क्या आप बिना मार्केट ट्रेंड का अनुमान लगाए प्राइज़ के अंतर से लाभ कमाना चाहते हैं? आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है, जिसमें लाभ एक ही एसेट की कीमत में अलग-अलग एक्सचेंजों पर होने वाले अंतर से कमाया जाता है। यह रणनीति खासतौर पर क्रिप्टो मार्केट में अच्छी तरह काम करती है क्योंकि इसमें उतार-चढ़ाव अधिक होता है और लिक्विडिटी सीमित होती है।

इस आर्टिकल में, आप जानेंगे कि आर्बिट्रेज कैसे काम करता है, इसके कौन-कौन से प्रकार होते हैं — प्योर से लेकर ट्रायएंगुलर तक — और जोखिम को कैसे कम किया जा सकता है। आज ही आर्बिट्रेज की दुनिया में प्रवेश करें और नए ट्रेडिंग अवसरों की खोज करें!

इस आर्टिकल में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:


मुख्य निष्कर्ष

  • आर्बिट्रेज़ एक ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें अलग-अलग मार्केट या ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर एक ही एसेट के प्राइज़ में अंतर से लाभ कमाया जाता है।
  • संक्षेप में, इसका मतलब है कि आप किसी एसेट को एक मार्केट में कम प्राइज़ पर खरीदते हैं और दूसरे मार्केट में ज़्यादा प्राइज़ पर बेचते हैं, जिससे प्राइज़ के अंतर का फायदा उठाया जाता है।
  • आर्बिट्रेज के लोकप्रिय प्रकार प्योर (प्रत्यक्ष), ट्रायएंगुलर, रिटेल, कन्वर्टिबल और मर्जर आर्बिट्रेज हैं।
  • यह तरीका क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में में ज़्यादा अच्छा काम करता है, क्योंकि इसमें अस्थिरता और नियम कम होते है। हालाँकि, इसके लिए आपको बहुत तेज़ी से ट्रेड एक्ज़िक्यूट करना होता है और कई एक्सचेंजों पर जमा राशि की आवश्यकता होती है।
  • मुख्य जोखिम, कमीशन, तकनीकी खराबियों और एक्सचेंज के बीच फ़ंड ट्रांसफ़र करने में होने वाली देरी से जुड़े होते हैं।
  • सफल आर्बिट्रेज ट्रेडिंग के लिए, विशेष स्वचालित प्रोग्राम और मार्केट स्कैनर का इस्तेमाल करना सही होता है, जो तेज़ी से ट्रेडिंग के अवसरों की पहचान कर सकें।
  • इस रणनीति का फायदा यह है कि इसमें आपको मार्केट की दिशा का अनुमान लगाए बिना ही पैसे कमाने का अवसर मिलता है।

आर्बिट्रेज़ क्या है?

आर्बिट्रेज़ का लक्ष्य एक ही एसेट के प्राइज़ में अंतर से लाभ कमाना है। ट्रेडर उस प्लेटफ़ॉर्म पर बिक्री करता है जहाँ एसेट महँगे होते है और उसी समय उसी एसेट को वहाँ खरीदता है जहाँ वह सस्ते होते हैं।

फिज़िकल रिटेलर आर्बिट्रेज के वास्तविक जीवन का उदाहरण हैं। जैसे कि वे डीलर जो एक देश में पुरानी गाड़ियाँ सस्ती खरीदते हैं और दूसरे देश में उन्हें महँगे प्राइज़ पर बेचते हैं।

लाइटफाइनेंस: आर्बिट्रेज़ क्या है?

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में स्टॉक्स, करेंसी, डेरिवेटिव और क्रिप्टोकरेंसी को खरीदना और बेचना शामिल होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का स्टॉक न्यू-यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर $5 में ट्रेड हो रहा है और लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर $4.7 में, तो यह आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में प्रवेश करने का एक अच्छा अवसर है। बशर्ते कि लाभ लागत से ज़्यादा हो।

नियम के रूप में, आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में लेन-देन की गति बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक शक्तिशाली कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और स्वचालित ट्रेडिंग प्रोग्राम फायदेमंद हो सकते हैं। मैनुअल आर्बिट्रेज़ नए मार्केट, जैसे क्रिप्टोकरेंसी में लाभकारी होता है, जबकि विकसित और प्रभावी मार्केट, जैसे स्टॉक मार्केट में यह लाभकारी नहीं होता।

क्रिप्टो में आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग क्या है?

क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग उसी क्रिप्टोकरेंसी के साथ अलग-अलग एक्सचेंज पर विपरीत ट्रेड खोलने पर आधारित होती है। इसलिए, क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ के दौरान, कम से कम दो क्रिप्टो एक्सचेंजों पर डिपॉज़िट होना आवश्यक है।

लाइटफाइनेंस: क्रिप्टो में आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग क्या है?

