल सही है। मुद्रा जोड़ों के औसत दैनिक उतार-चढ़ाव की वजह से ट्रेडर्स छोटे निवेशों से ज़्यादा पैसा नहीं कमा पाते।
फ़ॉरेक्स ट्रेड्स के सिलसिले में कोई भी मार्जिन समझौता अगर न हो तो विदेशी एक्सचेंज मार्किट तक पहुँच बना पाना फ़ॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए मुश्किल हो जाएगा और उन फ़ॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए मुश्किल होगी जो 100,000 यूनिट से कम मार्जिन डिपॉज़िट के साथ शमिल हुए हैं। चूंकि 100,000 यूनिट फ़ॉरेक्स पोज़िशन खोलने के लिए लेनदेन की सबसे कमतर स्वीकार्य वॉल्यूम है। ट्रेडिंग के लिए लीवरेज का उपयोग करते समय, $10- $100 की डिपॉज़िट काफी होती है।
इसके अलावा, मार्जिन में महत्वपूर्ण जोखिम छिपा होता है जो फ़ॉरेक्स ट्रेडर्स को जोखिमों की गणना करने के लिए मजबूर करता है, चूंकि बड़े लीवरेज का इस्तेमाल करने में लापरवाही बरतने से जल्द ही विनाशकारी परिणाम सामने आएँगे, उदाहरण के लिए पैसों का तेजी से नुकसान हो सकता है। इसलिए यह ट्रेडर के लिए उपयोगी कौशल का विकास करने में मदद करता है, जो कम जोखिम होने की वजह से नॉन-फ़ॉरेक्स मार्जिन के लेवल पर उनके पास नहीं होता।
क्या मार्जिन ट्रेडिंग के कोई नुकसान हैं?
अकुशल हाथों में मार्जिन डिपॉज़िट का मुख्य फ़ायदा इसका बड़ा नुकसान बन जाता है - मैं निवेश की हुई पूंजी पर बड़े रिटर्न की संभावना के बारे में बात कर रहा हूं। एक ट्रेडर अपनी पूंजी को लेकर बहुत ज़्यादा जोखिम उठा सकता है और तेजी से पैसा खोकर बड़ा नुकसान उठा सकता है।
शुरूआती चरण में, ट्रेडर आगे के ट्रेड्स का वॉल्यूम बढ़ाकर अपने कुल लाभ को तेजी से बढ़ाने की संभावना से दीवाने हो सकते हैं। यह अंधापन उन्हें निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ नहीं रहने देता और उन्हें इस बात के लिए बाध्य करता है कि वे सिर्फ अपने पूर्वानुमान के सकारात्मक नतीजों पर ही भरोसा करें।
दूसरी खामी तथाकथित प्राइस का अंतराल और डिपॉज़िट पर उनका प्रभाव है। वीकेंड पर फ़ॉरेक्स काम नहीं करता है, लेकिन वीकेंड के दौरान दुनिया की हालत बदलती रहती है। हालाँकि, ये बदलाव सोमवार को ही क्वोट या हवाले में नज़र आएँगे। इसलिए सोमवार को ओपन होने वाला प्राइस शुक्रवार से काफी अलग हो सकता है चूँकि शुक्रवार को मार्केट बंद रहती है। अगर किसी ट्रेडर ने वीकेंड में लीवरेज्ड पोज़िशन को खुला छोड़ दिया है, तो सोमवार को उन्हें हैरत का सामना करना पड़ सकता है - हो सकता है कि पोज़िशन के मुकाबले कीमत में भारी बदलाव आ गया हो। इस मामले में, सुरक्षात्मक माने जाने वाले स्टॉप आर्डर भी मदद नहीं करेंगे। जो ट्रेडर जोखिम प्रबंधन पर अमल नहीं करता, वह अपनी पूरी डिपॉज़िट खो सकता है।
मेरी राय में, मार्जिन में एक और कमी है - यह सभी ट्रेडर्स के लिए सुलभ और आसान है, चाहे उनका अनुभव कुछ भी हो। नए ट्रेडर ट्रेडिंग शुरू करने से पहले शायद ही कभी खुद को भरपूर तरीके से शिक्षित कर पाते हैं। इसके अलावा, ट्रेड से जुड़े उनके फैसलों पर भावनाओं का असर भी बहुत ज़्यादा होता है। नतीजे के तौर पर बहुत ज़्यादा कमाई करने का मौका देखकर, ऐसा हो सकता है कि कोई नौसिखिया ट्रेडर इस मौके का जिम्मेदारी से फ़ायदा न उठा पाए।