क्रिप्टो मार्केट अत्यधिक अस्थिर है, इसलिए इसमें अंतर स्टॉक या करेंसी एक्सचेंजों की तुलना में अधिक हो सकते हैं। इसके अलावा, यह मार्केट के कानून द्वारा सख्ती से नियंत्रित नहीं है, इसलिए लोग अपनी निवेश राशि वहाँ ट्रांसफ़र करने में हिचकिचाते हैं। जिसके, कम लिक्विडिटी के कारण प्राइज़ में अंतर विकसित मार्केट की तुलना में लंबे समय तक बने रहते हैं। क्रिप्टो मार्केट की अस्थिरता और लिक्विडिटी के कारण, मैनुअल ट्रेडर्स के लिए भी आर्बिट्रेज़ पर लाभ कमाना संभव है।

क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ का सामान्य विचार यह है कि ऐसे मामलों को खोजा जाए जहाँ एक ही क्रिप्टोकरेंसी का प्राइज़ दो अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग हो। चूँकि आर्बिट्रेज़ ट्रेडर उच्च प्राइज़ वाले एसेट को बेचते हैं, इससे सप्लाई बढ़ती है और प्राइज़ नीचे गिरता है। दूसरा ट्रेड कम प्राइज़ पर एसेट खरीदने का होता है, जिसका मतलब है कि माँग बढ़ती है और प्राइज़ में ऊपर की ओर दबाव पड़ता है। इस प्रकार, जितने ज़्यादा आर्बिट्रेज़ ट्रेड किए जाते हैं, प्राइज़ का अंतर उतना ही कम हो जाता है। इसलिए, एक क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडर को ऐसी परिस्थितियों की पहचान करना सीखना चाहिए और तुरंत संबंधित ट्रेड में प्रवेश करना चाहिए।

क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के जोखिम

क्रिप्टो आर्बिट्रेज ट्रेडिंग के दौरान मुख्य जोखिम सुरक्षा और समय से संबंधित होते हैं।

एक्सचेंज ट्रेडिंग में भाग लेने वाले क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडर्स हेकिंग अकाउंट और क्रिप्टो एक्सचेंजों से जुड़ी धोखाधड़ी के जोखिम के प्रति संवेदनशील रहते हैं। इसके अलावा, क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडर्स को उस स्थिति में अपने फ़ंड खोने का खतरा रहता है अगर कोई क्रिप्टो-ब्रोकर बेईमानी करता है और ग्राहक के पैसे चुराकर कंपनी बंद कर देता है। चूँकि क्रिप्टोकरेंसी, मार्केट के कानून द्वारा अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं है, इसलिए सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें, यानि, उच्च प्रतिष्ठा वाले ब्रोकर चुनें और अपने अकाउंट को अतिरिक्त वेरिफ़िकेशन के साथ सुरक्षित रखें।

आर्बिट्रेज़ ट्रेड को एक्ज़िक्यूशन करने में समय से संबंधित जोखिम जुड़े होते हैं। ट्रेडर्स क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग का लाभ दो तरीकों से उठा सकते हैं:

  • बेहतर ट्रेडिंग उपकरण और हाई-स्पीड संचार के ज़रिए यांत्रिक तरीके से;
  • आर्बिट्रेज़ के अवसर खोजने के लिए ऑटोमैटिक स्कैनर और ट्रेड खोलने के लिए विशेष प्रोग्राम का इस्तेमाल करके।

जितना ज़्यादा समय आर्बिट्रेज़ ट्रेड में प्रवेश के अवसर के सामने आने के बाद बीत जाता है, उतने ही ज़्यादा ट्रेडर उच्च प्राइज़ पर एसेट बेचेंगे और कम प्राइज़ पर खरीदेंगे। इसके कारण, प्राइज़ का अंतर और लाभ की संभावना कम हो जाएगी। किसी समय आर्बिट्रेज़ ट्रेड उपयुक्त नहीं रह सकता, क्योंकि लाभ की संभावना लागत को कवर नहीं करेगी।

लागत में अलग-अलग कमीशन शामिल होते हैं जो ट्रेडर, आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के दौरान देता है, जैसे ट्रेड खोलना, एक्सचेंज के बीच पैसे ट्रांसफ़र करना, या ट्रेडिंग अकाउंट से पैसे निकालना।

आर्बिट्रेज़ ट्रेड का उदाहरण

नीचे क्रिप्टो आर्बिट्रेज ट्रेडिंग का एक उदाहरण दिया गया है:

  • एक्सचेंज 1 में जमा: 15,000 यूरो + 1 BTC
  • एक्सचेंज 2 में जमा: 15,000 यूरो + 1 BTC
  • एक्सचेंज 1 पर 1 BTC का प्राइज़ = 15,000 यूरो।
  • एक्सचेंज 2 पर 1 BTC का प्राइज़ = 15,100 यूरो।

एक्सचेंज 1 पर 1 BTC खरीदने और एक्सचेंज 2 पर 1 BTC बेचने के बाद, ट्रेडर का जमा होगा:

  • एक्सचेंज 1 पर 2 BTC।
  • एक्सचेंज 2 पर 30,100 यूरो।

लाभ 100 यूरो था, लेकिन अब एक्सचेंज 1 पर सिर्फ़ BTC है और एक्सचेंज 2 पर सिर्फ़ यूरो। इसलिए, ट्रेडर न तो एक्सचेंज 2 पर BTC बेच सकेगा और न ही एक्सचेंज 1 पर इसे खरीद सकेगा। इसलिए, लाभ की गणना करते समय 1 BTC को एक्सचेंज 2 में ट्रांसफ़र करने की लागत को ध्यान में रखना चाहिए, उदाहरण के लिए, विकेंद्रीकृत एक्सचेंज का इस्तेमाल करके, और 15,000 यूरो को एक्सचेंज 1 में ट्रांसफ़र करना, ताकि दोनों एक्सचेंज पर BTC खरीदने और बेचने की क्षमता रिस्टोर हो सके।

आर्बिट्रेज़ के प्रकार

आर्बिट्रेज ट्रेड्स के कई प्रकार होते हैं:

  • क्लासिक आर्बिट्रेज़ निवेश और फ़ाइनेंशियल मार्केट से संबंधित होता है;
  • ट्रायएंगुलर आर्बिट्रेज़ विदेशी मुद्रा मार्केट और उसके मुख्य साधन, करेंसी पेयर्स से संबंधित होता है;
  • लेटेंसी आर्बिट्रेज़ में एक ही एसेट के प्राइज़ में अलग-अलग ट्रेडिंग वेन्यू पर होने वाले अंतर का फायदा उठाया जाता है, जो डेटा ट्रांसमिशन में देरी के कारण होता है।

प्योर आर्बिट्रेज़

प्योर या स्थानिक आर्बिट्रेज़ वही प्रोडक्ट का इंटर-मार्केट आर्बिट्रेज़ है, जब उसका प्राइज़ अलग-अलग मार्केट्स में समान नहीं होता। उदाहरण के लिए, बड़ी कंपनियों जैसे Sony के शेयर कई एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं। स्थानिक आर्बिट्रेज़ का मौका तब मिलता है जब Sony का प्राइज़ टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज (TYO) पर न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) की तुलना में कम हो। इस स्थिति में स्थानिक आर्बिट्रेज़ का मतलब है TYO पर सिक्योरिटी खरीदना और उसी समय NYSE पर वही सिक्योरिटी बेचना।

लाइटफाइनेंस: प्योर आर्बिट्रेज़

प्योर आर्बिट्रेज़ करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग में भी संभव है। फ़ॉरेक्स मार्केट के कुछ ट्रेडिंग सेशन के ऑपरेशन समय एक-दूसरे से मेल खाते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी मार्केट, यूरोपीय मार्केट बंद होने से पहले खुलती है। जिसके कारण, यूरो को यूरोप और अमेरिका में अलग-अलग प्राइज़ पर ट्रेड किया जा सकता है।

क्रिप्टो आर्बिट्रेज़ के दौरान हाई-लिक्विड और कम-लिक्विड एक्सचेंज के बीच भी प्राइज़ में अंतर संभव है। उदाहरण के लिए, हाई लिक्विड वाले Binance पर BTC खरीदने/बेचने की कीमत 16739.07/16739.56 है, और कम-लिक्विड वाले Bitfinex पर 16740/16742 है। इसलिए, यह संभव है कि Binance पर BTC 16739.56 में खरीदी जाए और Bitfinex पर 16740 में बेची जाए, हालाँकि कम सटीक कोटेशन का इस्तेमाल किया गया हो।

किन ऑटोमैटिक प्रक्रियाओं के विकास के कारण, इंटर-मार्केट प्राइज़ का अंतर हर दिन कम होता जा रहा है, इसलिए प्योर आर्बिट्रेज़, खासकर मैनुअल, अब कम ही होता है।

ट्रायएंगुलर आर्बिट्रेज़

ट्रायएंगुलर आर्बिट्रेज़ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब पेयर किए गए इंस्ट्रूमेंट्स की ट्रेडिंग की जा रही हो और एक का प्राइज़ दूसरे के प्राइज़ के हिसाब से व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, EURUSD, GBPUSD करेंसी पेयर्स, या BTCUSD, BTC/USDT क्रिप्टोकरेंसीज़।

इस प्रकार के आर्बिट्रेज़ ट्रेड का उद्देश्य तीन पेयर्ड इंस्ट्रूमेंट्स के बीच प्राइज़ का अंतर ढूँढना होता है। उदाहरण के लिए, BTCUSD = 16716, ETHUSD = 1216। इन डेटा के आधार पर, BTC/ETH की दर 16716/1216 = 13.75 होनी चाहिए।