मार्जिन ट्रेडिंग से जोखिम कम करना
जब जोखिम को कम करने की बात आती है, तो बहुत पहले ही इसे हल्के फुल्के विस्तार से बताया जा चुका है। समस्या यह है कि कोई भी व्यक्ति इन सलाहों को तब तक नहीं सुनता जब तक कि उसे कोई नकारात्मक अनुभव न हो जाए या फिर सलाहों को नजरअंदाज करने के बाद उन्हें कोई बड़ा जोखिम न उठाना पड़े।
यदि आप भी उन्हीं ट्रेडर्स में से एक हैं, तो आइए एक बार फिर से चर्चा करें कि उपयोग होने वाली मार्जिन में शामिल जोखिमों को किस तरह से उपयोगी और सद्भावपूर्ण डिपॉज़िट में बदला जा सकता है:
- चाहे कितना भी मार्जिन इस्तेमाल किया जाए, फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में जिन जोखिमों के बारे में सलाह दी जाती है, वो प्रति ट्रेड डिपॉज़िट का 5% से अधिक नहीं है। 5% पूर्ण और अधिकतम वैल्यू है। दूसरे शब्दों में, प्रति ट्रेड में सामान्य जोखिम लगभग 1-2% होना चाहिए। अगर लगातार 12-15 ट्रेड में आपको नुकसान का सामना करना पद रहा है, तो यह नियम आपकी डिपॉज़िट को सुरक्षित रखेगा।
- नयी और महत्त्वपूर्ण रिलीज़ जारी होने के 15 मिनट पहले और 15 मिनट बाद तक ट्रेड न करें। स्प्रेड में इज़ाफ़ा हो सकता है और इसके नतीजे में स्टॉप लॉस द्वारा समापन भी कहीं ज़यादा ख़राब कीमत पर होगा जिसे ट्रेडर ने सोचा भी नहीं होगा।
- यदि आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो वीकेंड के लिए ओपन पोज़िशन न छोड़ें। आपकी पोज़िशन की हालत के उलट मूल्यों में अंतराल हो सकता है
- अपनी सारी बचत को जल्दी से दोगुना करने की उम्मीद में फ़ॉरेक्स में निवेश न करें। इसकी मिसाल ऐसे ही है जैसे आप जिम में पहली बार जाकर सबसे भारी डम्बल उठा रहे हों। सबसे पहले, फ़ॉरेक्स से ट्रेड करने के लिए निःशुल्क मार्जिन का इस्तेमाल करके डेमो पर फ़ायदा हासिल करें, और फिर पूंजी में नुकसान के जोखिम को सामने रखते हुए अपने खुद के ट्रेडिंग नियमों का पालन करने की अपनी क्षमता का परीक्षण करें और इसके लिए एक छोटा सा लाइव अकाउंट प्राप्त करें। और उसके बाद ही धीरे-धीरे डिपॉज़िट बढ़ाएँ।
- वास्तविक अकाउंट पर ट्रेड करने के दौरान आपको दिन, हफ्ते और महीने के लिए लाभहीन ट्रेड्स की सीमा पहले से ही तय करनी होगी और उस पर सख्ती से अमल करना होगा। जिन सभी पेशेवर ट्रेडर्स से मैंने बात की, उन सभी की एक सीमा होती है। यह डिपॉज़िट को बचाने और आपकी पूंजी पर भावनाओं के जो नुकसानदायक प्रभाव पड़ते हैं, उन्हें कम करने की गारंटी है।
संक्षेप में, मार्जिन किसी फ़ॉरेक्स ट्रेडर के लिए बहुत कारआमद साबित हो सकती है, बशर्ते कि कुछ सख्त नियमों का पालन किया जाए। नहीं तो यह ट्रेडर की सभी कमियों से सामने आने वाले नतीजों को बढ़ा देगा, जिसका असर तुरन्त डिपॉज़िट पर दिखाई देगा।
मार्जिन अकाउंट क्या है?