मान लें कि वास्तविक BTC/ETH का प्राइज़ = 13.8 है, यानी कि गणना किए गए प्राइज़ 13.75 से ज़्यादा। ट्रायएंगुलर आर्बिट्रेज़ के माध्यम से लाभ कमाने के लिए, आपको तीन लेन-देन करने होंगे:

  • BTCUSD को 16716 USD पर खरीदें। उदाहरण के लिए, हम 10 लॉट्स 167160 USD की राशि के लिए खरीदते हैं;
  • BTC/ETH को 13.8 ETH पर बेचें। उदाहरण के लिए, 10 लॉट्स के लिए 138 ETH की राशि।

इन लेन-देन के कारण, अकाउंट में 138 ETH हैं और 167160 USD का डेब्ट है। इसलिए, तीसरे ट्रेड में ETH को बेचकर USD के डेब्ट को चुकाएँ। अतः

  • ETHUSD को 1216 USD पर बेचें, 138 ETH को 167808 USD (138 x 1216) में बेचें।

डेब्ट 167160 USD था, और तीसरे ट्रेड से 167808 USD का लाभ हुआ। इसलिए ट्रायएंगुलर आर्बिट्रेज़ से लाभ = 167808 - 167160 = 648 USD हुआ।

अगर इस उदाहरण में BTC/ETH का वास्तविक प्राइज़ गणना किए गए प्राइज़ से कम होता है, यानी 13.75 की जगह 13.7, तो ट्रायएंगुलर आर्बिट्राज में लेन-देन की दिशा इस प्रकार होती:

  • BTC/USD को 16716 USD पर बेचें;
  • BTC/ETH को 13.7 ETH पर खरीदें;
  • ETH/USD को 1216 USD पर खरीदें।

लेटेंसी आर्बिट्रेज़

लेटेंसी आर्बिट्रेज़, या हाई-फ़्रीक्वेंसी आर्बिट्रेज़, एक ऐसी रणनीति है जिसमें अलग-अलग ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर प्राइज़ अपडेट होने में आने वाली छोटी-सी देरी का लाभ उठाया जाता है। ट्रेडर्स सुपर-फ़ास्ट एल्गोरिद्म और खास सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, ताकि बाकी मार्केट से कुछ मिलीसेकंड पहले ही प्राइज़ में आए अंतर को पकड़ सकें। ट्रेड तुरंत पूरे किए जाते हैं, जिससे ट्रेडर्स इन छोटे-छोटे प्राइज़ के अंतर से लाभ कमा लेते हैं। इस तरह के आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के लिए एडवांस तकनीक, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और बड़े स्तर पर इंफ़्रास्ट्रक्चर में निवेश की ज़रूरत होती है।

आर्बिट्रेज़ के फायदे और नुकसान

सफल आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग का मुख्य आधार है तेज़ स्पीड। जितनी जल्दी ट्रेडर्स आर्बिट्रेज़ इंस्ट्रूमेंट्स ढूँढते हैं और जितनी जल्दी ट्रेड में प्रवेश करते हैं, उतने ही ज़्यादा लाभ की संभावना होती है। इसी कारण आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग मैनुअल ट्रेडर्स के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि वे स्पीड के मामले में प्रोग्राम से पीछे रह जाते हैं।

आर्बिट्रेज़ के लाभ

स्पष्टता

साधारण ट्रेडिंग की तुलना में, जहाँ कुछ लोग प्राइज़ चार्ट पर "हेड" और "शोल्डर्स" देखते हैं, जबकि अन्य लोग हॉरिज़ॉन्टल लेवल्स देखते हैं, वहीं आर्बिट्राज ट्रेडिंग में खोज का मुख्य उद्देश्य प्राइज़ में अंतर होता है।

कम अनिश्चितता

क्लासिकल ट्रेडिंग में हर एक ट्रेड का परिणाम सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी। परिणाम पहले से तय नहीं किया जा सकता। लेकिन आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में ट्रेड की सफलता सिर्फ़ उसकी स्पीड पर निर्भर करती है।

आर्बिट्रेज़ के नुकसान

लागत

लाभदायक आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के लिए, ट्रेडर्स को या तो ऐसे अच्छे सॉफ़्टवेयर पर पैसा खर्च करना पड़ता है जो ट्रेडिंग को ऑटोमैटिक कर दे, या फिर मैनुअल ट्रेडिंग के मौके ढूँढने पड़ते हैं। क्लासिकल ट्रेडिंग की तुलना में, आर्बिट्रेज़ में अलर्ट लगाकर सही मौके का इंतज़ार करना संभव नहीं है, क्योंकि यहाँ तुरंत कार्रवाई करनी होती है।

एक्ज़िक्यूशन जोखिम

किसी भी प्रकार की शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग की तरह, जिसमें लाभ की संभावना कम लेकिन वॉल्यूम ज़्यादा हो, आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के दौरान स्लिपेज, रिक्वोट्स और इंटरनेट कनेक्शन खोने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। स्थिति में एक छोटा भी अनियंत्रित बदलाव ट्रेडर के लिए नकारात्मक परिणाम ला सकता है।

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग की रणनीतियाँ

आइए कुछ आर्बिट्रेज़ रणनीतियों के बारे में सोचें जिनके लिए ट्रेड को तेज़ी से पूरा करने की ज़रूरत नहीं होती। इनमें जोखिम आर्बिट्रेज़, फ़िक्स्ड इनकम आर्बिट्रेज़ और कवर किया गया ब्याज आर्बिट्रेज़ शामिल हैं।

इन्हें क्लासिकल ट्रेडिंग में इंट्राडे और मीडियम-टर्म रणनीतियों के समान कहा जा सकता है, क्योंकि इनमें पोज़िशन कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक रखी जा सकती है।

जोखिम आर्बिट्रेज़ रणनीति

जोखिम आर्बिट्रेज़ रणनीति मर्जर आर्बिट्रेज़ पर आधारित होती है, जब एक कंपनी किसी दूसरी कंपनी के शेयर को पहले से तय प्राइज़ पर वापस खरीदने की योजना बनाती है, जो वर्तमान मार्केट प्राइज़ से ज़्यादा होता है। इस रणनीति में उस कंपनी के शेयर खरीदना शामिल है जिसे खरीदा जा रहा है, इस उम्मीद में कि लेन-देन पूरा होगा। लेन-देन में बताया गया प्राइज़ और वर्तमान मार्केट क्वोट के बीच जितना ज़्यादा अंतर होगा, आर्बिट्रेज़ ट्रेडर का लाभ उतना ही ज़्यादा होगा। इसके बावजूद, इस रणनीति में ट्रेड कैंसल होने का जोखिम भी होता है, जिससे आर्बिट्रेज़ ट्रेडर को योजना अनुसार लाभ नहीं मिलेगा।

उदाहरण के लिए, इस समय उस कंपनी के शेयर जो खरीदे जाने वाले हैं, $50 प्रति शेयर पर बिक रहे हैं। अगर लेन-देन में प्राइज़ $52.5 बताया गया है, तो यह शेयर जोखिम आर्बिट्रेज़ के लिए सही है। मान लें कि एक ट्रेडर 10 शेयर खरीदता है, जिनका कुल प्राइज़ $500 है। मर्जर की तारीख से पहले, शेयर की कीमत ऊपर-नीचे हो सकती है। ट्रेडर को इतनी संख्या में शेयर खरीदने चाहिए कि उनके पास ओपन पोज़िशन बनाए रखने के लिए पर्याप्त पैसे हों। अगर लेन-देन पूरा हो जाता है, तो ट्रेडर $52.5 प्रति शेयर के हिसाब से 10 शेयर्स के लिए $525 कमाएगा। अगर लेन-देन नहीं होता है, तो ट्रेडर को मार्केट के हिसाब से शेयर बेचकर पोज़िशन बंद करनी होगी।

इस प्रकार, जोखिम आर्बिट्रेज़ रणनीति में सिर्फ़ लाभ लेने का स्तर ही ज्ञात होता है, यानी लेन-देन में बताया गया प्राइज़।

फ़िक्स्ड इनकम आर्बिट्रेज़

फ़िक्स्ड इनकम आर्बिट्रेज़ कई प्रकार की सुरक्षा, जैसे शेयर और बॉन्ड, के बीच ब्याज दरों के अंतर पर आधारित होता है।

पिछली रणनीति के विपरीत, फ़िक्स्ड इनकम आर्बिट्रेज़ का अनुमान सटीक डेटा पर नहीं बल्कि ट्रेडर्स के अनुमान पर आधारित होता है। ट्रेड्स मानक आर्बिट्रेज़ योजना के अनुसार खोले जाते हैं, जिसमें महँगी सुरक्षा को बेचा जाता है और साथ ही सस्ती सुरक्षा को खरीदकर लाभ कमाने की कोशिश की जाती है।

मान लें कि बॉन्ड 1 की यील्ड 4% है और बॉन्ड 2 की यील्ड 3.5% है। इसके अलावा, सुरक्षा जारी करने वाली कंपनियाँ एक ही इंडस्ट्री में काम करती हैं, उनके लॉजिस्टिक्स समान हैं और लाभ लगभग बराबर है। इसलिए, आर्बिट्रेज़ ट्रेडर्स यह मान सकते हैं कि दोनों सुरक्षा के वास्तविक भविष्य के रिटर्न समान होंगे। इसके बाद वे बॉन्ड 2 (3.5% यील्ड) में लंबी पोज़िशन और बॉन्ड 1 (4% यील्ड) में शॉर्ट पोज़िशन लेते हैं। अगर बॉन्ड की कीमत मेल खा जाती है, तो ट्रेडर्स 4 - 3.5 = 0.5% का लाभ कमाएँगे।