मार्जिन अकाउंट ब्रोकर के पास एक ऐसा अकाउंट होता है जहाँ ट्रेडर, फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में अपना फ़ंड डिपॉज़िट करते हैं, ताकि उसे बाद में इस्तेमाल कर सकें। मार्जिन फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग अकाउंट पर जमा फ़ंड, मार्जिन ट्रेड ओपन करते समय संपार्श्विक के रूप में काम आती है। यह स्टैंडर्ड ब्रोकरेज अकाउंट के उलट है, जहाँ ट्रेडिंग में सिर्फ और सिर्फ अपने ही फ़ंड का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेडर के लिए उपलब्ध ट्रेड की मात्रा मार्जिन अकाउंट पर पूंजी की मात्रा और लीवरेज के साइज़ के आधार पर तय की जाती है।
प्रारंभिक मार्जिन और मेंटेनेंस मार्जिन
प्रारंभिक मार्जिन कोई ट्रेड खोलने के लिए आवश्यक धनराशि है। यदि ट्रेडर की इक्विटी प्रारंभिक मार्जिन से कम है, तो ज़रूरत पूरी नहीं हो पाती है, जिसका मतलब ये है कि वे नया ट्रेड नहीं खोल पाएँगे।
मसलन, कोई ट्रेडर 20 डॉलर में 10 शेयर खरीदना चाहता है। 1 से 2 लीवरेज के साथ, इस पोज़िशन को खोलने के लिए प्रारंभिक मार्जिन $20x10 / 2 = $100 होना चाहिए। पोज़िशन क्लोज़ होने तक यह राशि अकाउंट में जस की तस रहती है।
मेंटेनेंस मार्जिन इक्विटी की वह राशि है जो किसी ट्रेड को ओपन रखने के लिए ज़रूरी होती है। अगर ट्रेडर की इक्विटी मैंटेनस मार्जिन से नीचे है, तो पोज़िशन के आधार पर मार्जिन कॉल या जबरन क्लोजिंग की जायेगी।
आइए हम वही उदाहरण लें और मान लें कि मेंटेनेंस मार्जिन कुल का 40% है, यानी $200 x 0.4 = $80. इसके अलावा, मान लीजिए कि स्टॉक की कीमत 20 डॉलर से गिरकर 12 डॉलर हो गई है, और पोर्टफोलियो की वैल्यू अब 120 डॉलर है। ½ लीवरेज के साथ, ट्रेडर की इक्विटी अब $120/2 = $60 है, जो मेंटेनेंस के न्यूनतम लेवल से $20 कम है।
इसलिए, इस मामले में, मार्जिन कॉल लागू किया जाएगा और ब्रोकर के ज़रिये ट्रेडर को या तो अतिरिक्त धनराशि जमा करने या पोज़िशन को बंद करने का प्रस्ताव दिया जाएगा।
जैसा कि हम देखते हैं, मार्केट में जाने के बाद, किसी ट्रेडर को एक निश्चित इक्विटी मैनटैन रखने की ज़रूरत होती है ताकि वह मेंटेनेंस मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं को पूरा कर सके और अपनी पोज़िशन को स्वचालित रूप से बंद होने से बचा सके।
मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ
फ़ॉरेक्स पर अपने पहले ट्रेडिंग सत्र में, मैंने बहुत सारे ट्रेड ओपन किए और मुझे हैरत हुई कि मैं और ज़्यादा नहीं ओपन कर सका। मेरे डेमो अकाउंट बैलेंस मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं से बच गई थी - मेरे पास नई पोज़िशन ओपन करने के लिए पर्याप्त इक्विटी नहीं थी।
मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ मार्जिन की वह राशि है जो नये ट्रेड ओपन करने के लिए संपार्श्विक के रूप में आवश्यक है। मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं के सहारे फ़ॉरेक्स ब्रोकर नुकसान के जोखिम को कम करता है, वह भी ऐसे मामलों में जब ट्रेडर की पोज़िशन के खिलाफ प्राइस का तेज़ उतार-चढ़ाव छिड़ा होता है। जैसा कि हमें याद है कि मार्जिन ट्रेड में ब्रोकर, ट्रेडर को ट्रेड करने के लिए फ़ंड्स उपलब्ध कराता है।