लाइटफाइनेंस: फ़िक्स्ड इनकम आर्बिट्रेज़

अगर लाभप्रदता के संकेत किसी भी मात्रा में पास आते हैं, तो ट्रेडर्स को भी लाभ होगा। भले ही, वह कम हो। इसके विपरीत, अगर लाभप्रदता के मानों के बीच अंतर बढ़ता है, तो आर्बिट्रेज़ ट्रेडर्स को नुकसान होगा।

कवर किया गया ब्याज आर्बिट्रेज़

यह रणनीति दो देशों के ब्याज दरों के अंतर पर आधारित है। मान लीजिए देश 1 में वार्षिक प्रतिशत दर 5% है और देश 2 में 15% है। सबसे अधिक संभावना है कि देश 2 में डिपॉज़िट पर वार्षिक दर लगभग 10% होगी।

इस प्रकार, एक आर्बिट्रेज़ ट्रेडर राष्ट्रीय करेंसी में 5% पर लोन ले सकता है, फिर देश 2 की करेंसी खरीदकर इस राशि को 10% पर डिपॉज़िट कर सकता है। डिपॉज़िट अवधि के अंत में, ट्रेडर पैसा निकालता है, उसे वापस राष्ट्रीय करेंसी में बदलता है और लोन चुका देता है।

अगर डिपॉज़िट से पैसा निकालते समय विनिमय दर वही रहती है, तो ट्रेडर को 10% - 5% = 5% का लाभ होगा। करेंसी दर में संभावित बदलाव एक करेंसी जोखिम के रूप में कार्य करता है। उदाहरण के लिए, अगर देश 2 की करेंसी साल के दौरान देश 1 की करेंसी के मुकाबले 5% गिरावट आती है, तो लाभ शून्य होगा।

इस करेंसी जोखिम को संभावित लाभ की राशि के लिए एक फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग करके हेज किया जाता है। ऊपर दिए उदाहरण में 5% डिपॉज़िट की राशि पर वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग किया गया है। ट्रेडर का शुद्ध लाभ आर्बिट्राज ट्रेड से हुई आय माइनस फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट की लागत होगी।

स्टॉक मार्केट में आर्बिट्रेज़ के अवसर क्या हैं?

स्टॉक मार्केट के वर्तमान विकास स्तर पर पाँच प्रकार के आर्बिट्रेज़ का इस्तेमाल किया जाता है:

  1. इंटर-एक्सचेंज (प्योर) आर्बिट्रेज़ के दौरान, अलग-अलग एक्सचेंजों पर उसी एसेट के प्राइज़ में अंतर को ट्रैक किया जाता है। इनकी विशेषताएँ ऊपर बताई गई हैं। लाभ की गणना करने के लिए ध्यान रखें कि एक एसेट को अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग-अलग करेंसी में ट्रेड किया जा सकता है, जिससे रूपांतरण लागत आती है। दूसरा खर्चा है सुरक्षा को डिपॉज़िटरी के बीच ट्रांसफ़र करना।
  2. इंट्रा-इंडस्ट्री आर्बिट्रेज़ के दौरान, अलग-अलग उच्च-संबंधित एसेट्स के बीच प्राइज़ के अंतर को ट्रैक किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक ही इंडस्ट्री में कंपनियों के शेयर। इस प्रकार का आर्बिट्रेज़ इस धारणा पर आधारित है कि इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति के अनुसार, शेयर एक ही दिशा में मूव करेंगे।
  3. समान आर्बिट्रेज़ के दौरान, मूल एसेट और उसके डेरिवेटिव के बीच प्राइज़ के अंतर को ट्रैक किया जाता है। उदाहरण के लिए, किसी स्टॉक और उसके फ़्यूचर के बीच। इस प्रकार का आर्बिट्रेज़ इस तथ्य पर आधारित है कि फ़्यूचर का प्राइज़ मूल एसेट के प्राइज के करीब आता जाता है, और जैसे-जैसे समाप्ति की तारीख नज़दीक आती है, यह उस तारीख को उसके बराबर हो जाती है।
  4. कैलेंडर आर्बिट्रेज़ के दौरान, एक ही एसेट के लिए अलग-अलग समाप्ति की तारीख वाले फ़्यूचर्स के बीच प्राइज़ अंतर को ट्रैक किया जाता है। जब ज़्यादा अंतर होता है, तो महँगे कॉन्ट्रैक्ट को बेचा जाता है और सस्ते कॉन्ट्रैक्ट को कन्वर्जेन्स के आधार पर खरीदा जाता है। अगर स्प्रेड कम होता है, तो इसके विपरीत किया जाता है — महँगा कॉन्ट्रैक्ट खरीदा जाता है और सस्ता कॉन्ट्रैक्ट प्राइज़ अंतर के आधार पर बेचा जाता है।
  5. सांख्यिकी पर आधारित आर्बिट्रेज़ प्राइज़ के औसत मूल्य पर वापसी के सिद्धांत पर आधारित है। ओवरबॉट शेयर्स के लिए एक शॉर्ट ट्रेड खोला जाता है, और अंडरवैल्यूड शेयर्स के लिए एक लॉन्ग ट्रेड खोला जाता है।

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग कैसे करें?