वेब टर्मिनल से लिए गए एक उदाहरण पर गौर करें
आप किसी ट्रेड को ओपन करने से पहले चयन हुए वॉल्यूम के साथ चयनित इंस्ट्रूमेंट पर ट्रेड के लिए मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं का साइज़ देख सकते हैं - यह लॉट साइज़ के तहत दर्शाया गया है।
पोज़िशन ओपनिंग के बाद, ट्रेडर निम्नलिखित पैरामीटर देखता है:
पहला तो पहले से ओपन किए गए ट्रेड्स के लिए मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं की सम्पूर्ण राशि है।
दूसरा है निःशुल्क मार्जिन राशि। यह ओपन ट्रेड्स के लिए इक्विटी माइनस मार्जिन से जुडी आवश्यकताएँ हैं। ये फ़ंड नए ट्रेड ओपन करने के लिए उपलब्ध हैं।
यदि ओपन करने से पहले पैरामीटर “संचालन के लिए उपलब्ध” मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं से कम है, एक ऐसे ट्रेड के लिए जो चयनित इंस्ट्रूमेंट में निश्चित वॉल्यूम के साथ है तो आप ट्रेडिंग को जारी रख सकते हैं चाहे इंस्ट्रूमेंट को बदलने के बाद, ट्रेड वॉल्यूम को कम करने के बाद या फिर और अधिक फ़ंड्स डिपॉज़िट करके।
मार्जिन दरें
मार्जिन दर, ब्रोकर से ऋण ली गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियों के उपयोग के लिए लिया जाने वाला शुल्क है और यह उपयोग हो चुकी मार्जिन की राशि से जुड़ा होता है।
कौन सी असेट्स? जैसे, एक्सचेंज पर शॉर्ट पोज़िशन ओपन करते समय, ट्रेडर सबसे पहले ब्रोकर से ज़रूरी संख्या में शेयर ऋण लेता है। ट्रेडर को इस लीवरेज्ड ऑपरेशन के लिए स्टॉक ब्रोकर की दरों के हिसाब से भुगतान करना होगा। मार्जिन के साथ ट्रेडिंग करने के लिए ब्रोकर के पैसे का इस्तेमाल करने पर भी शुल्क लगता है।
मार्जिन दर क़र्ज़ या क्रेडिट कार्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स की ब्याज दरों से कम है। इसलिए, ट्रेडर आमतौर पर बैंक के बजाय के बजाये ब्रोकर को अतिरिक्त धनराशि का भुगतान करना पसंद करते हैं।
ट्रेडर हर साल फ़ॉरेक्स मार्जिन % की गणना करते हैं। फिर जो धनराशि ऋण ली गई है, उसकी अवधि के आधार पर इसे एडजस्ट किया जाता है।
मिसाल के तौर पर एक ट्रेडर 6% मार्जिन दर पर 1/10 लीवरेज पर $11,000 प्राइस के स्टॉक खरीदना चाहता है और 10 दिनों तक उस पोज़िशन को बरकरार रखने का इरादा तैयार करता है।
उनकी इक्विटी $1000 है। शेष $10,000 ब्रोकर द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
इस तरह ट्रेडर को पूरे साल तक ब्रोकर के फ़ंड का इस्तेमाल करने के लिए निम्नलिखित राशि का भुगतान करना होगा:
इसलिए, प्रति दिन के लिए ट्रेडिंग मार्जिन दर है:
अगर कोई ट्रेडर 10 दिनों तक किसी पोज़िशन को बनाए रखने का मंसूबा बनाता है, तो वास्तव में उन्हें मार्जिन का इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करना होगा:
मार्जिन फ़ंड के साथ ट्रेडर की 100 गुना लाभ कमाने की क्षमता को मद्देनज़र रखते हुए यह बहुत बढ़िया सौदा है।
जब आप फ़ॉरेक्स ट्रेड करते हैं, तो आमतौर पर फ़ॉरेक्स ब्रोकर ट्रेडर्स को मुफ्त में लीवरेज प्रदान करते हैं। यह फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग के फ़ायदों में से एक है, खासतौर से नए ट्रेडर्स के लिए जो अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि स्प्रेड बेट्स कैसे काम करते हैं।
क्रिप्टो मार्जिन ट्रेडिंग
आइए देखें कि मार्जिन के साथ क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग कैसे काम कर सकती है। दरअसल, पोज़िशन फ़ॉरेक्स या किसी अन्य इंस्ट्रूमेंट में मार्जिन से अलग नहीं है।
1 बिटकॉइन की मौजूदा कीमत को देखते हुए ज़्यादातर ट्रेडर्स इस इंस्ट्रूमेंट का ट्रेड करने के लिए अपने खुदरा निवेशक खातों से सिर्फ अपने खुद के पैसे का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
मार्जिन के बिना क्रिप्टोकरेंसी इंस्ट्रूमेंट्स की ट्रेडिंग करने के खिलाफ दूसरा तर्क उनका स्थिर न होना है। बिटकॉइन के लिए औसत दैनिक प्राइस उतार-चढ़ाव $1500- $3500 काफी स्टैंडर्ड है।
इस तरह अगर आप सिर्फ अपने खुद के पैसे से ट्रेड करते हैं तो एक दिन में आप कुल डिपॉज़िट का लगभग 10% खो सकते हैं।
मेरी राय में, क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग के दौरान ट्रेड वॉल्यूम को कम करने के लिए मार्जिन का इस्तेमाल करना सही है, पारंपरिक मुद्राओं के विपरीत, जहाँ लीवरेज का अवसर के तौर पर खूब इस्तेमाल होता है ताकि लॉट साइज़ को बढ़ा दिया जाए।
मार्केट के वर्तमान हालात में, 0.01 वॉल्यूम और 1/100 लीवरेज के साथ बिटकॉइन में ट्रेड खोलने के लिए किसी ट्रेडर को लगभग 23 डॉलर के अपने निजी फ़ंड की ज़रूरत होगी। हाँ, यह फ़ॉरेक्स के जोड़ों की तुलना में ज़्यादा है। लेकिन फिर भी, अगर आप मार्जिन ट्रेडिंग का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो यह लगभग 22,000 डॉलर के अपने निजी फ़ंड की तुलना में ज़्यादा किफायती है।
यदि आप दूसरी क्रिप्टोकरेंसी का भी ट्रेड करना चाहते हैं, जिनका प्राइस अक्सर बिटकॉइन से बहुत कम होता है, तो भी आपको अस्थिरता का ध्यान रखना चाहिए।
यह ETHUSD चार्ट है, जहाँ D1 समय-सीमा है:
औसत दैनिक चाल लगभग 50 डॉलर है, जो मोटे तौर पर इंट्रूमेंट की वैल्यू के 10% के बराबर है, जैसा कि बिटकॉइन के मामले में भी ऐसा ही है।
संक्षेप में, क्रिप्टोकरेंसी का ट्रेड करने के दौरान मार्जिन का इस्तेमाल करें ताकि उन्हें सामान्य मुद्रा जोड़े के समान बनाया जा सके। इस तरह अपने जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों की बुनियाद पर खासतौर से आप ट्रेड के वॉल्यूम का चयन कर सकते हैं।
उच्च अस्थिरता की वजह से क्रिप्टोकरेंसी में मिलने वाले मुनाफे फ़ॉरेक्स करेंसी जोड़ों से ज़्यादा है। इसलिए, अपनी ट्रेडिंग रणनीति के नियमों के अनुसार स्टॉप लॉस ऑर्डर लगाना दूसरा महत्वपूर्ण नियम है। दूसरे नियम के बिना, और बड़ा मुनाफा होने के बावजूद, अस्थिरता से होने वाले तुलनात्मक नुकसान की वजह से ट्रेडर का वित्तीय परिणाम शून्य के आसपास झूल सकता है।
ट्रेडिंग में मार्जिन को कैसे ट्रैक करें
बहुत से ट्रेडिंग टर्मिनलों में मार्जिन वैल्यू को दिखाने के लिए समान मूल पैरामीटर होते हैं।