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में सफल होने के लिए, नीचे दिए गए सुझावों का पालन करें:

  1. लेन-देन के प्रकार तय करें, मैनुअल या ऑटोमैटिक।
  2. मार्केट चुनें, लेन-देन के प्रकार और कमीशन की संख्या को ध्यान में रखते हुए। ऑटोमैटिक ट्रेडिंग के मामले में, हार्डवेयर और/या सॉफ़्टवेयर की लागत को भी ध्यान में रखें।
  3. किसी ट्रेड में संभावित लाभ की तुलना उसकी एक्ज़िक्यूशन लागत से करें।
  4. ट्रेड से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन करें। संभव हो तो उन्हें कम करने की कोशिश करें।
  5. एक डेमो अकाउंट पर ट्रेड की सीरीज़ करें, ताकि वास्तविक लाभ की तुलना योजना के अनुसार लाभ से की जा सके।
  6. सकारात्मक परिणाम होने पर, वास्तविक अकाउंट पर न्यूनतम वॉल्यूम के साथ ट्रेड करें, ताकि स्प्रेड और मनोविज्ञान का परिणाम पर प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके।
  7. अगर परिणाम अच्छा लगे, तो वास्तविक अकाउंट पर स्टैंडर्ड वॉल्यूम के साथ ट्रेड करना शुरू करें।

लाइटफाइनेंस: आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग कैसे करें?

निष्कर्ष

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग में मुख्य समस्या यह होती है कि उपकरण में निवेश करना है या अपनी क्षमताओं में। ऑटोमेटेड ट्रेडिंग के लिए या तो बड़ी जमा राशि की आवश्यकता होती है या लाभ पाने के लिए अधिक ट्रेड करने पड़ते हैं। उस प्रकार की मैनुअल आर्बिट्रज़ ट्रेडिंग में, जिन्हें तेज़ स्पीड की ज़्यादा आवश्यकता नहीं होती, जमा राशि सामान्य ट्रेडिंग के बराबर हो सकती है।

आर्बिट्रेज़, किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग की तरह, जोखिमों के साथ आता है जिन्हें ध्यान में रखना ज़रूरी है।

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट दोनों प्रकार के आर्बिट्रेज़ के लिए सबसे अधिक संभावनाशील है। यह अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, जिसका मतलब है कि ऑटोमैटिक और मैनुअल आर्बिट्रेज़ दोनों में प्रतिस्पर्धा स्टॉक या विदेशी मुद्रा जैसे विकसित मार्केट की तुलना में कम है।

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर EUR को कम प्राइज़ में खरीदना और उसी समय न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर EUR को अधिक प्राइज़ में बेचना, अगर दोनों लेन-देन की मात्रा समान हो।

हाँ। इसके अलावा, इसका फ़ाइनेंशियल मार्केट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद करता है।

एक ही एसेट को एक मार्केट में कम प्राइज़ पर खरीदा जाता है और उसी समय दूसरे मार्केट में अधिक प्राइज़ पर बेचा जाता है। लाफ कमाने के लिए, ट्रेडर्स को या तो लेन-देन तब बंद करना चाहिए जब प्राइज़ बराबर हो जाएँ, या एक सेल ट्रेड को उस एसेट से कवर करना चाहिए जिसे कम प्राइज़ पर खरीदा गया हो और दूसरे मार्केट से ट्रांसफ़र किया गया हो।

सिर्फ़ सैद्धांतिक रूप से। वास्तविकता में, इस प्रकार की ट्रेडिंग के लिए ट्रेडर्स को उचित क्षमता की आवश्यकता होती है। आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग के दौरान, सही एसेट्स की तलाश करनी होती है, जिनकी संख्या बढ़ती लिक्विडिटी के कारण कम होती जा रही है, लागत को ध्यान में रखते हुए ट्रेड के लाभ की गणना करनी होती है, और जोखिम प्रबंधन करना होता है।

हाँ। उदाहरण के लिए, अगर किसी एसेट को कम प्राइज़ पर खरीदा गया है और उसका प्राइज़ और गिरता है, और किसी एसेट को अधिक प्राइज़ पर बेचा गया है और उसका प्राइज़ बढ़ जाता है। साथ ही, अगर खरीदा हुआ एसेट एक मार्केट से दूसरे मार्केट में ट्रांसफ़र करने की लागत आर्बिट्रेज़ मुनाफे से अधिक हो जाती है।

यह उसी एसेट पर विपरीत लेन-देन करना होता है, अगर उसका प्राइज़ अलग-अलग मार्केट्स या अलग-अलग लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स में समान नहीं होता।