- बैलेंस। यह फ़ील्ड आपके ट्रेडिंग अकाउंट में शेष राशि की जानकारी दिखाती है, जिसमें सिर्फ पूर्ण या समाप्त किए गए ट्रेड शामिल हैं। वर्तमान ओपन पोज़िशन को बैलेंस फ़ील्ड में शामिल नहीं किया गया है।
- इक्विटी। यह फ़ील्ड दर्शाती है कि वास्तव में आपके अकाउंट में कितना पैसा है, जिसमें ओपन और क्लोज्ड दोनों पोज़िशन शामिल हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, इक्विटी = बैलेंस – वर्तमान लाभ/हानि।
- मार्जिन। यह फ़ील्ड यह दर्शाती है कि आपके कितने फ़ंड का इस्तेमाल ओपन पोज़िशन के लिए संपार्श्विक या मेंटेनेंस के रूप में किया जाता है।
- फ़्री मार्जिन। यह फ़ील्ड यह दर्शाती है कि आपकी फ़ेथ डिपॉज़िट का कितना हिस्सा मौजूदा पोज़िशन में शामिल नहीं था और इसका इस्तेमाल नई पोज़िशन खोलने के लिए किया जा सकता है या अकाउंट की इक्विटी से बट्टे अकाउंट में डाला जा सकता है।
- मार्जिन लेवल। यह फ़ील्ड आपके फ़ंड और मार्जिन (प्रतिशत के रूप में दिखाई गई) के बीच संबंध को दर्शाती है। मार्जिन लेवल वर्तमान जोखिमों को दर्शाता है।
आप फ़ॉरेक्स में मार्जिन की गणना कैसे करते हैं?
फ़ॉरेक्स मार्जिन के लेवल की गणना करने के लिए दो बुनियादी तरीके हैं: सरल और अत्यंत सरल।
1. मार्जिन की गणना करने का सरल तरीका
यह उन लोगों के लिए उचित रहेगा जो गणित में अच्छे हैं। आपको उस करेंसी पेयर की कीमत जाननी पड़ेगी जिस पर आप पोज़िशन खोलना चाहते हैं, इसी तरह लॉट और आपके ट्रेडिंग अकाउंट के लीवरेज की कीमत भी जाननी होगी।
मार्जिन = (प्राइस*लॉट) / लीवरेज खाता।
फ़ॉरेक्स मार्जिन की गणना करने के लिए हम अपने मान को इस फार्मूला में दर्ज करते हैं:
इस तरह, हमें अपने मापदंडों के साथ किसी एक लेनदेन के लिए आवश्यक मार्जिन की राशि मिल जाती है।
2. फ़ॉरेक्स मार्जिन कैलकुलेटर द्वारा मार्जिन की गणना करने का अत्यंत सरल तरीका
यह हर किसी के लिए उपयुक्त है, खासकर उन लोगों के लिए जो खुद से गणना करना पसंद नहीं करते। आपको फ़ॉरेक्स मार्जिन कैलकुलेटर की आवश्यकता होगी।
फ़ॉरेक्स मार्जिन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करना बहुत आसान है।
आप अपने ट्रेड के पैरामीटर में प्रवेश करते हैं: सबसे पहले, आप ट्रेडिंग अकाउंट का लीवरेज, मुद्रा जोड़ी, ट्रेड वॉल्यूम, ट्रेड का प्रकार, ओपनिंग प्राइस चुनते हैं। फ़ॉरेक्स मार्जिन कैलकुलेटर ट्रेड के सभी मापदंडों की तुरंत गणना करता है, जिसमें फ़ॉरेक्स मार्जिन का साइज़ भी शामिल है।
मार्जिन लेवल और फ़्री मार्जिन
मैंने पहले ही बताया है कि फ़ॉरेक्स मार्जिन लेवल क्या है। यह एक ट्रेडर के फ़ंड और मार्जिन (प्रतिशत के रूप में दिखाई गई) के बीच का संबंध है। मार्जिन लेवल का जुड़ाव मार्जिन कॉल और स्टॉप आउट जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं से है। मार्जिन कॉल तब होता है जब आपके फ़्री फ़ंड का लेवल ऋणात्मक या शून्य के बराबर हो जाता है। इस मामले में, आप अब कोई नई पोज़िशन नहीं खोल सकते क्योंकि आपके फ़ॉरेक्स ट्रेड अकाउंट का सारा पैसा पोज़िशन खोलने में इस्तेमाल किए गए मार्जिन के लिए संपार्श्विक है। मार्जिन कॉल होने के बाद, स्टॉप आउट हो सकता है। फ़ॉरेक्स में मार्जिन का इस्तेमाल करते समय, स्टॉप आउट लेवल वह होता है जब आपका मार्जिन लेवल एक ख़ास प्रतिशत (%) के लेवल तक गिर जाता है, जिसमें आपका ब्रोकर आपकी ओपन पोज़िशन को सबसे ज़्यादा नुकसान वाले से शुरू करते हुए स्वचालित रूप से बंद ("लिक्विडेटेड") कर देता है, ताकि ग्राहक को नुकसान से इस हद तक बचाया जा सके कि उसे अपना प्रारंभिक निवेश भी न खोना पड़े।
जो ट्रेडर आक्रामक रणनीति अपनाते हैं, वे इन हालात को भली-भांति समझते हैं, क्योंकि ऐसे हालात अक्सर उनके ट्रेडिंग में घटित होते रहते हैं, और वे बेट्स लगाने के बारे में भी जानते हैं। बेशक, मार्केट में किसी भी तरह के जोखिम से सुख नहीं मिलता, और ऐसे हालात के की वजह से अक्सर प्रारंभिक अकाउंट इक्विटी का नुकसान होता है, इसी के साथ फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में प्रवेश करने के लिए आवश्यक मार्जिन की राशि को भी नुकसान पहुँचता है। पुरानी रणनीति अपनाने वाले ट्रेडर्स को ऐसी परिस्थितियों का सामना कभी नहीं करना पड़ता।
आइए देखें कि आप मार्जिन लेवल का पता कैसे लगा सकते हैं और हमारे फ़ॉरेक्स मार्जिन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करके आप फ़्री मार्जिन के लेवल का पता कैसे लगा सकते हैं।
फ़ॉरेक्स में फ़्री मार्जिन, इक्विटी और उपयोग में लायी जा चुकी मार्जिन के बीच का अंतर होती है।
मार्जिन लेवल, इक्विटी/प्रयुक्त मार्जिन अनुपात पर आधारित प्रतिशत (%) प्राइस होता है।
निष्कर्ष
यदि आप फ़ॉरेक्स मार्जिन से जुडी आवश्यकताओं को सही ढंग से लागू करते हैं, तो आप अपनी फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति के प्रदर्शन को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अधिकतम उपलब्ध वित्तीय लीवरेज का इस्तेमाल करें और किसी चमत्कार की उम्मीद करें।
उचित आवेदन का मतलब है कि आपको अपने लिए सुविधाजनक लीवरेज साइज़ चुनना चाहिए, ताकि ट्रेडिंग प्रक्रिया की वजह से आपको भारी भावनात्मक तनाव महसूस न हो।
सभी निवेशकों के लिए उपयुक्त लीवरेज पर सिफारिशें नहीं की जा सकती हैं, लेकिन आपको हमेशा एक बात याद रखनी चाहिए! आप जितना कम घबराएँगे या उत्साहित होंगे, आप उतनी ही समझदारी भरे ट्रेडिंग निर्णय ले सकेंगे और इस तरह आपके मुनाफे कमाने की संभावना बढ़ जाएगी।
आपको हमेशा यह बात दिमाग में बिठा लेनी चाहिए कि वित्तीय लीवरेज जितना ज़्यादा होगा, जोखिम भी उतना ही ज़्यादा होगा! अगर आप एक नए ट्रेडर हैं, तो आपको भारी मुनाफा कमाने के बजाय अपनी डिपॉज़िट को न गंवाने पर ज़्यादा तवज्जो देने की ज़रूरत है। जब आप संरक्षण का गुण सीख जाएँगे तो आपको फ़ायदा मिलने लगेगा।
मार्जिन ट्रेडिंग पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह ब्रोकर के ऋण लिए गए फ़ंड का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग है, जो आपको बड़ी मात्रा में ट्रेड करने की अनुमति देता है। ट्रेड ओपनिंग के दौरान ट्रेडर के पास अपना पर्याप्त निजी फ़ंड होना चाहिए ताकि उसके तहत आने वाले दायित्वों को पूरा किया सके। इसलिए, जब फ़ॉरेक्स मार्जिन ट्रेडिंग का विकल्प चुनें, तो किसी भरोसेमंद ब्रोकरेज फर्म का ही चयन करें, प्लेटफ़ॉर्म की शर्तों (जैसे लेनदेन की लागत, शुल्क, आदि) पर ख़ास तवज्जो दें, और किसी पेशेवर से खुलकर सलाह लें।