हाँ। हालाँकि, लगभग 0.5% के कम मार्जिन के कारण, इस प्रकार की ट्रेडिंग में जमा राशि की ज़रूरत होती है। इसके अलावा, ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स ढूँढने के लिए अध्ययन करना भी जरूरी है, जिनकी लाभप्रदता लागत को कवर कर सके।

हाँ। लेकिन जैसे-जैसे मार्केट लंबे समय तक चलता है, यह और अधिक कुशल हो जाता है और जिसके कारण, आर्बिट्रेज़ के अवसर कम हो जाते हैं। इसलिए, आर्बिट्रेज़ रणनीति लागू करने के लिए स्टॉक मार्केट की तुलना में क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में ट्रेड करना बेहतर है।

एक ट्रेडिंग अकाउंट खोलें, उसी एसेट के प्राइज़ में अंतर पहचानना सीखें और जल्दी से काम करें। आर्बिट्रेज़ लेन-देन की गति सीधे इस प्रकार की ट्रेडिंग की लाभप्रदता से संबंधित होती है।

यह एक क्रिप्टोकरेंसी को एक एक्सचेंज पर कम प्राइज़ में खरीदना और उसी समय दूसरे एक्सचेंज पर उसी क्रिप्टोकरेंसी को अधिक प्राइज़ में बेचना है।

ट्रेड में शामिल होने के अवसर हर दिन सामने आते हैं। ट्रेड में जोखिम आमतौर पर डायरेक्शनल ट्रेडिंग की तुलना में कम होता है। लाभ कमाने के लिए, आर्बिट्रेज़ ट्रेडर को कोई अनोखी ट्रेडिंग रणनीति बनाने की ज़रूरत नहीं है, बस एक अच्छा आर्बिट्रेज़ रोबोट और जल्दी से कीमतें प्राप्त करने की क्षमता काफ़ी है।

हाँ। मुख्य जोखिम एक्ज़िक्यूशन से जुड़े होते हैं। इनमें स्लिपेज और रिक्वोट्स की संभावना शामिल है, यानी लेन-देन को योजना के अनुसार कम लाभकारी प्राइज़ पर पूरा करना। एक आर्बिट्रेज़ ट्रेड का औसत लाभ कुछ पिप्स होता है, इसलिए योजना और वास्तविक प्राइज़ के बीच एक पिप का अंतर भी परिणाम को काफ़ी प्रभावित कर सकता है।

नहीं। आर्बिट्रेज़ ट्रेड आमतौर पर छोटी अवधि के होते हैं, और लाभ उनकी बड़ी संख्या की वजह से होता है।

एक तरीका यह है कि दो क्रिप्टो एक्सचेंज ढूँढें जहाँ उसी क्रिप्टोकरेंसी का प्राइज़ अलग हो। इसके बाद, आप उस एक्सचेंज पर क्रिप्टोकरेंसी खरीदें जहाँ इसका प्राइज़ कम हो, और उसी समय दूसरे एक्सचेंज पर वही क्रिप्टोकरेंसी बेचें जहाँ इसका प्राइज़ अधिक हो।

उदाहरण के लिए, वर्तमान EUR/USD एक्सचेंज दर 1.10 है और AUD/USD एक्सचेंज दर 0.68 है। EUR/AUD का गणना किया गया प्राइज़ 1.10/0.68 = 1.62 होना चाहिए। अगर EUR/AUD का वास्तविक प्राइज़ गणना किए गए प्राइज़ से अधिक है, तो EUR/USD खरीदें और AUD/USD और EUR/AUD बेचें। नहीं तो, EUR/USD बेचें और AUD/USD और EUR/AUD खरीदें।

पहली शर्त यह है कि अगर एक ही एसेट अलग-अलग प्राइज़ पर ट्रेड हो रहा हो। दूसरी शर्त यह है कि आर्बिट्रेज़ ट्रेड से होने वाला लाभ लेन-देन की लागत से ज़्यादा होना चाहिए।

यह वह स्थिति है जब किसी एसेट का प्राइज़, जो हर जगह समान नहीं होता, निवेशकों के आर्बिट्रेज़ ट्रेड्स पर निर्भर होने लगती है। जहाँ उसका प्राइज़ कम होता है, वहाँ उसकी माँग बढ़ती है, और जहाँ उसका प्राइज़ अधिक होता है, वहाँ उसकी सप्लाई बढ़ती है।

एक ही एसेट वहाँ की लिक्विडिटी में अंतर के कारण जिस मार्केट में ट्रेड हो रहा है,। साथ ही, अलग-अलग ब्रोकर्स से कोटेशन प्राप्त करने की स्पीड में अंतर के कारण भी हो सकता है, जो लिक्विडिटी प्रोवाइडर के सर्वर की दूरी या उपकरण की गुणवत्ता के कारण हो सकता है।

आर्बिट्रेज़ ट्रेडिंग: यह क्या है और यह कैसे काम करती है?

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