मार्जिन डिपॉज़िट का इस्तेमाल करना अपने निजी फ़ंड से ट्रेड करने की तुलना में अधिक फ़ायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह तभी होगा जब आपके पास लाभदायक ट्रेडिंग रणनीति हो और आप जोखिम प्रबंधन के उसूलों पर अमल करते हों। यह याद रखना ज़रूरी है कि ट्रेडर्स को बड़ी मार्केट एक्सपोजर मार्जिन देने के बावजूद बड़े जोखिम फिर भी पनपते है। इसलिए आवश्यक कौशल न हो तो ट्रेडर अपने प्रारंभिक निवेश से भी ज़्यादा कुछ खो सकते हैं।
जब आप स्टॉक एक्सचेंज पर मार्जिन डिपॉज़िट करते हैं तो यह लीवरेज को इस्तेमाल करके स्टॉक एक्सचेंज इंस्ट्रूमेंट्स में ट्रेडिंग करने जैसा है।
किसी ट्रेडर को अधिक वॉल्यूम में ट्रेड करने के लिए, ब्रोकर उन्हें पैसा दिलाता है, जिसे वह पोज़िशन बंद होने के बाद वापस ले लेता है। इससे डिपॉज़िट बढ़ाए बिना ही ट्रेडर की कमाई करने की संभावना बढ़ जाती है। हालाँकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि विदेशी एक्सचेंज में लीवरेज्ड ट्रेडिंग करने के दौरान बड़े जोखिम होते हैं, इसलिए कितनी मार्जिन का इस्तेमाल करना है, यह हर एक ट्रेडर खुद से करेगा, और इस बीच वह अपने ट्रेडिंग के लक्ष्यों, अनुभव और जोखिम झेलने की बुनियाद पर व्याख्या करेगा।
यह एक ट्रेडर द्वारा खोला गया ट्रेड है, जिसका एक हिस्सा ब्रोकर का फ़ंड जिसे उसने ऋण लिया था, उसके द्वारा सुरक्षित किया जाता है। याद रखें कि मार्जिन के साथ लीवरेज्ड ट्रेडिंग में बहुत जोखिम होते है, इसलिए फ़ॉरेक्स एक्सचेंज मार्केट में अपना सफर शुरू करने से पहले इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से खुलकर सलाह लें।
फ़ॉरेक्स एक्सचेंज मार्केट में मार्जिन का इस्तेमाल करते समय, एक ट्रेडर की पोज़िशन को ब्रोकर द्वारा बंद किया जा सकता है, अगर किसी निश्चित राशि का नुकसान होता है तो। यदि प्राइस ट्रेड की विपरीत दिशा में चलती है, तो मार्जिन पर खरीदारी करने वाले को अपनी नकदी का उपयोग करने की तुलना में अधिक हानि होगी।
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोई ट्रेडर नया ट्रेड नहीं खोल सकता, क्योंकि उसके पास उसे कवर करने के लिए पर्याप्त फ़ंड नहीं होता है। आप इस लेख में मार्जिन कॉल के सिद्धांत के बारे में और ज्यादा पढ़ सकते हैं।
यह ट्रेडर के उपलब्ध फ़ंड का वह फ़ंड है जिसे खुदरा निवेशक के अकाउंट से निकाला जा सकता है या नए ट्रेड ओपन करने के लिए मार्जिन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ट्रेडर के लक्ष्य के आधार पर दो विकल्प हैं। यदि आप नए ट्रेड खोलने का इरादा करते हैं तो आपको एक या अनेक ओपन लाभहीन पोज़िशनों को बंद करना होगा, जिससे फ़ंड्स फ़्री हो जाएँगे। यदि आप नए ट्रेड खोलने का इरादा नहीं बना रहे हैं, तो आप कुछ भी नहीं कर सकते और स्टॉप लॉस या टेक प्रॉफ़िट मौजूदा ट्रेड के बंद होने का इंतजार कर सकते हैं।
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रीयल टाइम मोड में EURUSD का मूल्य चार्ट

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